RBI/2026-27/395
DCM (NE) No.G-2/08.07.18/2026-27
01 अप्रैल 2026
अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी
सभी बैंक
महोदया/प्रिय महोदय,
मास्टर निदेश - बैंक नोटों और सिक्कों के विनिमय की सुविधा
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 28, 38, 39, 58(1) और 58(2)(थ) के साथ पठित बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35(ए) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक समय-समय पर नागरिकों को नोटों और सिक्कों के विनिमय की सुविधा के प्रावधान पर बैंकों को दिशानिर्देश/ अनुदेश/ निदेश जारी करता है।
2. बैंक नोटों और सिक्कों के विनिमय की सुविधा के संबंध में मौजूदा दिशानिर्देशों/ अनुदेशों/ निदेशों को समेकित और अद्यतित करते हुए मास्टर निदेश तैयार किया गया है, जो संलग्न है, ताकि बैंक इस विषय पर मौजूदा अनुदेशों को एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकें।
3. अनुलग्नक II में सूचीबद्ध परिपत्र और इस विषय पर पहले जारी किए गए सभी मुख्य परिपत्र/ निदेश इस मास्टर निदेश के जारी होने की तिथि से वापस लिए जाते है।
भवदीया,
(सुमन नाथ)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक: यथोक्त मास्टर निदेश- बैंक नोटों और सिक्कों के विनिमय की सुविधा
सूचकांक
मास्टर निदेश - नोटों तथा सिक्कों को विनिमय की सुविधा
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 28, 38, 39, 58(1) और 58(2)(थ) के साथ पठित बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35(ए) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इस बात से संतुष्ट होकर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और उचित है, निम्न निदेश जारी किया जाता है।
1. बैंक शाखाओं में सिक्कों / नोट के विनिमय की सुविधा
1.1 देश के सभी हिस्सों में स्थित सभी बैंक शाखाएं जनसाधारण को निम्नलिखित ग्राहक सेवाएं अधिक सक्रियता और प्रभावी ढंग से अनिवार्य रूप से प्रदान करें ताकि उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों में जाने की आवश्यकता न हो:-
1.1.1 सभी मूल्यवर्ग के नए/ अच्छी गुणवत्ता वाले बैंक नोट तथा सिक्के जारी करना,
1.1.2 गंदे/ अपूर्ण/ कटे-फटे नोटों को बदलना और
1.1.3 लेनदेन अथवा विनिमय में नोट एवं सिक्के स्वीकार करना
1.2 चूंकि एटीएम के माध्यम से बड़े पैमाने पर नोटों का वितरण सुगम है, इसलिए बैंकों/ व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (डब्ल्यूएओ) को एटीएम में नकदी की उपलब्धता की निगरानी करने और समय पर नकदी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रणालियों/ तंत्रों को मजबूत करना चाहिए ताकि कैश आउट को रोका जा सके और आम जनता को होने वाली असुविधा टले।
1.3 शाखाएँ यह सुनिश्चित करेंगी कि नोट तथा सिक्कों के विनिमय की यह सुविधा केवल उनके ग्राहकों के लिए सीमित नहीं हैं बल्कि अन्य लोगों को भी दी जा रही है। लघु वित्त बैंक (जो 2 साल से कम समय की अवधि से बैंकिंग कारोबार कर रहे हैं) एवं भुगतान बैंक स्वेच्छा से कटे-फटे और अपूर्ण नोटों को बदल सकते हैं।
1.4 यह देखते हुए कि प्रत्येक थैली में 100 सिक्के अथवा छोटे मूल्य के पैक खजांची के साथ साथ ग्राहकों के लिए भी लेनदेन हेतु अधिक सुविधाजनक होगा, ऐसी थैलियाँ काउंटर पर रखी जाएँ तथा ग्राहकों को उपलब्ध करवाई जाएँ।
1.5 कोई भी बैंक शाखा, अपने काउंटरों पर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किए गए सिक्कों और/ या छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को लेने से मना नहीं करेंगे। भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी मूल्यवर्गों के विभिन्न आकार, विषय-वस्तु तथा डिजाइन के 50 पैसे, ₹1/-, ₹2/-, ₹5/-, ₹10/- तथा ₹20/- मूल्यवर्ग के सभी सिक्के वर्तमान में वैध निविदा हैं।
1.6 अप्रचलित सिक्के- भारत सरकार द्वारा जारी 20 दिसंबर 2010 की राजपत्रित अधिसूचना सं. 2978 के अनुसरण में, समय - समय पर जारी किये गये 25 पैसे और उससे निम्न मूल्यवर्ग के सिक्के, 30 जून 2011 से वैध मुद्रा नहीं हैं।
