विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम


विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केन्द्रीय कार्यालय
मुंबई-400001

अधिसूचना सं. फेमा.3(आर)/2018-आरबी

17 दिसम्बर 2018

विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (3) के खंड (ए), (डी) तथा (ई) और धारा- 47 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा समय-समय पर संशोधित दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.3/2000-आरबी, समय-समय पर संशोधित दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.4/2000-आरबी तथा समय-समय पर संशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं. फेमा. 120/ आरबी-2004 के विनियम 21 का अधिक्रमण करते हुए रिज़र्व बैंक भारत में निवास करने वाले व्यक्ति तथा भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों के बीच उधार लेने तथा उधार देने के संबंध में निम्नलिखित विनियम बनाता है; अर्थात:

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ :-

i) ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018 कहलाएंगे।

ii) वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।

2. परिभाषाएँ : -

इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:

i) "अधिनियम" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) से है;

ii) "प्राधिकृत व्यापारी (एडी)" का तात्पर्य अधिनियम की धारा-10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किये गए व्यक्ति से है;

iii) “ईईएफ़सी खाता”, “आरएफ़सी खाता” के अर्थ क्रमशः वहीं होंगे, जो समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 में उन्हें दिए गए हैं ;

iv) “बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)” अर्थात-रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से, निर्धारित किए गए ढांचे के अनुसार पात्र निवासी संस्था द्वारा भारत के बाहर से लिया हुआ उधार;

v) “बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल)” का अर्थ रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से, निर्धारित किए गए ढांचे के अनुसार भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के उधारकर्ता को उधार देना;

vi) “विदेशी मुद्रा” का अर्थ वही होगा जो अधिनियम में दिया गया है;

vii) “भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएँ/ अनुषंगी कंपनियाँ” का अर्थ है बैंककारी विनियमन अधिनियम,1949 के अनुसार विदेश में स्थापित संस्थाएं;

viii) “प्राधिकृत बैंक”, “अनिवासी भारतीय(एनआरआई)”, “विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) खाता(एफ़सीएनआर)(बी)”, “अनिवासी साधारण(एनआरओ) खाता”, तथा “अनिवासी बाह्य (एनआरई) खाता” के वही अर्थ होंगे जो उन्हें समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा (जमा) विनियमावली, 2016 में क्रमशः दिए गए हैं;

ix) “आवास वित्त संस्था” तथा “राष्ट्रीय आवास बैंक” का अर्थ वही होगा जो उन्हें समय-समय पर यथासंशोधित राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 में दिया गया है;

x) “भारतीय संस्था (एंटीटी)” का अर्थ समय-समय पर यथासंशोधित कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भारत में निगमित कंपनी अथवा समय-समय पर यथासंशोधित सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत भारत में निर्मित तथा पंजीकृत की गई कोई सीमित देयता भागीदारी है।

xi) “प्रवासी भारतीय नागरिक (ओ.सी.आई.)” कार्ड-धारक का अर्थ वही होगा जो समय-समय पर यथासंशोधित नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7(ए) में उसे दिया गया है;

xii) “रियल इस्टेट गतिविधि” में ऐसी कोई भी गतिविधि, जिसमें अपने स्वामित्ववाली अथवा लीज़ पर ली हुई संपत्ति की खरीद, बिक्री तथा वाणिज्यिक एवं आवासीय सम्पत्तियों अथवा जमीन को किराए पर देना शामिल है तथा रियल इस्टेट की खरीद, बिक्री, उसे किराए पर देना अथवा उसके प्रबंधन हेतु मध्यस्थता के लिए शुल्क अथवा करार आधार पर किसी एजेंट को सौंपने संबंधी गतिविधियां भी शामिल हैं। तथापि, इसमें एकीकृत टाउनशिप का विकास, नयी परियोजना/ आधुनिकीकरण अथवा मौजूदा इकाइयों के विस्तार हेतु औद्योगिक भूमि की खरीद / दीर्घकालिक लीज़िंग अथवा समय –समय पर संशोधित/ अद्यतन की गई अधिसूचना एफ़. सं. 13/06/2009-आईएनएफ़ के माध्यम से भारत सरकार द्वारा अनुमोदित इन्फ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्र की सुसंगत मास्टर सूची में दिये गए “इनफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्र” के अंतर्गत आनेवाली कोई भी गतिविधि शामिल नहीं होगी;

xiii) “रिश्तेदार” का अर्थ वही होगा, जो समय-समय पर यथासंशोधित कंपनी अधिनियम, 2013 में दिया गया है;

xiv) “प्रतिबंधित अंतिम उपयोग” का तात्पर्य ऐसे अंतिम उपयोग से है, जहां उधार ली गई निधियों का विनियोजन नहीं किया जा सकता है और उसमें निम्नलिखित शामिल होंगे:

