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विदेशी मुद्रा प्रबंध {भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा (करेंसी) खाता} विनियमावली, 2015

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई - 400 001

अधिसूचना सं.फेमा. 10 (आर)/2015-आरबी

21 जनवरी 2016

विदेशी मुद्रा प्रबंध {भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा (करेंसी) खाता} विनियमावली, 2015

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 9 और धारा 47 की उप-धारा (2) के खंड (ई) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और समय-समय पर यथा संशोधित 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.10/2000-आरबी को अधिक्रमित करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा खाते खोलने, धारण करने तथा रखने के लिए और भारत में किसी निवासी व्यक्ति द्वारा ऐसे खातों में रखी जा सकने वाली राशियों की सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित विनियम निर्मित करता है, अर्थात :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

i) ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध {भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा (करेंसी) खाता} विनियमावली, 2015 कहलएंगे।

ii) वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे ।

2. परिभाषाएं :-

इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो :-

i) "अधिनियम" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) से है;

ii) "प्राधिकृत व्यापारी" का तात्पर्य उक्त अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किये गए व्यक्ति से है;

iii) 'विदेशी मुद्रा खाता’ का तात्पर्य भारत अथवा नेपाल अथवा भूटान की मुद्रा से भिन्न किसी अन्य मुद्रा से है;

iv) 'अनुसूची’ का तात्पर्य इस विनियमावली की अनुसूची से है ;

v) इन विनियमों में प्रयुक्त किंतु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों के क्रमश: वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में दिए गए हैं।

3. भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाता धारण करने पर प्रतिबंध

उक्त अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत निर्मित नियमों अथवा विनियमों में जब तक अन्यथा उपबंधित न हो, भारत में निवासी कोई व्यक्ति विदेशी मुद्रा खाता न खोल सकता है, न धारण कर सकता है अथवा न रख सकता है;

बशर्ते कि भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक की विशेष अथवा सामान्य अनुमति से इन विनियमों के प्रारंभ से पहले यदि कोई विदेशी मुद्रा खाता धारित किया गया अथवा रखा गया हो तो उसे इन विनियमों के अंतर्गत धारित किया गया अथवा रखा गया माना जाएगा:

बशर्ते यह भी कि भारतीय रिज़र्व बैंक, उसे आवेदन किये जाने पर ऐसी शर्तों, जो आवश्यक समझी जाएंगी, के आधार पर भारत में निवासी किसी व्यक्ति को विदेशी मुद्रा खाता खोलने, धारण करने अथवा रखने की अनुमति दे सकता है ।

4. भारत में विदेशी मुद्रा खाता खोलना, धारण करना और रखना

(ए) विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाता :-

भारत में निवासी कोई व्यक्ति, भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास, अनुसूची में विनिर्दिष्ट विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाता योजना की शर्तों के अनुसार विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है जिसे विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाते के नाम से जाना जाएगा।

(बी) निवासी विदेशी मुद्रा खाता :-

(1) भारत में निवासी कोई व्यक्ति, निम्नवत विदेशी मुद्रा में से भारत में प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है अथवा रख सकता है, जिसे निवासी विदेशी मुद्रा (आरएफसी) खाते के नाम से जाना जाएगा -

(ए) भारत से बाहर के अपने नियोक्ता से पेन्शन अथवा अन्य काई अधिवर्षिता अथवा अन्य मौद्रिक लाभ के रूप में प्राप्त राशि; अथवा

(बी) अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (4) में उल्लिखित परिसंपत्तियों के परिवर्तन पर वसूली गयी और भारत में प्रत्यावर्तित राशि; अथवा

(सी) अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (4) में उल्लिखित व्यक्तियों से उपहार अथवा विरासत में प्राप्त अथवा अर्जित राशि; अथवा

(डी) अधिनियम की धारा 9 के खंड (सी) में उल्लिखित, अथवा उनसे उपहार अथवा विरासत के रूप में अर्जित राशि; अथवा

(ई) भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण से जीवन बीमा का कार्य करने के लिए अनुमत भारत में किसी बीमा कंपनी से बीमा पॉलिसी दावे / परिपक्वता / सुपुर्दगी मूल्य के रूप में विदेशी मुद्रा में किए गए भुगतान के रूप में प्राप्त आगम राशि।

(2) उप-विनियम (1) की शर्तों के अनुसार खोले गए अथवा धारण किये गए अथवा रखे गए निवासी विदेशी मुद्रा खातेगत निधियां विदेशी मुद्रा जमाशेष के अंतिम उपयोग के संबंध में सभी प्रतिबंधों से मुक्त होंगी जिनमें किसी भी नाम से अभिहित भारत से बाहर किए जाने वाले निवेशों पर प्रतिबंध शामिल हैं।

(3) निवासी व्यक्तियों को अपने निवासी विदेशी मुद्रा खाते में निवासी रिशतेदारों को "प्रथम अथवा उत्तरजीवी" के आधार पर संयुक्त धारक के रूप में शामिल करने की अनुमति है। तथापि, ऐसा निवासी भारतीय रिश्तेदार संयुक्त निवासी खाताधारक के जीवनकाल में खाते का परिचालन करने के लिए पात्र नहीं होगा।

स्पष्टीकरण – इसउप विनियम के प्रयोजन के लिए "रिश्तेदार" अभिव्यक्ति का तात्पर्य वही है जो कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत धारा 2(77) में दिया गया है।

