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प्रेस प्रकाशनी

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गवर्नर का वक्तव्य: 5 अगस्त 2026

5 अगस्त 2026

गवर्नर का वक्तव्य: 5 अगस्त 2026

सुप्रभात और नमस्कार।

2. पश्चिम एशिया संघर्ष प्रमुख व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान उत्पन्न करके, बाजार में अस्थिरता को बढ़ावा देकर और व्यापारिक भावनाओं को दबाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। अमेरिका द्वारा नए शुल्क लगाए जाने के कारण व्यापार संबंधी अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक आर्थिक वातावरण अधिकतर अस्थिर होता जा रहा है। वैश्विक संवृद्धि में मंदी की संभावना है, जबकि 2026 के लिए मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। कुछ केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति को कड़ा किया है, जबकि अन्य सतर्क बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें, मुद्राएं और वित्तीय बाजार अस्थिर बने हुए हैं, जो पश्चिम एशिया संघर्ष की बदलती तीव्रता और अनिश्चितताओं के अनुरूप उतार-चढ़ाव दिखा रहे हैं।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के निर्णय

3. इस वैश्विक पृष्ठभूमि में, वित्तीय वर्ष 2026-27 की तीसरी द्विमासिक बैठक के लिए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 3, 4 और 5 अगस्त को नीतिगत रेपो दर पर विचार-विमर्श और निर्णय लेने के लिए बैठक हुई। उभरते समष्टि-आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रमों तथा संभावना का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद, एमपीसी ने सर्वसम्मति से चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया; परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.00 प्रतिशत, तथा सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.50 प्रतिशत पर बनी रहेगी। एमपीसी ने तटस्थ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया।

4. मैं अब संक्षेप में इन निर्णयों के पीछे के औचित्य प्रस्तुत करूँगा।

5. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने यह पाया कि जैसा कि अनुमान था, हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति लक्ष्य से थोड़ा ऊपर पहुंच गई। हालांकि, पहली तिमाही की वास्तविक मुद्रास्फीति, अनुमानों से थोड़ी कम रही, जो लागत के दबावों के सीमित प्रभाव-प्रसार को दर्शाती है। उच्च मुद्रास्फीति मुख्य रूप से ईंधन और खाद्य पदार्थों के कारण है, जिसमें अब तक कीमतों के दबाव के व्यापक होने के बहुत कम संकेत हैं। कीमती धातुओं को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति अभी भी अनुकूल बनी हुई है। पूर्वानुमान के अनुरूप, हेडलाइन मुद्रास्फीति निकट भविष्य में और बढ़ने और मुख्यतः खाद्य एवं ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण, 2026-27 की तीसरी तिमाही में शिखर पर पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद इसमें कमी आएगी। कीमती धातुओं को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति द्वारा परिलक्षित अंतर्निहित मुद्रास्फीति, जो कुछ समय से सौम्य रही है, वित्तीय वर्ष के अंत तक मूल मुद्रास्फीति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की संभावना है।

6. आघात-सह घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा गतिविधियों में निरंतर विस्तार, और मजबूत निर्यात से संवृद्धि को समर्थन मिलना जारी है, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की स्थिति की पुष्टि करता है।

7. संक्षेप में, हालांकि हेडलाइन मुद्रास्फीति के बढ़ने का अनुमान है, लेकिन यह मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की आपूर्ति के दबाव के कारण है; यह व्यापक नहीं हो रही है; मूल मुद्रास्फीति मध्यम बनी हुई है और तीसरी तिमाही में अपने चरम पर पहुंचने के बाद इसके कम होने की उम्मीद है। संवृद्धि, हालांकि आघात-सह है, 2026-27 में कम रहने का अनुमान है। हालाँकि, दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो, भू-राजनीति और वैश्विक व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितताओं के कारण संभावना अस्पष्ट बनी हुई है। कोई भी नीतिगत कदम उठाने से पहले, विशेष रूप से मुद्रास्फीति, इसकी दिशा और संरचना के संबंध में अधिक स्पष्टता आने की आवश्यकता है। ऐसे किसी भी कदम में उभरते हुए संवृद्धि-मुद्रास्फीति के रुझानों के अनुरूप नीतिगत दरों को फिर से विचार करने की आवश्यकता होगी, विशेष रूप से अब तक के इसके सामान्य स्तरों से अंतर्निहित मुद्रास्फीति के सामान्यीकरण को देखते हुए।

8. इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, एमपीसी ने नीतिगत दर को यथावत् रखने के लिए वोट किया। एमपीसी ने समष्टि-आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप उचित कदम उठाने के लिए तटस्थ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया। एमपीसी ने इस बात पर जोर दिया कि वह कड़ी निगरानी रखेगी और मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ रहेगी।

संवृद्धि और मुद्रास्फीति का आकलन

संवृद्धि

9. पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न आपूर्ति-पक्ष के दबाव जून 2026 के बाद से कुछ हद तक कम हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकार द्वारा किए गए अस्थायी उपायों को वापस ले लिया गया है और प्रमुख निविष्टों की आपूर्ति का सामान्यीकरण हुआ है।1 हालाँकि, जुलाई के पहले सप्ताह से संघर्ष के पुनः तेज होने से ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बढ़ी है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर अनिश्चितता को फिर से जन्म दिया है।

10. वैश्विक स्तर पर बनी हुई अनिश्चितता के बावजूद, घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने आघात- सहनीयता प्रदर्शित की है, जैसा कि 2026-27 की पहली तिमाही के लिए उपलब्ध उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से परिलक्षित होता है। पहली तिमाही के लिए कंपनियों के प्रारंभिक परिणाम, विनिर्माण क्षेत्र में स्वस्थ प्रदर्शन की ओर संकेत करते हैं।2 इसकी पुष्टि विस्तार के संकेत दे रहे पीएमआई द्वारा भी होती है।3 सेवा क्षेत्र की गतिविधियों ने भी मजबूत घरेलू मांग के बावजूद अपनी गति बनाए रखी।4 निजी उपभोग तेज वैकल्पिक व्यय द्वारा संचालित होता रहा,5 जबकि बुनियादी ढांचे और निर्माण क्षेत्र में सरकार के मजबूत व्यय के समर्थन से निवेश गतिविधि स्थिर बनी हुई है।6 वस्तु निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि के साथ सुधार हुआ, जबकि सेवा निर्यात में वृद्धि की गति बनी रही।7 समग्र रूप से, भारत की अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन किया है।

11. भविष्य में, एल नीनो की स्थितियों के बीच कम और असमान दक्षिण-पश्चिम मानसून8 के कारण कृषि क्षेत्र की संभावनाएं अनिश्चित हैं। हालांकि, जलाशयों के स्तर, जो सामान्य के करीब बने हुए हैं, सकारात्मक संकेत देते हैं।9 फसल विविधीकरण हेतु सरकार की पहलें, जिनमें अल्पकालिक तथा जलवायु-आघात-सह फसलें और जल संचयन एवं संरक्षण शामिल हैं, अन्य बातों के साथ-साथ अपर्याप्त वर्षा के प्रभाव को कम करने में सहायक होने की उम्मीद है। यद्यपि विनिर्माण क्षेत्र को लागत दबावों का सामना करना पड़ सकता है, तथापि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का बढ़ता विविधीकरण, प्रभाव को कम करने में सहायक होगा। घरेलू मांग में मजबूती के आधार पर सेवा क्षेत्र से अपनी तेजी बनाए रखने की उम्मीद है।10 मांग की ओर से, कमजोर मानसून का ग्रामीण उपभोग पर पड़ने वाले प्रभाव को आंशिक रूप से सहायक सहयोगी क्षेत्र की गतिविधियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं द्वारा संतुलित किया जा सकता है। सेवा क्षेत्र में तेजी और स्थिर रोजगार की स्थितियां शहरी उपभोग का समर्थन करेंगी। मजबूत क्षमता उपयोग, मजबूत ऋण प्रवाह11 और बुनियादी ढांचे पर सरकार का निरंतर जोर, निवेश गतिविधियों को बनाए रखने की आशा है। शुद्ध बाह्य मांग को द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और बाजार विविधीकरण से मजबूती प्राप्त करने की आशा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़े हुए तनाव, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान डाल रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से संबंधित झटके, संवृद्धि के लिए अधोगामी जोखिम पैदा करते हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संवृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत लगाया गया है, जिसमें पहली तिमाही के लिए 7.0 प्रतिशत, दूसरी तिमाही के लिए 6.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत का अनुमान है। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

