भारतीय रिज़र्व बैंक
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
9वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय,
फोर्ट, मुंबई 400 001
सभी प्राधिकृत व्यक्ति
महोदया/महोदय,
प्राधिकृत व्यक्तियों के विदेशी मुद्रा लेन-देन – ड्राफ्ट
कृपया दिनांक 03 मई, 2000 का समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा) विनियम, 2000 (दिनांक 03 मई, 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.25/आरबी-2000), और दिनांक 05 जुलाई, 2016 के समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेन-देन (इसके बाद मास्टर निदेश के रूप में संदर्भित) के भाग ए (खंड III) और भाग सी में निहित अनुदेश देखें।
2. मास्टर निदेश के भाग ए (खंड III) और भाग सी में निहित प्राधिकृत व्यक्तियों और अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा लेन-देन के लिए सुविधाओं को अभिशासित करने वाले विनियामक ढांचे की समीक्षा की गई है और इसे प्राधिकृत व्यक्तियों को उत्पादों में सौदा करने और उनके एक्सपोजर की हेजिंग करने हेतु विदेशी मुद्रा लेन-देन करने के लिए, तुलन-पत्र प्रबंधन और बाजार-निर्माण के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करने और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को सरल बनाने के लिए परिष्कृत किया गया है। संशोधित अनुदेश इसके साथ अनुबंध 1 में संलग्न हैं। निवल खुली स्थिति सीमाओं की रिपोर्टिंग के प्रारूप को भी अद्यतन किया गया है। संशोधित प्रारूप अनुबंध 2 में दिया गया है।
3. इस परिपत्र के प्रयोजन के लिए, प्राधिकृत व्यक्तियों का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 10 (1) के तहत प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंकों और प्राधिकृत डीलर श्रेणी-III के रूप में प्राधिकृत स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलरों से होगा।
4. इस परिपत्र में निहित निदेश फेमा, 1999 की धारा 10(4) और 11(1) और 11(2) और भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45डबल्यू के तहत जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के तहत अपेक्षित अनुमतियों/अनुमोदनों, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव के बिना हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुबंध 1
प्राधिकृत डीलरों के विदेशी मुद्रा लेन-देन
1. अनुमत उत्पाद/लेन-देन/स्थान
1.1 ओटीसी लेन-देन
(i) एक प्राधिकृत डीलर अपने एक्सपोजर, तुलन-पत्र प्रबंधन, बाजार निर्माण और मालिकाना स्थिति की हेजिंग करने के उद्देश्य से अन्य प्राधिकृत डीलरों और अपनी विदेशी शाखाओं/विदेशी संस्थाओं/आईबीयू/ विशेष आर्थिक क्षेत्रों में ओबीयू के साथ निम्नलिखित विदेशी मुद्रा लेन-देन कर सकता है।
(ए) प्राधिकृत डीलर और प्रयोक्ता के बीच विदेशी मुद्रा लेन-देन करने की अनुमति।
(बी) समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियम, 2016 (अधिसूचना सं. फेमा5(आर)/2016-आरबी, दिनांक 01 अप्रैल, 2016) के अनुसार विदेशी मुद्रा में जमा रखना और स्वीकार करना।
(सी) समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना और उधार देना) विनियम, 2018 (अधिसूचना सं.फेमा 3(आर)/2018-आरबी, दिनांक 17 दिसंबर, 2018) के अनुसार विदेशी मुद्रा में उधार लेना और उधार देना।