1.7 सभी शाखाएं कारोबार के सभी दिन, किसी पक्षपात के बिना आम जनता को उपरोक्त सुविधा प्रदान करेंगी।
1.8 आम आदमी की जानकारी के लिए शाखाओं के स्तर पर उपलब्ध ऐसी सेवाओं का व्यापक प्रचार किया जायेगा।
1.9 बैंक अंतिम मील कनेक्टिविटी की समस्याओं को दूर करने के लिए नोटों और सिक्कों के वितरण हेतु अपने बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (बीसी) की सहभागिता बढ़ा सकते हैं और कैश इन ट्रांजिट (सीआईटी) संस्थाओं को भी नियुक्त कर सकते हैं।
1.10 बैंक शाखा के काउंटर पर प्रस्तुत किए गए नोटों की प्रामाणिकता की जांच विनिमय या ऋण देने से पहले मशीनों द्वारा की जाएगी। यदि काउंटर पर प्रस्तुत किया गया कोई नोट जाली पाया जाता है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में प्रस्तुतकर्ता को वापस नहीं किया जाएगा और न ही नष्ट किया जाएगा, जाली नोटों की पहचान, रिपोर्टिंग और निगरानी संबंधी मास्टर निदेश में निर्धारित कार्रवाई की जाएगी।
2. भारतीय रिज़र्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 2009 [भारतीय रिज़र्व बैंक (नोट वापसी) संशोधित नियमावली, 2018 द्वारा संशोधित] - शक्तियों का प्रत्यायोजन
2.1 भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58(2) के साथ पठित धारा 28 के अनुसार कोई भी व्यक्ति भारत सरकार द्वारा जारी बैंक नोटों या बैंकनोटों में से किसी गुम हो चुके, चोरी हो चुके, विकृत या अपूर्ण मुद्रा नोट का मूल्य भारत सरकार अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक से अधिकार के तौर पर वसूल करने का पात्र नहीं है। तथापि, वास्तविक मामलों में नागरिकों को कठिनाई से बचाने के प्रयोजन से यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से भारतीय रिज़र्व बैंक उन परिस्थितियों तथा उन शर्तों और परिसीमाओं का निर्धारण कर सकता है, जिनके अनुसार ऐसे बैंक नोटों या बैंक नोटों का मूल्य एक अनुग्रह के रूप में दिया जा सके।
2.2 आम नागरिकों को महात्मा गांधी (नई) शृंखला (जो पूर्व की शृंखला की तुलना में आकार में छोटे हैं) के कटे फटे नोटों के विनिमय हेतु नोट वापसी नियमावली, 2009 में संशोधन किया गया था, जिन्हे रिज़र्व बैंक (नोट वापसी) संशोधित नियमावली, 2018 द्वारा 6 सितंबर 2018 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। पचास रूपये तथा इससे उच्च मूल्यवर्ग के नोटों के पूर्ण मूल्य के भुगतान के लिए आवश्यक नोट के सबसे बड़े एकल अविभाजित टुकड़े के न्यूनतम क्षेत्र में भी संशोधन किया गया था।
2.3 नागरिकों के हित और सुविधा की दृष्टि से विनिमय सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से बैंक शाखाएँ भारतीय रिज़र्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 2009 [भारतीय रिज़र्व बैंक (नोट वापसी) संशोधित नियमावली, 2018] (इसके पश्चात इसे यहाँ एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) कहा जाएगा) के नियम 2(ज) के अंतर्गत कटे-फटे/ अपूर्ण बैंक नोटो के निःशुल्क विनिमय के लिए अधिकार दिए गए हैं।
3. गंदे नोट
विनिमय सुविधाओं में तेजी लाने के उद्देश्य से गंदे नोटों की परिभाषा को व्यापक किया गया है। ऐसे बैंक नोट को ''गंदा नोट' माना जाता है जो सामान्य इस्तेमाल के कारण गंदे हो गए हैं और इसमें साथ ही दो टुकड़ों को एक साथ चिपकाकर बनाया गया नोट भी शामिल है, जिसमें प्रस्तुत दोनों टुकड़े एक ही नोट के हैं और कोई भी आवश्यक लक्षण अनुपस्थित नहीं है। इन नोटों को बैंकों के काउंटरों पर विनिमय के लिए या बैंकों में रखे गए जनता के खातों में जमा करने के लिए या सरकारी बकाया के भुगतान के लिए स्वीकार किया जाएगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में, इन नोटों को जनता को पुन: जारी करने योग्य नोटों के रूप में जारी नहीं किया जाएगा, और ऐसे नोटों को आगे की प्रक्रिया के लिए आरबीआई कार्यालयों को गंदे नोट विप्रेषण के रूप में भेजने हेतु मुद्रा तिजोरियों में जमा किया जाएगा।
