भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई - 400 001
अधिसूचना सं. फेमा.3(आर)/2018-आरबी
17 दिसम्बर 2018
(16 फरवरी 2026 तक संशोधित)
(09 अक्तूबर 2025 तक संशोधित)
(29 जुलाई 2022 तक संशोधित)
(28 मई 2021 तक संशोधित)
(27 फरवरी 2019 तक संशोधित)
विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (3) के खंड (ए), (डी) तथा (ई) और धारा- 47 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा समय-समय पर संशोधित दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.3/2000-आरबी, समय-समय पर संशोधित दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.4/2000-आरबी तथा समय-समय पर संशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं. फेमा. 120/ आरबी-2004 के विनियम 21 का अधिक्रमण करते हुए रिज़र्व बैंक भारत में निवास करने वाले व्यक्ति तथा भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों के बीच उधार लेने तथा उधार देने के संबंध में निम्नलिखित विनियम बनाता है; अर्थात:
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ:-
i) ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018 कहलाएंगे।
ii) वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।
2. i[परिभाषाएँ: -
(1) इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा आवश्यकता न हो:
(ए) "अधिनियम" का अर्थ है विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (1999 का 42);
(बी) "आर्मस लेंग्थआधार" का अर्थ है दो संबंधित पक्षों के बीच एक लेनदेन जो इस तरह से आयोजित किया जाता है जैसे कि लेन-देन करने वाले पक्ष असंबंधित थे, ताकि हितों का कोई टकराव न हो;
(सी) "अधिकृत बैंक" का वही अर्थ होगा जो इसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन (जमा) विनियम, 2016 में दिया गया है;
(डी) "अधिकृत डीलर (एडी)" का अर्थ है अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के तहत अधिकृत डीलर के रूप में प्राधिकृत व्यक्ति;
(ई) "बेंचमार्क दर" का अर्थ है विदेशी मुद्रा (एफसीवाई) बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)/व्यापार ऋण (टीसी) के मामले में उधार की मुद्रा पर लागू 6 महीने की अवधि की कोई भी व्यापक रूप से स्वीकृत अंतरबैंक दर या वैकल्पिक संदर्भ दर (एआरआर)। साथ ही, इसका अर्थ है कि भारतीय रुपये (आईएनआर) मूल्यवर्ग के ईसीबी/टीसी के मामले में तदनुरूपी परिपक्वता की भारत सरकार की प्रतिभूति का मौजूदा यील्ड।
(एफ़) "नियंत्रण" -
(i) कंपनियों के मामले में, नियंत्रण का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 में उसे दिया गया है; तथा
(ii) एलएलपी के मामले में, नियंत्रण का अर्थ है नामित भागीदारों में से अधिकांश को नियुक्त करने का अधिकार, जहां ऐसे भागीदार, अन्य के लिए विशेष बहिष्करण के साथ, एलएलपी की सभी नीतियों पर नियंत्रण रखते हैं।
(जी) "उधार लेने की लागत" का अर्थ है ब्याज की दर, अन्य शुल्क, व्यय, प्रभार, गारंटी शुल्क और निर्यात क्रेडिट एजेंसी प्रभार, चाहे इसका भुगतान एफसीवाई या आईएनआर में किया गया हो, लेकिन इसमें भारत में देय प्रतिबद्धता शुल्क और सांविधिक कर शामिल नहीं होंगे;
(एच) "नामित अधिकृत डीलर (एडी) श्रेणी I बैंक" का अर्थ है ईसीबी और टीसी के संबंध में रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने और ऐसे लेनदेन की निगरानी के लिए उधारकर्ता द्वारा नामित एडी श्रेणी I बैंक;
(आई) "विनिमय अर्जकों का विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाता" का वही अर्थ होगा जो उन्हें क्रमशः विदेशी मुद्रा प्रबंधन (भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाते) विनियम, 2015 में दिया गया है;
(जे) "बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)" का अर्थ, इन विनियमों की अनुसूची I के अनुसार, पात्र उधारकर्ता द्वारा मान्यता प्राप्त ऋणदाता से उधार लेना है;
(के) "बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल)" का अर्थ, इन विनियमों की अनुसूची III के अनुसार, भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर निवास करने वाले व्यक्ति को उधार देना है;
(एल) "विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) खाता (एफ़सीएनआर (बी)" का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 में दिया गया है;
(एम) "वित्तीय क्षेत्र विनियामक" का अर्थ, भारत में लागू किसी भी कानून के तहत स्थापित वित्तीय विनियामक निकाय है और इसमें भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण शामिल हैं;
(एन) "विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफ़सीसीबी)" का वही अर्थ होगा जो इश्यू ऑफ फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स एंड ऑर्डिनरी शेयर्स (थ्रू डिपॉजिटरी रिसीट मैकेनिज्म) स्कीम, 1993 में दिया गया है;
(ओ) "विदेशी मुद्रा विनिमेय बॉन्ड (एफ़सीईबी)" का वही अर्थ होगा जो इश्यू ऑफ फॉरेन करेंसी एक्सचेंजेबल बॉन्ड्स स्कीम, 2008 में दिया गया है;
(पी) "आवास वित्त संस्था" का वही अर्थ होगा जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) में दिया गया है;
(क्यू) "भारतीय संस्था" का अर्थ है कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के तहत भारत में निगमित कंपनी या केंद्रीय/राज्य अधिनियम के तहत भारत में स्थापित कॉर्पोरेट निकाय या सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के तहत भारत में गठित और पंजीकृत सीमित देयता भागीदारी;
(आर) "इंडस्ट्रियल पार्क" का अर्थ ऐसी परियोजना है जिसमें विकसित भूमि के प्लॉट या निर्मित स्थान या सामान्य सुविधाओं के साथ संयोजन के रूप में गुणवत्तापूर्ण ढाँचा विकसित किया जाता है और औद्योगिक गतिविधि के उद्देश्य से सभी आवंटित इकाइयों को उपलब्ध कराया जाता है;
स्पष्टीकरण: साझा सुविधाओं का अर्थ इंडस्ट्रियल पार्क में स्थित सभी इकाइयों के लिए उपलब्ध सुविधाओं से है, और इसमें बिजली, सड़कें (पहुंचने वाली सड़कें भी शामिल हैं), रेलवे लाइन/साइडिंग जिसमें इलेक्ट्रिफाइड रेलवे लाइनें और मुख्य रेलवे लाइन से कनेक्टिविटी शामिल है, पानी की सप्लाई और सीवरेज, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट, कॉमन टेस्टिंग, टेलीकॉम सेवाएं, एयर कंडीशनिंग, कॉमन फैसिलिटी बिल्डिंग, इंडस्ट्रियल कैंटीन, कन्वेंशन/कॉन्फ्रेंस हॉल, पार्किंग, ट्रैवल डेस्क, सुरक्षा सेवा, प्रथम उपचार केंद्र, एम्बुलेंस और अन्य सुरक्षा सेवा, प्रशिक्षण सुविधाएं और इंडस्ट्रियल पार्क में स्थित इकाइयों के साझा इस्तेमाल के लिए बनी ऐसी अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
(एस) “बुनियादी ढांचा क्षेत्र” का वही अर्थ होगा जो उसे भारत सरकार की समय-समय पर संशोधित अधिसूचना एफ़. सं. 13/06/2009-आईएनएफ़ के तहत स्वीकृत ‘इंफ्रास्ट्रक्चर सब-सेक्टर की हार्मोनाइज्ड मास्टर लिस्ट’ में दिया गया है। इन विनियामकीय उद्देश्यों के लिए, “एक्सप्लोरेशन, माइनिंग और रिफाइनरी’’ जैसे क्षेत्रों को बुनियादी ढांचा क्षेत्र माना जाएगा;
(टी) “अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफ़एससी)” का वही अर्थ होगा जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र प्राधिकार अधिनियम, 2019 (2019 का 50) में दिया गया है;
(यू) ‘उदारीकृत विप्रेषण योजना’ का अर्थ 4 फरवरी, 2004 के परिपत्र ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं 64 के अनुसार बनाई गई योजना है;
(वी) “अनिवासी बाहरी (एनआरई) खाता” का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 में दिया गया है;
(डबल्यू) “अनिवासी साधारण (एनआरओ) खाता” का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 में दिया गया है;
(एक्स) “राष्ट्रीय आवास बैंक” का वही अर्थ होगा राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) में दिया गया है;
(वाय) “निवल मालियत” –
(i) कंपनियों के मामले में, निवल मालियत का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) में दिया गया है; तथा
(ii) अन्य संस्थाओं के मामले में, निवल मालियत पूंजीगत और अवितरित लाभ के तहत तुलन पत्र में दर्ज धन का योग होगा, जिसमें से संचित हानि, आस्थगित व्यय और विविध व्यय के कुल मूल्य को घटाया जाएगा, जो अंतिम लेखापरीक्षित तुलन पत्र के अनुसार बट्टे खाते में नहीं डाला गया है।
(ज़ेड) "अनिवासी भारतीय (एनआरआई)" का वही अर्थ होगा जैसा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियम, 2016 में दिया गया है;
(एए) "प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्डधारक" का वही अर्थ होगा जो नागरिकता अधिनियम, 1955 में दिया गया है;
(एबी) "रियल इस्टेट व्यवसाय" का अर्थ लाभ अर्जित करने की दृष्टि से भूमि या अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री या इसे पट्टे पर देना है और इसमें निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए भूमि या अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री और पट्टा (हस्तांतरण न होना) शामिल नहीं है;
(i) औद्योगिक पार्कों, एकीकृत टाउनशिप और एसईजेड का निर्माण और विकास;
(ii) नई औद्योगिक परियोजनाओं का विकास, मौजूदा इकाइयों का आधुनिकीकरण और विस्तार;