(सी) निवासी विदेशी मुद्रा (घरेलू) खाता

(1) निवासी कोई व्यक्ति, करेंसी नोटों, बैंक नोटों और यात्री चेकों के रूप में अर्जित विदेशी मुद्रा से भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा (घरेलू) खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है अथवा रख सकता है, जिसे निवासी विदेशी मुद्रा (घरेलू) खाते के नाम से जाना जायेगा:

(ए) भारत से बाहर दौरे के दौरान भारत में किसी कारोबार अथवा किए गए किसी कार्य से उत्पन्न न हुई सेवाओं के लिए किए गए भुगतान; अथवा

(बी) भारत में निवास न करने वाले व्यक्ति, जो भारत के दौरे पर है, द्वारा विधि सम्मत दी गई सेवाओं अथवा दायित्व के लिए किए गए मानदेय के भुगतान अथवा उपहार से ; अथवा

(सी) भारत से बाहर किसी स्थान के दौरे के दौरान मानदेय अथवा उपहार के रूप में प्राप्त; अथवा

(डी) विदेश यात्रा के लिए किसी प्राधिकृत व्यापारी से अर्जित विदेशी मुद्रा राशि में से व्यय न हुई राशि से; अथवा

(ई) किसी रिश्तेदार से उपहार के रूप में प्राप्ति से;

स्पष्टीकरण – इस उप विनियम के प्रयोजन के लिए "रिश्तेदार" अभिव्यक्ति का तात्पर्य वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत धारा 2(77) में दिया गया है।

(एफ़) माल/सेवाओं के निर्यात, अथवा रॉयल्टी, मानदेय अथवा किसी अन्य विधि सम्मत तरीके से किए गए अर्जन से;

(जी) निवासी खाताधारक द्वारा धारित शेयरों के भारत सरकार द्वारा अनुमोदित निक्षेपागार रसीद योजना, 2014 के अंतर्गत ADR/GDR में परिवर्तन स्वरूप विनिवेश से प्राप्त आगम राशि।;

(एच) भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण से जीवन बीमा का कार्य करने के लिए अनुमत भारत में किसी बीमा कंपनी से बीमा पॉलिसी दावे / परिपक्वता / सुपुर्दगी मूल्य के रूप में विदेशी मुद्रा में किए गए भुगतान के रूप में प्राप्त आगम राशि से।

(2) इस खाते से विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियम, 2000 के अंतर्गत चालू खाता लेनदेन के लिए भुगतानों हेतु और विदेशी मुद्रा प्रबंध (अनुमत पूंजी खाता लेनदेन) विनियमावली, 2000 के उपबंधों के अंतर्गत अनुमत पूंजी खाता लेनदेन के लिए राशि नामे की जा सकेगी।

(3) यह खाता चालू खाते के रूप में रखा जाएगा और उस पर कोई ब्याज देय नहीं होगा।

(4) इस खाते में जमाशेष की कोई उच्चतम सीमा नहीं होगी।

(डी) विशेष आर्थिक क्षेत्र की कोई यूनिट

किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित कोई यूनिट भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकती है और बनाए रख सकती है, बशर्ते कि,

(ए) विशेष आर्थिक क्षेत्र की यूनिट द्वारा प्राप्त सभी विदेशी मुद्रा निधियाँ ऐसे खाते में जमा की जाएंगी,

(बी) भारत में रुपये के बदले खरीदी गई विदेशी मुद्रा रिज़र्व बैंक की पूर्वानुमति के बिना इस खाते में जमा नहीं की जा सकेगी,

(सी) विशेष आर्थिक क्षेत्र की यूनिट द्वारा भारत में निवासी व्यक्तियों अथवा अन्य के साथ किए गए सदाशयी व्यापारिक लेनदेनों के लिए इस खाते की निधियों का उपयोग किया जा सकेगा,

(डी) समय-समय पर यथा संशोधित 3 मई 2000 की भारत सरकार की अधिसूचना सं. जीएसआर 381 (ई) की अनुसूची III की मद 1(ii) के सिवाय, नियम 5 के अंतर्गत लगाए गए प्रतिबंधों से इस खाते के जमा शेष मुक्त/छूट प्राप्त रहेंगे।

बशर्ते कि इस खाते में धारित निधियाँ विशेष आर्थिक क्षेत्र की यूनिट से भिन्न भारत में निवासी किसी व्यक्ति अथवा संस्था (कंपनी) को किसी भी तरीके से न तो उधार दी जाएंगी और न ही उपलब्ध कराई जाएंगी ।

(ई) डायमंड डॉलर खाता (DDAs)

समय-समय पर भारत सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट एवं लागू विदेश व्यापार नीति में दिये गए पात्रता मानदंडों और समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशा निर्देशों को पूरा करने वाली फ़र्मों और कंपनियों को भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक अनुसूची-II में विनिर्दिष्ट डायमंड डॉलर खाते की शर्तों के अनुसार भारत में डायमंड डॉलर खाते खोलने, धारित करने और बनाए रखने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

(एफ़) निर्यातक

भारत में निवासी कोई व्यक्ति निर्यातक होने के कारण जिसने भारत से बाहर कन्स्ट्रकशन कांट्रैक्ट अथवा तैयार परियोजना का कार्य हाथ में लिया है, अथवा भारत से सेवाओं अथवा इंजीन्यरिंग माल को आस्थगित भुगतान की शर्तों पर निर्यात करता है वह भारत में किसी बैंक के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और बनाए रख सकता है, बशर्ते कि -

