6 मार्च 2026
आरबीआई ने ‘डिजिटल लेनदेन में ग्राहक की देयता को सीमित करने संबंधी ढांचे की समीक्षा’ के लिए संशोधन निदेश का मसौदा जारी किया
वर्ष 2017 में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने संबंधी मौजूदा अनुदेशों के जारी होने के बाद से डिजिटल भुगतान और बैंकिंग परिदृश्य में काफी बदलाव हुआ है। समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि बैंकों को इस विषय पर संशोधित अनुदेश जारी किए जाएँ जिनसे अन्य बातों के साथ-साथ अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करने पर विद्यमान अनुदेशों के दायरे का विस्तार होगा ताकि धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की अन्य श्रेणियों को इनमें शामिल किया जा सके, धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए बैंकों द्वारा लिए गए समय को कम किया जा सके और छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए मुआवज़ा-प्रक्रिया लागू की जा सके।
2. तदनुसार, 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य से टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित संशोधन निदेशों के मसौदे जारी किए हैं, जिसके द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमन विभाग द्वारा जारी दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण संबंधी मौजूदा निदेशों में संशोधन प्रस्तावित है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (भुगतान बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (स्थानीय क्षेत्र बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक - दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
3. इन संशोधन निदेशों के आरंभ की जाने वाली मुआवज़ा-प्रक्रिया इन निदेशों के प्रभावी होने की तारीख से एक वर्ष के लिए लागू होगी। इस प्रक्रिया की समीक्षा प्राप्त अनुभव के आधार पर की जाएगी जिसका उद्देश्य पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवज़े में बैंकों की हिस्सेदारी को बढ़ाना और भारतीय रिज़र्व बैंक की हिस्सेदारी को कम करना/ समाप्त करना होगा।
4. विनियमित संस्थाओं और जन सामान्य / अन्य हितधारकों द्वारा संशोधन निदेशों के मसौदे पर अभिमत/ प्रतिक्रिया 6 अप्रैल 2026 को या उससे पहले निम्नलिखित चैनलों के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती है:
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प्रत्येक दस्तावेज के साथ प्रदान किए गए हाइपरलिंक, जिस पेज पर वे प्रकाशित किए गए हैं, के माध्यम से वेबसाइट पर उपलब्ध 'कनेक्ट 2 रेगुलेट' खंड द्वारा; या
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विषय पंक्ति 'निदेशों (संशोधन निदेशों के मसौदे के पूर्ण नाम (विनियमित संस्था के प्रकार सहित)) पर प्रतिक्रिया' लिखकर ई-मेल द्वारा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2224
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