मुद्रास्फीति

12. यद्यपि जून 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति, लगातार 16 महीनों तक लक्ष्य से नीचे बने रहने के बाद, बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई, फिर भी यह 2026-27 की पहली तिमाही के लिए पूर्व में अनुमानित आंकड़े12 से 30 आधार अंक (बीपीएस) कम रही। जून में यह वृद्धि मुख्य रूप से उच्च खाद्य13, ईंधन14 और ईंधन-प्रेरित मुद्रास्फीति के कारण हुई, जिसका प्रभाव रेस्तरां सेवाओं जैसे चुनिंदा वर्गों में देखा गया15। उच्च निवेश लागत से उत्पन्न दबावों के बावजूद, मई-जून के दौरान मूल मुद्रास्फीति (खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई) 3.9 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही।16 इस अवधि के दौरान, कीमती धातुओं को छोड़कर मूल मुद्रा स्फीति और भी कम रहकर 2.3-2.5 प्रतिशत के बीच रही।

13. आगे, वर्षा के कालिक और स्थानिक वितरण पर एल निनो का प्रभाव एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है17, हालाँकि सक्रिय आपूर्ति प्रबंधन और खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार राहत प्रदान कर सकते हैं18। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अत्यधिक अस्थिर बनी हुई हैं, जिनमें भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रेरित भरी उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, जिससे निकट समय की संभावना असपष्ट हो गई है।19 यद्यपि सामान्यीकृत मुद्रास्फीति के दबाव अब तक सीमित रहे हैं, फिर भी खाद्य, ईंधन और अन्य निविष्टि कीमतों में वृद्धि के द्वितीय-चरण के प्रभावों के व्यापक आधार वाली मुद्रास्फीति में परिवर्तित होने का जोखिम बना हुआ है।

14. समस्त कारकों पर विचार करने के उपरांत, वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति का अनुमान 5.0 प्रतिशत लगाया गया है, जिसमें दूसरी तिमाही के लिए 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5.5 प्रतिशत का अनुमान है। वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 5.3 प्रतिशत लगाया गया है, जिसमें जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। वर्ष 2026-27 के लिए मूल मुद्रास्फीति का अनुमान 4.3 प्रतिशत है। कीमती धातुओं को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति के कम रहने का अनुमान है, हालांकि यह चौथी तिमाही से मूल मुद्रास्फीति के साथ संरेखित होने की संभावना है।

चलनिधि और वित्तीय बाजार की स्थितियां

15. एलएएफ के तहत शुद्ध स्थिति के रूप में मापी गई प्रणालीगत चलनिधि, जून 2026 में हुई पिछली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद से, औसतन दैनिक आधार पर 1.0 लाख करोड़ के अधिशेष पर बनी हुई है।20 आगे की अवधि में, मानसून के मौसम के दौरान मुद्रा का सामान्य वापस आना, सरकार के नकद शेषों में कमी और पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने हेतु किए गए हमारे विशेष उपायों से निकट भविष्य में बैंकिंग प्रणाली की चलनिधि को सहायता मिलने की संभावना है।

16. जून की बैठक के बाद से, भारित औसत मांग दर, नीतिगत गलियारा के भीतर बनी रही, जिसका औसत 5.31 प्रतिशत रहा। जुलाई में अल्पावधि मुद्रा बाज़ार दरों, विशेष रूप से वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्र की दरों में कमी आई।21 सरकार और रिज़र्व बैंक द्वारा भारतीय ऋण बाजारों में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के सहारे, जून और जुलाई के दौरान विभिन्न अवधियों में सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) के प्रतिफल में कमी आई। हालाँकि, जमा और उधार दरों में सख्ती आने के कारण मई-जून के दौरान ऋण बाजार में नीतिगत संचरण में मंदी आई।22 फिर भी, सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि मजबूत23 और वैविध्यपूर्ण24 बनी हुई है।