ए) चिट फंड या निधि कंपनी के कारोबार में;

बी) मार्जिन ट्रेडिंग और डेरिवेटिव सहित पूंजी बाजार में निवेश;

सी) कृषि अथवा वृक्षारोपण गतिविधियां;

डी) रियल इस्टेट गतिविधियों या फार्म-हाउसों का निर्माण; तथा

ई) हस्तांतरनीय विकास सत्वाधिकार (टीडीआर) में व्यापार, जहां टीडीआर का अर्थ वही होगा जो उसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अनुमेय पूंजी खातेगत लेनदेन) विनियमावली, 2015 में दिया गया है।

xv) “अनुसूची” का अर्थ इस विनियमावली की अनुसूची है;

xvi) “स्टार्ट-अप” अर्थात एक ऐसी संस्था, जो 17 फरवरी, 2016 को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी एवं समय समय पर यथा संशोधित/ अद्यतन की गई अधिसूचना सं.जी.एस.आर.180 (ई) में निर्धारित शर्तों का अनुपालन करती है;

xvii) "व्यापार ऋण" भारत सरकार के परामर्श से निर्धारित किए गए व्यापार ऋण ढांचे के अनुसार भारत में आयात के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ता, बैंक / वित्तीय संस्थान द्वारा प्रदान किए गए ऋण हैं;

स्पष्टीकरण: वित्त के स्रोत के आधार पर, इस तरह के व्यापार ऋण में आपूर्तिकर्ताओं के ऋण और खरीदारों के ऋण शामिल हैं। आपूर्तिकर्ता का ऋण विदेशी आपूर्तिकर्ता द्वारा भारत में आयात के लिए दिए गए ऋण से संबंधित है, जबकि खरीदारों का ऋण किसी विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान से आयातक द्वारा भारत में आयात के भुगतान हेतु की गई ऋण की व्यवस्था को संदर्भित करता है। यह आयात विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की मौजूदा विदेश व्यापार नीति के तहत अनुमत होना चाहिए।

xviii) इस विनियमावली में उपयोग किए गए किन्तु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों का अर्थ क्रमशः वही होगा, जो अधिनियम में उन्हें दिया गया है;

3. उधार देने अथवा लेने पर प्रतिबंध

अधिनियम, नियम या विनियमन में दिये गए प्रावधानों के अलावा भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से विदेशी मुद्रा में न तो उधार लेगा और न ही निवासी अथवा अनिवासी को उधार देगा और भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से रुपये में न तो उधार लेगा और न ही उधार देगा;

बशर्ते कि रिज़र्व बैंक भारत में निवासी किसी व्यक्ति को भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से विदेशी मुद्रा में उधार लेने अथवा निवासी या अनिवासी को उधार देने हेतु और /अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से रुपये में उधार लेने अथवा देने के लिए, पर्याप्त कारण दिये जाने पर, अनुमति दे सकता है।

स्पष्टीकरण: (ए) भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत में अथवा (बी) भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किए गए क्रेडिट कार्ड के उपयोग को भारतीय रुपयों में / विदेशी मुद्रा में उधार लेना अथवा उधार देना नहीं माना जाएगा।

4. भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर से विदेशी मुद्रा में लिया गया उधार

ए. प्राधिकृत व्यापारियों अथवा उनकी भारत के बाहर की शाखाओं द्वारा उधार लेना

i) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अपने प्रधान कार्यालय अथवा शाखा या भारत के बाहर किसी कॉरस्पान्डन्ट या किसी अन्य संस्था से विनिर्दिष्ट सीमा तक उधार ले सकेगा और वह रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर भारत सरकार के परामर्श से विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन होगा।

ii) किसी प्राधिकृत व्यापारी (एडी) जो कि भारत में निगमित अथवा गठित बैंक है, की भारत के बाहर की शाखा भारत के बाहर अपने नियमित बैंकिंग कारोबार के दौरान विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगी जो रिज़र्व बैंक एवं देश के विनियामक प्राधिकारी, जहां उसकी शाखा स्थित है, द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों या दिशानिर्देशों के अधीन है।

iii) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अपने निर्यातक घटकों को पोतलदान के पूर्व या पोतलदान-पश्चात विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान करने के प्रयोजनार्थ भारत के बाहर स्थित किसी बैंक या किसी वित्तीय संस्था से विदेशी मुद्रा में उधार ले सकेगा, बशर्ते इस संबंध में रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन हो।

iv) कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुरूप भारत के बाहर से ईसीबी जुटा सकेगा।