4. कटे-फटे एवं अपूर्ण नोट –प्रस्तुति व पास किया जाना (passing)
4.1 कटे-फटे नोट
कटे-फटे नोट’ का अभिप्राय ऐसे नोट से है जिसका एक हिस्सा गायब हो या जो दो से अधिक टुकड़ों में विभक्त हो। ऐसे बैंक नोट को किसी भी बैंक की शाखा में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रस्तुत किये गये नोटों को एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकृत एवं अधिनिर्णयन कर विनिमय प्रदान किया जाएगा। शाखाएँ यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएंगी कि मुद्रा विनिमय सुविधाओं का निजी मुद्रा परिवर्तकों या पेशेवर दोषपूर्ण नोटों के डीलरों द्वारा दुरुपयोग न किया जाए।
4.2 अपूर्ण नोट
"अपूर्ण नोट" से अभिप्राय ऐसे किसी नोट से है, जो पूर्णत: या अंशत: विरूपित, सिकुड़ा हुआ, गला हुआ, परिवर्तित या अस्पष्ट हो, हालांकि इसमें कटा-फटा नोट सम्मिलित नहीं है। सामान्य उपयोग के लिए उपयुक्त अपूर्ण नोटों को विनिमय के लिए किसी भी बैंक शाखा में प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार के प्रस्तुत किये गये नोटों को एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के अंतर्गत बनाये गये उल्लिखित नियमों के अनुसार स्वीकृत एवं अधिनिर्णयन कर विनिमय प्रदान किया जाएगा।
5. बैंक नोट जो सामान्य उपयोग के लिए अनुपयुक्त हों
ऐसे नोट, जो बहुत ही खस्ताहाल हों या बुरी तरह से जल गए हों, अथवा आपस में बुरी तरह से चिपक गए हों और इस वजह से सामान्य उपयोग के लिए अनुपयुक्त हों, ऐसे बैंक नोट को शाखाओं द्वारा विनिमय के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रकार के बैंक नोट के धारक को यह सूचित किया जाएगा कि वे इन नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्गम कार्यालय1 में प्रस्तुत करें जहां इनका अधिनिर्णयन एक विशेष प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। प्रस्तुतकर्ता को यह भी सूचित किया जाएगा कि ऐसे बैंक नोट विनिमय के उद्देश्य से पंजीकृत डाक/ पंजीकृत पार्सल के माध्यम से, उनके बैंक खाते में अधिनिर्णीत मूल्य जमा करने के लिए उनके बैंक खाते का विवरण (खाता संख्या, शाखा का नाम, IFSC कोड आदि) देकर, भारतीय रिज़र्व बैंक के उपर्युक्त निर्गम कार्यालय में प्रेषित किए जा सकते हैं।
6. गंदे/ कटे-फटे / अपूर्ण नोटों के विनिमय की सुविधा की प्रक्रिया
6.1 गंदे नोटों का विनिमय
6.1.1 कम संख्या में प्रस्तुत किए गए नोट: यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए नोटों की संख्या 20 तक हो और उनका अधिकतम मूल्य प्रति दिन ₹5,000/- हो, तो बैंक शाखा द्वारा उन्हें काउंटर पर नि:शुल्क बदले जायेंगे।
6.1.2 अधिक संख्या में प्रस्तुत किए गए नोट: यदि किसी व्यक्ति द्वारा एक दिन में प्रस्तुत किए गए नोटों की संख्या 20 अथवा मूल्य ₹5000/- प्रति दिन से अधिक हो, तो बैंक इन्हे रसीद देकर स्वीकार करेंगे, और इनका मूल्य बाद में जमा किया जाएगा। बैंक निविदाकर्ता को रसीद पर भुगतान की संभावित तारीख के बारे में सूचित करेंगे जो प्राप्ति के 7 दिन से अधिक नहीं होना चाहिए। इलेक्ट्रानिक माध्यम से विनिमय मूल्य को जमा करने के लिए निविदाकर्ता से बैंक खाते का विवरण प्राप्त किया जाएगा। बैंक Reserve Bank of India (Responsible Business Conduct) Directions, 20252 में उल्लिखित नियमानुसार सेवा शुल्क लगा सकते हैं।
6.2 कटे-फटे तथा अपूर्ण नोटों का विनिमय
6.2.1 सभी बैंक शाखाए, एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के भाग III में कटे-फटे तथा अपूर्ण नोटों के विनिमय के लिए दी गई प्रक्रिया के अनुसार रसीद देते हुए विनिमय का कार्य करेंगे और इस मास्टर निदेश के अनुच्छेद 6.2.2, 6.2.3 और 6.2.4 में उल्लिखित दिशा-निर्देशों का पालन करें, जो क्रमशः कम और ज्यादा संख्या में प्रस्तुत किए गए नोटों के लिए लागू होते हैं।