(ii) एक प्राधिकृत डीलर अन्य प्राधिकृत डीलरों और विदेशी संस्थाओं/आईबीयू/ विशेष आर्थिक क्षेत्रों में ओबीयू के साथ भारतीय रुपये से जुड़े गैर-सुपर्दगी डेरिवेटिव संविदा (एनडीडीसी) को या तो सीधे या बैक-टू-बैक आधार पर अपनी विदेशी शाखाओं (भारत में संचालित विदेशी बैंकों के मामले में, मूल बैंक की किसी भी शाखा के माध्यम से), आईबीयू, विदेशी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों और विदेशी संयुक्त उद्यमों के माध्यम से, निम्नलिखित शर्तों के अधीन, कर सकता है:
(ए) आईएनआर से जुड़े एनडीडीसी को प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक द्वारा किया जा सकता है, बशर्ते कि प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक (या इसके अनिवासी मूल बैंक) के पास एक ऑपरेटिंग आईबीयू है;
(बी) इस तरह के लेन-देन भारत में निगमित प्राधिकृत डीलरों की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी/संयुक्त उद्यम द्वारा किए जा सकते हैं, बशर्ते कि पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी/संयुक्त उद्यम एक बैंकिंग इकाई हो; तथा
(सी) इस तरह के लेन-देन आईएनआर या किसी विदेशी मुद्रा में नकद निपटान किए जा सकते हैं।
(iii) एक प्राधिकृत डीलर, समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 16 जून, 2025 के मास्टर निदेश - भारतीय रिजर्व बैंक (इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म) निदेश, 2025 अनुसार रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (ईटीपी) पर विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा और विदेशी मुद्रा ब्याज दर डेरिवेटिव संविदा कर सकता है।
(iv) एक प्राधिकृत डीलर भारत के बाहर ईटीपी पर लेन-देन कर सकता है, बशर्ते कि ईटीपी ऑपरेटर किसी ऐसे देश में निगमित/स्थापित हो जो वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) का सदस्य है और ईटीपी या लेनदेन को एक ऐसे वित्तीय बाजार विनियामक द्वारा विनियमित किया जाता है जो भुगतान और बाजार अवसंरचना समिति (सीपीएमआई) या प्रतिभूति आयोगों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईओएससीओ) का सदस्य है।
बशर्ते किआईएनआर से जुड़े लेन-देन के संबंध में:
(ए) प्राधिकृत डीलर ऐसे ईटीपी पर केवल अनिवासी व्यक्तियों के साथ लेन-देन करते हैं; तथा
(बी) अपतटीय ईटीपी का ऑपरेटर अपनी वेबसाइट पर ईटीपी पर किए गए आईएनआर से जुड़े लेन-देन से संबंधित जानकारी का प्रसार करता है।
1.2 एक्सचेंज ट्रेडेड लेन-देन
(i) एक प्राधिकृत डीलर भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर, और समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 20 जनवरी, 2020 के "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) में रुपया डेरिवेटिव की शुरूआत" संबंधी एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.17 के अनुसार, आईएफएससी में विनियमित एक्सचेंजों पर, अनुमत एक्सचेंज ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव (ईटीसीडी) संविदा कर सकता है, जैसा भी लागू हो;
(ii) एक प्राधिकृत डीलर विदेशी एक्सचेंजों पर आईएनआर से नहीं जुड़े लेन-देन भी कर सकता है, बशर्ते कि विदेशी एक्सचेंज किसी ऐसे देश में स्थित हो जो एफएटीएफ का सदस्य है और एक ऐसे वित्तीय बाजार विनियामक द्वारा विनियमित है जो सीपीएमआई या आईओएससीओ का सदस्य है।
2. स्वर्ण कीमतों की हेजिंग