बी. प्राधिकृत व्यापारी के अलावा किसी व्यक्ति द्वारा उधार लेना

i) पात्र निवासी संस्थाएं अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुरूप भारत के बाहर से ईसीबी जुटा सकेंगी।

ii) आयातकों द्वारा अनुसूची-II में निहित प्रावधानों के अनुरूप डीजीएफटी की वर्तमान विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत यथा अनुमेय पूंजीगत या गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात हेतु भारत के बाहर से व्यापार ऋण जुटाया जा सकेगा।

iii) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर स्थित किसी बैंक से, चाहे ऋण या ओवरड्राफ्ट या किसी अन्य ऋण सुविधा के माध्यम से उधार ले सकेगा, जहां वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात आस्थगित भुगतान शर्तों या टर्न-की प्रॉजेक्ट या सिविल निर्माण संविदा के निष्पादन के आधार पर किया जाना प्रस्तावित है, बशर्ते जिस प्राधिकारी ने इसके लिए अनुमोदन प्रदान किया है उसके द्वारा नियत शर्तें समय-समय पर संशोधित दिनांक 12 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं.फेमा.23(आर)/2015-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात) नियमावली, 2015 के अनुरूप हों।

iv) भारतीय संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम के तहत स्थापित वित्तीय संस्थान आगे उधार देने के प्रयोजन से भारत सरकार के पूर्वानुमोदन पर विदेशी मुद्रा में उधार जुटा सकते हैं।

स्पष्टीकरण: बाह्य वाणिज्यिक उधार स्वरूप के इस प्रकार के उधार अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अधीन होंगे।

v) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर के निवासी अपने रिश्तेदारों से 2,50,000/- अमेरिकी डॉलर से अनधिक मूल्य तक अथवा उसके समतुल्य अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए किसी अन्य मूल्य तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से, समय-समय पर निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन रहते हुए उधार ले सकता है;

vi) भारत का निवासी कोई व्यक्ति, जो विदेश में पढ़ाई कर रहा है, वह शिक्षा शुल्क के भुगतान के प्रयोजनों और स्वयं के जीवनयापन (मेंटेनेंस) हेतु भारत के बाहर 2,50,000/- अमेरिकी डॉलर से अनधिक मूल्य तक अथवा उसके समतुल्य अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए किसी अन्य मूल्य तक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से समय-समय पर निर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन रहते हुए ऋण जुटा सकता है।

5. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा में उधार:-

ए. प्राधिकृत व्यापारियों अथवा उनकी भारत के बाहर की शाखाओं द्वारा उधार

i) प्राधिकृत व्यापारी(एडी) अथवा भारत के बाहर की उसकी शाखा भारत के बाहर के उधारकर्ता को अनुसूची-III में निहित प्रावधानों के अनुसार विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत ईसीएल प्रदान कर सकते हैं।

ii) प्राधिकृत व्यापारी (एडी) भारत में अपने घटकों को रिज़र्व बैंक द्वारा इस संबंध में जारी विवेकपूर्ण मानदंडों, ब्याज दर निदेशों और दिशा-निर्देशों, यदि कोई हो, के अनुपालन के अधीन उनकी विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को पूरा करने या उनकी रुपया कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं या पूंजीगत व्यय के लिए ऋण प्रदान कर सकता है।

iii) रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निदेशों या दिशा-निर्देशों के अधीन, भारत में प्राधिकृत व्यापारी (एडी) भारत में किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी(एडी) को विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान कर सकता है।

iv) एडी बैंकों की भारत के बाहर की शाखाएं एनआरई/एफसीएनआर जमा खातों या समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा. 5(आर)/ 2016-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसार अनुरक्षित तथा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर यथाविनिर्दिष्ट किसी अन्य खातों में रखी निधियों की जमानत पर विदेशी मुद्रा ऋण प्रदान कर सकते हैं।