(ए) विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात) विनियमावली 2015 के अंतर्गत संविदा/परियोजना का कार्य करने/माल अथवा सेवाओं के निर्यात के लिए अनुमोदन प्राप्त किया गया हो, और

(बी) अनुमोदन पत्र में विनिर्दिष्ट शर्तों का सम्यक रूप से पालन किया गया हो।

(जी) अन्य मामले

(1) भारत से बाहर निगमित किसी शिपिंग अथवा एयरलाइन कंपनी के भारतीय एजेंट ऐसी एयरलाइन अथवा शिपिंग कंपनी के भारत में स्थानीय खर्चों को पूरा करने के लिए भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है;

बशर्ते कि, ऐसे खाते में जमा की जाने वाली राशि या तो भारत में माल भाड़ा अथवा यात्री किराया के रूप में प्राप्त राशि हुई हो अथवा भारत से बाहर की प्रिसिपल (कंपनी) से प्राप्त हुई हो;

(2) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी भारत में जहाज-कर्मी दल / क्रू प्रबंधन एजेंसियों को उनके सामान्य कारोबार संबंधी लेनदेनों के प्रयोजन के लिए भारत में ब्याज रहित विदेशी मुद्रा खाता खोलने अथवा बनाए रखने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

(3) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में स्थापित परियोजना कार्यालयों के लिए 3 मई 2000 की विदेशी मुद्रा प्रबंध (शाखा अथवा कार्यालय अथवा अन्य कारोबारी स्थान की स्थापना) विनियमावली, 2000 के अनुसार भारत में परियोजना के कार्यान्वयन के लिए ब्याज रहित एक अथवा अनेक विदेशी मुद्रा खाता/खाते खोलने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

(4) 3 मई 2000 की विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2000 के अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मार्ग से विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय कंपनी भारत में प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खात खोल सकती है और बनाए रख सकती है।

बशर्ते कि भारतीय निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा में आसन्न व्यय किए जाने हों और एतदर्थ खोला गया खाता संबन्धित अपेक्षा पूरी होते ही बंद कर दिया जाएगा किन्तु किसी भी हालत में ऐसा खाता खोलने की तारीख से 6 महीने से अधिक अवधि के लिए परिचालनीय नहीं होगा।

(5) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत भारत में कोई प्राधिकृत व्यापारी अंतरराष्ट्रीय सेमीनारों/ सम्मेलनों/ कोन्वेंशनों, आदि के आयोजकों को ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए विदेश से विशेष आमंत्रितों को भुगतान करने सहित प्रतिनिधियों से शुल्क प्राप्त करने और भुगतान के लिए भारत में विदेशी मुद्रा खाता खोलने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

5. भारत से बाहर विदेशी मुद्रा खाता खोलना, धारण करना और रखना :-

(ए) प्राधिकृत व्यापारियों अथवा उनकी शाखाओं के खाते

(1) भारत का कोई प्राधिकृत व्यापारी उक्त अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत निर्मित नियमों अथवा विनियमों अथवा जारी निदेशों के उपबंधो के अनुसार विदेशी मुद्रा कारोबार और उससे संबंधित अन्य प्रासंगिक मामलों हेतु विदेशी मुद्रा खाता भारत से बाहर अपनी शाखा, प्रधान कार्यालय अथवा प्रतिनिधि के पास खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है।

(2) भारत में निगमित अथवा गठित किसी बैंक की भारत से बाहर की कोई शाखा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा, समय-समय पर, जारी निदेशों अथवा मार्गदर्शी सिध्दांतों और जहां शाखा स्थित है, उस देश के विनियामक प्राधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में सामान्य बैंकिंग कारोबार करने के उद्देश्य से विदेशी मुद्रा खाता भारत से बाहर के बैंक के पास खोल सकता है, धारण कर सकता है तथा रख सकता है।

(बी) भारत से बाहर के अपने कार्यालय/शाखा/प्रतिनिधि के नाम में कंपनी/फ़र्म द्वारा खाता रखना

भारत में पंजीकृत अथवा निगमित कोई फ़र्म अथवा कंपनी अथवा कॉर्पोरेट बॉडी (जिसे इसके बाद "भारतीय कंपनी" कहा गया है) भारत से बाहर स्थापित अपने (ट्रेडिंग अथवा नॉन ट्रेडिंग) कार्यालय अथवा अपनी शाखा अथवा भारत से बाहर पदापित अपने प्रतिनिधि के नाम में ऐसे कार्यालय अथवा शाखा अथवा प्रतिनिधि द्वारा किए जाने वाले सामान्य कारोबारी परिचालनों के लिए भारत से विप्रेषण करने हेतु विदेशी मुद्रा खाता भारत से बाहर के बैंक में खोल सकती है/धारित कर सकती है और बनाए रख सकती है; बशर्ते कि -

(ए) भारतीय कंपनी की सामान्य कारोबारी गतिविधियों के लिए समुद्रपारीय शाखा / कार्यालय की स्थापना की गई हो, अथवा प्रतिनिधि को पदापित किया गया हो ;

(बी) इस उप विनियम के अंतर्गत भारतीय कंपनी द्वारा ऐसे सभी खातों को किसी एक लेखा वर्ष में किए गए कुल विप्रेषण निम्नलिखित से अधिक नहीं होंगे,