(iii) 'बुनियादी ढांचा क्षेत्र' के तहत कोई भी गतिविधि;
(iv) निर्माण-विकास परियोजना;
(v) उधारकर्ता के स्वयं के उपयोग के लिए वाणिज्यिक या आवासीय संपत्तियां;
(vi) रियल इस्टेट ब्रोकिंग सेवाएं।
स्पष्टीकरण:-
(ए) निर्माण-विकास परियोजनाओं में टाउनशिप का विकास, आवासीय/वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण, सड़कों या पुलों, होटलों, रिसॉर्ट्स, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, मनोरंजन सुविधाओं, शहर और क्षेत्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे, टाउनशिप शामिल हैं;
(बी) रियल इस्टेट व्यवसाय के संबंध में हस्तांतरण में ये शामिल हैं, -
(i) संपत्ति की बिक्री, विनिमय या त्याग; या
(ii) उसमें किसी भी अधिकार की समाप्ति; या
(iii) किसी भी विधि के तहत उसका अनिवार्य अधिग्रहण; या
(iv) संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (1882 का 4) की धारा 53ए में निर्दिष्ट प्रकृति के अनुबंध के आंशिक प्रदर्शन में किसी भी अचल संपत्ति के कब्जे की अनुमति देने या बनाए रखने की अनुमति देने वाला कोई भी लेनदेन; या
(v) किसी कंपनी में पूंजीगत लिखत प्राप्त करके या किसी भी समझौते या किसी व्यवस्था के माध्यम से या किसी अन्य तरीके से कोई भी लेनदेन, जिसमें किसी भी अचल संपत्ति के अंतरण या उपयोग को सक्षम करने का प्रभाव होता है, शामिल हैं।
(एसी) "संबंधित पक्ष" का अर्थ है ऐसी इकाई से है जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के प्रावधानों के अनुसार संबंधित पक्ष के रूप में अर्हता प्राप्त करती है। कंपनी के अलावा किसी व्यक्ति के लिए, यह परिभाषा आवश्यकतानुसार लागू होगी;
(एडी) "रिश्तेदार" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) में दिया गया है;
(एई) "प्रतिभूति" का वही अर्थ होगा जो प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 में दिया गया है;
(एएफ) "विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड)” का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम 2005 में दिया गया है;
(एजी) "विशेष अनिवासी रुपया खाता (एसएनआरआर) खाता" का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियम, 2016 में दिया गया है;
(एएच) “व्यापार ऋण (टीसी)” का मतलब है भारत में अनुमेय आयात के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ता या वित्तीय संस्थान द्वारा दिया गया ऋण और इसमें आपूर्तिकर्ताओं के ऋण और खरीदारों के ऋण दोनों शामिल हैं;
स्पष्टीकरण: आपूर्तिकर्ताओं के ऋण का संबंध भारत में आयात के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दिए गए ऋण से है, जबकि खरीदारों के ऋण का मतलब भारत में आयात के भुगतान के लिए आयातक द्वारा किसी विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान से व्यवस्था किए गए ऋण से है।
(एआई) “अंतरणीय विकास अधिकार” का वही मतलब होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (अनुमेय पूंजी खाता लेनदेन) विनियमावली, 2015 में इसे दिया गया है।
(2) इन विनियमावली में उपयोग किए गए लेकिन परिभाषित नहीं किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों का अर्थ क्रमशः वही होगा जो उन्हें अधिनियम में दिया गया है।]
3. उधार देने अथवा लेने पर प्रतिबंध
अधिनियम, नियम या विनियमन में दिये गए प्रावधानों के अलावा भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से विदेशी मुद्रा में न तो उधार लेगा और न ही निवासी अथवा अनिवासी को उधार देगा और भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से रुपये में न तो उधार लेगा और न ही उधार देगा;
बशर्ते कि रिज़र्व बैंक भारत में निवासी किसी व्यक्ति को भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से विदेशी मुद्रा में उधार लेने अथवा निवासी या अनिवासी को उधार देने हेतु और /अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से रुपये में उधार लेने अथवा देने के लिए, पर्याप्त कारण दिये जाने पर, अनुमति दे सकता है।
स्पष्टीकरण: (ए) भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत में अथवा (बी) भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किए गए क्रेडिट कार्ड के उपयोग को भारतीय रुपयों में / विदेशी मुद्रा में उधार लेना अथवा उधार देना नहीं माना जाएगा।
ii[3ए. उधार ली गई निधि के अंतिम उपयोग पर प्रतिबंध:-
(1) इन विनियमों के तहत उधार ली गई निधि भारत में इन कामों के लिए उपयोग नहीं की जाएगी:-
(ए) चिट फंड;
(बी) निधि कंपनी;
(सी) रियल इस्टेट व्यवसाय और फार्महाउस का निर्माण, बशर्ते कि:-
(i) निर्माण और विकास परियोजना के लिए ऋण लेने के मामले में, उधारकर्ता प्लॉट तभी बेचेगा जब वह ट्रंक अधोसंरचना अर्थात सड़कें, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइटिंग, जल निकासी और सीवरेज का विकास सुनिश्चित कर ले।
(ii) औद्योगिक पार्क के लिए ऋण लेने के मामले में, ऐसे पार्क में कम से कम 10 यूनिट होनी चाहिए और कोई भी एक यूनिट आबंटन योग्य क्षेत्र के 50 प्रतिशत से ज़्यादा जगह नहीं घेरेगी और औद्योगिक गतिविधि के लिए आबंटित किए जाने वाले क्षेत्र का न्यूनतम प्रतिशत कुल आबंटन योग्य क्षेत्र के 66 प्रतिशत से कम नहीं होगा।
स्पष्टीकरण: औद्योगिक पार्क में "आबंटन योग्य क्षेत्र" का मतलब है—
(i) विकसित भूमि के प्लॉट के मामले में - इकाई को आबंटन के लिए उपलब्ध निवल साइट क्षेत्र, जिसमें सामान्य सुविधाओं के लिए क्षेत्र शामिल नहीं है।
(ii) निर्मित स्थानों के मामले में - फर्श क्षेत्र और सामान्य सुविधाएं देने के लिए उपयोग किया गया बना हुआ स्थान।
(iii) विकसित भूमि और निर्मित स्थान के संयोजन के मामले में – सामान्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाने वाले साइट क्षेत्र और निर्मित स्थान को छोड़कर इकाइयों को आवंटन के लिए उपलब्ध निवल साइट और फर्श क्षेत्र।
(डी) कृषि और पशुपालन, निम्नलिखित के आलावा –
(i) नियंत्रित परिस्थितियों में फूलों की खेती, बागवानी और सब्जियों और मशरूम की खेती;
(ii) बीज और रोपण सामग्री का विकास और उत्पादन;
(iii) पशुपालन (कुत्तों की ब्रीडिंग सहित), मत्स्य पालन, जलीय कृषि और मधुमक्खी पालन; और
(iv) कृषि और संबंधित क्षेत्रों से संबंधित सेवाएं
स्पष्टीकरण:- 'नियंत्रित परिस्थितियों में' में फूलों की खेती, बागवानी, सब्जियों और मशरूम की खेती की श्रेणियों के लिए 'नियंत्रित परिस्थितियों में खेती' शामिल है जो कि खेती का एक तरीका है जिसमें बारिश, तापमान, सौर विकिरण, हवा की नमी और संवर्धन माध्यम को कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया जाता है। इन मापदंडों में नियंत्रण हरित घरों, नेट हाउस, पॉली हाउस या किसी अन्य उन्नत बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के तहत संरक्षित खेती के माध्यम से किया जा सकता है जहां सूक्ष्म-जलवायु परिस्थितियों को मानवजनित रूप से विनियमित किया जाता है।
(ई) चाय, कॉफी, रबर, इलायची, पाम तेल के पेड़, जैतून के तेल के पेड़ के अलावा अन्य बागान
(एफ) अंतरणीय विकास अधिकारों (टीडीआर) में व्यापार;
(जी) सूचीबद्ध / गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में लेनदेन, सिवाय उन लेनदेन के जो किसी भारतीय संस्थान द्वारा कॉर्पोरेट कार्यों जैसे विलय, विलीनीकरण, समामेलन, व्यवस्था या नियंत्रण के अधिग्रहण के लिए किए गए हैं, जो कि उस अधिनियम जिसके तहत संस्था को निगमित / स्थापित किया गया है, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (शेयरों का पर्याप्त अर्जन और अधिग्रहण) विनियम, 2011, वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और प्रतिभूति हित अधिनियम, 2002 और दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016, जैसा लागू हो, के अनुसार किया जाए;
स्पष्टीकरण: उप-विनियम 1(ग) के अंतर्गत, ऋण केवल रणनीतिक उद्देश्यों हेतु प्राप्त किया जाएगा, अर्थात् ऐसे उद्देश्य जो संभावित सहयोग (सिनर्जी) के माध्यम से दीर्घकालिक मूल्य सृजन के मुख्य उद्देश्य से प्रेरित हों, अल्पकालिक लाभों के लिए नहीं हो।
(एच) घरेलू भारतीय रुपया ऋण की चुकौती (i) जो इस विनियमन के तहत प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के लिए लिया गया था; या (ii) जो लागू प्रूडेंशियल मानदंडों के अनुसार गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
(आई) इस विनियम के अंतर्गत धन उधार लेने और उपयोग करने के लिए जिन उद्देश्यों की अनुमति नहीं है, उन उद्देश्यों के लिए कोई भी ऑन-लेंडिंग नहीं की जाएगी।
4. भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर से विदेशी मुद्रा में लिया गया उधार
ए. प्राधिकृत व्यापारियों अथवा उनकी भारत के बाहर की शाखाओं द्वारा उधार लेना
i) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अपने प्रधान कार्यालय अथवा शाखा या भारत के बाहर किसी कॉरस्पान्डन्ट या किसी अन्य संस्था से विनिर्दिष्ट सीमा तक उधार ले सकेगा और वह रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर भारत सरकार के परामर्श से विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन होगा।