17. द्वि-मार्गी परिचालन के माध्यम से, रिज़र्व बैंक बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त चलनिधि सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाएगा, जिसका उद्देश्य भारित औसत मांग दर (डब्ल्यूएसीआर) को नीतिगत रेपो दर के अनुरूप रखना है।

वित्तीय स्थिरता

18. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के पूंजी पर्याप्तता, चलनिधि, अस्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता से संबंधित प्रणाली-स्तरीय वित्तीय मानदंड स्वस्थ बने हुए हैं, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में निवल ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में कुछ कमी आई है।25 इसी तरह, एनबीएफ़सी के प्रणाली -स्तरीय मानदंड भी सुदृढ़ हैं, जिनमें पर्याप्त पूंजी स्थिति, बेहतर जीएनपीए अनुपात और उच्च लाभप्रदता शामिल है।26

बाह्य क्षेत्र

19. अब मैं बाह्य क्षेत्र की ओर रुख करता हूँ। चुनौतीपूर्ण और अस्थिर वैश्विक समष्टि-आर्थिक माहौल के बावजूद, 2025-26 में भारत का चालू खाता घाटा सौम्य रहा और उभरते बाज़ारों के लिए टिकाऊ माने जाने वाले स्तर से काफी नीचे बना रहा।27 इस वर्ष अप्रैल-मई के दौरान, चालू खाते में 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया, जो मुख्य रूप से सेवा व्यापार में सुदृढ़ अधिशेष28 और मजबूत प्रेषण प्राप्तियों29 के कारण था। 2026-27 की पहली तिमाही में, भारत का पण्य व्यापार घाटा 2025-26 की पहली तिमाही के 68.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 86.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और स्वर्ण का आयात था।30 आगे चलकर, वैश्विक व्यापार संवृद्धि में नरमी31, ऊर्जा की कीमतों में उछाल और सतत व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण 2026-27 में भारत के चालू खाता घाटे के बढ़ने का जोखिम है। दूसरी ओर, भारत-यूके व्यापार लेन-देन और प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ हाल के अन्य समझौतों के लागू होने, सेवाओं के मजबूत निर्यात और आवक विप्रेषणों में बढ़ोत्तरी से इन जोखिमों को कम करने की उम्मीद है।

20. बाहरी वित्तपोषण के संबंध में, अप्रैल-जून 2026 के दौरान सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) का अंतर्वाह 30.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो एक वर्ष पहले के 26.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था, जो भारत में वैश्विक निवेशकों की निरंतर रुचि को रेखांकित करता है।32 उच्च सकल अंतर्वाह और बाह्य एफ़डीआई की वृद्धि में कमी से प्रेरित होकर, इस अवधि के दौरान निवल एफ़डीआई अंतर्वाह में भी वृद्धि हुई।33 इसके अतिरिक्त, अप्रैल-मई 2026 के दौरान निवल बहिर्वाह के बाद, जून-जुलाई 2026 में भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफ़पीआई) में सुधार आया है और मुख्य रूप से ऋण खंड के कारण 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवल अंतर्वाह दर्ज किया गया है।34 जून में लागू किए गए पूंजी प्रवाह उपायों ने इस अंतर्वाह35 को समर्थन दिया है; परिणामस्वरूप, इस वर्ष भुगतान संतुलन में एक मजबूत अधिशेष दर्ज होने की उम्मीद है।

21. भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि36, आरक्षित निधि के मानक पैमानों के अनुसार पर्याप्त बने हुए हैं, जिसमें 10 महीने से अधिक का आयात कवर और 90.8 प्रतिशत का विदेशी ऋण कवर शामिल है।

22. विनिमय दर के संबंध में, हम अपनी उस नीति को जारी रखेंगे जिसके तहत यह बाजारी शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है, जबकि अत्यधिक अस्थिरता पर अंकुश लगाने, सट्टा व्यवहार की जाँच करने और अव्यवस्थित गतिविधियों को रोकने के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह मूलभूत तत्वों के अनुरूप हो और आर्थिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न न करे। इस उद्देश्य के लिए, हमारे पास प्रभावी विनियामकीय और बाजार-आधारित लिखतों की एक विस्तृत शृंखला उपलब्ध है।