6.2.2 कम संख्या में प्रस्तुत किए गए नोट: यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए नोटों की संख्या 10 तक है तो बैंक शाखाएँ सामान्यत: इन नोटों का अधिनिर्णयन एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के भाग III में दी गई प्रक्रिया के अनुसार करते हुए, विनिमय मूल्य का भुगतान काउंटर पर ही करेंगे।
6.2.3 अधिक संख्या में प्रस्तुत किए गए नोट: यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत नोटों की संख्या 10 अथवा मूल्य ₹5000/- प्रति दिन से अधिक हो, तो बैंक शाखाएं उन्हें प्रस्तुत किए गए नोटों के लिए प्राप्ति रसीद जारी कर सकती हैं, जिसका विनिमय मूल्य बाद में निविदाकर्ता के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
6.2.4 यदि गैर-तिजोरी शाखाएँ कटे-फटे नोटों का अधिनिर्णयन करने में सक्षम नहीं हैं, तो प्राप्ति रसीद देकर नोट प्राप्त कर सकते हैं तथा अधिनिर्णयन के लिए संबद्ध मुद्रा तिजोरी शाखाओं को भेज सकते है। बैंक निविदाकर्ता को रसीद पर भुगतान की संभावित तारीख के बारे में सूचित करेंगे जो प्राप्ति की तिथि से 30 दिन की अवधि से अधिक नहीं होनी चाहिए। इलेक्ट्रानिक माध्यम से विनिमय मूल्य को जमा करने के लिए निविदाकर्ता से बैंक खाते का विवरण प्राप्त किया जाएगा।
6.3 यदि विनिमय के लिए दिए गए गंदे/ कटे-फटे /अपूर्ण नोटों का मूल्य ₹50,000/- से अधिक है तो, ऐसे मामलों में बैंकों द्वारा सामान्य सावधानियाँ बरतने की अपेक्षा की जाती है।
7. काउंटर पर बैंक नोट गणना मशीन का प्रावधान
बैंकों को भुगतान काउंटरों पर नोट गणना मशीनें/ डुयल डिस्प्ले नोट गणना मशीनें उपलब्ध करानी होंगी ताकि ग्राहक जारी किए गए नोटों की संख्यात्मक सटीकता के बारे में स्वयं संतुष्ट हो सके।
8. सिक्कों का वितरण
8.1 बड़ी मात्रा में सिक्के लेने वाले ग्राहकों की आवश्यकता (एक लेन-देन में 1 बैग से अधिक) को देखते हुए बैंकों को सलाह दी जाती है कि ऐसे ग्राहकों को केवल कारोबार के लेन-देन के लिए ही सिक्के प्रदान करें। बैंक यह भी प्रयास करेंगे कि इस तरह की सेवाएँ उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित ‘ड़ोर-स्टेप बैंकिंग’ सेवाएँ के भाग के रूप में प्रदान करें। बैंक यह सुनिश्चित करें कि ऐसे ग्राहक बैंक के केवाईसी अनुपालित ग्राहक होने चाहिए और दिए गए सिक्कों का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। बैंक इस बात का ध्यान रखें कि ऐसी सुविधा का दुरुपयोग न हो। बैंक शाखाओं के काउंटरों से रिटेल ग्राहकों को सिक्कों का वितरण जारी रहेगा।
8.2 बड़ी मात्रा में सिक्के लेने वाले ग्राहकों और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (बीसी) को आगे वितरण के लिए सिक्कों की निरंतर आपूर्ति करने के लिए सभी बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी शाखाओं में प्रत्येक मूल्यवर्ग के सिक्कों की न्यूनतम 1 बैग उपलब्ध हो।
9. शिकायत निवारण
किसी बैंक शाखा के विरुद्ध निविदाकर्ता की शिकायत के मामले में, संबंधित बैंक शाखा में शिकायत दर्ज की जा सकती है। यदि बैंक द्वारा शिकायत दर्ज करने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर जवाब प्राप्त नहीं होता है या शिकायत को पूर्ण/ आंशिक रूप से अस्वीकार कर दिया जाता है या शिकायतकर्ता बैंक द्वारा दिए गए समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो इस स्थिति में रिज़र्व बैंक – एकीकृत लोकपाल योजना 2021' के अंतर्गत लोकपाल के पास शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायतें https://cms.rbi.org.in पर भी दर्ज की जा सकती हैं तथा बैंक/ डाक रसीदों को प्रमाण के रूप में संलग्न कर इसे ई-मेल के माध्यम से या भौतिक रूप से भारतीय रिजर्व बैंक, चौथी मंजिल, सेक्टर 17, चंडीगढ़ – 160017 में स्थापित “केंद्रीकृत प्राप्ति तथा प्रसंस्करण केंद्र” को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की जा सकती हैं।
10. कटे-फटे/ अपूर्ण नोटों का प्रबंधन
10.1 ‘भुगतान’/ ‘भुगतान किया’/ ‘अस्वीकृत’ की मुहरें लगे नोट (Notes Bearing 'PAY'/ 'PAID'/ 'REJECT' Stamps)
