आरबीआई/DGBA/2026-27/400
CO.DGBA.GBD.No.S44/31.02.007/2026-27
30 अप्रैल 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक [एजेंसी बैंकों (एबी) द्वारा सरकारी कारोबार का संचालन - एजेंसी कमीशन का भुगतान और एबी की निगरानी] निदेश, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 20, 21 और 21ए के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (इसके बाद 'आरबीआई' या 'रिज़र्व बैंक' के रूप में संदर्भित) केंद्र और राज्य सरकारों के बैंकर के रूप में कार्य करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक अपने स्वयं के कार्यालयों तथा सार्वजनिक हित और बैंकिंग विकास की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, ‘भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934’ की धारा 45 के तहत आपसी समझौते के आधार पर नियुक्त एजेंसी बैंकों के कार्यालयों के माध्यम से, केंद्र और राज्य सरकारों का सामान्य बैंकिंग कारोबार करता है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बैंकर के रूप में अपनी भूमिका में रिज़र्व बैंक, सरकारी बैंकिंग कारोबार के निर्बाध संचालन के लिए एजेंसी बैंकों को निम्नलिखित निदेश/ अनुदेश जारी करता है।
अध्याय I: प्रस्तावना
ए. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ
1. इन निर्देशों को आरबीआई [एजेंसी बैंकों (एबी) द्वारा सरकारी कारोबार का संचालन - एजेंसी कमीशन का भुगतान और एबी की निगरानी] निदेश, 2026 कहा जाएगा।
2. ये निदेश जारी होने के तुरंत बाद प्रभावी होंगे, जब तक कि अन्यथा सूचित न किया गया हो।
बी. प्रयोज्यता
3. ये निदेश एबी पर लागू होंगे।
सी. परिभाषाएं
4. इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा न लगे, यहाँ प्रयुक्त शब्दों के वही अर्थ होंगे जो नीचे दिए गए हैं:
(ए) ‘एबी’ का अर्थ है वे सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी), अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंक (पीवीबी), अनुसूचित भुगतान बैंक (पीबी), और अनुसूचित लघु वित्त बैंक (एसएफबी) जिन्हें आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45 के तहत आरबीआई द्वारा, आपसी समझौते से, केंद्र सरकार (कें.स.) / राज्य सरकारों (रा.स.) का सरकारी बैंकिंग कारोबार करने के लिए नियुक्त किया गया है।
(बी) ‘एजेंसी कमीशन’ का अर्थ है वह पारिश्रमिक जो आरबीआई द्वारा किसी एबी को, आरबीआई के एजेंट के रूप में कार्य करने के बदले में, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सामान्य बैंकिंग कार्य के संचालन हेतु, सार्वजनिक ऋण के प्रबंधन से संबंधित कार्यों को छोड़कर, उन स्थानों पर और उस प्रणाली से दिया जाता है जो आरबीआई और उस बैंक के बीच हुए समझौते में विनिर्दिष्ट हैं।
(सी) 'प्रीफंडेड स्कीम' का अर्थ एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें सरकार द्वारा भविष्य की देयता, दायित्व या निपटान को कवर करने के लिए एबी को अग्रिम रूप से धन का भुगतान किया जाता है।
(डी) "स्क्रॉल" का अर्थ है "भुगतान स्क्रॉल" या "प्राप्ति स्क्रॉल":
(डीए) 'भुगतान स्क्रॉल' का अर्थ है एबीद्वारा प्रस्तुत एक भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक विवरण जो एक निश्चित तारीख को मंत्रालय या विभाग के लिए आरबीआई में मौजूद सरकारी खाते से किए गए और दावा किए गए भुगतानों को सूचीबद्ध करता है, जिसका उपयोग लेखांकन और मिलान के लिए किया जाता है।
(डीबी) 'प्राप्ति स्क्रॉल' का अर्थ है एबी द्वारा प्रस्तुत एक भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक विवरण जो एक निश्चित तारीख को मंत्रालय या विभाग के लिए आरबीआई में मौजूद सरकारी खाते में एकत्र और प्रेषित प्राप्तियों को सूचीबद्ध करता है, जिसका उपयोग लेखांकन और मिलान के लिए किया जाता है।
(ई) 'लगेज फाइल' का अर्थ है बैंकों द्वारा आरबीआई को रिपोर्ट किए गए 'एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज (एक्सएमएल)' प्रारूप में फाइल का एक इलेक्ट्रॉनिक रूप जिसमें लेनदेन का विवरण होता है।
5. अन्य सभी अभिव्यक्तियां, जब तक कि यहां परिभाषित न की गई हों, का वही अर्थ होगा जो उन्हें लागू अधिनियमों, उनके तहत बनाए गए नियमों/ विनियमों या उनमें किसी भी सांविधिक संशोधन या पुनरधिनियमन के तहत, या आरबीआई द्वारा प्रकाशित पारिभाषिक शब्दावली, जैसे कि सामान्य या वाणिज्यिक भाषा में उपयोग किया जाता है, जैसा भी मामला हो।
अध्याय II: एजेंसी कारोबार व्यवस्था - एबी की नियुक्ति
6. सभी पीएसबी, आरबीआई के एजेंट के तौर पर सरकारी कारोबार करने के लिए पात्र हैं। 22 फरवरी 2003 से आरबीआई ने चार पीवीबी को सरकारी कारोबार (रा.स. कारोबार सहित) करने के लिए प्राधिकृत किया। 31 जनवरी 2012 से सभी अनुसूचित पीवीबी को कें.स./ रा.स. कारोबार (जहां आरबीआई एजेंसी कमीशन का भुगतान करता है) करने के लिए पीएसबी के समान पात्र बना दिया गया था। इसके अलावा, 15 दिसंबर 2021 से, वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय (MoF), भारत सरकार (GoI) के परामर्श से अनुसूचित पीबी और अनुसूचित एसएफबी को भी सरकारी कारोबार करने के लिए पात्र बनाने का निर्णय लिया गया था। अभी सभी पीएसबी, अनुसूचित पीवीबी, अनुसूचित पीबी और अनुसूचित एसएफबी आरबीआई के एजेंट के रूप में सरकारी कारोबार करने के पात्र हैं। एबी की सूची अनुलग्नक 1 में दी गई है।