ii) किसी प्राधिकृत व्यापारी (एडी) जो कि भारत में निगमित अथवा गठित बैंक है, की भारत के बाहर की शाखा भारत के बाहर अपने नियमित बैंकिंग कारोबार के दौरान विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगी जो रिज़र्व बैंक एवं देश के विनियामक प्राधिकारी, जहां उसकी शाखा स्थित है, द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों या दिशानिर्देशों के अधीन है।
iii) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अपने निर्यातक घटकों को पोतलदान के पूर्व या पोतलदान-पश्चात विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान करने के प्रयोजनार्थ भारत के बाहर स्थित किसी बैंक या किसी वित्तीय संस्था से विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगा, बशर्ते इस संबंध में रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन हो।
iv) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुरूप भारत के बाहर से ईसीबी जुटा सकेगा।
बी. प्राधिकृत व्यापारी के अलावा किसी व्यक्ति द्वारा उधार लेना
i) पात्र निवासी संस्थाएं अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुरूप भारत के बाहर से ईसीबी जुटा सकेंगी।
ii) आयातकों द्वारा अनुसूची-II में निहित प्रावधानों के अनुरूप डीजीएफटी की वर्तमान विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत यथा अनुमेय पूंजीगत या गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात हेतु भारत के बाहर से व्यापार ऋण जुटाया जा सकेगा।
iii) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर स्थित किसी बैंक से, चाहे ऋण या ओवरड्राफ्ट या किसी अन्य ऋण सुविधा के माध्यम से उधार ले सकेगा, जहां वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात आस्थगित भुगतान शर्तों या टर्न-की प्रॉजेक्ट या सिविल निर्माण संविदा के निष्पादन के आधार पर किया जाना प्रस्तावित है, बशर्ते जिस प्राधिकारी ने इसके लिए अनुमोदन प्रदान किया है उसके द्वारा नियत शर्तें समय-समय पर संशोधित दिनांक 12 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं.फेमा.23(आर)/2015-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात) नियमावली, 2015 के अनुरूप हों।
iv) भारतीय संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम के तहत स्थापित वित्तीय संस्थान आगे उधार देने के प्रयोजन से भारत सरकार के पूर्वानुमोदन पर विदेशी मुद्रा में उधार जुटा सकते हैं।
स्पष्टीकरण: बाह्य वाणिज्यिक उधार स्वरूप के इस प्रकार के उधार अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अधीन होंगे।
v) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी अपने रिश्तेदारों से 2,50,000/- अमेरिकी डॉलर से अनधिक मूल्य तक अथवा उसके समतुल्य अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए किसी अन्य मूल्य तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से, समय-समय पर निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन रहते हुए उधार ले सकता है;
vi) भारत का निवासी कोई व्यक्ति, जो विदेश में पढ़ाई कर रहा है, वह शिक्षा शुल्क के भुगतान के प्रयोजनों और स्वयं के जीवनयापन (मेंटेनेंस) हेतु भारत के बाहर 2,50,000/- अमेरिकी डॉलर से अनधिक मूल्य तक अथवा उसके समतुल्य अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए किसी अन्य मूल्य तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से समय-समय पर निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन रहते हुए ऋण जुटा सकता है।
5. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा में उधार:-
ए. प्राधिकृत व्यापारियों अथवा उनकी भारत के बाहर की शाखाओं द्वारा उधार
i) प्राधिकृत व्यापारी(एडी) अथवा भारत के बाहर की उसकी शाखा भारत के बाहर के उधारकर्ता को अनुसूची-III में निहित प्रावधानों के अनुसार विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत ईसीएल प्रदान कर सकते हैं।
ii) प्राधिकृत व्यापारी (एडी) भारत में अपने घटकों को रिज़र्व बैंक द्वारा इस संबंध में जारी विवेकपूर्ण मानदंडों, ब्याज दर निदेशों और दिशा-निर्देशों, यदि कोई हो, के अनुपालन के अधीन उनकी विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को पूरा करने या उनकी रुपया कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं या पूंजीगत व्यय के लिए ऋण प्रदान कर सकता है।
iii) रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निदेशों या दिशा-निर्देशों के अधीन, भारत में प्राधिकृत व्यापारी (एडी) भारत में किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी(एडी) को विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान कर सकता है।
iv) एडी बैंकों की भारत के बाहर की शाखाएं एनआरई/एफसीएनआर जमा खातों या समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा. 5(आर)/ 2016-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसार अनुरक्षित तथा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर यथाविनिर्दिष्ट किसी अन्य खातों में रखी निधियों की जमानत पर विदेशी मुद्रा ऋण प्रदान कर सकते हैं।
बी. प्राधिकृत व्यापारियों से इत्तर व्यक्तियों द्वारा उधार
पात्र निवासी संस्था अनुसूची-III में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर के उधारकर्ता को विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत ईसीएल प्रदान कर सकती है।
6. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारतीय रुपए में उधार:-
ए. प्राधिकृत व्यापारियों द्वारा उधार
प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी जुटा सकता है।
बी. प्राधिकृत व्यापारी से इतर व्यक्तियों द्वारा उधार
i) पात्र निवासी संस्थाएं अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी जुटा सकती हैं।
स्पष्टीकरण: भारत से बाहर निवास करने वाले किसी व्यक्ति को विनिर्दिष्ट समयावधि के अंदर पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से इक्विटी में परिवर्तनीय शेयरों को छोड़कर अप्रैल-2007 के 30 वें दिन को या इसके बाद अधिमानी शेयरों के निर्गम के माद्यम से और विनिर्दिष्ट समयावधि के अंदर पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से इक्विटी में परिवर्तनीय डिबेंचरों को छोड़कर जून 2007 के 7वें दिन परिवर्तनीय डिबेंचरों के निर्गम के जरिए उधार लेना, कर्ज समझा जाएगा और यह तदनुसार अनुसूची-I में उल्लिखित शर्तों के अनुसार होगा।
ii) भारत सरकार द्वारा यथापरिभाषित पात्र निवासी संस्थाएं पारदेशीय (ओवरसीज़) बहुपक्षीय वित्तीय संस्थआओं/ अंतरराष्ट्रीय विकास वित्तीय संस्थाओं से उधार ले सकती हैं, जहां ऐसी संस्थाओं के निधि स्रोत विदेशों में जारी रुपया मूल्यवर्गांकित बॉन्ड हैं या घरेलू रूप से जुटाए जाने वाले संसाधन अथवा भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कोई अन्य स्रोत है।
iii) अनुसूची-II में निहित प्रावधानों के अनुसार डीजीएफटी की मौजूदा विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत अनुमत पूंजीगत या गैर-पूंजीगत माल के आयात के लिए आयातकों द्वारा भारतीय रुपये में भारत के बाहर से व्यापार ऋण जुटाया जा सकता है।
iv) प्रतिभूति के अंतरण अथवा निर्गम के परिणामस्वरूप होने वाले कर्ज-रूपी विदेशी निवेश, जो ऊपर उल्लिखित उप-विनियमों में शामिल नहीं है, के मामले में दिनांक 7 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं.फेमा.20 (आर)/ 2017-आरबी के मार्फत अधिसूचित एवं समय-समय पर यथासंशोधित, विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2017 की शर्तों का अनुपालन किया जाना चाहिए।
v) यदि भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से जमाराशि स्वीकार की जाती है, अथवा दी जाती है, जिसमें ऐसे खातों में धारित धनराशियों की जमानत के समक्ष ऋण/ ओवरड्राफ्ट शामिल है, तो वे समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा. 5(आर)/2016-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) नियमावली, 2016 के अनुरूप होनी चाहिए।
vi) iii[भारत में निवासी एकल व्यक्ति, एनआरआई या ओसीआई कार्डधारक रिश्तेदार से निम्नलिखित शर्तों के अधीन आईएनआर में भारत में प्रयोग के लिए उधार ले सकता है:
(ए) ऋण की राशि या तो भारत के बाहर से आवक प्रेषण द्वारा या ऋणदाता के एनआरई / एनआरओ / एफसीएनआर (बी) / एसएनआरआर खाते में डेबिट करके प्राप्त की जानी चाहिए; और
(बी) उधार गैर-प्रत्यावर्तन आधार पर होगा अर्थात ब्याज का भुगतान और मूलधन की चुकौती केवल ऋणदाता के एनआरओ खाते में की जाएगी।]
vii) भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत स्थापित वित्तीय संस्थान आगे उधार देने के उद्देश्य से भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन से भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत उधार जुटा सकते हैं।
स्पष्टीकरण: ऐसे उधार जो ईसीबी के स्वरूप में हैं, वे अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अधीन होंगे।
7. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा रुपये में उधार देना
ए. प्राधिकृत व्यापारी द्वारा उधार देना
i) भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) किसी अनिवासी भारतीय / प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ध-धारक को उधारकर्ता की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए/ स्वयं के कारोबारी प्रयोजनों से/ भारत में रिहायशी आवास के अधिग्रहण/ भारत में मोटर वाहन के अधिग्रहण के लिए अथवा प्राधिकृत व्यापारी (एडी) के निदेशक बोर्ड द्वारा निर्धारित ऋण नीति के अनुसार तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के विवेकपूर्ण मानदंडों के अनुपालन में अन्य किसी प्रयोजन के लिए ऋण प्रदान कर सकते हैं। प्राधिकृत व्यापारी बैंक को सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित उद्देश्य के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।
ii) भारत के बाहर के बैंक द्वारा भारत में प्राधिकृत व्यापारी (एडी) के पास रखे गए रुपया खाते में ओवेरड्राफ्ट: कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी), रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्देशित ऐसी शर्तों के अधीन अपनी समुद्रपारीय शाखा अथवा भारत के बाहर के प्रतिनिधि अथवा मुख्य कार्यालय द्वारा उसके पास रखे गए रुपया खातों में से ऐसी राशि, जिसका मूल्य 5 बिलियन रुपये से अधिक नहीं है अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय निर्धारित कोई अन्य मूल्य की राशि के अस्थायी ओवेरड्राफ्ट की अनुमति दे सकते हैं।
iii) iv[भारत में कोई ए.डी. भारत से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति को ऐसा उधार दे सकता है, जिससे भारत से बाहर रहने वाला व्यक्ति सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करते हुए किए गए लेनदेन के निपटान के संबंध में मार्जिन भुगतान करता है, इस बारे में रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित निबंधन और शर्तें लागू होंगी।
स्पष्टीकरण: 'सरकारी प्रतिभूति' अभिव्यक्ति का वही आशय होगा जो सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 की धारा 2(एफ) में निर्धारित कया गया है और 'प्रतिभूतियों' शब्द का भी उसी के अनुसार अर्थ लिया जाएगा।]
iv) v[प्राधिकृत व्यापारी (एडी) बैंक, भारत के बाहर निवासी व्यक्तियों को जो कि भूटान, नेपाल या श्रीलंका के निवासी हैं, जिसमें इन क्षेत्राधिकारों के बैंक भी शामिल हैं, सीमा पार व्यापार लेनदेन के लिए भारतीय रुपये में उधार प्रदान कर सकते है।]
बी. प्राधिकृत व्यापारी से इतर व्यक्तियों द्वारा उधार देना
i) भारत में पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी अथवा भारत में पंजीकृत आवास वित्त संस्था अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई कोई अन्य वित्तीय संस्था, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन किसी अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक को आवास ऋण अथवा वाहन ऋण प्रदान कर सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।
ii) कोई भारतीय एंटीटी, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन अपने अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक कर्मचारी को स्टाफ कल्याण योजना के अंतर्गत भारतीय रुपये में ऋण प्रदान कर सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।
iii) कोई निवासी व्यक्ति, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत निर्धारित समग्र सीमा के भीतर अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक रिश्तेदार को रुपये में ऋण प्रदान कर सकता/ सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधियों का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।
vi[7-ए. भारत के बाहर रह रहे व्यक्तियों द्वारा उधार लिया जाना और ऋण दिया जाना:-
भारत से बाहर का निवासी कोई व्यक्ति धन उधार लेने अथवा ऋण देने के लिए रुपये में रेपो अथवा रिवर्स रेपो लेनदेन कर सकता है, जो कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथानिर्धारित शर्तों और निबंधनों के तहत होगा।
स्पष्टीकरण: रेपो का वही अर्थ रहेगा जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45यू(सी) में परिभाषित है, रिवर्स रेपो का वही अर्थ रहेगा जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 यू(डी) में परिभाषित है।]
8. उधारदाता/ उधारकर्ता की आवासीय स्थिति में हुए परिवर्तन की स्थिति में ऋण को जारी रखना:
i) कोई प्राधिकृत व्यापारी/ प्राधिकृत बैंक रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की गई शर्तों के अधीन कोई निवासी व्यक्ति, जो बाद में भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति बना है, को प्रदान किए गए ऋणों को जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं।
ii) यदि किसी निवासी व्यक्ति द्वारा अन्य निवासी व्यक्ति को ऋण प्रदान किया गया हो और उधरदाता बाद में अनिवासी हो जाता है तो निवासी उधारकर्ता द्वारा ऋण की चुकौती, उधारदाता के विकल्प पर रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए गए अनुसार भारत में कार्यरत बैंक में रखे गए उधारदाता के एनआरओ खाते में अथवा किसी अन्य खाते में जमा कर के की जानी चाहिए।
iii) यदि इन विनियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत में निवास करने वाले व्यक्ति को किसी अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक द्वारा ऋण दिया गया हो और उधारदाता बाद में निवासी बन जाता है, तो ऋण की चुकौती उधारदाता के विकल्प पर रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए गए अनुसार भारत में कार्यरत बैंक में रखे गए उधारदाता के नामित खाते में कि जाए।
iv) निवासी व्यक्ति को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की गई शर्तों तथा सीमाओं के अधीन भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति के रूप में पूर्व में विदेश में लिए गए ऋणों की चुकौती करने की अनुमति दी जाएगी।
9. पूर्व में लागू विनियमों के अंतर्गत लिए गए किसी भी उधार को अनुमत किए गए अनुसार चुकौती की नियत तारीख तक जारी रखा जा सकता है।
(डॉ. आदित्य गेहा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
फुट नोट:
मूल विनियमावली दिनांक [17 दिसम्बर 2018 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)/2018-आरबी] सा.का.नि. 1213(अ) द्वारा भारत सरकार के सरकारी राजपत्र के भाग II, खंड-3, उप-खंड(i) में प्रकाशित की गई थी, तत्पश्चात निम्नलिखित अधिसूचनाओं द्वारा संशोधित की गयी थी, अर्थात्;:
(i) भारत सरकार के सरकारी राजपत्र (असाधारण, भाग II - खंड 3, उप-खंड (i)) में, सा.का.नि 163(अ) दिनांक 27 फरवरी, 2019 द्वारा प्रकाशित [दिनांक 26 फरवरी, 2019 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)1/2019-आरबी];
(ii) भारत सरकार के सरकारी राजपत्र (असाधारण, भाग III - खंड 4) दिनांक 28 मई 2021 में दिनांक 24 मई, 2021 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)2/2021-आरबी द्वारा प्रकाशित;
(iii) भारत सरकार के सरकारी राजपत्र (असाधारण, भाग III - खंड 4) दिनांक 29 जुलाई 2022 में दिनांक 28 जुलाई, 2022 की अधिसूचना संख्या फेमा.3(R)(3)/2022-आरबी द्वारा प्रकाशित;
(iv) भारत सरकार के सरकारी राजपत्र (असाधारण, भाग III - खंड 4) दिनांक 09 अक्टूबर 2025 में दिनांक 06 अक्टूबर, 2025 की अधिसूचना संख्या फेमा.3(आर)(4)/2025-आरबी द्वारा प्रकाशित; और
(v) भारत सरकार के सरकारी राजपत्र (असाधारण, भाग III - खंड 4) दिनांक 16 फरवरी 2026 में दिनांक 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या फेमा.3(आर)(5)/2026-RB द्वारा प्रकाशित।
vii[अनुसूची-I
[विनियम 4(ए)(iv), 4(बी)(i), 4(बी)(iv), 6(ए), 6(बी)(i), 6(बी)(vii)] देखें]
बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) फ्रेमवर्क
1. योग्य उधारकर्ता –
(1) भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति (एकल व्यक्ति के अलावा) जो किसी केंद्रीय या राज्य अधिनियम के तहत निगमित, स्थापित या पंजीकृत है, पात्र उधारकर्ता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसे व्यक्ति को लागू अधिनियमों के अनुसार ईसीबी की अनुमति हो।
(2) कोई भी पात्र उधारकर्ता, जो पुनर्गठन योजना या कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के अधीन है, केवल तभी ईसीबी जुटा सकता है जब पुनर्गठन या समाधान योजना के तहत विशेष रूप से अनुमति दी गई हो।
(3) कोई पात्र उधारकर्ता जिसके विरुद्ध अधिनियम के अंतर्गत जारी किसी नियम, विनियम या निदेश के उल्लंघन के लिए किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा कोई जांच, न्यायनिर्णयन या अपील लंबित है, लंबित जांच, न्यायनिर्णयन या अपील के बावजूद और ऐसी जांच, न्यायनिर्णयन या अपील के परिणाम पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ईसीबी जुटा सकता है। तथापि, उधारकर्ता को लंबित जांच, न्यायनिर्णयन या अपील के बारे में जानकारी 'फॉर्म ईसीबी 1' (या यदि कोई मौजूदा ईसीबी है तो 'संशोधित फॉर्म ईसीबी 1') के अंतर्गत देनी होगी।
2. मान्यता प्राप्त उधारदाता – एक पात्र उधारकर्ता निम्नलिखित से ईसीबी जुटा सकता है –
(ए) भारत के बाहर रहने वाला व्यक्ति;
(बी) ऐसी संस्था जिसका ऋण देने का व्यवसाय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित होता है उसकी भारत के बाहर स्थित शाखा; और
(सी) आईएफएससी में स्थापित कोई वित्तीय संस्था या उसकी शाखा।