बी. प्राधिकृत व्यापारियों से इत्तर व्यक्तियों द्वारा उधार

पात्र निवासी संस्था अनुसूची-III में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर के उधारकर्ता को विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत ईसीएल प्रदान कर सकती है।

6. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारतीय रुपए में उधार:-

ए. प्राधिकृत व्यापारियों द्वारा उधार

प्राधिकृत व्यापारी (एडी) अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी जुटा सकता है।

बी. प्राधिकृत व्यापारी से इतर व्यक्तियों द्वारा उधार

i) पात्र निवासी संस्थाएं अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी जुटा सकती हैं।

स्पष्टीकरण: भारत से बाहर निवास करने वाले किसी व्यक्ति को विनिर्दिष्ट समयावधि के अंदर पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से इक्विटी में परिवर्तनीय शेयरों को छोड़कर अप्रैल-2007 के 30 वें दिन को या इसके बाद अधिमानी शेयरों के निर्गम के माद्यम से और विनिर्दिष्ट समयावधि के अंदर पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से इक्विटी में परिवर्तनीय डिबेंचरों को छोड़कर जून 2007 के 7वें दिन परिवर्तनीय डिबेंचरों के निर्गम के जरिए उधार लेना, कर्ज समझा जाएगा और यह तदनुसार अनुसूची-I में उल्लिखित शर्तों के अनुसार होगा।

ii) भारत सरकार द्वारा यथापरिभाषित पात्र निवासी संस्थाएं पारदेशीय (ओवरसीज़) बहुपक्षीय वित्तीय संस्थआओं/ अंतरराष्ट्रीय विकास वित्तीय संस्थाओं से उधार ले सकती हैं, जहां ऐसी संस्थाओं के निधि स्रोत विदेशों में जारी रुपया मूल्यवर्गांकित बॉन्ड हैं या घरेलू रूप से जुटाए जाने वाले संसाधन अथवा भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कोई अन्य स्रोत है ।

iii) अनुसूची-II में निहित प्रावधानों के अनुसार डीजीएफटी की मौजूदा विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत अनुमत पूंजीगत या गैर-पूंजीगत माल के आयात के लिए आयातकों द्वारा भारतीय रुपये में भारत के बाहर से व्यापार ऋण जुटाया जा सकता है।

iv) प्रतिभूति के अंतरण अथवा निर्गम के परिणामस्वरूप होने वाले कर्ज-रूपी विदेशी निवेश, जो ऊपर उल्लिखित उप-विनियमों में शामिल नहीं है, के मामले में दिनांक 7 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं.फेमा.20 (आर)/ 2017-आरबी के मार्फत अधिसूचित एवं समय-समय पर यथासंशोधित, विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2017 की शर्तों का अनुपालन किया जाना चाहिए।

v) यदि भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से जमाराशि स्वीकार की जाती है, अथवा दी जाती है, जिसमें ऐसे खातों में धारित धनराशियों की जमानत के समक्ष ऋण/ ओवरड्राफ्ट शामिल है, तो वे समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा. 5(आर)/2016-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) नियमावली, 2016 के अनुरूप होनी चाहिए।

vi) भारत का निवासी कोई व्यक्ति जो भारत में निगमित कंपनी नहीं है, वह रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर भारत सरकार के परामर्श से विनिर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अधीन एनआरआई/ भारत के बाहर के वे रिश्तेदार, जो ओसीआई कार्ड-धारक हैं, से भारतीय रुपये में उधार ले सकता है। उधारकर्ता को सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधियों का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोगों के लिए न हो।

vii) भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत स्थापित वित्तीय संस्थान आगे उधार देने के उद्देश्य से भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन से भारत के बाहर से रुपये में मूल्यवर्गीकृत उधार जुटा सकते हैं।

स्पष्टीकरण: ऐसे उधार जो ईसीबी के स्वरूप में हैं, वे अनुसूची-I में निहित प्रावधानों के अधीन होंगे।

7. भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा रुपये में उधार देना

ए. प्राधिकृत व्यापारी द्वारा उधार देना

i) भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी) किसी अनिवासी भारतीय / प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ध-धारक को उधारकर्ता की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए/ स्वयं के कारोबारी प्रयोजनों से/ भारत में रिहायशी आवास के अधिग्रहण/ भारत में मोटर वाहन के अधिग्रहण के लिए अथवा प्राधिकृत व्यापारी (एडी) के निदेशक बोर्ड द्वारा निर्धारित ऋण नीति के अनुसार तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के विवेकपूर्ण मानदंडों के अनुपालन में अन्य किसी प्रयोजन के लिए ऋण प्रदान कर सकते हैं। प्राधिकृत व्यापारी बैंक को सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित उद्देश्य के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।

ii) भारत के बाहर के बैंक द्वारा भारत में प्राधिकृत व्यापारी (एडी) के पास रखे गए रुपया खाते में ओवेरड्राफ्ट: कोई प्राधिकृत व्यापारी (एडी), रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्देशित ऐसी शर्तों के अधीन अपनी समुद्रपारीय शाखा अथवा भारत के बाहर के प्रतिनिधि अथवा मुख्य कार्यालय द्वारा उसके पास रखे गए रुपया खातों में से ऐसी राशि, जिसका मूल्य 5 बिलियन रुपये से अधिक नहीं है अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय निर्धारित कोई अन्य मूल्य की राशि के अस्थायी ओवेरड्राफ्ट की अनुमति दे सकते हैं।

बी. प्राधिकृत व्यापारी से इतर व्यक्तियों द्वारा उधार देना

i) भारत में पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी अथवा भारत में पंजीकृत आवास वित्त संस्था अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई कोई अन्य वित्तीय संस्था, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन किसी अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक को आवास ऋण अथवा वाहन ऋण प्रदान कर सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।

ii) कोई भारतीय एंटीटी, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन अपने अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक कर्मचारी को स्टाफ कल्याण योजना के अंतर्गत भारतीय रुपये में ऋण प्रदान कर सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधि का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।

iii) कोई निवासी व्यक्ति, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत निर्धारित समग्र सीमा के भीतर अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक रिश्तेदार को रुपये में ऋण प्रदान कर सकता/ सकती है। उधारकर्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधार ली गई निधियों का उपयोग प्रतिबंधित अंतिम उपयोग के प्रयोजन के लिए नहीं किया जाता है।

8. उधारदाता/ उधारकर्ता की आवासीय स्थिति में हुए परिवर्तन की स्थिति में ऋण को जारी रखना:

i) कोई प्राधिकृत व्यापारी/ प्राधिकृत बैंक रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की गई शर्तों के अधीन कोई निवासी व्यक्ति, जो बाद में भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति बना है, को प्रदान किए गए ऋणों को जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं।

ii) यदि किसी निवासी व्यक्ति द्वारा अन्य निवासी व्यक्ति को ऋण प्रदान किया गया हो और उधरदाता बाद में अनिवासी हो जाता है तो निवासी उधारकर्ता द्वारा ऋण की चुकौती, उधारदाता के विकल्प पर रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए गए अनुसार भारत में कार्यरत बैंक में रखे गए उधारदाता के एनआरओ खाते में अथवा किसी अन्य खाते में जमा कर के की जानी चाहिए।

iii) यदि इन विनियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत में निवास करने वाले व्यक्ति को किसी अनिवासी भारतीय/ प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक द्वारा ऋण दिया गया हो और उधारदाता बाद में निवासी बन जाता है, तो ऋण की चुकौती उधारदाता के विकल्प पर रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किए गए अनुसार भारत में कार्यरत बैंक में रखे गए उधारदाता के नामित खाते में कि जाए।

iv) निवासी व्यक्ति को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की गई शर्तों तथा सीमाओं के अधीन भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति के रूप में पूर्व में विदेश में लिए गए ऋणों की चुकौती करने की अनुमति दी जाएगी।

9. पूर्व में लागू विनियमों के अंतर्गत लिए गए किसी भी उधार को अनुमत किए गए अनुसार चुकौती की नियत तारीख तक जारी रखा जा सकता है।

(अजय कुमार मिश्र)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


अनुसूची I

[ देखें विनियम 4(ए)(iv), 4(बी)(i), 4(बी)(iv), 6(ए), 6(बी)(i), 6 (बी) (vii) ]

भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर से उधार

पात्र संस्थाएं इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) जुटा सकते हैं।

1. उधार की मुद्रा

ईसीबी किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा तथा भारतीय रुपये में अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर विनिर्दिष्ट की गई किसी अन्य मुद्रा में जुटाई जा सकती है।