अतिरिक्त उपाय

23. अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं कुछ अतिरिक्त उपायों की घोषणा करना चाहता हूँ।

सहकारी क्षेत्र

24. सहकारी क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए मैं दो उपाय का प्रस्ताव रखता हूँ।

(i) पहला, यूसीबी के लाइसेंसीकरण संबंधी चर्चा पत्र पर प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर, हम यूसीबी के लाइसेंसीकरण को फिर से शुरू करने के लिए दिशानिर्देश का मसौदा जारी कर रहे हैं; और

(ii) दूसरा, 2008 में ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए क्रेडिट निगरानी व्यवस्था में पिछले बार किए गए संशोधन के बाद से प्राप्त अनुभव और गतिविधि को ध्यान में रखते हुए, हम इस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के बाद निदेशों का मसौदा जारी कर रहे हैं।

अग्रिम संबंधी ब्याज दर

25. उधार दरों में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के लिए, सभी विनियमित संस्थाओं के लिए अग्रिमों पर ब्याज दरों के विनियामक ढांचे को सुसंगत और मानकीकृत करने का प्रस्ताव है।

समापन टिप्पणी

26. निष्कर्ष के तौर पर, वैश्विक आर्थिक स्थिति और मनोभाव, पश्चिम एशिया के संघर्ष के तेज़ी से बदलते घटनाक्रम, दायरा और तीव्रता दोनों स्तर पर, अनिश्चित बनी हुई है। हालाँकि, इससे घरेलू संवृद्धि-मुद्रास्फीति संभावना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत समष्टि-आर्थिक अवसंरचना इन वैश्विक आघातों का दृढ़ता से सामना करने में मदद कर रहे हैं। जैसा कि मेरे पिछले वक्तव्य में संकेत दिया गया था, यह ऐसे आघातों को सहने की हमारी आघात-सहनीयता को बढ़ाने वाले उपायों में तेज़ी लाने का एक अवसर है। हम ऐसी नीतियां लागू करना जारी रखेंगे जो हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करती हैं। चाहे वह धारणीय संवृद्धि को सुविधाजनक बनाना हो, उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देना हो; या फिर कीमतों, वित्तीय प्रणाली या मुद्रा की स्थिरता को बनाए रखना हो, हम इसे सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

27. धन्यवाद। नमस्कार और जय हिंद।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/810


1 25 जून 2026 को, सरकार ने गैर-घरेलू पैक किए गए एलपीजी की आपूर्ति पर सभी क्षेत्रीय प्रतिबंध हटा दिए और आपूर्ति को पश्चिम एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया। 1 जुलाई 2026 से, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के खुदरा आउटलेट्स के माध्यम से मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल की बिक्री और वितरण को नियंत्रित करने वाले अस्थायी विनियामकीय उपाय भी वापस ले लिए गए।

2 1 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार, 413 सूचीबद्ध निजी विनिर्माण कंपनियों के परिणामों ने 2026-27 की पहली तिमाही में निवल बिक्री में 21.9 प्रतिशत और परिचालन लाभ में 15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आईआईपी विनिर्माण ने पहली तिमाही में 6.3 प्रतिशत की संवृद्धि दर्ज की। विनिर्माण क्षेत्र के भीतर, एनआईसी 2-अंक स्तर पर 23 उद्योग समूहों में से 16 ने 2025-26 की पहली तिमाही की तुलना में 2026-27 की दूसरी तिमाही में सकारात्मक संवृद्धि दर्ज की है।

3 2026-27 की तिमाही पहली में विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 54.6 रहा, जो विस्तार वाले क्षेत्र में बना हुआ है (2025-26 की चौथी तिमाही में यह 55.4 था)।

4 2026-27 की पहली तिमाही में जीएसटी ई-वे बिल 12.4 प्रतिशत की अच्छी दर से बढ़े, जबकि टोल संग्रह (मात्रा) में 16.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2026-27 की पहली तिमाही में जीएसटी राजस्व में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। घरेलू एयर कार्गो ने 2026-27 की पहली तिमाही में 9.1 प्रतिशत की संवृद्धि दर्ज की। 2026-27 की पहली तिमाही में मोटर वाहन की बिक्री (खुदरा) में 14.5 प्रतिशत की संवृद्धि हुई। 2026-27 की पहली तिमाही में बंदरगाह कार्गो में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