स्पष्टीकरण: इस पैराग्राफ के प्रयोजन के लिए, वित्तीय संस्था का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र) विनियमावली, 2015 के तहत इसे दिया गया है।
3. उधार की मुद्रा –
(1) एक पात्र उधारकर्ता विदेशी मुद्रा (एफसीवाई) या भारतीय रुपये (आईएनआर) में मूल्यवर्गित ईसीबी जुटा सकता है।
(2) ईसीबी की मुद्रा को एक विदेशी मुद्रा से दूसरी विदेशी मुद्रा में, किसी विदेशी मुद्रा से भारतीय रुपये में और भारतीय रुपये से किसी विदेशी मुद्रा में बदला जा सकता है।
(3) मुद्रा परिवर्तन उस विनिमय दर पर होगा जो ऐसे परिवर्तन के लिए करार की तिथि पर प्रचलित है या ऐसी विनिमय दर पर होगा जिसके परिणामस्वरूप करार की तिथि पर प्रचलित विनिमय दर का उपयोग करके प्राप्त देयता से अधिक देयता नहीं होगी।
4. उधार लेने के प्रकार –
(1) एक पात्र उधारकर्ता किसी भी प्रकार की वाणिज्यिक उधार व्यवस्था में ईसीबी जुटा सकता है जिसमें सहमत ब्याज का भुगतान, जिसे किसी भी नाम से बुलाया जाता है, और मूलधन की चुकौती शामिल हो।
स्पष्टीकरण: ईसीबी में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉण्ड (एफसीसीबी) और विदेशी मुद्रा विनिमेय बॉण्ड (एफसीईबी) जारी करके उधार लेना शामिल है।
(2) भारत के बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति से 30 अप्रैल 2007 को या उसके बाद प्राप्त निधि, जो अधिमान शेयरों या डिबेंचरों, जो पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से इक्विटी शेयरों में परिवर्तनीय नहीं हैं, के निर्गमन के बदले में प्राप्त हुआ हो, उसे ईसीबी माना जाएगा।
(3) पात्र उधारकर्ता द्वारा जुटाई गई निम्नलिखित निधियों को ईसीबी नहीं माना जाएगा:
(ए) इन विनियमों के अनुसार जुटाया गया, तीन वर्ष तक की मूल परिपक्वता अवधि वाला व्यापारिक उधार;
(बी) इन विनियमों तथा विदेशी मुद्रा प्रबंधन (माल और सेवाओं का निर्यात) विनियम, 2015 के अनुसार प्राप्त निर्यात अग्रिम;
(सी) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (ऋण लिखत) विनियमावली, 2019 के तहत प्राप्त निवेश;
(डी) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियम, 2019 के तहत जारी संपरिवर्तनीय नोटों के माध्यम से प्राप्त निवेश; और
(ई) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियम, 2019 के अनुसार ऋण लिखत के माध्यम से विदेशी उद्यम पूंजी निवेशक (एफवीसीआई) से प्राप्त निवेश।
5. उधार लेने की सीमा –
(1) एक पात्र उधारकर्ता निम्नलिखित में से जो भी अधिक हो, उस सीमा तक ईसीबी जुटा सकता है: (ए) 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बकाया ईसीबी; या (बी) उधारकर्ता के अंतिम लेखापरीक्षित एकल तुलन-पत्र के अनुसार निवल मालियत के 300 प्रतिशत तक कुल बकाया उधार (बाह्य और घरेलू)।
स्पष्टीकरण: बकाया उधार में गैर-निधि आधारित ऋण और अनिवार्य रूप से इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों के निर्गमन के माध्यम से जुटाई गई निधियाँ शामिल नहीं होगी।
(2) उधार सीमा के अनुपालन की जांच करते समय प्रस्तावित ईसीबी (पुनर्वित्त के लिए ईसीबी के अलावा) को भी सम्मिलित किया जाएगा।
(3) उप-पैराग्राफ (1) में निर्दिष्ट उधार सीमा उन पात्र उधारकर्ताओं पर लागू नहीं होगी जो वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों द्वारा विनियमित हैं।
6. परिपक्वता–
(1) एक पात्र उधारकर्ता तीन वर्ष की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि (एमएएमपी) के साथ ईसीबी जुटाएगा।
स्पष्टीकरण: ईसीबी के लिए औसत परिपक्वता अवधि की गणना इन विनियमों के परिशिष्ट I में दर्शाए गए तरीके से की जाएगी।
(2) विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत पात्र उधारकर्ता एक वर्ष और तीन वर्ष के बीच औसत परिपक्वता अवधि के साथ ईसीबी भी जुटा सकता है, इस शर्त के अधीन कि ऐसे ईसीबी की बकाया राशि 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक न हो।
(3) कॉल और पुट ऑप्शन, यदि कोई हो, एमएएमपी के पूरा होने से पहले प्रयोक्तव्य नहीं होंगे।
(4) उप-पैराग्राफ (1) और (2) में निर्दिष्ट एमएएमपी को निम्नलिखित मामलों में पूरा करना आवश्यक नहीं होगा –
(ए) अधिनियम के तहत जारी नियमों और विनियमों के अनुसार ईसीबी (एफसीसीबी और एफसीईबी सहित) का गैर-ऋण लिखत में परिवर्तन;
(बी) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियम, 2019 के तहत जारी गैर-ऋण लिखतों से प्राप्तियों का उपयोग करके ईसीबी का प्रत्यावर्तन आधार पर पुनर्भुगतान, इस शर्त के अधीन कि प्राप्तियां ईसीबी के आहरण के बाद हों;
(सी) इन विनियमों के अनुसार ईसीबी के पुनर्वित्तपोषण;
(डी) उधारदाता द्वारा कर्ज का अधित्याग; और
(ई) अगर ईसीबी का पुनर्भुगतान उधारदाता या उधारकर्ता द्वारा कॉर्पोरेट कार्रवाइयां जैसे कि बंदी, विलय, विलगाव, व्यवस्था, नियंत्रण का अधिग्रहण, समामेलन, समाधान या परिसमापन के लिए आवश्यक हो।
7. उधार लेने की लागत –
(1) उधार लेने की लागत प्रचलित बाजार स्थितियों के अनुरूप होगी।
(2) तीन वर्षों से कम की औसत परिपक्वता अवधि वाले पात्र ईसीबी के मामले में, उधार लेने की लागत इस विनियमावली के तहत व्यापार ऋण के लिए विनिर्दिष्ट लागत सीमा के अनुपालन में होगी। निश्चित दर वाले ऋणों के मामले में, संबंधित स्वैप का फ्लोटिंग रेट तथा स्प्रेड, सीलिंग से ज़्यादा नहीं होगा।
8. अन्य लागत – प्रसंविदा के उल्लंघन या चूक के लिए लागू होने वाले चुकौती प्रभार या दंडात्मक ब्याज, यदि कोई हो, तो प्रचलित बाजार स्थितियों के अनुरूप होंगे।
9. स्वतंत्र संव्यवहार का सिद्धांत – संबंधित पक्ष से प्राप्त ईसीबी का कार्य निष्पक्ष स्वतंत्र संव्यवहार के सिद्धांत के आधार पर किया जाएगा।
10. ईसीबी राशि की प्राप्ति –
(1) एक पात्र उधारकर्ता नामित एडी श्रेणी I बैंक के माध्यम से रिज़र्व बैंक से ऋण पंजीकरण संख्या (एलआरएन) लेने के बाद ही ईसीबी कि राशि प्राप्त कर सकेगा।
(2) भारत में अनुमत आईएनआर व्यय के लिए उपयोग की जाने वाली ईसीबी निधियां, प्राप्ति तिथि से अगले महीने के अंत तक नामित एडी श्रेणी I बैंक में भारत में रखे गए आईएनआर खाते में जमा की जाए। उपयोग लंबित होने पर, निधियों को नामित एडी श्रेणी I बैंक में एक वर्ष तक की अवधि के लिए भार-रहित सावधि जमा में निवेश किया जा सकता है।
(3) अनुमत विदेशी मुद्रा व्यय के लिए उपयोग की जाने वाली ईसीबी निधि को विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 के अनुसार भारत में नामित एडी श्रेणी I बैंक में रखे गए एफसीवाई खाते में या भारत के बाहर रखे गए एफसीवाई खाते में जमा किया जाए। उपयोग लंबित होने पर, निधियों को भारत के बाहर एक वर्ष तक की अवधि के भार-रहित सावधि जमा में या एक वर्ष तक के मूल परिपक्वता वाले भार-रहित ऋण लिखत में निवेश किया जा सकता है।
11. जमानत–
(1) ईसीबी को निम्नलिखित द्वारा जमानत किया जा सकता है –
(ए) अनिवासी ऋणदाता या जमानत न्यासी के पक्ष में अचल संपत्तियों, मूर्त चल आस्तियां, वित्तीय आस्तियां और अमूर्त आस्तियां (बौद्धिक संपदा अधिकारों सहित) पर प्रभार सृजन करके; और
(बी) विदेशी मुद्रा प्रबंध (गारंटी) विनियमावली, 2000 के अनुसार ऋणदाता या जमानत न्यासी के पक्ष में गारंटी जारी करके।
(2) ईसीबी प्राप्त करना निम्नलिखित नियमों और शर्तों के अधीन होगा कि:
(ए) उधार करार में एक खंड है जिसमें उधारकर्ता को ऐसी जमानत प्रदान करने की आवश्यकता होती है;
(बी) किसी ऋणग्रस्त आस्ति पर प्रभार सृजित करने से पहले भारत में मौजूदा ऋणदाता (ऋणदाताओं) से, जैसा भी लागू हो, ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ प्राप्त किया जाएगा; और
(सी) किसी परिसंपत्ति पर प्रभार का सृजन, पारदेशीय ऋणदाता/ जमानत न्यासी द्वारा भारत में आस्ति के अधिग्रहण करने की अनुमति के रूप में नहीं माना जाएगा।
(3) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाएं किसी भी प्रकार की गारंटी प्रदान (जारी) नहीं करेंगी।
(4) जमानत के प्रवर्तन/ सक्रियण की स्थिति में -
(ए) ऋणदाता का दावा ईसीबी पर बकाया दावे तक ही सीमित रहेगा;
(बी) किसी भी आस्ति / संपत्ति का अंतरण अधिनियम या उसके तहत जारी की गई नियमावली, विनियमावली या निदेशों के अनुपालन में होगा। भारत में मौजूदा ऋणदाता (ऋणदाताओं) (यदि कोई हो) से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' प्राप्त करने के बाद ऋणग्रस्त चल आस्तियों को देश से बाहर ले जाया जा सकता है; और
(सी) जहां अधिनियम या नियमावली या विनियमावली या उसके तहत जारी किए गए निदेशों के तहत ऋणदाता द्वारा आस्ति / संपत्ति का अधिग्रहण अनुमत नहीं है वहां भारत में निवासी व्यक्ति को ऐसी संपत्ति के अंतरण से प्राप्त विक्रय आगम को ईसीबी के बकाया दावे को समाप्त करने के लिए ऋणदाता को प्रेषित किया जा सकता है।
12. पुनर्वित्तपोषण - पात्र उधारकर्ता मौजूदा ईसीबी को आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से नए ईसीबी द्वारा पुनर्वित्त कर सकता है, बशर्ते कि पुनर्वित्त के परिणामस्वरूप मूल उधार पर लागू एमएएमपी आवश्यकता को पूरा करने में विफल न हो (एकाधिक उधार के मामले में भारित बकाया परिपक्वता)।
13. ईसीबी का गैर-ऋण लिखत में संपरिवर्तन –
(1) ईसीबी (जिनमें वे भी शामिल हैं जो परिपक्व हो चुके हैं लेकिन जिनका भुगतान नहीं हुआ है) को विदेशी मुद्रा प्रबंध (गैर-ऋण लिखत) नियम, 2019 के अनुपालन के अधीन गैर-ऋण लिखत में परिवर्तित किया जा सकता है।