2. प्रकार/ स्वरूप

ईसीबी को रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श से निर्धारित किए गए स्वरूप में जुटाया जा सकता है। वर्तमान में ईसीबी में शामिल वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबैंचर जैसी कुछ संकर लिखतें, सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद विशिष्ट संकर लिखत विनियमों द्वारा शासित होंगी।

3. उधारकर्ताओं की पात्रता

स्टार्ट-अप्स सहित सभी संस्थाएं समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं. फेमा. 20(आर)/2017-आरबी के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति के अंतरण अथवा निर्गम) नियमावली, 2017 के अनुसार स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। साथ ही, रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से, कुछ अन्य संस्थाएं/ क्षेत्र निर्दिष्ट कर सकता है, जो ईसीबी जुटाने के लिए पात्र हैं अथवा पात्रता के विद्यमान मानदंडों में संशोधन कर सकता है।

4. परिपक्वता

न्यूनतम औसत परिपक्वता 3 वर्ष की होगी। तथापि, रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से कुछ क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं द्वारा जुटाई गई ईसीबी अथवा किसी विशिष्ट राशि की ईसीबी, अथवा विशिष्ट अंतिम उपयोग अथवा कुछ मान्यताप्राप्त उधारदाताओं से उधार लेने के लिए न्यूनतम औसत परिपक्वता शर्त निर्धारित कर सकता है।

5. उधारदाता :

उधारदाता ईसीबी नीति में दिए गए अनुसार एफ़एटीएफ़ अथवा आईओएससीओ का अनुपालन करने वाले देश का निवासी होना चाहिए, ईसीबी के अंतरण पर भी यही शर्त लागू होगी। तथापि बहुपक्षीय तथा क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाएं, जहां भारत एक सदस्य देश है, को भी मान्यताप्राप्त उधारदाता समझा जाएगा। साथ ही रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर अनुसूची के अंतर्गत किसी अन्य उधारदाता/ उधारदाताओं के सेट को निर्दिष्ट करेगा अथवा विद्यमान प्रावधानों को संशोधित करेगा।

स्पष्टीकरण: भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं/ सहायक संस्थाओं को केवल विदेशी मुद्रा में जुटाए गए ईसीबी के लिए मान्यताप्राप्त उधारदाता के रूप में अनुमति दी गई है।

6. समग्र लागत

i. विदेशी मुद्रा में जुटाई गई ईसीबी के लिए 6 महीने के लिबोर के बेंचमार्क अथवा संबंधित मुद्रा के लिए यथा लागू बेंचमार्क से अतिरिक्त अधिकतम स्प्रेड 450 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार होगा।

ii. भारतीय रुपये में जुटाई गई ईसीबी के लिए अधिकतम स्प्रेड तदनुरूपी परिपक्वता वाली भारत सरकार की प्रतिभूतियों के प्रचलित प्रतिफल के अतिरिक्त 450 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार होगा ।

7. अंतिम उपयोग

अनुसूची के अनुसरण में भारत के बाहर से जुटाए गए उधार की राशियों का उपयोग रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से, विनिर्दिष्ट की गई नकारात्मक अंतिम-उपयोग की सूची में शामिल गतिविधियों को छोड़कर अन्य सभी प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है।

8. उधार लेने की व्यक्तिगत सीमाएं

सभी पात्र उधारकर्ता/ उधारकर्ताओं की श्रेणियाँ प्रति वित्तीय वर्ष 750 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि तक ईसीबी जूटा सकते हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए यह राशि 3 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि तक सीमित रहेगी। तथापि रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर विशिष्ट क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं द्वारा अथवा विशिष्ट अंतिम उपयोग के लिए जुटाई गई ईसीबी के लिए उच्चतर सीमाएं निर्धारित कर सकता है। उक्त व्यक्तिगत सीमाएं रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर समीक्षा के अधीन होंगी।

9. जमानत

इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले उधारकर्ता रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार इन विनियमों के तहत अथवा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए किसी अन्य विनियम के अनुसार उधारदाता/ आपूर्तिकर्ता को जमानत प्रदान कर सकते हैं। उधारकर्ता, उधार लेने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन जमानत के रूप में कॉर्पोरेट और/अथवा व्यक्तिगत गारंटी भी प्रदान कर सकते हैं। तथापि, रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित की गई विशिष्ट शर्तों को छोड़कर, बैंक, वित्तीय संस्थाएं तथा गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियाँ, इस अनुसूची के अंतर्गत अपने घटकों द्वारा लिए गए उधार के लिए उनकी ओर से पारदेशीय (ओवरसीज़) उधारदाता के पक्ष में किसी भी प्रकार की गारंटी प्रदान (जारी) नहीं करेंगे।