7. कोई भी पात्र बैंक जो सरकारी कारोबार को करने का इच्छुक है, उसे आरबीआई के साथ एक समझौते के निष्पादन पर एबी के रूप में नियुक्त किया जाएगा। किसी पात्र बैंक को एबी के रूप में प्राधिकृत करने के लिए दिशानिर्देश/ ढांचा इस प्रकार है:
7.1 के. स. / संघ राज्य क्षेत्र (यूटी) कारोबार के लिए: संबंधित सिविल/ गैर-सिविल मंत्रालय/ विभाग आवेदक बैंक के साथ एक प्रस्ताव तैयार करेगा और उसे जांच के लिए महालेखा नियंत्रक (कें.स.ए) के कार्यालय को अग्रेषित करेगा। इसके बाद कें.स.ए इस प्रस्ताव पर अपनी सिफारिश सरकारी और बैंक लेखा विभाग (डीजीबीए), केंद्रीय कार्यालय (केंका), आरबीआई को भेजेगा। आरबीआई प्रस्ताव की जांच करेगा और, यदि पात्र पाया जाता है, तो एक समझौते के निष्पादन के बाद आवेदक बैंक को औपचारिक रूप से एबी के रूप में नियुक्त करेगा।
7.2 रा.स. कारोबार के लिए: रा. स. का संबंधित विभाग आवेदक बैंक के साथ एक प्रस्ताव तैयार करेगा और उसे जांच के लिए रा.स. के वित्त विभाग को अग्रेषित करेगा। रा.स. का वित्त विभाग इस प्रस्ताव पर अपनी सिफारिश आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय (आरओ) को भेजेगा। क्षेत्रीय कार्यालय प्रस्ताव की जांच करेगा और इसे अपनी टिप्पणियों के साथ डीजीबीए को भेजेगा, जो प्रस्ताव की जांच करेगा और यदि पात्र पाया जाता है, तो समझौते के निष्पादन के बाद आवेदक बैंक को औपचारिक रूप से एबी के रूप में नियुक्त करेगा।
7.3 कें.स./ यूटी/ रा.स. कारोबार के लिए किसी एबी को प्राधिकृत करने हेतु कोई भी अनुमोदन की शर्त यह होगी कि आवेदक बैंक आवेदन करते समय/ आरबीआई के साथ समझौता हस्ताक्षरित करते समय न तो त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचे के अंतर्गत होगा और न ही उस पर कोई अधिस्थगन (Moratorium) लागू होगा।
8. सरकारी कारोबार के लिए एबी की आधिकारिक मान्यता:
8.1 किसी विशेष सरकारी कारोबार के लिए एबी को आधिकारिक मान्यता देने का निर्णय पूरी तरह से संबंधित कें.स. विभाग/ यूटी/ रा.स. के अधिकार क्षेत्र में आता है। किसी एबी को मान्यता देने की प्रक्रिया वैसी ही होगी, जैसी कि पैरा 7.1 (कें.स./ यूटी कारोबार के लिए) और पैरा 7.2 (रा.स. कारोबार के लिए) में विस्तार से बताई गई है। कें.स. / यूटी/ रा.स. के पास यह विकल्प भी है कि वे संबंधित एबी को नोटिस देकर और आरबीआई को जानकारी देते हुए, आधिकारिक मान्यता को खत्म कर सकता है।
8.2 जब भारतीय रिज़र्व बैंक किसी बैंक को किसी सरकारी कारोबार के लेनदेन के लिए प्राधिकृत कर देता है, तो किसी भी प्रकार (भौतिक या ई-मोड) या प्रचालन के क्षेत्र के संबंध में किसी अन्य अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है। इनका निर्णय कें.स.ए कार्यालय (कें.स./ यूटी के लिए) या रा.स. के वित्त विभाग (रा.स. के लिए) द्वारा, जैसा भी लागू हो, आरबीआई को सूचित करते हुए किया जाएगा।
9. सरकार द्वारा आरबीआई के परामर्श से समय-समय पर विभिन्न सरकारी पहलों और योजनाओं के मैट्रिक्स के आधार पर एबी के कार्य-निष्पादन की समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा के आधार पर, सरकारी कारोबार करने के लिए संबंधित बैंक को दी गई अनुमति वापस ली जा सकती है।
10. कें.स. मंत्रालय/ विभाग (कें.स.ए के परामर्श से) और रा.स. विभाग [संबंधित महालेखाकार (एजी) कार्यालय के परामर्श से], आरबीआई के संदर्भ के बिना किसी भी पूर्व-वित्त पोषित योजना के कार्यान्वयन के लिए किसी भी बैंक को नियुक्त कर सकता है।
11. सभी एबी आरबीआई से किसी भी और निर्देश की प्रतीक्षा किए बिना, सरकार (केंद्र के साथ-साथ राज्यों) द्वारा जारी निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे। ऐसे निर्देशों से संबंधित प्रश्नों के लिए, एबी सीधे संबंधित सरकार से संपर्क करेंगे। इसी तरह, आरबीआई को रिपोर्ट करने से संबंधित प्रश्नों के लिए एबी, डीजीबीए/ केंद्रीय लेखा अनुभाग (सीएएस), नागपुर, आरबीआई से संपर्क करेंगे।
अध्याय III: एबी द्वारा सरकारी कारोबार के संचालन के लिए एजेंसी कमीशन का भुगतान
ए. एजेंसी कमीशन के लिए पात्र सरकारी लेनदेन
12. एबी द्वारा किए गए निम्नलिखित सरकारी कारोबार से संबंधित लेनदेन एजेंसी कमीशन के लिए पात्र हैं:
ए. कें.स./रा.स. की ओर से राजस्व प्राप्तियां
बी. कें.स. / रा.स. से संबंधित पेंशन भुगतानों सहित, एबी द्वारा संभाले जाने वाले सभी भुगतान लेनदेन—उन भुगतानों को छोड़कर जो पहले से ही वित्तपोषित हैं, या जिनके लिए सरकारों द्वारा एबी को मुआवज़ा दिया जाता है।
सी. कार्य की कोई भी अन्य मद, जिसे रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रूप से एजेंसी कमीशन के लिए पात्र बताया गया हो।
13. जब भी एबी भौतिक मोड या ई-मोड (चालान आधारित) के माध्यम से स्टांप शुल्क एकत्र करते हैं, तो वे एजेंसी कमीशन के लिए पात्र होते हैं, बशर्ते एबी जनता से कोई शुल्क न ले या ना इस कार्य के संचालन के लिए रा.स. से पारिश्रमिक प्राप्त न करें।