(2) ईसीबी का गैर-ऋण लिखत में परिवर्तन निम्नलिखित नियमों और शर्तों के अधीन होगा:
(ए) इस प्रकार के संपरिवर्तन को सक्षम करने के लिए ऋणदाता को कोई अतिरिक्त लागत देय नहीं होगी;
(बी) ऋणदाता की सहमति प्राप्त है; और
(सी) अन्य ऋणदाताओं की सहमति, यदि कोई हो, उपलब्ध है या कम से कम संपरिवर्तन के संबंध में जानकारी अन्य ऋणदाताओं के साथ साझा की गई है।
(3) प्रूडेंशियल विनियम, जिसमें पुनर्गठन से संबन्धित विनियम भी शामिल है, तब भी लागू होंगे जब उधारकर्ता ने रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित किसी इकाई (जिसमें उसकी विदेशी शाखा या सहायक कंपनी शामिल है) से ऋण सुविधाएँ प्राप्त की है।
(4) गैर-ऋण लिखतों में परिवर्तन के लिए पात्र ईसीबी देयता का निर्धारण संबंधित पक्षों के बीच परिवर्तन के करार की तिथि पर प्रचलित विनिमय दर के आधार पर या ऐसी विनिमय दर पर किया जाएगा जिसके परिणामस्वरूप करार की तिथि पर प्रचलित विनिमय दर का उपयोग करके प्राप्त देयता से अधिक देयता न हो।
14. मानदण्ड, नियम और शर्तों में बदलाव –
(1) ईसीबी को शासित करने वाले मापदंडों, नियमों और शर्तों में परिवर्तन ऋणदाता की सहमति और इस अनुसूची के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन हैं।
(2) उधार की अवधि के विस्तार की स्थिति में, यदि उधारकर्ता ने रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित किसी इकाई (जिसमें उसकी विदेशी शाखा या सहायक कंपनी शामिल है) से ऋण सुविधाएँ प्राप्त की हैं तब भी पुनर्गठन सहित प्रूडेंशियल विनियम लागू होंगे।
(3) नामित एडी श्रेणी I बैंक का परिवर्तन मौजूदा नामित एडी श्रेणी I बैंक से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ प्राप्त करने के अधीन होगा।
15. ऋण कि चुकौती –
(1) ईसीबी फ्रेमवर्क के अनुपालन में किए गए ईसीबी के संबंध में मूलधन, ब्याज और अन्य प्रभार चुकाया जा सकता है।
(2) ऋणदाता के एनआरओ खाते से प्राप्त ईसीबी के मामले में चुकौती केवल एनआरओ खाते में ही जमा किया जाए।
16. रिपोर्टिंग –
(1) पात्र उधारकर्ता रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित प्रारूप में नामित एडी श्रेणी I बैंक के माध्यम से निम्नलिखित आवेदन/विवरणी प्रस्तुत करेंगे:
(ए) ईसीबी का ब्यौरा प्रदान करने और एलआरएन प्राप्त करने के लिए 'फॉर्म ईसीबी 1';
(बी) ‘फॉर्म ईसीबी 1’ में पूर्व में रिपोर्ट किए गए ईसीबी मापदंडों में किसी भी परिवर्तन की रिपोर्टिंग के लिए ‘संशोधित फॉर्म ईसीबी 1’, उस महीने के अंत से सात कैलेंडर दिनों के भीतर जिसमें ऐसा परिवर्तन प्रभावी हुआ था; और
स्पष्टीकरण: 'फॉर्म ईसीबी 1' में पहले रिपोर्ट की गई किसी भी अन्य जानकारी में बदलाव को सूचित करने के लिए 'संशोधित फॉर्म ईसीबी 1' भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
(सी) ईसीबी निधि प्राप्ति और ऋण चुकौती की रिपोर्टिंग के लिए 'फॉर्म ईसीबी 2', उस महीने के अंत से सात कैलेंडर दिनों के भीतर जिसमें nइदधि प्राप्ति या ऋण चुकौती की गई थी।
स्पष्टीकरण: एलआरएन के तहत बकाया उधार में परिवर्तन करने वाली किसी भी घटना या लेनदेन की रिपोर्टिंग 'फॉर्म ईसीबी 2' में की जाएगी।
(2) रिपोर्टिंग समय-सीमा का पालन न करने की स्थिति में, उधारकर्ता रिपोर्टिंग पूरी करने के बाद इस संबंध में रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार विलंब प्रस्तुतीकरण शुल्क का भुगतान कर सकता है।
(3) नामित एडी श्रेणी I बैंक पात्र उधारकर्ता से प्राप्त आवेदन/ विवरणी को उचित प्रमाणन के साथ रिज़र्व बैंक को इस उद्देश्य के लिए सूचित कि गई विधि और प्रारूप में प्रस्तुत करेगा।
(4) यदि कोई पात्र उधारकर्ता 'फॉर्म ईसीबी 1'/'संशोधित फॉर्म ईसीबी 1' में अधिनियम के तहत जारी किसी भी नियम या विनियमन या निदेश के उल्लंघन के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा लंबित जांच या न्यायनिर्णयन या अपील की रिपोर्टिंग करता है तो नामित एडी श्रेणी I बैंक संबंधित एजेंसियों को उधार का पूरा ब्यौरा प्रदान करेगा।
(5) नामित एडी श्रेणी I बैंक उधारकर्ता के अनुरोध पर आवंटित एलआरएन को रद्द करने के लिए रिज़र्व बैंक से संपर्क कर सकते हैं, बशर्ते कि कोई आहरण न हुआ हो।
(6) सक्रिय एलआरएन वाले किसी भी उधारकर्ता को एक लापता उधारकर्ता के रूप में माना जाएगा –
(ए) यदि उधारकर्ता अंतिम रिपोर्ट किए गए ‘फॉर्म ईसीबी 1’ के अनुसार आहरण या ऋण चुकौती कि जाने वाले तिमाही के बाद लगातार चार या अधिक तिमाहियों तक विनिर्दिष्ट विवरणी में से कोई भी प्रस्तुत करने में विफल रहता है; और
(बी) नामित एडी श्रेणी I बैंक, चार तिमाहियों की ऐसी अवधि के पूरा होने के बाद, संतुष्ट है कि:
i. बैंक द्वारा किए गए प्रलेखित संचार के कई प्रयासों के बावजूद न तो उधारकर्ता और न ही उसके लेखा परीक्षक/ निदेशक/ प्रवर्तक से संपर्क हो सका और न उन्होंने कोई प्रतिक्रिया दी; और
ii. बैंक के पास उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उधारकर्ता, पंजीकृत कार्यालय के पते पर कार्यरत नहीं पाया गया।
(7) यदि कोई उधारकर्ता आहरण के बाद लापता हो जाता है, तो नामित एडी श्रेणी I बैंक इसकी सूचना रिज़र्व बैंक और प्रवर्तन निदेशालय दोनों को दें।]
अनुसूची II
[देखें विनियम 4(बी)(ii), तथा 6(बी)(iii)]
आयात के लिए व्यापारिक ऋण
आयातक इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से व्यापारिक उधार जुटा सकते हैं।
1. प्रयोजन
इस प्रकार के ऋण रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन डीजीएफ़टी की विद्यमान विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत अनुमत किए गए अनुसार गैर-पूंजीगत तथा पूंजीगत वस्तुओं के आयात के प्रयोजन से तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) के भीतर अथवा किसी भिन्न एसईज़ेड से गैर-पूंजीगत तथा पूंजीगत वस्तुओं की खरीद के लिए जुटाए जा सकते हैं।
स्पष्टीकरण: एसईज़ेड का तात्पर्य एसईज़ेड अधिनियम, 2005 में दी गई परिभाषा से है।
2. उधार लेने की मुद्रा
व्यापारिक ऋण किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा तथा भारतीय रुपये में अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्दिष्ट की गई किसी अन्य मुद्रा में जुटाया जा सकता है।
3. उधार की राशि
आयातक पूंजीगत तथा गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए प्रति आयात लेनदेन 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की समतुल्य राशि अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित की गई कोई अन्य राशि तक व्यापारिक उधार जुटा सकते हैं।
4. अवधि
व्यापारिक ऋण की अवधि जिसकी गणना पोतलदान की तारीख से की जाएगी, निम्नानुसार होगी:
i. गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए- किन्ही वस्तुओं के आयात के लिए / किसी विशिष्ट क्षेत्र द्वारा आयात के लिए परिचालन चक्र से संलग्न तथा एक वर्ष की अधिकतम अवधि, अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि।
ii. पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए: तीन वर्ष की अधिकतम अवधि अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि।
5. मान्यताप्राप्त उधारदाता
भारत में पारदेशीय (ओवरसीज़) आपूर्तिकर्ता, बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाएं, विदेशी इक्विटि धारक तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्रों (आईएफ़एससी) में वित्तीय संस्थाएं अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित की गई कोई अन्य एंटीटी।
6. लागत:
i. विदेशी मुद्रा में व्यापारिक उधार के लिए 6 महीने के लिबोर के बेंचमार्क अथवा संबंधित मुद्रा के लिए यथालागू बेंचमार्क से अतिरिक्त अधिकतम स्प्रेड होगा 250 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार।
ii. रुपये में मूल्यवर्गीकृत व्यापारिक ऋण के लिए समग्र लागत प्रचलित बाज़ार परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए अथवा वह रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार हो।
7. जमानत तथा गारंटी
इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले उधारकर्ता रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार इन विनियमों के तहत अथवा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए किसी अन्य विनियम के अनुसार उधारदाता/ आपूर्तिकर्ता को जमानत प्रदान कर सकते हैं। उधारकर्ता, उधार लेने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन जमानत के रूप में कॉर्पोरेट तथा/ अथवा व्यक्तिगत गारंटी भी प्रदान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एडी श्रेणी-I बैंकों को समुद्रपारीय आपूर्तिकर्ता, बैंक तथा वित्तीय संस्था के पक्ष में बैंक गारंटी जारी करने की अनुमति है लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधारभूत (अंडरलाइंग) आयात/ व्यापारिक ऋण, मौजूदा मानदंडों का अनुपालन करता है।
8. रिपोर्टिंग संबंधी अपेक्षाएँ
रिपोर्टिंग संबंधी अपेक्षा तथा क्रियाविधि रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार होगी।
अनुसूची III
[देखें विनियम 5(ए)(i), तथा 5(बी)]
भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के उधारकर्ताओं को उधार देना
पात्र संस्थाएं इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर के उधारकर्ताओं को बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल) प्रदान कर सकते हैं।
1. भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी(एडी) समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2004 के अनुसार किसी विदेशी संस्था, जिसमें किसी भारतीय संस्था ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है, को विदेशी मुद्रा में बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल) प्रदान कर सकता है।
2. भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएँ भारत के बाहर अपने बैंकिंग कारोबार के सामान्य क्रम में विदेशी मुद्रा ऋण प्रदान कर सकते हैं।
3. समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं. फेमा. 120/ आरबी- 2004 के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) नियमावली, 2004 के अंतर्गत कोई पात्र संस्था किसी विदेशी संस्था, जिसमें उसने उक्त विनियमों के अनुसार प्रत्यक्ष निवेश किया है, को विदेशी मुद्रा में उधार दे सकती है।
4. भारत में निवास करने वाला कोई व्यक्ति समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से निर्धारित की गई शर्तों के अधीन अपने समुद्रपारीय आयातक ग्राहक को व्यापार से संबंधित प्रयोजनों से अपने ईईएफ़सी खाते में धारित निधियों में से विदेशी मुद्रा में उधार दे सकता है।
5. भारतीय कंपनियाँ अपनी भारत के बाहर की शाखाओं के कर्मचारियों को व्यक्तिगत प्रयोजनों से विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान कर सकती हैं बशर्ते व्यक्तिगत प्रयोजनों से प्रदान किया गया ऋण उधारदाता की स्टाफ कल्याण योजना / ऋण नियमावली तथा भारत तथा विदेश में निवासी स्टाफ पर यथालागू अन्य शर्तों के अनुसार होगा।
viii[अनुबंध I
[अनुसूची I के उप-पैराग्राफ 6(1) देखें]
औसत परिपक्वता अवधि की गणना – उदाहरण
यह मानते हुए कि 2 मिलियन अमरीकी डॉलर की ईसीबी राशि का लाभ उठाने और नीचे दी गई अनुसूची के अनुसार चुकौती करने का प्रस्ताव है, तो ऐसी ईसीबी की औसत परिपक्वता अवधि की गणना निम्नलिखित तरीके से की जाएगी:
आहरण/चुकौती की तिथि
(MM/DD/YYYY) |
आहरण |
चुकौती |
शेष |
दिनों की संख्या** |
उत्पाद =
(कॉलम 4 * कॉलम 5) /
(ऋण राशि*
360) |
| कॉलम 1 |
कॉलम 2 |
कॉलम 3 |
कॉलम 4 |
कॉलम 5 |
कॉलम 6 |
| 05/11/2007 |
0.75 |
|
0.75 |
24 |
0.0250 |
| 06/05/2007 |
0.50 |
|
1.25 |
85 |
0.1476 |
| 08/31/2007 |
0.75 |
|
2.00 |
477 |
1.3250 |
| 12/27/2008 |
|
0.20 |
1.80 |
180 |
0.4500 |
| 06/27/2009 |
|
0.25 |
1.55 |
180 |
0.3875 |
| 12/27/2009 |
|
0.25 |
1.30 |
180 |
0.3250 |
| 06/27/2010 |
|
0.30 |
1.00 |
180 |
0.2500 |
| 12/27/2010 |
|
0.25 |
0.75 |
180 |
0.1875 |
| 06/27/2011 |
|
0.25 |
0.50 |
180 |
0.1250 |
| 12/27/2011 |
|
0.25 |
0.25 |
180 |
0.0625 |
| 06/27/2012 |
|
0.25 |
0.00 |
|
|
| औसत परिपक्वता अवधि = (कॉलम 6 का योग) |
3.2851 |
| ** गणना = दिन360 (पहली तिथि, दूसरी तिथि, 360)] |
एंड नोट:
i 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या FEMA 3(R)(5)/2026-आरबी के माध्यम से 16 फरवरी, 2026 से प्रतिस्थापित किया गया है। प्रतिस्थापन से पहले, शब्द इस प्रकार थे:
“2. परिभाषाएँ
इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:
i) "अधिनियम" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) से है;
ii) "प्राधिकृत व्यापारी (एडी)" का तात्पर्य अधिनियम की धारा-10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किये गए व्यक्ति से है;
iii) “ईईएफ़सी खाता”, “आरएफ़सी खाता” के अर्थ क्रमशः वहीं होंगे, जो समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 में उन्हें दिए गए हैं;
iv) “बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)” अर्थात-रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से, निर्धारित किए गए ढांचे के अनुसार पात्र निवासी संस्था द्वारा भारत के बाहर से लिया हुआ उधार;
v) “बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल)” का अर्थ रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से, निर्धारित किए गए ढांचे के अनुसार भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के उधारकर्ता को उधार देना;
vi) “विदेशी मुद्रा” का अर्थ वही होगा जो अधिनियम में दिया गया है;
vii) “भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएँ/ अनुषंगी कंपनियाँ” का अर्थ है बैंककारी विनियमन अधिनियम,1949 के अनुसार विदेश में स्थापित संस्थाएं;
viii) “प्राधिकृत बैंक”, “अनिवासी भारतीय(एनआरआई)”, “विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) खाता(एफ़सीएनआर)(बी)”, “अनिवासी साधारण(एनआरओ) खाता”, तथा “अनिवासी बाह्य (एनआरई) खाता” के वही अर्थ होंगे जो उन्हें समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा (जमा) विनियमावली, 2016 में क्रमशः दिए गए हैं;
ix) “आवास वित्त संस्था” तथा “राष्ट्रीय आवास बैंक” का अर्थ वही होगा जो उन्हें समय-समय पर यथासंशोधित राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 में दिया गया है;
x) “भारतीय संस्था (एंटीटी)” का अर्थ समय-समय पर यथासंशोधित कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भारत में निगमित कंपनी अथवा समय-समय पर यथासंशोधित सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत भारत में निर्मित तथा पंजीकृत की गई कोई सीमित देयता भागीदारी है।
xi) “प्रवासी भारतीय नागरिक (ओ.सी.आई.)” कार्ड-धारक का अर्थ वही होगा जो समय-समय पर यथासंशोधित नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7(ए) में उसे दिया गया है;
xii) “रियल इस्टेट गतिविधि” में ऐसी कोई भी गतिविधि, जिसमें अपने स्वामित्ववाली अथवा लीज़ पर ली हुई संपत्ति की खरीद, बिक्री तथा वाणिज्यिक एवं आवासीय सम्पत्तियों अथवा जमीन को किराए पर देना शामिल है तथा रियल इस्टेट की खरीद, बिक्री, उसे किराए पर देना अथवा उसके प्रबंधन हेतु मध्यस्थता के लिए शुल्क अथवा करार आधार पर किसी एजेंट को सौंपने संबंधी गतिविधियां भी शामिल हैं। तथापि, इसमें एकीकृत टाउनशिप का विकास, नयी परियोजना/ आधुनिकीकरण अथवा मौजूदा इकाइयों के विस्तार हेतु औद्योगिक भूमि की खरीद / दीर्घकालिक लीज़िंग अथवा समय –समय पर संशोधित/ अद्यतन की गई अधिसूचना एफ़. सं. 13/06/2009-आईएनएफ़ के माध्यम से भारत सरकार द्वारा अनुमोदित इन्फ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्र की सुसंगत मास्टर सूची में दिये गए “इनफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्र” के अंतर्गत आनेवाली कोई भी गतिविधि शामिल नहीं होगी;
xiii) “रिश्तेदार” का अर्थ वही होगा, जो समय-समय पर यथासंशोधित कंपनी अधिनियम, 2013 में दिया गया है;
xiv) “प्रतिबंधित अंतिम उपयोग” का तात्पर्य ऐसे अंतिम उपयोग से है, जहां उधार ली गई निधियों का विनियोजन नहीं किया जा सकता है और उसमें निम्नलिखित शामिल होंगे:
ए) चिट फंड या निधि कंपनी के कारोबार में;
बी) मार्जिन ट्रेडिंग और डेरिवेटिव सहित पूंजी बाजार में निवेश;
सी) कृषि अथवा वृक्षारोपण गतिविधियां;
डी) रियल इस्टेट गतिविधियों या फार्म-हाउसों का निर्माण; तथा
ई) हस्तांतरनीय विकास सत्वाधिकार (टीडीआर) में व्यापार, जहां टीडीआर का अर्थ वही होगा जो उसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अनुमेय पूंजी खातेगत लेनदेन) विनियमावली, 2015 में दिया गया है।
xv) “अनुसूची” का अर्थ इस विनियमावली की अनुसूची है;
xvi) “स्टार्ट-अप” अर्थात एक ऐसी संस्था, जो 17 फरवरी, 2016 को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी एवं समय समय पर यथा संशोधित/ अद्यतन की गई अधिसूचना सं.जी.एस.आर.180 (ई) में निर्धारित शर्तों का अनुपालन करती है;
xvii) "व्यापार ऋण" भारत सरकार के परामर्श से निर्धारित किए गए व्यापार ऋण ढांचे के अनुसार भारत में आयात के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ता, बैंक / वित्तीय संस्थान द्वारा प्रदान किए गए ऋण हैं;
स्पष्टीकरण: वित्त के स्रोत के आधार पर, इस तरह के व्यापार ऋण में आपूर्तिकर्ताओं के ऋण और खरीदारों के ऋण शामिल हैं। आपूर्तिकर्ता का ऋण विदेशी आपूर्तिकर्ता द्वारा भारत में आयात के लिए दिए गए ऋण से संबंधित है, जबकि खरीदारों का ऋण किसी विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान से आयातक द्वारा भारत में आयात के भुगतान हेतु की गई ऋण की व्यवस्था को संदर्भित करता है। यह आयात विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की मौजूदा विदेश व्यापार नीति के तहत अनुमत होना चाहिए।
xviii) इस विनियमावली में उपयोग किए गए किन्तु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों का अर्थ क्रमशः वही होगा, जो अधिनियम में उन्हें दिया गया है;”
ii 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या FEMA 3(R)(5)/2026-आरबी के माध्यम से 16 फरवरी 2026 से सम्मिलित किया गया।
iii 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या FEMA 3(R)(5)/2026-आरबी के माध्यम से 16 फरवरी, 2026 से प्रतिस्थापित किया गया है। प्रतिस्थापन से पहले, शब्द इस प्रकार थे:
“vi) भारत का निवासी कोई व्यक्ति जो भारत में निगमित कंपनी नहीं है, वह रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर भारत सरकार के परामर्श से विनिर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन एनआरआई/ भारत के बाहर के वे रिश्तेदार, जो ओसीआई कार्ड-धारक हैं, से भारतीय रुपये में उधार ले सकता है। उधारकर्ता को सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधियों का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोगों के लिए न हो।”
iv 24 मई 2021 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)(2)/2021-आरबी के माध्यम से 28 मई 2021 से सम्मिलित किया गया।
v 06 अक्तूबर 2025 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)(4)/2025-आरबी के माध्यम से 09 अक्तूबर 2025 से सम्मिलित किया गया।
vi 26 फरवरी 2019 की अधिसूचना संख्या फेमा 3(आर)(1)/2019-आरबी के माध्यम से 27 फरवरी 2019 से सम्मिलित किया गया।
vii 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या FEMA 3(R)(5)/2026-आरबी के माध्यम से 16 फरवरी, 2026 से प्रतिस्थापित किया गया है। प्रतिस्थापन से पहले, शब्द इस प्रकार थे:
“अनुसूची-I
[देखें विनियम 4(ए)(iv), 4(बी)(i), 4(बी)(iv), 6(ए), 6(बी)(i), 6 (बी) (vii)]
भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर से उधार
पात्र संस्थाएं इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) जुटा सकते हैं।
1. उधार की मुद्रा
ईसीबी किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा तथा भारतीय रुपये में अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर विनिर्दिष्ट की गई किसी अन्य मुद्रा में जुटाई जा सकती है।
2. प्रकार/स्वरूप
ईसीबी को रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श से निर्धारित किए गए स्वरूप में जुटाया जा सकता है। वर्तमान में ईसीबी में शामिल वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबैंचर जैसी कुछ संकर लिखतें, सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद विशिष्ट संकर लिखत विनियमों द्वारा शासित होंगी।
3. उधारकर्ताओं की पात्रता
स्टार्ट-अप्स सहित सभी संस्थाएं समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं. फेमा. 20(आर)/2017-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति के अंतरण अथवा निर्गम) नियमावली, 2017 के अनुसार स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। साथ ही, रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से, कुछ अन्य संस्थाएं/ क्षेत्र निर्दिष्ट कर सकता है, जो ईसीबी जुटाने के लिए पात्र हैं अथवा पात्रता के विद्यमान मानदंडों में संशोधन कर सकता है।
4. परिपक्वता
न्यूनतम औसत परिपक्वता 3 वर्ष की होगी। तथापि, रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से कुछ क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं द्वारा जुटाई गई ईसीबी अथवा किसी विशिष्ट राशि की ईसीबी, अथवा विशिष्ट अंतिम उपयोग अथवा कुछ मान्यताप्राप्त उधारदाताओं से उधार लेने के लिए न्यूनतम औसत परिपक्वता शर्त निर्धारित कर सकता है।
5. उधारदाता:
उधारदाता ईसीबी नीति में दिए गए अनुसार एफ़एटीएफ़ अथवा आईओएससीओ का अनुपालन करने वाले देश का निवासी होना चाहिए, ईसीबी के अंतरण पर भी यही शर्त लागू होगी। तथापि बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाएं, जहां भारत एक सदस्य देश है, को भी मान्यताप्राप्त उधारदाता समझा जाएगा। साथ ही रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर अनुसूची के अंतर्गत किसी अन्य उधारदाता/ उधारदाताओं के सेट को निर्दिष्ट करेगा अथवा विद्यमान प्रावधानों को संशोधित करेगा।
स्पष्टीकरण: भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं/ सहायक संस्थाओं को केवल विदेशी मुद्रा में जुटाए गए ईसीबी के लिए मान्यताप्राप्त उधारदाता के रूप में अनुमति दी गई है।
6. समग्र लागत
i. विदेशी मुद्रा में जुटाई गई ईसीबी के लिए 6 महीने के लिबोर के बेंचमार्क अथवा संबंधित मुद्रा के लिए यथा लागू बेंचमार्क से अतिरिक्त अधिकतम स्प्रेड 450 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार होगा।
ii. भारतीय रुपये में जुटाई गई ईसीबी के लिए अधिकतम स्प्रेड तदनुरूपी परिपक्वता वाली भारत सरकार की प्रतिभूतियों के प्रचलित प्रतिफल के अतिरिक्त 450 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार होगा।
7. अंतिम उपयोग
अनुसूची के अनुसरण में भारत के बाहर से जुटाए गए उधार की राशियों का उपयोग रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से, विनिर्दिष्ट की गई नकारात्मक अंतिम-उपयोग की सूची में शामिल गतिविधियों को छोड़कर अन्य सभी प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है।
8. उधार लेने की व्यक्तिगत सीमाएं
सभी पात्र उधारकर्ता/ उधारकर्ताओं की श्रेणियाँ प्रति वित्तीय वर्ष 750 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि तक ईसीबी जूटा सकते हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए यह राशि 3 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि तक सीमित रहेगी। तथापि रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर विशिष्ट क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं द्वारा अथवा विशिष्ट अंतिम उपयोग के लिए जुटाई गई ईसीबी के लिए उच्चतर सीमाएं निर्धारित कर सकता है। उक्त व्यक्तिगत सीमाएं रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर समीक्षा के अधीन होंगी।
8 ए: प्रति वित्त-वर्ष 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर अथवा उसकी समतुल्य राशि की सीमा को अस्थायी रूप से बढ़ाकर 1500 मिलियन अमेरिकी डॉलर अथवा उसकी समतुल्य राशि कर दिया गया है। यह रियायत दिनांक 31 दिसंबर 2022 तक जुटाई जाने वाली ईसीबी के लिए लागू होगी।
9. जमानत
इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले उधारकर्ता रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार इन विनियमों के तहत अथवा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए किसी अन्य विनियम के अनुसार उधारदाता/ आपूर्तिकर्ता को जमानत प्रदान कर सकते हैं। उधारकर्ता, उधार लेने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन जमानत के रूप में कॉर्पोरेट और/अथवा व्यक्तिगत गारंटी भी प्रदान कर सकते हैं। तथापि, रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित की गई विशिष्ट शर्तों को छोड़कर, बैंक, वित्तीय संस्थाएं तथा गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियाँ, इस अनुसूची के अंतर्गत अपने घटकों द्वारा लिए गए उधार के लिए उनकी ओर से पारदेशीय (ओवरसीज़) उधारदाता के पक्ष में किसी भी प्रकार की गारंटी प्रदान (जारी) नहीं करेंगे।
10. ऋण की राशि की विदेश में पार्किंग।
इस अनुसूची के अंतर्गत लिए गए उधार से प्राप्त निधियों को अनुमत अंतिम उपयोग के लिए उपयोग में लाए जाने तक रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार विदेश में अथवा भारत में पार्क किया जा सकता है।
11. ऋण का आहरण
इस अनुसूची के अंतर्गत उधार ली गई निधियों में से आहरण रिज़र्व बैंक द्वारा स्थापित प्रणाली के अनुसार रिज़र्व बैंक से अथवा प्राधिकृत व्यापारी(एडी) से ऋण पंजीकरण संख्या प्राप्त करने के बाद ही किया जाएगा। इसका अनुपालन नहीं करने पर उधारकर्ता को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट दंड का भुगतान करना पड़ सकता है।
बशर्ते यह कि उपर्युक्त के अनुसार दंड का भुगतान नहीं करने को उल्लंघन माना जाएगा तथा अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में दिए गए अनुसार कंपाउंडिंग अथवा न्याय निर्णयन के अधीन होगा।
12. रिपोर्टिंग
उधारकर्ता, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की गई रिपोर्टिंग क्रियाविधि का अनुपालन करेगा। इसका अनुपालन नहीं करने पर उधारकर्ता को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट दंड का भुगतान करना पड़ सकता है।
बशर्ते यह कि उपर्युक्त के अनुसार दंड का भुगतान नहीं करने को उल्लंघन माना जाएगा तथा अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में दिए गए अनुसार कंपाउंडिंग अथवा न्याय निर्णयन के अधीन होगा।
13. ऋण कि चुकौती
नामित प्राधिकृत व्यापारी (एडी) को इस अनुसूची के अंतर्गत उधार लेने संबंधी दिशानिर्देशों के अनुरूप मूल धन, ब्याज, तथा अन्य प्रभारों का विप्रेषण करने की सामान्य अनुमति होगी।
14. हेजिंग
रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर इस अनुसूची के अंतर्गत उधार लेने संबंधी हेजिंग अपेक्षाओं को निर्धारित करेगा।
15. ईसीबी जुटाने के लिए उपलब्ध मार्ग
सभी ईसीबी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जुटाई जा सकती हैं यदि वे इस अनुसूची के अंतर्गत निर्धारित मानदंडों के अनुरूप हैं और विनिर्दिष्ट रिपोर्टिंग शर्तों के अधीन हैं। सभी अन्य मामलों पर आरबीआई द्वारा अनुमोदन मार्ग के तहत विचार किया जाएगा।”
viii 09 फरवरी 2026 की अधिसूचना संख्या FEMA 3(R)(5)/2026-आरबी के माध्यम से 16 फरवरी 2026 से सम्मिलित किया गया। |