10.1.1 प्रत्येक शाखा के प्रभारी अधिकारी अर्थात् शाखा प्रबंधक और प्रत्येक शाखा के लेखा अथवा नकदी विंग के प्रभारी अधिकारी, एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के अनुसार शाखा में प्राप्त नोटों का अधिनिर्णयन करने के लिए “विहित अधिकारी” के रूप में कार्य करेंगे। कटे-फटे नोटों के अधिनिर्णयन करने के बाद विहित अधिकारी के लिए यह आवश्यक है कि वह बैंक नोटों पर दिनांकित मुहर लगाकर अपने आद्याक्षर करते हुए ‘भुगतान’ / ‘भुगतान किया’/ ‘अस्वीकृत’ का आदेश रिकॉर्ड करें। इन मुहरों पर बैंक और संबंधित शाखा का नाम भी होना चाहिए और इस प्रकार की मुहरों के दुरुपयोग से बचने के लिए इन्हें ‘विहित अधिकारी’ की अभिरक्षा में रखा जाएगा।
10.1.2 भारतीय रिज़र्व बैंक के किसी भी निर्गम कार्यालय अथवा किसी बैंक शाखा की ‘भुगतान’/ ‘भुगतान किया’/ ‘अस्वीकृत’ मुहरयुक्त कटे-फटे/ दोषपूर्ण नोटों को किसी भी बैंक शाखा में पुनः भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने पर, एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के नियम 6(2) के अंतर्गत भुगतान करने से मना कर दिया जाएगा और प्रस्तुतकर्ता को सूचित किया जाएगा कि ऐसे विकृत नोट/ नोटों का मूल्य नहीं दिया जा सकता क्योंकि इनका मूल्य पहले ही दिया जा चुका है, जो इस/ इन पर लगे मुहरों से स्पष्ट है। सभी बैंक शाखाओं को सूचित किया जाता है कि वे ‘भुगतान’/ ‘भुगतान किया’/ ‘अस्वीकृत’ की मुहर लगे नोटों को नागरिकों में पुनः भूल से भी जारी न करें। शाखाएं अपने ग्राहकों को सावधान करेंगी कि वे किसी भी अन्य बैंक या व्यक्ति से ऐसे नोट न लें।
10.2. नारे लिखे हुए / दागदार नोट अथवा घिसे हुए नोट
10.2.1 बैंकों को नोट के किसी भी हिस्से पर कुछ भी लिखने नहीं चाहिए। इसके अलावा, उन्हें इस संबंध में अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और आम जनता को शिक्षित करने का भी प्रयास करना चाहिए।
10.2.2 नारे, राजनीतिक या धार्मिक संदेश, लिखावट, दागदार (तेल/ रंग के धब्बों सहित), स्टेपल आदि प्रकार के बैंकनोट उपयोग तथा संचलन के लिए उपयुक्त नहीं हैं तथा आरबीआई की स्वच्छ नोट नीति के विरूद्ध हैं।
10.2.3 नागरिकों से प्राप्त इस तरह के नोट संचलन के लिए पुन: जारी नहीं किए जाएंगे तथा आरबीआई को आगे प्रेषित करने के लिए मुद्रा तिजोरी को भेजे जाएंगे।
10.2.4 नारे, राजनीतिक अथवा धार्मिक संदेश लिखे नोट वैध-मुद्रा नहीं होते हैं और एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के नियम 6 (3)(iii) के अंतर्गत ऐसे नोट के दावे को अस्वीकृत कर दिया जाएगा। इसी प्रकार विरूपित किए गए नोट भी एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के नियम 6 (3)(ii) के अंतर्गत अस्वीकृत किए जाएंगे।
10.2.5 सभी लिखावट वाले/ दागदार (रंग/ तेल के धब्बों सहित) नोट वैध निविदा रहेंगे तथा ऐसे नोटों को किसी भी बैंक शाखा में जमा/ विनिमय किया जा सकता है।
10.3. जानबूझकर काटे गए नोट
यदि जानबूझकर काटे गए, फाड़े गए, बेईमानी से फेर-बदल अथवा छेड़छाड़ किये नोटों को विनिमय मूल्य पाने के लिये प्रस्तुत किया जाता है तो उन्हें एनआरआर, 2009 (2018 में यथा संशोधित) के नियम 6 (3)(ii) के तहत निरस्त कर दिया जाये। यद्यपि जानबूझकर काटे गए नोटों की सटीक परिभाषा निर्धारित करना संभव नहीं है, तथापि ऐसे नोटों को ध्यान से देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कार्य जानबूझकर धोखा देने के उद्देश्य से किया गया है, क्योंकि ऐसे नोटों को जिस प्रकार से काटा/ विरूपित किया जाता है उसमें नोटों के आकार/ गायब हुए टुकड़ों में एकरूपता देखने को मिलती है अर्थात ये नोट किसी खास जगह पर ही विकृत होते हैं, खासकर जब नोट बड़ी मात्रा में प्रस्तुत किये जाते हैं। प्रस्तुतकर्ता के नाम, प्रस्तुत किए गए नोटों की संख्या और मूल्यवर्ग आदि सहित इस प्रकार के मामलों का विवरण भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्गम विभाग के उप महाप्रबंधक/ महाप्रबंधक, जिनके अधिकार क्षेत्र में शाखा अवस्थित है, को रिपोर्ट किए जाएंगे। बड़ी मात्रा में ऐसे नोट प्रस्तुत किए जाने की स्थिति में मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को भी दी जाएगी।