14. यदि रा.स. एबी को फ्रैंकिंग विक्रेता के रूप में नियुक्त करता है और यह दस्तावेजों की फ्रैंकिंग के लिए जनता से स्टाम्प शुल्क एकत्र करता है, तो वह एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं होगा, क्योंकि रा.स. इसे कमीशन का भुगतान कर रहा है। हालांकि, वह एबी, जो फ्रैंकिंग बार की खरीद के लिए चालान (भौतिक या ई-मोड में) के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा करने के लिए फ्रैंकिंग विक्रेता द्वारा भुगतान किए गए स्टाम्प शुल्क को एकत्र करता है, एजेंसी कमीशन के लिए पात्र होगा क्योंकि यह ऊपर बताए अनुसार स्टाम्प शुल्क का नियमित भुगतान है।
बी. सरकारी लेनदेन जो कि एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं हैं
15. निम्नलिखित गतिविधियां एबी कारोबार के अंतरगत नहीं आती हैं और इसलिए, एजेंसी कमीशन के पात्र नहीं हैं:
१. जो एबी अपनी टैक्स देनदारियों का भुगतान अपनी खुद की शाखाओं के माध्यम से, या किसी अन्य एबी की अधिकृत शाखाओं (जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) भी शामिल है) अथवा आरबीआई के कार्यालयों के माध्यम से करते हैं—विशेषकर उन जगहों पर जहाँ उनकी अपनी कोई अधिकृत प्रत्यक्ष कर संग्रह शाखा मौजूद नहीं है—उन्हें इस बात का उल्लेख स्क्रॉल में अलग से करना चाहिए।
२. सरकारी ठेकेदारों/आपूर्तिकर्ताओं द्वारा एबी के माध्यम से बैंक गारंटी (बीजी) / सुरक्षा जमाराशियाँ आदि प्रस्तुत करना, क्योंकि ये बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों के लिए किए जाने वाले बैंकिंग लेनदेन की श्रेणी में आते हैं।
३. रा.स. द्वारा सीधे वित्तीय संस्थानों और बैंकों से लिए गए अल्पकालिक/दीर्घकालिक ऋण, क्योंकि ये लेनदेन सामान्य बैंकिंग कारोबार की प्रकृति के नहीं हैं। आरबीआई, सार्वजनिक ऋण प्रबंधन के लिए एजेंट के रूप में कार्य करने हेतु, एबी को सहमति से पारिश्रमिक का अलग से भुगतान करता है।
४. स्वायत्त/सांविधिक निकायों/नगर पालिकाओं/कंपनियों/निगमों/स्थानीय निकायों का बैंकिंग कारोबार
५. पूर्व-वित्तपोषित योजनाएँ, जिन्हें किसी केंद्रीय मंत्रालय/विभाग (कें.स.ए के परामर्श से) अथवा किसी राज्य सरकार के विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा सकता है।
६. स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस), 2015 से संबंधित लेनदेन
७. मंत्रालयों/विभागों आदि की ओर से बैंकों द्वारा खोले गए साख पत्र (एलसी)/बीजी से उत्पन्न लेनदेन, क्योंकि भारतीय रिज़र्व बैंक सरकारों से प्राप्त अधिदेश के आधार पर बैंकों को भुगतान की गई राशि की प्रतिपूर्ति करता है
८. कार्य की कोई भी अन्य मद, जिसे आरबीआई/कें.स./रा.स. द्वारा विशेष रूप से एजेंसी कमीशन के लिए अपात्र घोषित किया गया हो।
16. एबी उन लेनदेन, जो एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं हैं, के संबंध में समय-समय पर आरबीआई द्वारा जारी निदेशों का सावधानीपूर्वक पालन करेंगे
सी. विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित लेनदेन
17. एबी लघु बचत योजनाओं (एसएसएस) से संबंधित लेनदेन भी करते हैं। एसएसएस लेनदेन के लिए एजेंसी कमीशन की दरें भारत सरकार द्वारा तय और वहन की जाती हैं, जबकि उन्हें सीएएस पर संसाधित और निपटाया जाता है। भारत सरकार की अधिसूचना एफ सं. 7/10/2014-एनएस दिनांक 10 अक्टूबर 2017, के अनुसार सरकार, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड, एक्सिस बैंक लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक लिमिटेड को मौजूदा एसएसएस के अलावा, राष्ट्रीय बचत सावधि जमा योजना, 1981, राष्ट्रीय बचत (मासिक आय खाता) योजना, 1987, राष्ट्रीय बचत आवर्ती जमा योजना, 1981 और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (आठवीं जारी) योजना, 1989 के अंतर्गत अभिदान प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत किया था। सभी प्राधिकृत एबी को एसएसएस से संबंधित लेनदेन के प्रबंधन के लिए एजेंसी कमीशन का भुगतान भारत सरकार द्वारा निर्धारित एसएसएस के लिए लागू दरों के अनुसार किया जाता है। सभी लेन-देन, जैसे प्राप्ति, भुगतान, जुर्माना, ब्याज आदि, की रिपोर्टिंग सीधे सीएएस को दैनिक आधार पर की जाएगी, जो सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) योजना के लेन-देन के समान है, ताकि रिपोर्टिंग, समाधान और लेखांकन में एकरूपता बनाए रखी जा सके। एसएसएस पर कमीशन के निपटान की प्रक्रिया सीएएस में की जाती है और उसका निपटान किया जाता है। एबी संबंधित योजनाओं के नियमों और विनियमों का पालन करेंगे। नियमों और विनियमों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के गैर-पालन से उत्पन्न होने वाली आर्थिक देनदारियां, यदि कोई हों, पूरी तरह से एबी द्वारा वहन की जाएंगी।
डी. एबी द्वारा आरबीआई को लेनदेन की रिपोर्ट करना`
18. एनईएफटी 24x7 और आरटीजीएस 24x7 के परिचालनगत होने के बाद, वस्तु और सेवा कर (जीएसटी), ICEGATE के माध्यम से सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क और TIN 2.0 प्रणाली के अंतर्गत प्रत्यक्ष कर संग्रहण के लिए प्राधिकृत एजेंसी बैंक, ग्लोबल अवकाशों को छोड़कर सभी दिवसों में अपनी लगेज़ फाइलें आरबीआई के क्वांटम भुगतान एक्सचेंज (क्यूपीएक्स) /ई-कुबेर में अपलोड करेंगे। ग्लोबल अवकाश, 26 जनवरी, 15 अगस्त, 02 अक्टूबर, सभी गैर-कार्य दिवस शनिवार, सभी रविवार और कोई अन्य दिन जिसे सरकारी लेन-देनों के लिए आरबीआई द्वारा अवकाश घोषित किया हो, हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह लगेज फाइलें आरबीआई के क्यूपीएक्स/ ई-कुबेर में प्रधान मुख्य लेखा नियंत्रक (पीआर सीसीए) कार्यालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा निर्धारित 1800 बजे या उससे पहले अपलोड की जाएं। क्यूपीएक्स/ई-कुबेर में इन लगेज़ फाइलों को अपलोड करने के लिए 1800 बजे के बाद कोई समय में छूट नहीं दी जाएगी।