5 वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दोपहिया और ट्रैक्टर की खुदरा बिक्री में क्रमशः 15.1 प्रतिशत और 21.4 प्रतिशत की दोहरे अंकों की संवृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री और आईआईपी उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में क्रमशः 21.0 प्रतिशत और 7.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई।

6 2026-27 की पहली तिमाही में स्टील की खपत में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सीमेंट का उत्पादन 8.8 प्रतिशत बढ़ा।

7 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान वस्तु निर्यात में 15.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में आयात 19.9 प्रतिशत बढ़ा। 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान सेवा निर्यात में 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में सेवा आयात 10.1 प्रतिशत बढ़ा।

8 3 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में सामान्य की तुलना में कुल विचलन 11.9 प्रतिशत था।

9 30 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार, 166 प्रमुख जलाशयों में अखिल भारतीय जल भंडारण कुल क्षमता का 44.4 प्रतिशत था, जबकि एक वर्ष पूर्व यह 69.3 प्रतिशत और दस वर्षों का औसत 47.7 प्रतिशत था।

10 2026-27 की पहली तिमाही के लिए पीएमआई सेवाएँ 58.7 पर रहीं, जो 2025-26 की चौथी तिमाही के 58.0 से बढ़कर 50.0 के तटस्थ स्तर और अपने दीर्घकालिक औसत, दोनों से ऊपर बनी रहीं, जो मजबूत विस्तार का संकेत देती हैं।

11 वर्ष-दर-वर्ष आधार पर, 15 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार खाद्य से इतर बैंक ऋण में 17.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि (अर्थात 11 जुलाई 2025) में यह 9.7 प्रतिशत थी।

12 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति 3.9 प्रतिशत थी, जबकि जून 2026 की नीति में 4.2 प्रतिशत का अनुमान था।

13 मई और जून में सीपीआई खाद्य और पेय खंड में मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमशः 4.5 प्रतिशत और 5.1 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2026 में 4.0 प्रतिशत थी। खाद्य और पेय मुद्रास्फीति में वृद्धि व्यापक बनी रही, जिसमें जून 2026 में मांस, खाद्य तेल, फलों और मसालों में 8 प्रतिशत से अधिक मुद्रास्फीति दर्ज की गई।

14 ईंधन समूह 'बिजली, गैस और अन्य ईंधन' और वर्ग 'निजी परिवहन उपकरणों के लिए ईंधन और लुब्रिकेंट' का प्रतिनिधित्व करता है। ईंधन की मुद्रास्फीति अप्रैल और मई में क्रमशः 0.4 प्रतिशत और 1.9 प्रतिशत से बढ़कर जून में 4.5 प्रतिशत हो गई। मई में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में संचयी रूप से क्रमशः 7.4 प्रतिशत और 8.4 प्रतिशत की वृद्धि की गई।

15 मई और जून में 'रेस्तरां और आवास सेवाओं' श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमशः 5.7 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2026 में 4.2 प्रतिशत थी।

16 मूल सीपीआई का तात्पर्य उस सीपीआई से है, जिसमें उन खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों और ईंधन (जिसमें 'बिजली, गैस और अन्य ईंधन' समूह और 'निजी परिवहन उपकरणों के लिए ईंधन और स्नेहक' वर्ग दोनों शामिल हैं) शामिल नहीं हैं।

17 3 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार, संचयी मौसमी वर्षा दीर्घावधि औसत (एलपीए) से 12.0 प्रतिशत कम बनी रही। इसका स्थानिक वितरण भी असमान रहा, जहाँ 36 में से 15 मौसम संबंधी उप-मंडलों में कम वर्षा दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान है कि वर्तमान अल नेनो की स्थिति के बने रहने और मजबूत होने की संभावना है, जिससे अगस्त-सितंबर के दौरान सामान्य से कम वर्षा का जोखिम बढ़ रहा है, जबकि हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) की स्थिति के तटस्थ रहने की उम्मीद है।

18 16 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार, चावल और गेहूं का भंडार क्रमशः 654.7 लाख टन (बफर मानदंड का 4.8 गुना) और 516.3 लाख टन (बफर मानदंड का 1.9 गुना) था।