10. ऋण की राशि की विदेश में पार्किंग ।

इस अनुसूची के अंतर्गत लिए गए उधार से प्राप्त निधियों को अनुमत अंतिम उपयोग के लिए उपयोग में लाए जाने तक रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार विदेश में अथवा भारत में पार्क किया जा सकता है।

11. ऋण का आहरण

इस अनुसूची के अंतर्गत उधार ली गई निधियों में से आहरण रिज़र्व बैंक द्वारा स्थापित प्रणाली के अनुसार रिज़र्व बैंक से अथवा प्राधिकृत व्यापारी(एडी) से ऋण पंजीकरण संख्या प्राप्त करने के बाद ही किया जाएगा। इसका अनुपालन नहीं करने पर उधारकर्ता को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट दंड का भुगतान करना पड़ सकता है।

बशर्ते यह कि उपर्युक्त के अनुसार दंड का भुगतान नहीं करने को उल्लंघन माना जाएगा तथा अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में दिए गए अनुसार कंपाउंडिंग अथवा न्याय निर्णयन के अधीन होगा।

12. रिपोर्टिंग

उधारकर्ता, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की गई रिपोर्टिंग क्रियाविधि का अनुपालन करेगा। इसका अनुपालन नहीं करने पर उधारकर्ता को रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट दंड का भुगतान करना पड़ सकता है।

बशर्ते यह कि उपर्युक्त के अनुसार दंड का भुगतान नहीं करने को उल्लंघन माना जाएगा तथा अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में दिए गए अनुसार कंपाउंडिंग अथवा न्याय निर्णयन के अधीन होगा।

13. ऋण कि चुकौती

नामित प्राधिकृत व्यापारी (एडी) को इस अनुसूची के अंतर्गत उधार लेने संबंधी दिशानिर्देशों के अनुरूप मूल धन, ब्याज, तथा अन्य प्रभारों का विप्रेषण करने की सामान्य अनुमति होगी।

14. हेजिंग

रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के साथ परामर्श कर इस अनुसूची के अंतर्गत उधार लेने संबंधी हेजिंग अपेक्षाओं को निर्धारित करेगा।

15. ईसीबी जुटाने के लिए उपलब्ध मार्ग

सभी ईसीबी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जुटाई जा सकती हैं यदि वे इस अनुसूची के अंतर्गत निर्धारित मानदंडों के अनुरूप हैं और विनिर्दिष्ट रिपोर्टिंग शर्तों के अधीन हैं। सभी अन्य मामलों पर आरबीआई द्वारा अनुमोदन मार्ग के तहत विचार किया जाएगा।


अनुसूची II

[ देखें विनियम 4(बी)(ii), तथा 6(बी)(iii) ]

आयात के लिए व्यापारिक ऋण

आयातक इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर से व्यापारिक उधार जुटा सकते हैं।

1. प्रयोजन

इस प्रकार के ऋण रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित शर्तों के अधीन डीजीएफ़टी की विद्यमान विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत अनुमत किए गए अनुसार गैर-पूंजीगत तथा पूंजीगत वस्तुओं के आयात के प्रयोजन से तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) के भीतर अथवा किसी भिन्न एसईज़ेड से गैर-पूंजीगत तथा पूंजीगत वस्तुओं की खरीद के लिए जुटाए जा सकते हैं।

स्पष्टीकरण : एसईज़ेड का तात्पर्य एसईज़ेड अधिनियम, 2005 में दी गई परिभाषा से है।

2. उधार लेने की मुद्रा

व्यापारिक ऋण किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा तथा भारतीय रुपये में अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्दिष्ट की गई किसी अन्य मुद्रा में जुटाया जा सकता है।

3. उधार की राशि

आयातक पूंजीगत तथा गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए प्रति आयात लेनदेन 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की समतुल्य राशि अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित की गई कोई अन्य राशि तक व्यापारिक उधार जुटा सकते हैं।