19. रा.स. के लेनदेन के लिए मासिक शेष राशि अंतरण की तिथि अगले माह की पाँचवी तारीख है। अनुवर्ती माह की चौथी तारीख के बाद रिपोर्ट किए गए पिछले माह के राज्य सरकार के लेन-देन (इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रूप में) और ऐसे लेन-देन, जो उससे पिछले माह के दौरान किए गए थे का विवरण, संबंधित राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी से पुष्टि कराए जाने के बाद लेखांकन हेतु अलग विवरणी के रूप में आरबीआई को भेजा जाना चाहिए।
20. कें.स. के लेनदेन (इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक रूप में), या उसके किसी समायोजन के लिए, यदि लेनदेन की तारीख से 90 दिनों के अंतराल के बाद रिपोर्ट किया जाता है, तो एबी को संबंधित मंत्रालय/विभाग से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा और निपटान के लिए ऐसे लेन-देन की रिपोर्टिंग के समय उसे अलग से आरबीआई को प्रस्तुत करना होगा।
21. रिपोर्टिंग, समाधान और लेखांकन में एकरूपता बनाए रखने के लिए, एबी, जीएमएस से संबन्धित लेनदेन, जैसे कि, प्राप्ति, भुगतान, जुर्माना, ब्याज, जुटाने हेतु कमीशन, हैंडलिंग शुल्क, आदि को सीधे इस उद्देश्य के लिए बनाए गए सरकारी खाते, जोकि सीएएस में है, को दैनिक आधार पर वैसे ही रिपोर्ट करेंगे, जैसा कि सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) योजना 2019, के लेनदेन के मामले में होता है। इसके अलावा, बैंकों द्वारा किए गए, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सरकारी जमा (एमएलटीजीडी) से संबंधित भुगतानों की प्रतिपूर्ति, सीएएस द्वारा की जाएगी। तदनुसार, बैंक जमाकर्ताओं को संबंधित नियत तारीखों पर ब्याज का भुगतान करेंगे और उसके बाद सीएएस के माध्यम से सरकार के समक्ष दावा प्रस्तुत करेंगे।
ई. एजेंसी कमीशन की दरें
22. एबी के साथ समझौते के अनुसार, आरबीआई उसके द्वारा निर्धारित दरों पर एजेंसी कमीशन का भुगतान करता है। 01 अप्रैल 2025 से लागू दरें तालिका 1 में दी गई हैं:
| तालिका 1: एजेंसी कमीशन दरें |
| क्र. सं. |
लेन-देन का प्रकार |
इकाई |
दर |
| ए. |
(i) |
प्राप्तियाँ - भौतिक माध्यम |
प्रति लेनदेन |
₹ 40/- |
| |
(ii) |
प्राप्तियाँ - ई- माध्यम |
प्रति लेनदेन |
₹ 12/- |
| बी. |
पेंशन भुगतान |
प्रति लेनदेन |
₹ 80/- |
| सी. |
पेंशन के अलावा अन्य भुगतान |
प्रति ₹100 टर्नओवर |
प्रति ₹100/- के लिए 7 पैसे |
23. इस संदर्भ में, उपरोक्त सारणी में क्रम संख्या ए. (ii) के सामने दर्शाई गई ' प्राप्तियाँ-ई-माध्यम' लेनदेन, ऐसे लेनदेनों को संदर्भित करते हैं जिनमें धनप्रेषक के बैंक खाते से, इंटरनेट बैंकिंग/डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड/यूपीआई आदि के माध्यम से धन का प्रेषण शामिल है, साथ ही ऐसे लेनदेन भी जिनमें नकदी/लिखतों की भौतिक प्राप्ति शामिल नहीं है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनरेट किए गए और एबी को नकदी/ लिखत के साथ जमा किए गए चालान को भौतिक माध्यम के अंतर्गत किया गया लेनदेन माना जाना चाहिए।
एफ़. एकल चालान को एकल लेनदेन के रूप में मानना
24. जीएसटी भुगतान प्रक्रिया के अंतर्गत, एकल कामन पोर्टल पहचान संख्या (सीपीआईएन) के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर उत्पन्न चालान पहचान संख्या (सीआईएन) को, एकल लेनदेन के रूप में माना जाए, भले ही वह एकाधिक प्रधान खाताशीर्ष/ उप प्रधान खाताशीर्ष/ लघु खाताशीर्ष वाले खातों में जमा किया गया हो। उदाहरण के लिए, एकल चालान के माध्यम से अदा किया गया कें.स.एसटी, रा.स.एसटी, आईजीएसटी और उपकर, आदि एक ही लेनदेन होगा। एक ही चालान यानी सीपीआईएन के तहत जोड़े गए ऐसे सभी रिकॉर्ड को एजेंसी कमीशन का दावा करने के उद्देश्य से एकल लेनदेन के रूप में माना जाना चाहिए (01 जुलाई 2017 से प्रभावी)।
25. इसी तरह, जीएसटी के अंतर्गत न आने वाले लेनदेनों के मामले में, एक एकल चालान (इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक) को केवल एकल लेनदेन के रूप में माना जाना चाहिए, न कि एकाधिक लेनदेन के रूप में, भले ही चालान में कई प्रधान खाताशीर्ष/उप प्रधान खाताशीर्ष/लघु खाता शीर्ष शामिल हों, जिन्हें क्रेडिट किया जाएगा। इसलिए, सफलतापूर्वक संसाधित किए गए एकल चालान के अंतर्गत शामिल किए गए रिकॉर्ड को एजेंसी कमीशन का दावा करने के उद्देश्य से एकल लेनदेन माना जाना चाहिए।
जी. एजेंसी कमीशन का दावा करने की प्रक्रिया
