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मिन्ट स्ट्रीट मेमो (एमएसएम) समकालीन विषयों पर संक्षिप्त रिपोर्ट और विश्‍लेषण के रूप में दस्तावेजों की एक श्रृंखला है जिसे रिज़र्व बैंक और उन्नत वित्तीय अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (सीएएफआरएएल) के स्टाफ द्वारा तैयार किया जाता है अथवा बैंक के हाल के किसी प्रकाशन से लिया जाता है।

अगस्त 2017

विमुद्रीकरण और बैंक जमा वृद्धि

अध्ययन यह अनुमान लगाता है कि विमुद्रीकरण के बाद बैंक जमाराशियों में ‘आधिक्य’ वृद्धि 3.0-4.7 प्रतिशत बिंदुओं के दायरे में रही है। सांकेतिक मामलों में, इन अनुमानों का अभिप्राय जमाराशियों के आधिक्य से है जो विमुद्रीकरण के कारण बैंकिंग प्रणाली में ₹ 2.8-4.3 ट्रिलियन के दायरे में रही हैं। विशिष्ट प्रकार के खातों जो साधारणतया निम्न स्तरीय गतिविधि से चिह्नित होते हैं, में नकद जमाराशियों की असामान्य वृद्धि के सूक्ष्म-स्तरीय विश्लेषण भी निष्कर्षों में सहायता करता है। बैंक जमाराशियों में परिवर्तन से संबंधित ऐसे अभिलाभ, यदि टिकाऊ रहे, तो इनका बचतों के वित्तीयकरण के रूप में लाभदायक प्रभाव हो सकता है।

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अस्वीकरण - मिन्ट स्ट्रीट मेमो (एमएसएम) में व्यक्त विचार और राय लेखकों की होती है और आवश्यक नहीं है कि ये भारतीय रिज़र्व बैंक के विचार हों।


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