11. बैंक शाखाओं के स्तर पर अधिनिर्णीत नोटों का निपटान
11.1 बैंक शाखाओं द्वारा अधिनिर्णीत नोटों के संबंध में, पूर्ण मूल्य प्रदत्त बैंक नोटों को उन तिजोरी शाखाओं को भेजें जिनके साथ उन्हें संलग्न किया गया है। इसके अतिरिक्त, इन नोटों को मुद्रा तिजोरी शाखाओं द्वारा अलग-अलग पैकेटों/ बक्सों में पैक करके, गंदे नोटों के प्रेषण के साथ आरबीआई के निर्गम कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा।
11.2 मुद्रा तिजोरी शाखा में रखे गए अर्ध मूल्य भुगतान किए तथा अस्वीकृत नोटों को एक अलग चालान के साथ अलग से पैक किया जाएगा तथा पूर्ण मूल्य प्रदत्त नोटों के साथ गंदे नोटों के विप्रेषण के हिस्से के रूप में या आवश्यकतानुसार पंजीकृत एवं बीमाकृत डाक द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्गम विभाग को भेजे जाएंगे अर्थात अर्ध मूल्य भुगतान और अस्वीकृत नोटों को आरबीआई के निर्गम कार्यालय को समय-समय पर प्रेषित किया जाएगा, और जरूरी नहीं कि गंदे नोटों के विप्रेषण के साथ ही भेजे जाएं।
11.3 मुद्रा तिजोरी शाखाओं के अलावा अन्य शाखाएं अर्ध मूल्य/ अस्वीकृत नोटों को अलग से एक अलग चालान के साथ पैक करेंगी और उन्हें अपनी संबद्ध मुद्रा तिजोरी शाखाओं को या संबंधित निर्गम कार्यालय (आरबीआई) को पंजीकृत और बीमाकृत डाक द्वारा आवश्यकतानुसार भेजेंगी।
11.4 पूर्ण मूल्य प्रदत्त नोटों को आरबीआई के निर्गम कार्यालय द्वारा तिजोरी विप्रेषण माना जाएगा जबकि अर्ध मूल्य प्रदत्त तथा अस्वीकृत नोटों को अधिनिर्णयन हेतु प्रस्तुत किए गये नोट माने जायेंगे तथा तद्नुसार उनका प्रसंस्करण किया जाएगा।
11.5 सभी मुद्रा तिजोरी वाली शाखाओं को तिमाही के दौरान अधिसूचित नोटों के संख्या की जानकारी अनुलग्नक 1 के अनुसार हमारे आरबीआई निर्गम कार्यालयों को भेजना अनिवार्य है।
12. प्रशिक्षण
आरबीआई निर्गम कार्यालय, बैंक शाखाओं के "विहित अधिकारियों" के लिए आवधिक आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। चूँकि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य उक्त अधिकारियों को दोषपूर्ण नोटों के अधिनिर्णयन की प्रक्रिया की जानकारी देना तथा उनमें आत्मविश्वास प्रदान करना है, अत: यह अनिवार्य है कि संबंधित शाखाओं के विहित अधिकारियों को ऐसे कार्यक्रमों में नामित किया जाएँ।
13. नोटिस बोर्ड का प्रदर्शन
आम जनता की जानकारी हेतु सभी बैंक शाखाओं को अपनी शाखा परिसर में एक प्रमुख स्थान पर एक बोर्ड प्रदर्शित करना अनिवार्य है जिस पर नोट और सिक्कों के विनिमय की सुविधा की जानकारी दी गयी हो और साथ ही यह भी लिखा हो कि ‘गंदे/ कटे फटे नोट व सिक्के यहाँ पर स्वीकार किये जाते हैं एवं बदले जाते जाते हैं’।
14. निगरानी और नियंत्रण
14.1 बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी/ आंचलिक प्रबंधक/ क्षेत्रीय प्रबंधक, बैंक शाखाओं/ मुद्रा तिजोरियों का आकस्मिक दौरा करेंगे, अपने दौरे रिपोर्टों में उपरोक्त निर्देशों के अनुपालन की स्थिति दर्ज करेंगे और आवश्यकतानुसार तत्परता से सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
14.2 इस मास्टर निदेश के किसी भी प्रावधान का अनुपालन करना भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन माना जायेगा और मुद्रा वितरण और विनिमय के लिए प्रोत्साहन और ग्राहक सेवा प्रदान करने और लेनदेन/शेष की रिपोर्टिंग में कमी के लिए बैंक शाखाओं और मुद्रा तिजोरियों के लिए दंडात्मक प्रावधानों पर मास्टर निदेश के अनुसार दंड लागू किया जाएगा।
अनुलग्नक II
वापस लिए गए परिपत्रों/ मास्टर निदेशों/ मास्टर परिपत्रों की सूची
| सं. |
दिशानिर्देश/अधिसूचना सं. |
दिनांक |
विषय-वस्तु |
| 1 |
मुप्रवि (एनई)सं.जी-5/08.07.18/2025-26 |
01.04.2025 |
मास्टर निदेश - नोटों तथा सिक्कों को बदलने की सुविधा |
| 2 |
डीसीएम (सीसी) सं.97527/03.41.01/2021-22 |
27.08.2021 |
सिक्कों के वितरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन तथा अन्य उपायों की समीक्षा |