26. एबी एजेंसी कमीशन के लिए कें.स. लेनदेन से संबंधित अपने दावे सीएएस को और रा.स. लेनदेन से संबंधित अपने दावे आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को निर्धारित प्रारूप में (जीएसटी विवरण के साथ) प्रस्तुत करेंगे। जीएसटी प्राप्तियों, टीआईएन 2.0 के तहत प्रत्यक्ष कर संग्रह और आईसीईजीएटीई के माध्यम से अप्रत्यक्ष करों के संग्रह से संबंधित एजेंसी कमीशन के दावों का निपटारा मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा। तदनुसार, सभी अधिकृत एबी इन प्राप्ति लेनदेनों से संबंधित अपने एजेंसी कमीशन के दावों को मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करेंगे। सीएएस को रिपोर्ट किए गए कें.स. लेनदेन के लिए एजेंसी कमीशन के दावे का निपटान सीएएस में जारी रहेगा।
27. एबी को एजेंसी कमीशन के लिए अपने दावे, उस तिमाही के समाप्त होने के 60 कैलेंडर दिनों के भीतर आरबीआई को प्रस्तुत करने होंगे, जिस तिमाही में वे लेन-देन किए गए थे। यदि बैंक, निर्धारित अवधि के भीतर दावे प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो आरबीआई को बाद में किए जाने वाले किसी भी प्रस्तुतीकरण के साथ एक औपचारिक स्पष्टीकरण भी संलग्न करना होगा, जिसमें देरी के कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया हो।
28. सभी एबी तिमाही आधार पर सीएएस को विशेष जमा योजना (एसडीएस) लेनदेन से संबंधित एजेंसी कमीशन के दावे प्रस्तुत करेंगे। इन दावों का निपटारा सीएएस में किया जाएगा। तथापि, एबी, भुगतान किए गए ब्याज और आहरण दोनों की प्रतिपूर्ति का दावा आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों से करना जारी रखेंगे, जहां प्रतिरूप खाते अनुरक्षित किए जाते हैं।
29. एबी यह सुनिश्चित करेंगे कि एजेंसी कमीशन के दावे निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किए गए हैं और सटीक हैं।
एच. एजेंसी कमीशन का दावा करने के लिए एबी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज
30. एबी द्वारा एजेंसी कमीशन का दावा करने का प्रारूप अनुलग्नक 2 में दिया गया है। शाखा अधिकारियों और सनदी लेखाकार/लागत लेखाकार द्वारा हस्ताक्षरित किए जाने वाले प्रमाण पत्रों के प्रारूप क्रमशः अनुलग्नक 2ए और अनुलग्नक 2बी में दिए गए हैं। ये प्रमाणपत्र, सरकारी कामकाज के प्रभारी कार्यकारी निदेशक (ED) / मुख्य महाप्रबंधक (कें.स.एम) की ओर से जारी किए जाने वाले उस सामान्य प्रमाणपत्र के अतिरिक्त हैं, जिसमें यह पुष्टि की जाती है कि कोई पेंशन बकाया क्रेडिट किया जाना बाकी नहीं है/ नियमित पेंशन /बकाया जमा करने में कोई विलंब नहीं हुआ है, के अतिरिक्त होंगे।
31. एजेंसी कमीशन के दावों को समवर्ती लेखा परीक्षक/सांविधिक लेखा परीक्षक द्वारा भी प्रमाणित किया जा सकता है। इसके अलावा, एबी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके आंतरिक निरीक्षक/लेखा परीक्षक, उनके निरीक्षण/लेखा परीक्षा के दौरान, अपनी शाखाओं द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन दावों का सत्यापन करें और उनकी सटीकता की पुष्टि करें।
32. एबी, निर्धारित एजेंसी कमीशन दरों के अनुसार लागू जीएसटी राशि सहित अपने एजेंसी कमीशन के दावे, आरबीआई के मौजूदा निदेशों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों/सीएएस को प्रस्तुत करेंगे। जीएसटी पर टीडीएस के संबंध में सरकारी निदेशों के अनुसार, एजेंसी कमीशन का भुगतान करते समय आरबीआई द्वारा, यथा लागू कटौती की जाएगी।
आई. एजेंसी कमीशन के दावे पर स्पष्टीकरण
33. एबी, पेंशन लेन-देन के लिए निर्धारित दरों पर एजेंसी कमीशन का दावा करने के पात्र तभी होंगे, जब पेंशन वितरण से संबंधित संपूर्ण कार्य—जिसमें पेंशन की गणना भी शामिल है—उन्हीं के द्वारा किया गया हो। यदि पेंशन गणना आदि से संबंधित कार्य संबंधित सरकारी विभाग/कोषागार द्वारा किया जाता है, और बैंक केवल सरकारी खाते में नामे द्वारा पेंशनभोगी के खाते में पेंशन जमा करता है, तो ऐसे लेनदेन को 'पेंशन भुगतान के अलावा' लेनदेन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसके लिए, एबी 'पेंशन भुगतान के अलावा' लेनदेन के लिए निर्धारित दरों पर एजेंसी कमीशन के लिए पात्र होंगे।
34. एजेंसी कमीशन के लिए पात्र लेनदेनों की संख्या प्रत्येक पेंशनभोगी के लिए प्रतिवर्ष 14 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसमें निवल पेंशन के भुगतान हेतु मासिक जमा का एक लेनदेन और महंगाई राहत में वृद्धि, यदि लागू हो, के कारण बकाया राशि के भुगतान के लिए प्रतिवर्ष अधिकतम दो लेनदेन शामिल हैं। पेंशन के देर से शुरू होने/फिर से शुरू होने के कारण बकाया राशि के भुगतान से जुड़े मामले एजेंसी कमीशन के दावे के लिए एकल लेनदेन के रूप में योग्य हैं। दूसरे शब्दों में, पेंशन के देर से शुरू होने/फिर से शुरू होने के कारण बकाया के किसी भी भुगतान को एकल जमा लेनदेन के रूप में माना जाना चाहिए, न कि अलग मासिक जमा के रूप में।
35. एजेंसी कमीशन एबी को पूरी दर पर देय है, बशर्ते लेनदेन सभी चरणों में बैंक द्वारा संभाला जाए। हालांकि, जहां भी दो बैंकों के बीच काम साझा किया जाता है, एजेंसी कमीशन को बैंकों के बीच 75%:25% के अनुपात में साझा किया जाता है। इस प्रकार, विस्तृत रूप में, यह एजेंसी कमीशन एबी को निम्नलिखित ब्यौरे के अनुसार देय है,
(ए) ऐसे मामलों में पूर्ण दर पर, जहां बैंक द्वारा सभी स्तरों, अर्थात्, स्क्रॉल और चालानों/चेकों को भुगतान और लेखा कार्यालयों तथा कोषागारों/ उप-कोषागारों को भेजे जाने तक, पर लेन-देन का संचालन किया जाता है।