  1. भारतीय कंपनी द्वारा विगत 2 वित्तीय वर्षों के दौरान औसत वार्षिक बिक्री / आय अथवा पण्यावर्त के 15% अथवा उसकी निवल मालियत के 25% तक, में से जो भी अधिक हो, जहां विप्रेषण शाखा अथवा कार्यालय अथवा प्रतिनिधि के प्रारम्भिक खर्चों को पूरा करने के लिए हों ; और

  2. विगत 2 वित्तीय वर्षों के दौरान औसत वार्षिक बिक्री / आय अथवा पण्यावर्त के 10% जहां विप्रेषण शाखा अथवा कार्यालय अथवा प्रतिनिधि के आवर्ती खर्चों को पूरा करने के लिए हों ;

(सी) समुद्रपारीय शाखा/कार्यालय/प्रतिनिधि उक्त अधिनियम, उसके अंतर्गत निर्मित नियमों अथवा विनियमों का उल्लंघन करते हुए कोई संविदा अथवा करार नहीं करेंगे ;

(डी) इस प्रकार खोले, धारित अथवा रखे गए खाते निम्नवत बंद कर दिये जाएंगे,

  1. यदि खाता खोलने से 6 माह के भीतर समुद्रपारीय शाखा/कार्यालय की स्थापना नहीं होती है, अथवा

  2. समुद्रपारीय शाखा / कार्यालय के बंद होने से एक माह के भीतर, अथवा

  3. जहां प्रतिनिधि 6 माह तक पदापित न हो,

और ऐसे खाते में धारित जमा भारत में प्रत्यावर्तित की जाएगी;

बशर्ते यह कि प्रथम परंतुक के खंड (बी) में अंतर्विष्ट प्रतिबंध निम्न दशाओं में लागू नहीं होंगे –

  1. इस उप विनियम के अंतर्गत किए गए विप्रेषण भारतीय कंपनी के विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते (EEFC) खाते की निधियों से किए गए हों, अथवा

  2. 100% निर्यातोन्मुख यूनिट अथवा निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (EPZ) अथवा हार्डवेयर टेक्नालजी पार्क (HTP) अथवा सॉफ्टवेयर टेक्नालजी पार्क (STP) की यूनिट द्वारा, यूनिट की स्थापना से 2 वर्षों के भीतर, समुद्रपारीय शाखा/कार्यालय की स्थापना की जाती है अथवा प्रतिनिधि पदापित किया जाता है;

स्पष्टीकरण : इस उप विनियम के प्रयोजन के लिए

  1. समुद्रपारीय शाखा/ कार्यालय / प्रतिनिधि के सामान्य कारोबारी परिचालनों के लिए कार्यालय उपकरण और अन्य परिसंपत्तियों के अर्जन के लिए की गई खरीद को पूंजी खातेगत लेनदेन नहीं माना जाएगा;

  2. समुद्रपारीय शाखा / कार्यालय / प्रतिनिधि द्वारा 5 वर्षों से अनधिक अवधि की लीज़ के सिवाय अचल संपत्ति का अंतरण अथवा अर्जन विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अर्जन और अंतरण) विनियमावली, 2015 के अधीन होगा।

(सी) निर्यातक

भारत में निवासी कोई व्यक्ति निर्यातक होने के कारण जिसने भारत से बाहर कन्स्ट्रकशन कांट्रैक्ट अथवा तैयार परियोजना का कार्य हाथ में लिया है, अथवा भारत से सेवाओं अथवा इंजीन्यरिंग माल को आस्थगित भुगतान की शर्तों पर निर्यात करता है वह भारत से बाहर किसी बैंक के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और बनाए रख सकता है, बशर्ते कि -

(ए) विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात) विनियमावली 2015 के अंतर्गत संविदा/परियोजना का कार्य करने/माल अथवा सेवाओं के निर्यात के लिए अनुमोदन प्राप्त किया गया हो, और

(बी) अनुमोदन पत्र में विनिर्दिष्ट शर्तों का सम्यक रूप से पालन किया गया हो।

(डी) समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए

कोई भारतीय पार्टी समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के प्रयोजन से विदेश में विदेशी मुद्रा खाता निम्नलिखित शर्तों के अंतर्गत खोल सकती है, धारण कर सकती है और बनाए रख सकती है :

(ए) भारतीय पार्टी विदेशी समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2004 के अनुसार समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए पात्र हो।

(बी) मेजबान देश के विनियम यह विनिर्दिष्ट करते हों कि ऐसे देश में किया जाने वाला निवेश नामित खाते के जरिए किया जाए।

(सी) मेजबान देश के विनियमों के अनुसार खाता खोला जाएगा, धारित किया जाएगा और रखा जाएगा।

(डी) भारतीय पार्टी द्वारा ऐसे खाते में प्रेषित विप्रेषणों का उपयोग समुद्रपारीय संयुक्त उद्यम/पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए ही होगा।

(ई) उक्त खाते में सहायक कंपनी से प्राप्त लाभांश और/अथवा अन्य हकदारीगत राशि खाते में जमा होने से 30 दिनों के भीतर भारत में प्रत्यावर्तित की जाएगी।