| 3 |
डीसीएम (आरएमएमटी) सं.S153/11.01.01/2021-22 |
10.08.2021 |
एटीएम में नकदी की उपलब्धता की निगरानी |
| 4 |
डीसीएम (एनई) सं.3057/08.07.18/2018-19 |
26.06.2019 |
सिक्कों को स्वीकार करना |
| 5 |
डीसीएम (एनई) सं.657/08.07.18/2018-19 |
07.09.2018 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 2009 में संशोधन |
| 6 |
आरबीआई/2017-18/132 डीसीएम (आरएमएमटी) सं.2945/11.37.01/2017-18 |
15.02.2018 |
सिक्कों को स्वीकार करना |
| 7 |
डीसीएम (नोटविनिमय) सं.120/08.07.18/2016-17 |
14.07.2016 |
गंदे/ विरूपित /अपूर्ण नोटों के लिए विनिमय की सुविधा |
| 8 |
डीसीएम (एनई) सं.3498/08.07.18/2012-13 |
28.01.2013 |
नोटों और सिक्कों की विनिमय सुविधा |
| 9 |
डीसीएम (पीएलजी) सं.G - 14/10.65.03/2013-14 |
10.10.2013 |
वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति वक्तव्य - बैंकनोटों और सिक्कों का वितरण - वैकल्पिक तरीके |
| 10 |
डीसीएम (पीएलजी) सं. G12/10.65.03/2013-14 |
10.09.2013 |
वर्ष 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति वक्तव्य - बैंकनोटों और सिक्कों का वितरण - वैकल्पिक तरीके |
| 11 |
डीसीएम(पीएलजी)सं.6983/10.03.03/2010-11 |
28.06.2011 |
25 पैसे और उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को संचलन से वापस लेना |
| 12 |
डीसीएम(पीएलजी)सं.6476/10.03.03/2010-11 |
31.05.2011 |
25 पैसे और उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को संचलन से वापस लेना – अस्वीकृति के बारे में शिकायतें |
| 13 |
डीसीएम(पीएलजी)सं.4459/10.03.03/2010-11 |
09.02.2011 |
25 पैसे और उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को संचलन से वापस लेना |
| 14 |
डीसीएम(पीएलजी)सं.4137/10.03.03/2010-11 |
25.01.2011 |
25 पैसे और उससे कम मूल्यवर्ग के सिक्कों को संचलन से वापस लेना |
| 15 |
डीसीएम(आरएमएमटी)सं.1277/11.36.03/2010-11 |
24.08.2010 |
करेंसी चेस्ट शाखाओं द्वारा विनिमय सुविधाएं / सुविधाओं को प्रदान करने हेतु योजना |
| 16 |
डीसीएम(एनई)सं.1612/08.01.01/2009-10 |
13.09.2009 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 2009 –अधिसूचना |
| 17 |
आरबीआई/2006-07/349/डीसीएम(एनई)सं.7488/08.07.18/2006-07 |
25.04.2007 |
निम्न मूल्यवर्ग के नोटों और सिक्कों की स्वीकृति |
| 18 |
डीसीएम(आरएमएमटी)सं.1181/11.37.01/2003-04 |
05.04.2004 |
सिक्कों की स्वीकृति |
| 19 |
डीसीएम (पीएलजी) सं. 874/10.36.00/2003-04 |
29.1.2004 |
काउंटर में नोट गिनने वाली मशीनों का प्रावधान |
| 20 |
डीसीएम(एनई)सं.310/08.07.18/2003-04 |
19.01.2004 |
आम जनता के सद्स्यों को नोटो और सिक्कों के विनिमय की सुविधाएं प्रदान करना |
| 21 |
डीसीएम(आरएमएमटी)सं.404/11.37.01/2003-04 |
09.10.2003 |
सिक्कों की स्वीकृति और नोटों की उपलब्धता |
| 22 |
जी-11/08.07.18/2001-02 |
02.11.2001 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 1975 सार्वजनिक / निजी क्षेत्र के बैंकों की करेंसी चेस्ट शाखाओं को नोट विनिमय शक्तियों का प्रत्यायोजन |
| 23 |
सीवाई सं.386/08.07.13/2000-01 |
16.11.2000 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 1975 - सरकारी एवं निजी क्षेत्र की मुद्रा तिजोरी वाली बैंको को नोट विनिमय की संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन |
| 24 |
जी-67/08.07.18/96-97 |
18.02.1997 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 1975 - करेंसी चेस्ट वाले निजी क्षेत्र की बैंकों को संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन |
| 25 |
जी-52/08.07.18/96-97 |
11.01.1997 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली - सरकारी क्षेत्र के बैंको को दोषपूर्ण नोटों के विनिमय के लिए संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना – भुगतान करें / प्रदत्त मुहर लगाये गये नोटों का निपटान |