(बी) लागू दर के 75% की दर पर, जहां डीलिंग शाखा के लिए लेन-देनों का हिसाब रखने के लिए स्क्रॉल और दस्तावेज भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा सरकारी कारोबार करने वाले किसी भी एबी की स्थानीय/निकटतम शाखा को भेजना अपेक्षित है।
(सी) लागू दर के 25% की दर पर, ऐसी एजेंसी बैंक शाखा के मामले में जो अन्य एबी की डीलिंग शाखाओं से स्क्रॉल और दस्तावेज़ प्राप्त करती हैं, और ऐसे लेन-देनों के लेखांकन के लिए स्क्रॉल और दस्तावेज़ों को भुगतान एवं लेखा कार्यालयों, कोषागारों आदि को प्रेषित करने के लिए उत्तरदायी है।
36. सभी एबी को अपने निधियों और एजेंसी कमीशन से जुड़े एजेंसी लेन-देन, किसी अन्य एबी के ज़रिए भेजने के बजाय—जो कुछ मामलों में संकलनकर्ता का काम करता है—सीधे आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से करना चाहिए। इसी तरह, रा.स. की ओर से एबी द्वारा किए गए भुगतान को सीधे आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के साथ निपटाया जाए। एजेंसी लेनदेन विवरण/स्क्रॉल सीधे एबी द्वारा संबंधित रा.स./कोषागार को अग्रेषित किए जाएं। सीधे आरबीआई के साथ रा.स. निधियों के निपटान के लिए यह दैनिक व्यवस्था 01 जनवरी 2018 से प्रभावी है।
37. कई राज्यों में, एबी, रा.स. द्वारा इस सेवा के लिए नियुक्त इकाई (जैसे स्टॉकहोल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) की ओर से ई-स्टाम्प/ई-कोर्ट/ई-पंजीकरण शुल्क एकत्र करता है, और बाद में, सरकार द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर, इन लेन-देनों के निपटान के लिए आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को रिपोर्ट करता है। जैसा कि ऊपर कहा गया है, जिन लेन-देन में नकदी/लिखत की भौतिक प्राप्ति शामिल नहीं है, उन्हें 'ई-माध्यम-प्राप्ति' के रूप में माना जाए। एबी को ऐसे लेनदेन के लिए इस आधार पर कमीशन का दावा नहीं करना चाहिए, कि सरकार को राशि हस्तांतरित करने का आदेश भौतिक रूप से प्रस्तुत किया गया था, जैसा कि भौतिक प्राप्तियों के लिए लागू होता है।
जे. एजेंसी कमीशन के गलत दावों के लिए दंडात्मक ब्याज
38. एबी और आरबीआई के बीच समझौते के अनुसार, सरकार और/या आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों के उल्लंघन या अनुपालन न करने पर दंड लगाया जाएगा। निपटाए गए एजेंसी कमीशन में से गलत दावों के लिए एबी को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथा अधिसूचित बैंक दर + 2% की दर पर दण्ड ब्याज अदा करना होगा।
अध्याय IV: एबी में सरकारी कारोबार की निगरानी
39. एबी के साथ किए गए एजेंसी समझौते के अनुसार, आरबीआई सरकारी कारोबार के संचालन का आवधिक निरीक्षण करता है। सरकारी कारोबार की निगरानी प्रणाली में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं:
(ए) निरीक्षण के दायरे में विभिन्न शाखाओं, केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्रों (CPPCs) के साथ-साथ एबी के प्रधान कार्यालयों में किए गए सरकारी कारोबार शामिल हैं। कार्यालयों/ शाखाओं को निरीक्षण से उत्पन्न होने वाले कार्रवाई बिंदु, यदि कोई हो, के बारे में सूचित किया जाएगा और इसकी एक प्रति उनके नियंत्रक कार्यालय को भी भेजी जाएगी।
(बी) 'प्रमुख' के रूप में चिह्नित कार्रवाई बिंदुओं के संबंध में टिप्पणियां भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों, जिनके अंतर्गत शाखा/ कार्यालय आते हैं, को कार्रवाई बिंदुओं के संप्रेषित होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए।
(सी) 'अन्य' कार्रवाई बिंदुओं के लिए, आवश्यक सुधार बैंक द्वारा ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ऐसे 'अन्य' कार्रवाई बिंदुओं के अनुपालन की गुणवत्ता एवं निरंतरता की जांच और उस पर टिप्पणी भी आंतरिक लेखा परीक्षा द्वारा की जाना चाहिए।
(डी) सरकारी कारोबार की ऑफसाइट निगरानी के एक हिस्से के रूप में, एबी को अनुलग्नक 3 और अनुलग्नक 4 में संलग्न प्रारूपों के अनुसार अपने सरकारी कारोबार के विवरण को रिपोर्ट करना चाहिए। पूर्ण विवरण dgbaomc@rbi.org.in पर ई-मेल किया जाना चाहिए, जिसकी एक प्रति आरबीआई के उस क्षेत्रीय कार्यालय को भेजी जाना चाहिए, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह बैंक आता है। एबी और भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय की सूची जिसके अंतर्गत वे आते हैं, अनुलग्नक 5 में दी गई है।
(ई) आरओ द्वारा एबी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समय-समय पर बातचीत की जाएगी; एसबीआई के मामले में, ये बैठकें डीजीबीए, केंका, आरबीआई में आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का उद्देश्य एबी के साथ संचार का एक माध्यम बनाए रखना, और एबी द्वारा किए जा रहे सरकारी कारोबार के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी और प्रतिक्रिया प्राप्त करना होगा। चर्चा का एजेंडा आमतौर पर बैंक के आकार और उसके द्वारा संभाले जा रहे सरकारी कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगा। चर्चाओं में, कम से कम, निम्नलिखित विषय शामिल होंगे:
(i) पिछले निरीक्षण के बाद से एबी के सरकारी कारोबार में हुए विकास;
(ii) निरीक्षण निष्कर्षों के अनुपालन की निरंतरता;