(एफ़) भारतीय पार्टी उक्त खाते से किए गए नामे और जमा के ब्योरे वार्षिक आधार पर नामित प्राधिकृत व्यापारी बैंक को सांविधिक लेखा-परीक्षक के इस आशय के प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत करेगी जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि खाते का रख-रखाव मेजबान देश के क़ानूनों और यथा लागू मौजूदा फेमा विनियमों/उपबंधों के अनुसार किया गया है।

(जी) इस प्रकार खोले गए खाते को संयुक्त उद्यम/पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी से विनिवेश अथवा उसके बंद होते ही अथवा ऐसा होने से 30 दिनों के भीतर बंद कर दिया जाएगा।

स्पष्टीकरण – इस विनियम के प्रयोजन के लिए "भारतीय पार्टी" अभिव्यक्ति का तात्पर्य वही होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम), विनियंमावली, 2004 में दिया गया है।

(ई) अन्य मामले

(1) बाह्य वाणिज्यिक उधार लेने अथवा अमेरिकी निक्षेपागार रसीद (ADR) अथवा वैश्विक निक्षेपागार रसीद (GDR) जारी करने संबंधी शर्तों का अनुपालन करके संसाधन के रूप में जुटाई गई निधियाँ उनके अंतिम उपयोग होने अथवा भारत में प्रत्यावर्तित होने तक भारत से बाहर किसी बैंक के पास विदेशी मुद्रा खाते में जमा के रूप में रखी जा सकती हैं।

(2) भारत में निगमित जहाजरानी अथवा एयरलाइन कंपनी अपने सामान्य कारोबारी लेनदेन के प्रयोजन हेतु भारत से बाहर के बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकती है, धारण कर सकती है और रख सकती है।

(3) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अथवा भारतीय साधारण बीमा निगम (GIC) और उसकी सहायक कंपनियाँ अपने द्वारा किए जाने वाले बीमा कारोबार से संबन्धित व्यय को पूरा करने और भारत से बाहर बीमा प्रीमियम प्राप्त करने के लिए विदेशी मुद्रा खाता भारत से बाहर के बैंक में खोल सकती है, धारण कर सकती है और रख सकती है।

(4) निवासी व्यक्ति उदारीकृत विप्रेषण योजना (जिसे इसके बाद "योजना" कहा गया है) के अंतर्गत विप्रेषण के लिए भारत से बाहर के बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है, और रख सकता है। इस योजना के अंतर्गत पात्र सभी विप्रेषणों से संबन्धित अथवा उत्पन्न होने वाले सभी लेनदेनों के लिए इस खाते का प्रयोग किया जा सकता है।

(5) भारत में निवासी कोई व्यक्ति जो भारत से बाहर किसी प्रदर्शनी/व्यापारिक मेले में भाग लेने गया है, वह प्रदर्शनी / व्यापार मेले में प्रदर्शित माल की बिक्रीगत आगम राशि को जमा करने के लिए भारत से बाहर के बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है:

बशर्ते कि प्रदर्शनी / व्यापार मेले की समाप्ति से एक माह के भीतर ऐसी राशि सामान्य बैंकिंग चैनल से भारत में प्रत्यावर्तित की जाएगी।

(6) भारत में निवासी कोई व्यक्ति जो भारत से बाहर शिक्षा प्राप्त करने गया है, वह भारत से बाहर रहने के दौरान भारत से बाहर के किसी बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है।

बशर्ते कि इस खाते में भारत से प्रेषित सभी राशियां उक्त अधिनियम, उसके अंतर्गत निर्मित नियमावली और विनियमावली के अनुसार जमा की जाएंगी।

बशर्ते यह भी कि उसके द्वारा शिक्षा पूरी करने के बाद भारत वापस आने पर ऐसे खाते के संबंध में यह समझा जाएगा कि वह उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत खोला गया था।

(7) भारत में निवासी कोई व्यक्ति जो किसी दूसरे देश में दौरे पर है वह भारत से बाहर रहने के दौरान भारत से बाहर के किसी बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है बशर्ते उसके भारत वापस आने पर संदर्भित खाते में जमा शेष भारत में प्रत्यावर्तित किया जाएगा।

(8)(i) किसी दूसरे देश का नागरिक, जो भारत में निवासी है, जो विदेशी कंपनी का कर्मचारी है अथवा भारत का नागरिक है, जो विदेशी कंपनी में भारत से बाहर नियोजित है एवं दोनों में से किसी भी मामले में कर्मचारी ऐसी विदेशी कंपनी के भारत में स्थित कार्यालय/ शाखा/ अनुषंगी कंपनी/ज्वाइंट वेंचर/कंपनी समूह में प्रतिनियुक्ति पर है, भारत से बाहर के किसी बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है, धारण कर सकता है और रख सकता है एवं विदेशी कंपनी के भारत में स्थित कार्यालय/शाखा/अनुषंगी कंपनी/ज्वाइंट वेंचर/कंपनी समूह को दी गई अपनी सेवाओं के बदले उसे मिलने वाला पूरा वेतन ऐसे खातों में प्राप्त कर सकता है, बशर्ते भारत में लागू कर का भुगतान किया जाए।

(ii) दूसरे देश का नागरिक जो भारत में निवासी है, वह भारत में निगमित कंपनी का कर्मचारी होने के कारण भारतीय कंपनी को दी गई सेवाओं के लिए भारत में रुपये में प्राप्त पूरा वेतन भारत से बाहर के बैंक में खोले गए, धारण किए गए और रखे गए विदेशी मुद्रा खाते में विप्रेषित कर सकता है बशर्ते भारत में लागू करों का भुगतान किया जाए।