19 पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार, कच्चे तेल की भारतीय बास्केट (आईसीबी) का औसत मूल्य मई के 106.23 अमेरिकी डॉलर से गिरकर जून में 83.22 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। हालाँकि, पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से शुरू होने के कारण, जुलाई के पहले सप्ताह से तेल की कीमतों में फिर बढ़ोत्तरी हुई है। जून के अंत के स्तर (31 जुलाई 2026 तक) की तुलना में ब्रेंट और भारतीय बास्केट कच्चे तेल की कीमतों में क्रमशः 34.5 प्रतिशत और 32.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

20 एलएएफ के तहत औसत दैनिक निवल अवशोषण मई 2026 के 1.7 लाख करोड़ से कम होकर जून में 0.9 लाख करोड़ हो गया, लेकिन इसके बाद जुलाई में बढ़कर 1.1 लाख करोड़ हो गया।

21 6 जून से 31 जुलाई 2026 की अवधि के लिए डब्ल्यूएसीआर औसतन नीतिगत रेपो दर से 6 आधार अंक ऊपर कारोबार कर रहा था। जून की नीति के बाद से 3-महीने के ख़जाना बिल, 3-महीने के जमा प्रमाणपत्र और 3-महीने के वाणिज्यिक पत्र की दरें औसतन क्रमशः 5.27 प्रतिशत, 6.72 प्रतिशत और 7.07 प्रतिशत रहीं, जबकि अप्रैल और जून की नीति के बीच ये क्रमशः 5.31 प्रतिशत, 6.67 प्रतिशत और 7.52 प्रतिशत थीं।

22 नीतिगत रेपो दर में संचयी रूप से 125 आधार अंकों की कटौती के परिणामस्वरूप, फरवरी 2025 से जून 2026 के बीच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की भारित औसत उधार दर (डब्ल्यूएएलआर) नए रुपये ऋण के लिए 80 बीपीएस और बकाया रुपये ऋण के लिए 91 बीपीएस घट गई। जमाराशि के स्तर पर, इसी अवधि के दौरान नई जमा राशियों पर भारित औसत घरेलू मियादी जमा दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) में 63 बीपीएस की गिरावट आई है, जबकि बकाया जमा राशियों पर इसमें 51 बीपीएस की कमी आई है। हाल के महीनों में नई ऋण दरों में बदलाव की गति धीमी रही है, जो मजबूत ऋण मांग को दर्शाती है।

23 वर्ष-दर-वर्ष आधार पर, 15 जुलाई 2026 तक बैंक ऋण में 17.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 9.9 प्रतिशत थी। हाल ही में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 में सभी स्रोतों से ऋण में 16.3 प्रतिशत (वार्षिक) की वृद्धि हुई, जबकि एक वर्ष पहले यह 11.5 प्रतिशत थी।

24 क्षेत्र-वार आंकड़े बताते हैं कि खुदरा और सेवा क्षेत्र में ऋण का प्रवाह उत्साहजनक है। एमएसएमई में निरंतर ऋण वृद्धि और बड़े उद्योगों को ऋण में तेजी से औद्योगिक ऋण और मजबूत हुआ है। कृषि ऋण स्थिर गति से बढ़ा है।

25 एससीबी मानदंड: जून 2025 से जून 2026 के बीच, वर्ष-दर-वर्ष आधार पर बकाया ऋण और जमा में क्रमशः 18.6 प्रतिशत तथा 13.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जून 2026 में प्रणाली-स्तर का जोखिम भारित आस्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) 17.78 प्रतिशत रहा, जो विनियामकीय न्यूनतम स्तर से पर्याप्त अधिक था। अनर्जक ऋण अनुपात में और सुधार हुआ तथा सकल अनर्जक आस्ति अनुपात जून 2025 के 2.22 प्रतिशत की तुलना में जून 2026 में 1.68 प्रतिशत तथा निवल अनर्जक आस्ति अनुपात जून 2025 के 0.51 प्रतिशत की तुलना में जून 2026 में 0.40 प्रतिशत रहा। चलनिधि बफर सुदृढ़ रहे तथा जून 2026 के अंत में चलनिधि कवरेज अनुपात 126.94 प्रतिशत रहा। जून 2026 में आस्तियों पर वार्षिकीकृत प्रतिलाभ 1.32 प्रतिशत (जून 2025 में 1.30 प्रतिशत) तथा निवल मूल्य पर प्रतिलाभ 13.23 प्रतिशत (जून 2025 में 13.02 प्रतिशत) रहा। जून 2026 में निवल ब्याज मार्जिन 3.21 प्रतिशत (जून 2025 में 3.26 प्रतिशत) रहा।