(iii) सरकारी कारोबार से संबंधित बड़ी धोखाधड़ी की जांच में हुई प्रगति;
(iv) शिकायतों के संबंध में स्थिति;
(v) पेंशन भुगतान से संबंधित मुद्दे;
(vi) कें.स. और रा.स. विभागों द्वारा उठाए गए मुद्दे जैसे कि सरकारी निधियों के प्रेषण में विलंब, लगाए गए दंड आदि।
(vii) नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (C&AG) के कार्यालय और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा अपनी आवधिक लेखा परीक्षा/ निरीक्षण रिपोर्टों में उठाए गए मुद्दे, और
(viii) अन्य संबंधित मुद्दे
40. सरकारी बैंकिंग के संचालन के लिए प्रणालियां और नियंत्रण: मौजूदा निर्देशों के अलावा, एबी यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंक शाखाओं में आंतरिक/ समवर्ती लेखा परीक्षा यह सत्यापित करे कि सरकारी कारोबार, सरकार/ आरबीआई द्वारा निर्धारित नियमों और विनियमों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ एजेंसी कमीशन के दावों, पेंशन भुगतानों आदि की जांच शामिल है। निरीक्षण अधिकारियों/ लेखा परीक्षकों को एक जांचसूची प्रदान की जाएगी, जिसमें कम से कम, उदाहरण स्वरूप अनुलग्नक 6 में दी गई मदें शामिल होंगी।
अध्याय V - निरसन और अन्य प्रावधान
ए. निरसन और शेष प्रावधान
41. इन निदेशों के जारी होने के साथ, सरकारी कारोबार के लिए मौजूदा निदेशों, निर्देशों और दिशानिर्देशों, जो कि अनुलग्नक 7 में दिये गए है, को निरस्त कर दिया गया है। पहले से निरस्त किए गए निर्देश और दिशानिर्देश निरस्त रहेंगे।
42. इस निरसन के बावजूद, निरस्त किए गए निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देशों के तहत की गई या की गई मानी गई या शुरू की गई कोई भी कार्रवाई, उसके प्रावधानों द्वारा शासित होगी। इन निरस्त सूचियों के तहत दिए गए सभी अनुमोदनों या स्वीकृतियों को इन निदेशों द्वारा शासित माना जाएगा। इसके अलावा, इन निदेशों, निर्देशों और दिशानिर्देशों को निरस्त करने से निम्न प्रावधान किसी भी तरह से पूर्वाग्रह रूप से प्रभावित नहीं होंगे:
(ए) उसके अधीन अर्जित, उपार्जित या उपगत कोई अधिकार, दायित्व या देनदारी;
(बी) उसके अधीन किए गए किसी भी उल्लंघन के संबंध में कोई जुर्माना, ज़ब्ती या सज़ा; और
(सी) उपर्युक्त किसी भी अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व, देनदारी, जुर्माना, ज़ब्ती, या दंड के संबंध में कोई भी जाँच, कानूनी कार्यवाही या उपाय; और ऐसी कोई भी जाँच, कानूनी कार्यवाही या उपाय शुरू किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है, या लागू किया जा सकता है, और ऐसा कोई भी जुर्माना, ज़ब्ती, या दंड इस तरह से लगाया जा सकता है, मानो वे निदेश, निर्देश या दिशानिर्देश निरस्त ही न किए गए हों।
बी. अन्य कानूनों का अनुप्रयोग वर्जित नहीं
43. इन निर्देशों के प्रावधान, इस समय लागू किसी भी अन्य कानून, नियमों, विनियमों या निर्देशों के प्रावधानों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके विपरीत।
सी. व्याख्याएं
44. इन निदेशों के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से, या इन निदेशों के प्रावधानों के अनुप्रयोग या व्याख्या में आने वाली किसी भी कठिनाई को दूर करने के लिए, रिज़र्व बैंक, यदि वह आवश्यक समझे, तो इसमें शामिल किसी भी मामले के संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण जारी कर सकता है; और इन निदेशों के किसी भी प्रावधान की जो व्याख्या रिज़र्व बैंक द्वारा की जाएगी, वह अंतिम और बाध्यकारी होगी।
(सिवाकुमार बोस)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुलग्नक 7
इस मास्टर निर्देश में रिज़र्व बैंक द्वारा समेकित परिपत्रों की सूची, जिन्हें इसके द्वारा निरस्त किया जाता है।
| क्र.सं. |
परिपत्र संख्या |
जारी करने की तिथि |
विषय |
| 1 |
DGBA.GAD.No.H-190/ 31.12.010/2003-04 |
14 सितंबर 2003 |
आरबीआई द्वारा एजेंसी कमीशन पर टीडीएस लागू नहीं किया जाना |
| 2 |
DGBA.GAD.No.H-41/ 42.02.001/2003-04 |
22 जुलाई 2004 |
एजेंसी बैंकों के माध्यम से राज्य सरकारों के आय और अन्य प्रत्यक्ष करों (केंद्र सरकार) तथा व्यवसाय कर/ अन्य करों की स्वीकृति हेतु योजना। |
| 3 |
DGBA.GAD.No.H-1225-1258/42.02.001/ 2004-05 |
27 अक्टूबर 2004 |
एजेंसी बैंकों के माध्यम से आय और अन्य प्रत्यक्ष करों (केंद्र सरकार) तथा राज्य सरकारों के व्यवसाय कर/ अन्य करों की स्वीकृति हेतु योजना |
| 4 |
DGBA.GAD.No.H-2625-2658/31.12.010(C)/2004
-05 |
17 दिसंबर 2004 |
एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार के संचालन के लिए पारिश्रमिक - टर्नओवर कमीशन का भुगतान |
| 5 |
DGBA.GAD.No.H-3568-3601/ 42.01.001/ 2004-05 |
13 जनवरी 2005 |
एजेंसी बैंकों के माध्यम से आय और अन्य प्रत्यक्ष करों (केंद्र सरकार) तथा राज्य सरकारों के व्यवसाय कर/ अन्य करों की स्वीकृति हेतु योजना |
| 6 |
DGBA.GAD.No.H-4530/ 31.12.010(C)/ 2005-06 |
27 अक्टूबर 2005 |
एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन के दावे – सामान्य अनियमितताएँ |
| 7 |
DGBA.GAD.No.H- 11136/ 31.12.010(C)/ 2005-06 |
31 जनवरी 2006 |
एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन के दावे – सामान्य अनियमितताएँ |