स्पष्टीकरण :- इस उप विनियम में “कंपनी” अभिव्यक्ति में “सीमित देयता भागीदारी फर्म’ (Limited Liability Partnership) भी शामिल है जिसे सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 में परिभाषित किया गया है।

6. खातों के प्रकार :-

जब तक कि इन विनियमों में अन्यथा उल्लेख न किया गया हो, इन विनियमों के अंतर्गत भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोला जा सकता है, धारण किया जा सकता है और रखा जा सकता है :

ए) जहां खाता धारक कोई व्यक्ति हो, उन मामलों में चालू अथवा बचत अथवा मीयादी जमा खातों के रूप में तथा अन्य मामलों में चालू खाता अथवा मीयादी जमा खातों के रुप में;

बशर्ते कि विनयम 4(ए) में संदर्भित विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाता (EEFC Account), समय-समय पर, रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट रीति से खोला जा सकेगा, धारण किया जा सकेगा अथवा रखा जा सकेगा।

बी) ऐसा खाता खोलने, धारण करने और रखने के लिए पात्र व्यक्ति के नाम में एकल अथवा संयुक्त रूप से, इसे खोला जा सकता है, धारण किया जा सकता है और रखा जा सकता है ।

7. खाताधारक की मृत्यु के बाद, खाते से विप्रेषण :-

विदेशी मुद्रा खाता धारक की मृत्यु हो जाने पर –

ए) प्राधिकृत व्यापारी, जिसके पास ऐसा खाता रखा गया है, वह भारत से बाहर के निवासी नामित व्यक्ति को मृत खाताधारक के खाते में से उसके शेयर अथवा हक़दारी की सीमा तक निधियां विप्रेषित कर सकता है ।

बी) भारत में निवासी नमिती, जो मृतक की विदेश में देयताओं को पूरा करने के लिए अपने हिस्से में से भारत से बाहर निधियां विप्रेषित करने का इच्छुक है, वह ऐसे विप्रेषण के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक को आवेदन कर सकता है।

सी) विनियम 5 के अनुसार भारत से बाहर रखे गए ऐसे खाते का निवासी नामिती संदर्भित खाते को बंद कर देगा और बैंकिंग चैनल से भारत में आगम राशि को वापस लाएगा।

8. विदेशी मुद्रा खाते रखने वाले प्राधिकृत व्यापारियों की जिम्मेदरियां :-

कोई प्राधिकृत व्यापारी जो विदेशी मुद्रा खाता रखता है, वह -

ए) समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किये जाने वाले निदेशों का अनुपालन करेगा; तथा

बी) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथा निर्धारित आवधिक विवरणी अथवा विवरण, यदि कोई हो, प्रस्तुत करेगा

(बी.पी. कानूनगो)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


अनुसूची ।
{विनियम (4) का उप-विनियम (ए) देखें}

विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाता (EEFC) योजना

1. विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में विदेशी मुद्रा जमा करने की सीमा

(1) भारत में निवासी कोई व्यक्ति नीचे विनिर्दिष्ट किए अनुसार अर्जित शत-प्रतिशत (100%) विदेशी मुद्रा किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास रखे गए विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में जमा कर सकता है:

  1. रिज़र्व बैंक को दिए गए वचनपत्र के अनुसरण में अथवा विदेशी मुद्रा में लिए गए ऋण अथवा भारत के बाहर से प्राप्त निवेश अथवा खातेधारक द्वारा विशिष्ट दायित्वों को पूरा करने के रूप में प्राप्त विप्रेषणों को छोडकर बैंकिंग चैनल से प्राप्त आवक विप्रेषण;

  2. 100% निर्यातोन्मुख इकाई अथवा (ए) निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (EPZ) अथवा (बी) सॉफ्टवेयर टेक्नालोजी पार्क (STP) अथवा (सी) इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर टेक्नालोजी पार्क की यूनिट द्वारा इसी प्रकार की यूनिट अथवा घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (DTA) की यूनिट को की गई माल की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान और विशेष आर्थिक क्षेत्र की यूनिट को घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र की यूनिट द्वारा की गई माल की आपूर्ति के लिए भी विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान;

  3. समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात) विनियमावली, 2015 के अनुसार प्रदान किए गए अनुमोदन के अनुसार काउंटर ट्रेड प्रयोजन के लिए प्राधिकृत व्यापारी के पास रखे गए खाते में निर्यातक द्वारा प्राप्त भुगतान;

  4. माल और सेवाओं के निर्यात के लिए किसी निर्यातक द्वारा प्राप्त अग्रिम विप्रेषण;

  5. बैंक फॉर फ़ॉरेन इकनॉमिक अफेयर्स, मॉस्को के भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के खाते में अमेरिकी डॉलर में रखी स्टेट क्रेडिट की चुकौती स्वरूप निधियों में से भारत से माल और सेवाओं के किए गए निर्यात हेतु प्राप्त भुगतान;

  6. व्यक्तिगत क्षमता में दी गई पेशेवर सेवाओं के लिए निदेशक शुल्क, परामर्श शुल्क, व्याख्यान शुल्क, मानदेय और इसी प्रकार की अन्य आमदनी को शामिल करते हुए पेशेवर आय(अर्जन)।