| 26 |
जी-24/08.01.01/96-97 |
03.12.1996 |
कटे-फटे नोटों का विनिमय – उदारीकरण |
| 27 |
जी-64/08.07.18/95-96 |
18.05.1996 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली - सरकारी क्षेत्र के बैंको को संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन – और दोषपूर्ण नोटों के विनिमय हेतु प्रचार – प्रसार |
| 28 |
जी-71/08.07.18/92-93 |
22.06.1993 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली - सरकारी क्षेत्र के बैंको को संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन योजना और दोषपूर्ण नोटों के विनिमय हेतु प्रचार – प्रसार |
| 29 |
जी-83/सीएल-1/(पी एस बी)-91-92 |
06.05.1992 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली - सरकारी क्षेत्र के बैंको की करेंसी चेस्ट वाली शाखाओं को शक्तियों का प्रत्यायोजन |
| 30 |
जी-74/सीएल-1/(पी एस बी)जन–90-91 |
05.06.1991 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली के अधीन सरकारी क्षेत्र के बैंको संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना |
| 31 |
5.5/सीएल-1/(पी एस बी)-90-91 |
25.09.1990 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली के अधीन सरकारी क्षेत्र के बैंको संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना |
| 32 |
8/सीएल-1/(पी एस बी)-90-91 |
17.08.1990 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली के अधीन सरकारी क्षेत्र के बैंको संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना |
| 33 |
जी-123//सीएल-1(पीएसबी)(जन)89-90 |
07.05.1990 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली के अधीन सरकारी क्षेत्र के बैंको संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना - संशोधन |
| 34 |
जी-108/सीएल-1(पीएसबी)(जन)89-90 |
03.04.1990 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली, 1989 – 500 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोट - सरकारी एवं निजी क्षेत्र के बैंको की शाखाओं के स्तर पर दोषपूर्ण नोटों का विनिमय |
| 35 |
जी-8/सीएल-1(पीएसबी)(जन)89-90 |
12.07.1989 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली- आरबीआई निर्गम कार्यालयों की '' दावा हेतु '' मुहर लगाये गये नोट |
| 36 |
जी-84/सीएल-1(पीएसबी)(जन)88-89 |
17.03.1989 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली- सरकारी क्षेत्र के बैंको को नोट विनिमय हेतु संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन |
| 37 |
जी-66/सीएल-1(पीएसबी)88-89 |
09.02.1989 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली- सरकारी क्षेत्र के बैंको को शक्तियों का प्रत्यायोजन – प्रशिक्षण |
| 38 |
एस.12 /सीएल-1 (पीएसबी)–88-89 |
30.09.1988 |
नोट वापसी नियमावली, - जानबूझकर विरुपितकिय गये नोट |
| 39 |
जी-134/सीएल-1(पीएसबी)87-89 |
25.05.1988 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली के अधीन संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना का कार्यान्वयन |
| 40 |
192/सीएल-1(पीएसबी)86-87 |
02.06.1987 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली- सरकारी क्षेत्र के बैंको को शक्तियों का प्रत्यायोजन की योजना |
| 41 |
189/सीएल-1(पीएसबी)86-87 |
02.06.1987 |
करेंसी नोटों पर संदेश, नारे आदि लिखकर उन्हें विरूपित बनाना |
| 42 |
185/सीएल-1(पीएसबी)86-87 |
20.05.1987 |
भारतीय रिजर्व बैंक (नोट वापसी) नियमावली- दोषपूर्ण नोटों पर भुगतान करें / रद्द करें की मुहर लगाना |
| 43 |
173/सीएल-1(पीएसबी)84-85 |
02.04.1985 |
सरकारी क्षेत्र के बैंको को दोषपूर्ण नोटों के विनिमय हेतु संपूर्ण शक्तियों का प्रत्यायोजन – उक्त के लिए प्रक्रिया |
| 44 |
सीवाय.सं.1064/सीएल.1/76-77 |
09.08.1976 |
जनता के लिए गंदे और कटे-फटे नोटों के विनिमय की सुविधा |
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