| 8 |
DGBA.GAD.No.H- 13118/ 31.12.010(C)/ 2005-06 |
2 मार्च 2006 |
एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन के दावे – सामान्य अनियमितताएँ |
| 9 |
DGBA.GAD.No.H.13034 / 31.12.010(C)/ 2006-07 |
27 फ़रवरी 2007 |
पेंशन लेनदेनों पर एजेंसी कमीशन |
| 10 |
DGBA.GAD.H-1800/ 31.12.010(C)/2009-10 |
21 अगस्त 2009 |
एजेंसी कमीशन के दावों में असामान्य वृद्धि |
| 11 |
DGBA.GAD.H-3903/ 31.12.010(C)/2009-10 |
11 नवंबर 2009 |
एजेंसी कमीशन दावे बाहरी लेखा परीक्षक/ चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित किए जाना |
| 12 |
DGBA.GAD.No.H.160/ 31.12.010(C)/ 2010-11 |
7 जुलाई 2010 |
एजेंसी कमीशन दावे बाहरी लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित किए जाना |
| 13 |
DGBA.GAD.No.H-670/ 31.12.010(C)/ 2010-11 |
24 मार्च 2011 |
आरबीआई द्वारा एजेंसी कमीशन पर टीडीएस लागू नहीं किया जाना |
| 14 |
DGBA.GAD.No.H-8852/ 31.12.010(C)/ 2010-11 |
21 जून 2011 |
पंजीकरण शुल्क और स्टांप ड्यूटी के संग्रह पर एजेंसी कमीशन का भुगतान |
| 15 |
DGBA.GAD.No.7575/31. 12.011/2011-12 |
22 मई 2012 |
सरकारी लेनदेनों पर बैंकों को देय एजेंसी कमीशन का युक्तिकरण और पुनरीक्षण |
| 16 |
DGBA.GAD.No.H2529/ 31.12.010(C)/2012-13 |
31 अक्टूबर 2012 |
एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार का संचालन - एजेंसी कमीशन का भुगतान - बैंकों द्वारा एजेंसी कमीशन का दावा करने के लिए संशोधित प्रारूप-कार्य समूह की सिफारिशों का कार्यान्वयन |
| 17 |
DGBA.GAD.No.H5029/42.01.033/2011-12 |
31 जनवरी 2012 |
सरकारी एजेंसी कारोबार व्यवस्था – अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंकों की भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एजेंसी बैंकों के रूप में नियुक्ति |
| 18 |
DGBA.GAD.No.-3147/44.01.001/2015-16 |
07 अप्रैल 2016 |
एजेंसी बैंकों में सरकारी कारोबार की निगरानी |
| 19 |
DGBA.GAD.No.2294/15. 04.001/2016-17 |
6 मार्च 2017 |
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना |
| 20 |
DGBA.GAD.No.2646/31.02.007/2016-17 |
07 अप्रैल 2017 |
सरकारी बैंकिंग के संचालन के लिए प्रणालियां और नियंत्रण |
| 21 |
DGBA.GBD.No.3333/31. 02.007/2016-17 |
22 जून 2017 |
सरकारी प्राप्तियों के लिए एजेंसी कमीशन का भुगतान |
| 22 |
DGBA.GAD.No.1007/15.04.001/2017-18 |
17 अक्टूबर 2017 |
स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, 2015 |
| 23 |
DGBA.GBD.No.1324/31. 02.007/2017-18 |
16 नवंबर 2017 |
जीएसटी प्राप्ति लेनदेनों के लिए एजेंसी कमीशन |
| 24 |
DGBA.GBD.No.1498/31. 02.007/2017-18 |
7 दिसंबर 2017 |
कुछ मामलों में एजेंसी लेनदेनों का सीधे आरबीआई से निपटान (फंड और एजेंसी कमीशन के लिए) |
| 25 |
DGBA.GBD.No.1972/15.02.005/2017-18 |
01 फ़रवरी 2018 |
लघु बचत योजनाएं- एजेंसी कमीशन का भुगतान |
| 26 |
DGBA.GBD.No.2294/15.01.001/2017-18 |
15 मार्च 2018 |
विशेष जमा योजना (एसडीएस) के संचालन के लिए बैंकों को देय एजेंसी कमीशन |
| 27 |
DGBA.GBD.No.1590/44. 02.001/2018-19 |
24 दिसंबर 2018 |
एजेंसी बैंकों को एजेंसी कमीशन का भुगतान - GST के अंतर्गत TDS प्रावधान की प्रयोज्यता। |
| 28 |
DGBA.GBD.No.1870/44.02.001/2018-19 |
23 जनवरी 2019 |
एजेंसी बैंकों को एजेंसी कमीशन का भुगतान - GST के अंतर्गत TDS प्रावधान की प्रयोज्यता। |
| 29 |
DGBA.GBD.No.648/31.12.007/2019-20 |
25 सितंबर 2019 |
एजेंसी कमीशन - मिलान प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना |
| 30 |
DGBA.GBD.No.S77/42.01.033/2021-22 |
10 मई 2021 |
सरकारी एजेंसी कारोबार व्यवस्था – अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंकों की भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एजेंसी बैंकों के रूप में नियुक्ति |
| 31 |
CO.DGBA.GBD.No.S1112/42-01-033/2021-2022 |
15 दिसंबर 2021 |
सरकारी एजेंसी कारोबार व्यवस्था – अनुसूचित निजी क्षेत्र के बैंकों की भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के एजेंसी बैंकों के रूप में नियुक्ति |
| 32 |
CO.DGBA.GBD.No.S957/43-33-005/2022-2023 |
14 नवंबर 2022 |
TIN 2.0 व्यवस्था के तहत प्रत्यक्ष कर संग्रह के लिए एजेंसी कमीशन |
| 33 |
CO.DGBA.GBD.No.S29 5/31-12-010/2023-2024 |
14 जून 2023 |
ICEGATE भुगतान गेटवे के माध्यम से अप्रत्यक्ष करों के संग्रह हेतु एजेंसी कमीशन |
| 34 |
CO.DGBA.GBD.No.S 1234/31-12-010/2023-2024 |
13 मार्च 2024 |
GST, ICEGATE और TIN 2.0 लगेज फ़ाइलें अपलोड करने की कट-ऑफ़ समय-सीमा |
| 35 |
आरबीआई/2025-26/06 CO.DGBA.GBD.No.S2/31-12-010/2025-2026 |
01 अप्रैल 2025 |
एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार के संचालन पर मास्टर परिपत्र - एजेंसी कमीशन का भुगतान |
| 36 |
CO.DGBA.GBD.No.S168/31-12-011/2025-2026 |
16 जून 2025 |
एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार के संचालन पर मास्टर परिपत्र के माध्यम से जारी निर्देशों की समीक्षा - एजेंसी कमीशन का भुगतान |
|