(2) उप–पैराग्राफ (1) के प्रयोजन के लिए, अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड से प्राप्त भुगतान जिसकी प्रतिपूर्ति विदेशी मुद्रा में की जाएगी, उसे बैंकिंग चैनल से प्राप्त विप्रेषण माना जाएगा।

2. विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में अनुमत जमा

विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में निम्न प्रकार की जमा की जा सकती है, अर्थात –

  1. पैराग्राफ (1) के उपबंधों के अंतर्गत विदेशी मुद्रा के प्राप्तकर्ता द्वारा प्राप्त आवक विप्रेषण / भुगतान

  2. उक्त खाते में रखी निधियों पर अर्जित ब्याज ;

  3. उक्त खाते से पहले आहरित, किन्तु अप्रयुक्त विदेशी मुद्रा फिर से जमा करना;

  4. पैराग्राफ 3 के खंड (iv) के अनुसार ऋण/अग्रिम की अदायगी स्वरूप खाताधारक के आयातक से प्राप्त राशि ।

  5. निवासी खाताधारक द्वारा धारित शेयरों के भारत सरकार द्वारा अनुमोदित निक्षेपागार रसीद योजना, 2014 के अंतर्गत ADR/GDR में परिवर्तन स्वरूप विनिवेश से प्राप्त आगम राशि।

3. विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते से अनुमत नामे

विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते से निम्नलिखित नामे किए जा सकते हैं, अर्थात –

  1. विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियमावली, 2000 के अंतर्गत चालू खाता लेनदेन और विदेशी मुद्रा प्रबंध (अनुमत पूंजी खाता लेनदेन), नियमावली 2000 के अंतर्गत अनुमत पूंजी खातेगत लेनदेनों संबंधी भारत से बाहर भुगतान के लिए।

  2. 100% निर्यातोन्मुख इकाई अथवा (ए) निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (EPZ) अथवा (बी) सॉफ्टवेयर टेक्नालजी पार्क (STP), (सी) इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर टेक्नालजी पार्क की यूनिट से खरीदे गए माल की कीमत के रूप में विदेशी मुद्रा में भुगतान।

  3. केंद्र सरकार की यथा लागू निर्यात-आयात नीति के उपबंधों के अनुसार सीमाशुल्क का भुगतान।

  4. ऐसे खाताधारक निर्यातक द्वारा भारत से बाहर के आयातक को व्यापार से संबन्धित ऋण/अग्रिम हेतु बशर्ते विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा में उधार लेना और उधार देना), विनियमावली 2000 का अनुपालन होता हो।

  5. हवाई किराए और होटल व्यय के लिए भुगतान सहित माल / सेवाओं की आपूर्ति के लिए भारत में निवासी किसी व्यक्ति को विदेशी मुद्रा में किए गए भुगतान।

4. विविध

i) विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (EEFC) खाते में रखी निधियों से रुपये में आहरण करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, इस प्रकार रुपये में आहारित राशि को इस खाते में फिर से जमा नहीं किया जा सकता है।

ii) ऐसे खाते धारकों द्वारा रखे गए खातों के लिए अलग सीरीज़ की चेक-बुकें जारी की जाएं जिनमें चेकों के ऊपरी हिस्से में "EEFC खाता" अंकित हो, और ऐसे चेकों का भुगतान करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि खाते धारक द्वारा किए जाने वाले भुगतान के लिए क्या ये चेकें जारी करना संबन्धित विनियमावली के अंतर्गत अनुमत है।

iii) निवासी व्यक्तियों को इस बात की अनुमति है कि वे निवासी रिश्तेदारों को संयुक्त खाता धारक के रूप मे विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में "प्रथम अथवा उत्तरजीवी" के आधार पर शामिल कर सकते है, हालांकि ऐसे निवासी भारतीय रिश्तेदार निवासी खाताधारक के जीवनकाल में खाते का परिचालन करने के लिए पात्र नहीं होंगे।

स्पष्टीकरण: इस उप विनियम के प्रयोजन के लिए "रिश्तेदार" का तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(77) में यथा परिभाषित "रिश्तेदार" से है।


अनुसूची ।।
(विनियम 4 का उप-विनिमय (ई) देखें)
डायमंड डॉलर खाता (डीडीए) योजना

1. फर्म और कंपनियाँ निम्नलिखित शर्तों पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के पास डायमंड डॉलर खाता (डीडीए) खोल तथा बनाये रख सकते हैं :-

(ए) नियार्तकों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी विदेश व्यापार नीति में निर्धारित पात्रता मानदण्डों का अनुपालन करना चाहिए।

(बी) डायमंड डॉलर खाता (डीडीए) निर्यातक के नाम में खोला जाए और उसे केवल अमरीकी डॉलर में बनाए रखा जाए।

(सी) यह खाता केवल चालू खाते के रूप में होगा और खाते में धारित शेष पर ब्याज का भुगतान नहीं किया जाएगा।

(डी) खाताधारक के डायमंड डॉलर खातों के बीच किसी अंतर-खाता अंतरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

(ई) किसी निर्यातक फर्म/कंपनी को पाँच से अधिक डायमंड डॉलर खातों को खोलने और उन्हें बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

(एफ) खाते में धारित शेष, आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) अपेक्षाओं के अधीन होंगे।

(जी) विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (इइएफसी) खातों को छोड़कर, भारत अथवा विदेश में बैंकों में विदेशी मुद्रा खाते रखने वाली निर्यातक फर्में और कंपनियाँ डायमंड डॉलर खाते खोलने के लिए पात्र नहीं हैं।