4. अवधि

व्यापारिक ऋण की अवधि जिसकी गणना पोतलदान की तारीख से की जाएगी, निम्नानुसार होगी:

i. गैर-पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए- किन्ही वस्तुओं के आयात के लिए / किसी विशिष्ट क्षेत्र द्वारा आयात के लिए परिचालन चक्र से संलग्न तथा एक वर्ष की अधिकतम अवधि, अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि।

ii. पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए: तीन वर्ष की अधिकतम अवधि अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि।

5. मान्यताप्राप्त उधारदाता

भारत में पारदेशीय (ओवरसीज़) आपूर्तिकर्ता, बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थाएं, विदेशी इक्विटि धारक तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्रों (आईएफ़एससी) में वित्तीय संस्थाएं अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित की गई कोई अन्य एंटीटी।

6. लागत:

i. विदेशी मुद्रा में व्यापारिक उधार के लिए 6 महीने के लिबोर के बेंचमार्क अथवा संबंधित मुद्रा के लिए यथालागू बेंचमार्क से अतिरिक्त अधिकतम स्प्रेड होगा 250 आधार अंक प्रति वर्ष अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार।

ii. रुपये में मूल्यवर्गीकृत व्यापारिक ऋण के लिए समग्र लागत प्रचलित बाज़ार परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए अथवा वह रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के साथ परामर्श कर निर्धारित किए गए अनुसार हो ।

7. जमानत तथा गारंटी

इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले उधारकर्ता रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार इन विनियमों के तहत अथवा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए किसी अन्य विनियम के अनुसार उधारदाता/ आपूर्तिकर्ता को जमानत प्रदान कर सकते हैं। उधारकर्ता, उधार लेने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन जमानत के रूप में कॉर्पोरेट तथा/ अथवा व्यक्तिगत गारंटी भी प्रदान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एडी श्रेणी-I बैंकों को समुद्रपारीय आपूर्तिकर्ता, बैंक तथा वित्तीय संस्था के पक्ष में बैंक गारंटी जारी करने की अनुमति है लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधारभूत (अंडरलाइंग) आयात/ व्यापारिक ऋण, मौजूदा मानदंडों का अनुपालन करता है।

8. रिपोर्टिंग संबंधी अपेक्षाएँ

रिपोर्टिंग संबंधी अपेक्षा तथा क्रियाविधि रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार होगी।


अनुसूची III

[ देखें विनियम 5(ए)(i), तथा 5(बी) ]

भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर के उधारकर्ताओं को उधार देना

पात्र संस्थाएं इस अनुसूची में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर के उधारकर्ताओं को बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल) प्रदान कर सकते हैं।

1. भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी(एडी) समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2004 के अनुसार किसी विदेशी संस्था, जिसमें किसी भारतीय संस्था ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है, को विदेशी मुद्रा में बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीएल) प्रदान कर सकता है।

2. भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएँ भारत के बाहर अपने बैंकिंग कारोबार के सामान्य क्रम में विदेशी मुद्रा ऋण प्रदान कर सकते हैं।

3. समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं. फेमा. 120/ आरबी- 2004 के माध्यम से अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) नियमावली, 2004 के अंतर्गत कोई पात्र संस्था किसी विदेशी संस्था, जिसमें उसने उक्त विनियमों के अनुसार प्रत्यक्ष निवेश किया है, को विदेशी मुद्रा में उधार दे सकती है।

4. भारत में निवास करने वाला कोई व्यक्ति समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार के परामर्श से निर्धारित की गई शर्तों के अधीन अपने समुद्रपारीय आयातक ग्राहक को व्यापार से संबंधित प्रयोजनों से अपने ईईएफ़सी खाते में धारित निधियों में से विदेशी मुद्रा में उधार दे सकता है।

5. भारतीय कंपनियाँ अपनी भारत के बाहर की शाखाओं के कर्मचारियों को व्यक्तिगत प्रयोजनों से विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान कर सकती हैं बशर्ते व्यक्तिगत प्रयोजनों से प्रदान किया गया ऋण उधारदाता की स्टाफ कल्याण योजना / ऋण नियमावली तथा भारत तथा विदेश में निवासी स्टाफ पर यथालागू अन्य शर्तों के अनुसार होगा।


पाद टिप्पणी :

विनियमावली दिनांक 17 दिसम्बर 2018 के सा का नि.1213(अ) द्वारा भारत सरकार के सरकारी राजपत्र के भाग II, खंड-3, उप-खंड(i) में प्रकाशित की गई


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