समय-समय पर यथासंशोधित स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, 2015 (अधिसूचना सं. मास्टर निदेश सं.डीबीआर.आईबीडी.सं.45/23.67.003/2015-16, दिनांक 22 अक्टूबर, 2015), के तहत नामित बैंक और वैसे बैंक जिसे विनियमन विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारत में अपने घटकों के साथ वायदा स्वर्ण संविदा करने की अनुमति है, विदेशी बाजारों में एक्सचेंज-ट्रेडेड और ओटीसी हेजिंग उत्पादों का उपयोग करके स्वर्ण के अपने मूल्य जोखिम (अंतर-बैंक स्वर्ण सौदों से उत्पन्न होने वाली स्थिति सहित) की हेजिंग कर सकते हैं। विकल्पों से जुड़े उत्पादों का उपयोग करते समय, बैंक यह सुनिश्चित कर सकता है कि प्रीमियम की, प्रत्यक्ष या निहित, कोई निवल प्राप्ति नहीं है।
3. विदेशी मुद्रा खाते और विदेशी बाजारों में निवेश
एक प्राधिकृत डीलर, अपने निदेशक मंडल (या समकक्ष मंच) द्वारा अनुमोदित नीति के अधीन, अपने विदेशी मुद्रा खातों में अधिशेष धन का उपयोग निम्नलिखित हेतु कर सकता है:
(i) ओवरनाइट प्लेसमेंट;
(ii) एक वर्ष तक की परिपक्वता के साथ रिवर्स रेपो। किसी विदेशी राज्य द्वारा जारी किए गए विदेशी ऋण लिखत ऐसे लेनदेन के लिए पात्र प्रतिभूतियां होंगे;
(iii) एक वर्ष तक की मूल या अवशिष्ट परिपक्वता के साथ किसी विदेशी राज्य द्वारा जारी किए गए विदेशी मुद्रा बाजार लिखतों और/या ऋण लिखतों में निवेश;
(iv) समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना और उधार देना) विनियम, 2018 (अधिसूचना सं. फेमा 3(आर)/2018-आरबी, दिनांक 17 दिसंबर, 2018) और विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अनुसार भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा में उधार देना, तथा
(v) गैर-अभिनियोजित एफसीएनआर (बी) फंडों को किसी विदेशी राज्य द्वारा जारी किए गए दीर्घकालिक विदेशी ऋण लिखतों में भी निवेश किया जा सकता है, बशर्ते कि ऐसे लिखतों की अवशिष्ट परिपक्वता अंतर्निहित एफसीएनआर (बी) जमाओं की परिपक्वता से अधिक नहीं होगी।
4. प्राधिकृत डीलरों द्वारा ओवरसीज विदेशी मुद्रा में उधार लेना
4.1 प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंकों द्वारा ओवरसीज विदेशी मुद्रा में उधार लेना
(i) एक प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक अपने प्रधान कार्यालय, विदेशी शाखाओं, विदेशी बैंकों, अंतर्राष्ट्रीय/बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों या रिज़र्व बैंक द्वारा इस उद्देश्य के लिए अनुमत किसी अन्य संस्था से विदेशी मुद्रा में उधार ले सकता है।
बशर्ते कि प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक केवल उन अंतर्राष्ट्रीय/बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से उधार ले सकता है जिनमें भारत सरकार एक शेयरधारी सदस्य है या जो एक से अधिक सरकारों द्वारा स्थापित किए गए हैं या एक से अधिक सरकारों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा शेयरधारिता है।
(ii) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक द्वारा ओवरसीज विदेशी मुद्रा उधार उसकी टियर-I पूंजी के 100 प्रतिशत या 10 मिलियन अमरीकी डालर (या इसके समतुल्य), जो भी अधिक हो, से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस सीमा से अधिक का कोई भी उधार रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से ही लिया जाएगा।
(iii) निम्नलिखित उधार उपरोक्त सीमा से बाहर होंगे:
(ए) निर्यात ऋण के वित्तपोषण के उद्देश्य से प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक द्वारा विदेशी उधार;
(बी) पूंजी जुटाने/बढ़ाने के उद्देश्य से विदेशी मुद्रा में उधार;
(सी) किसी विदेशी बैंक द्वारा अपने प्रधान कार्यालय से प्राप्त ब्याज मुक्त निधि, जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 11(2)(बी)(i) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखी गई नकदी/बिना भारित अनुमोदित प्रतिभूतियों का स्रोत है, जिसे विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार ऋण जोखिम शमन के रूप में माना जाता है;