2. अनुमत जमा

i. अमरीकी डॉलर में प्राप्त लदान- पूर्व और लदानोत्तर वित्त की राशि।

ii. कच्चे, कटे हुए, पॉलिस किए हुए हीरों और हीरे जड़ित आभूषणों के लदान से प्राप्त निर्यात आय की वसूली राशि।

iii. कच्चे, कटे हुए, पॉलिस किए हुए हीरों की स्थानीय बिक्री से अमरीकी डॉलर में प्राप्त आय की वसूली राशि।

3. अनुमत नामे

i) समुद्रपारीय/स्थानीय स्रोतों से कच्चे हीरों के आयात/क्रय के लिए भुगतान।

ii) कटे हुए और पॉलिस किए हुए हीरों, रंगीन रत्नों और सादे स्वर्ण आभूषणों की स्थानीय स्रोतों से खरीद के लिए भुगतान।

iii) समुद्रापारीय/नामित एजेंसियों से स्वर्ण के आयात/क्रय के लिए भुगतान तथा बैंक से अमरीकी डॉलर में लिए गए ऋणों की चुकौती।

iv) निर्यातक के रुपया खाते में अंतरण।

उपर्युक्त लेनदेन समय-समय पर भारत सरकार द्वारा जारी विदेश व्यापार नीति के प्रावधानों के अधीन हैं/होंगे ।

4. आवेदन प्रक्रिया:-

डायमंड डॉलर खाता खोलने के लिए निर्यातक फर्म/कंपनी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक को संलग्न फार्मेट में आवेदन करेगी। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक प्रत्येक लाइसेंसिंग वर्ष के अंत में (अप्रैल-मार्च) फर्म/कंपनी के पिछले कार्य निष्पादन रिकार्ड का आकलन करें। अगर कोई फर्म/कंपनी पात्रता मानदण्डों को पूरा नहीं करती है तो खाता तुरंत बंद कर दिया जाए।

डायमंड डॉलर खाता खोलने के लिए आवेदनपत्र

शाखा प्रबंधक

(प्राधिकृत व्यापारी बैंक/शाखा का नाम और पता)

महोदय,

हम हीरे/ रंगीन रत्नों/ हीरों अथवा रंगीन रत्नों से जड़े हुए आभूषणों/ सोने के सादे आभूषणों के आयात/ निर्यात में कम-से-कम दो वर्षों के पिछले कार्य निष्पादन रिकार्ड सहित कच्चे अथवा कटे हुए अथवा पॉलिस किए हुए हीरों/ बहुमूल्य धातु वाले सादे आभूषणों, मीनाकारी और/ अथवा हीरों और/ अथवा अन्य रत्न-जटित अथवा बिना हीरे अथवा अन्य रत्न-जटित की खरीद/बिक्री का कार्य करते हैं तथा पिछले तीन लाइसेंन्सिंग वर्षों के दौरान हमारा 3 करोड़ रुपए अथवा उससे अधिक का औसत वार्षिक पण्यावर्त रहा है।

2. हम वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी क्रियाविधियों की पुस्तिका (हैंडबुक आफ प्रोसिजर्स)(संबंधित खंड संख्या का उल्लेख करें) के साथ पठित भारत सरकार की विदेश व्यापार नीति (अवधि अर्थात 2009-2014) के प्रावधानों (संबंधित प्रावधान का उल्लेख करें) के अनुसार आपके बैंक में डायमंड डॉलर खाता योजना के तहत चालू खाता / खाते खोलना चाहते हैं।

3. संबंधित ब्योरे नीचे प्रस्तुत हैं :

i) फर्म/कंपनी का नाम

ii) पंजीकृत कार्यालय का पता

iii) मुख्य व्यवसाय

iv) आइई कूट सं.

v) पिछले दो वर्षों का वार्षिक पण्यावर्त (सनदी लेखाकार का प्रमाणपत्र संलग्न करें)

vi) विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाते के ब्योरे, यदि कोई हो

4. हम पुष्टि करते हैं कि हमारा भारत अथवा विदेश में किसी बैंक में विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाते को छोड़कर कोई विदेशी मुद्रा खाता नहीं है ।

5. हम घोषित करते हैं कि हम आपकी शाखा में खोलने के लिए एक प्रस्तावित खाते सहित 5 डायमंड डॉलर खाते से अधिक खाते नहीं रखते हैं ।

6. हम घोषित करते हैं कि हम न तो भारतीय रिज़र्व बैंक की निर्यातक सतर्कता सूची में है और न ही भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लि. (ईसीजीसी) की चूककर्ताओं की सूची में हैं।

7. हम समय-समय पर बनाये गये / बनाये जाने वाले डायमंड डॉलर खाता योजना के नियमों और आपके बैंक में डायमंड डॉलर खाता खोलने और बनाये रखने के लिए निर्धारित शर्तों और भारतीय रिज़र्व बैंक/भारत सरकार के किन्हीं अन्य विदेशी मुद्रा/विदेश व्यापार विनियमों का पालन करने का वचन देते हैं ।

हम आपसे अनुरोध करते हैं आप फर्म/कंपनी के नाम में डायमंड डॉलर खाता खोलें ।

(फर्म/कंपनी के प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर)

नाम:

पदनाम:

फर्म/कंपनी की मुहर:

दिनांक:

स्थान:


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