महामहिम, भारत की राष्ट्रपति, माननीय महाराष्ट्र के गवर्नर, माननीय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, माननीय केंद्रीय संचार मंत्री, माननीय महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, विशिष्ट अतिथिगण, मीडिया के प्रतिनिधि, और भारतीय रिज़र्व बैंक के मेरे सहयोगी - भूतपूर्व और वर्तमान।
2. इस महत्वपूर्ण अवसर पर, जो भारतीय रिज़र्व बैंक की 90वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, आप सभी का स्वागत करना मेरा सौभाग्य है। भारत की माननीय राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति से हम अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने इस अवसर के महत्व को बहुत बढ़ा दिया है और हमें अत्यधिक प्रोत्साहित किया है। मैं उनके व्यस्त कार्यक्रम से हमारे लिए समय निकालने हेतु उनका आभार व्यक्त करता हूँ। मैं इस समारोह में उनका हार्दिक स्वागत करता हूँ। मैं महाराष्ट्र के महामहिम गवर्नर, माननीय केंद्रीय संचार मंत्री, तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों का भी स्वागत करता हूँ। मैं उन सभी अन्य गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों का भी हार्दिक स्वागत करता हूँ, जिन्होंने हमारे साथ यहाँ उपस्थित होने के लिए अपना कीमती समय निकाला है।
3. नब्बे वर्ष पूर्व, भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना भारत की मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता के संरक्षक के रूप में कार्य करने के उद्देश्य से की गई थी। इन नौ दशकों के दौरान, हमने बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को ढाला है और विकसित हुए हैं; साथ ही हम अपने राष्ट्र की आर्थिक प्रगति और उसके लोगों के कल्याण के प्रति सदैव समर्पित रहे हैं।
4. ठीक एक वर्ष पूर्व, जब हमने अपने 90वें वर्ष में प्रवेश किया था, तब हमने एक उद्घाटन समारोह के साथ उत्सवों का शुभारंभ किया था, जिसे माननीय प्रधानमंत्री ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से सुशोभित किया था। पूरे वर्ष के दौरान, हमने 'उभरती प्रौद्योगिकी' और 'डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना' जैसे विषयों पर कई उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया। 'वैश्विक दक्षिण' के केंद्रीय बैंकों के सम्मेलन ने वैश्विक समुदाय में भारत के 'विचार-नेतृत्व' को सुदृढ़ किया, और भविष्य में हमारे समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा अवसरों के प्रति हमारी समझ को और अधिक गहरा किया।
5. आम जनता के साथ जुड़ने के उद्देश्य से, हमने देशव्यापी पहल का आयोजन किया; इनमें 'आरबीआई@90 क्विज़' जैसी प्रतियोगिताएँ शामिल थीं, जिनमें पूरे देश के विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। हमने एक कला प्रतियोगिता आयोजित की, जिसमें भारत की कलात्मक परंपराओं की रचनात्मकता और विरासत का उत्सव मनाया गया। खेल आयोजन, टाउन हॉल बैठकें, वृक्षारोपण अभियान और रक्तदान शिविरों ने हमारे कर्मचारियों और समुदायों को एक साथ जोड़ा।
6. इन सभी आयोजनों ने सहयोग और सेवा की उस भावना को और मज़बूत किया, जो रिज़र्व बैंक की पहचान है। हमने अपने अतीत का उत्सव मनाया और भविष्य के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी की पुनः पुष्टि की। हमने अपनी उपलब्धियों और समृद्ध विरासत पर चिंतन किया, और एक ऐसे 'विकसित भारत' के स्वप्न को साकार करने के लिए स्वयं को पुनः समर्पित किया, जो एक अधिक मज़बूत, स्थिर और समावेशी वित्तीय प्रणाली पर आधारित हो।
7. इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँचते हुए, हम यह स्वीकार करते हैं कि रिज़र्व बैंक की भूमिका उसके प्रारंभिक जनादेश से कहीं अधिक विस्तृत हो चुकी है। आज, हम परंपरा और परिवर्तन के उस संगम पर खड़े हैं, जहाँ मूल्य स्थिरता, वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास की अनिवार्यताएँ; तीव्र तकनीकी प्रगति, वैश्विक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और बढ़ती जन अपेक्षाओं के साथ आकर मिलती हैं।
8. हमारी अर्थव्यवस्था की वित्तीय संरचना को आकार देने में आगामी दशक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। हम वित्तीय समावेशन के विस्तार और उसे और अधिक गहन बनाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हम ग्राहक सेवाओं में निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देने और ग्राहक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। हमारा यह प्रयास रहेगा कि हम वित्तीय स्थिरता और दक्षता के हितों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, अपने विनियामक ढाँचों को सर्वोत्तम रूप से अनुकूल बनाएं। हम प्रौद्योगिकी और नवाचार को निरंतर अपना समर्थन प्रदान करते रहेंगे। हम सदैव सतर्क, अनुकूलनशील और भविष्योन्मुखी बने रहेंगे।
हम सभी हितधारकों—जिनमें सरकारें और वित्तीय क्षेत्र के विनियामक प्रमुख हैं—के साथ प्रभावी सहयोग जारी रखेंगे। बदलते आर्थिक परिदृश्य में, वित्तीय प्रणाली की पहुँच का विस्तार करके, उसकी दक्षता में वृद्धि करके और उसकी सुदृढ़ता को और अधिक मज़बूत बनाकर, उसे बेहतर बनाने हेतु जो कुछ भी आवश्यक होगा, हम वह सब कुछ करेंगे।
9. यद्यपि हम नई तकनीकों और आधुनिक विनियामक दृष्टिकोणों को अपना रहे हैं, तथापि हमारे प्रमुख मूल्य—अखंडता, पारदर्शिता और जनसेवा के प्रति समर्पण—सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। भारत की जनता का जो विश्वास रिज़र्व बैंक में निहित है, वही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है। हम इसे अक्षुण्ण बनाए रखने और आने वाले वर्षों में इसे और अधिक सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह कृतसंकल्प हैं। यह संस्था राष्ट्र की धरोहर है। हम लोगों, वित्तीय प्रणाली और अर्थव्यवस्था के हितों की सेवा करने के अपने अटूट संकल्प से प्रेरित होकर, हर एक निर्णय लेना जारी रखेंगे।
10. जिस प्रकार हम इस वर्ष भर चले उत्सव का समापन कर रहे हैं और अपने शताब्दी दशक में कदम रख रहे हैं, उसी प्रकार हम ऐसा पूरे आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ करते रहेंगे। आगे की यात्रा में निरंतर अनुकूलन और स्फुर्ति; नये चिंतन और नवाचार; सहयोग और समन्वय; तथा उत्कृष्टता और पूर्णता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी। हम, रिज़र्व बैंक में, सभी चुनौतियों का सामना करने और सभी अवसरों को भुनाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। ताकि हम भारत की आर्थिक प्रगति में अग्र-सक्रियता एवं सतत रूप से योगदान दे सकें।
11. इन शब्दों के साथ मैं पुन: भारत की महामहिम राष्ट्रपति जी का और गणमान्य व्यक्तियों एवं विशिष्ट अतिथिगण का इस स्मरणीय कार्यक्रम में स्वागत करता हूँ।
धन्यवाद, जयहिन्द। |