(डी) नोस्ट्रो खातों में पांच दिनों तक ओवरड्राफ्ट; तथा
(ई) कोई अन्य ओवरसीज विदेशी मुद्रा में उधार जो रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रूप से अनुमत हो।
(iv) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक, समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना और उधार देना) विनियम, 2018 (अधिसूचना सं. फेमा 3(आर)/2018-आरबी दिनांक 17 दिसंबर, 2018) और विनियमन विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी निदेशों के अनुसार, भारत में विदेशी मुद्रा में उधार देने के लिए, ओवरसीज विदेशी मुद्रा में उधारियों के माध्यम से जुटाई गई निधियों के साथ-साथ स्वैप के माध्यम से प्राप्त विदेशी मुद्रा निधियों का उपयोग कर सकता है।
4.2 प्राधिकृत डीलर श्रेणी-III के रूप में प्राधिकृत स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलरों द्वारा ओवरसीज विदेशी मुद्रा में उधार
एक स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलर, भारत के बाहर अपने मूल या विदेशी बैंकों या रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमति के अनुसार किसी अन्य इकाई से विदेशी मुद्रा में उधार ले सकता है और नोस्ट्रो खातों में ओवरड्राफ्ट का लाभ उठा सकता है (पांच दिनों के भीतर समायोजित नहीं)। इस तरह की उधारी समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 28 नवंबर, 2025 के भारतीय रिजर्व बैंक (स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलर) निदेश, 2025 में निर्धारित विदेशी मुद्रा उधार की सीमा के भीतर होगी।
5. शासन और जोखिम प्रबंधन
(i) एक प्राधिकृत डीलर, अपने निदेशक मंडल (या समकक्ष मंच) के अनुमोदन से, अपने विदेशी मुद्रा लेन-देन के लिए एक उपयुक्त नीति तैयार करेगा जिसमें अन्य के साथ-साथ निवल एकदिवसीय खुली स्थिति (एनओओपी) की सीमा भी शामिल होगी। एनओओपी की सीमा को सीआईएमएस/ई-मेल के माध्यम से रिज़र्व बैंक को fmrdfx@rbi.org.in पर सूचित करेगा। ऐसी सीमा प्राधिकृत डीलर की कुल पूंजी (टियर I और टियर II पूंजी) के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। यह सीमा उनकी विदेशी शाखाओं, आईबीयू और ओबीयू सहित सभी शाखाओं के लिए समग्र सीमा होगी। विदेशी बैंकों के लिए, यह सीमा केवल भारत में उनकी शाखाओं को कवर करेगी।
(ii) भारतीय रिज़र्व बैंक, अपने विवेक से, प्राधिकृत डीलरों के लिए एक मुद्रा (एनओपी-आईएनआर) के रूप में रुपये को शामिल करते हुए निवल खुली स्थिति के लिए एक सीमा निर्धारित कर सकता है।
(iii) एक प्राधिकृत डीलर विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अपनी निवल खुली स्थितियों की गणना करेगा। अन्य सभी जोखिम सीमाओं की गणना की प्रक्रिया को एक आंतरिक नीति के रूप में प्रलेखित किया जाएगा और सुसंगत तरीके से पालन किया जाएगा।
6. बाजार का समय
(i) ग्राहक और अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा लेन-देन के लिए बाजार समय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जाएगा। एक प्राधिकृत डीलर उपयोगकर्ताओं और अन्य प्राधिकृत डीलरों, आईबीयू, ओबीयू और विदेशी संस्थाओं के साथ तटवर्ती बाजार घंटों से परे भी लेन-देन कर सकता है।
(ii) ईटीसीडी लेन-देन के लिए बाजार का समय, रिज़र्व बैंक के परामर्श से भारतीय और प्रतिभूति बोर्ड द्वारा निर्धारित किया जाएगा। |