26 एनबीएफ़सी मानदंड: जून 2026 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का कुल सीआरएआर 25.41 प्रतिशत तथा टियर-I सीआरएआर 23.58 प्रतिशत रहा, जो विनियामकीय न्यूनतम अपेक्षाओं से पर्याप्त अधिक था। सकल अनर्जक आस्ति अनुपात जून 2025 के 3.09 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 2.50 प्रतिशत तथा निवल अनर्जक आस्ति अनुपात जून 2025 के 1.00 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 0.84 प्रतिशत हो गया। इस क्षेत्र में आस्तियों पर प्रतिलाभ जून 2025 के 3.01 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 में 3.37 प्रतिशत हो गया। निवल ब्याज मार्जिन जून 2025 के 4.99 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 में 5.39 प्रतिशत हो गया।

27 वर्ष 2025-26 में भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 0.6 प्रतिशत (25.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जो वर्ष 2024-25 के स्तर (सकल घरेलू उत्पाद का 0.6 प्रतिशत; 23.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के लगभग समान था।

28 अप्रैल–मई 2026 के दौरान सेवा व्यापार अधिशेष 34.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि अप्रैल–मई 2025 में यह 31.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

29 अप्रैल–मई 2026 के दौरान मुख्यतः श्रमिकों के प्रेषणों से युक्त निवल अंतरण 29.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो अप्रैल–मई 2025 के 20.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था।

30 वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में माल निर्यात में क्रमिक तथा वर्ष-दर-वर्ष, दोनों आधारों पर सुधार हुआ, जो आंशिक रूप से तेल की ऊँची कीमतों तथा तेल निर्यात पर अधिक मार्जिन को परिलक्षित करता है। वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में माल निर्यात 129.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही के 111.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में 15.9 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) बढ़ा, जबकि वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही में इसमें 2.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। यह वृद्धि मुख्यतः पेट्रोलियम उत्पादों, इंजीनियरी वस्तुओं तथा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्यात से प्रेरित रही। माल आयात भी दोहरे अंक की वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष 19.9 प्रतिशत) के साथ बढ़कर वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में 216.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पूर्व यह 180.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

31 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के डबल्यूईओ (जुलाई 2026) के अनुसार, वर्ष 2025 के 5.0 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2026 में वैश्विक माल एवं सेवा व्यापार मात्रा संवृद्धि के घटकर 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

32 यूएनसीटीएडी की वर्ल्ड इनवेस्टमेंट रिपोर्ट (डब्ल्यूआईआर) 2026 के अनुसार, विश्व की शीर्ष एफडीआई मेजबान अर्थव्यवस्थाओं में भारत की रैंकिंग 2024 में 13वें स्थान से बेहतर होकर 2025 में 11वें स्थान पर आ गई है। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान विश्व स्तर पर घोषित ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं के मामले में भारत 33.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि के साथ तीसरे स्थान पर है।

33 भारत में सकल एफडीआई प्रवाह अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान 14.8 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान निवल एफडीआई अंतर्वाह बढ़कर 7.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो अप्रैल-जून 2025-26 के 4.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान निवल बहिर्वाह एफडीआई 1.4 प्रतिशत बढ़कर 9.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पूर्व 9.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

34 15-, 30- और 40-वर्षीय अवधि के सभी नए निर्गमों को पूर्ण सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत शामिल करना, सामान्य मार्ग के तहत अल्पकालिक निवेश, एकाग्रता और सुरक्षा-वार निवेश से संबंधित समष्टिविवेकपूर्ण सीमाओं को हटाना और जी-सेक में निवेश करने वाले एफपीआई के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित कर छूट।

35 2026-27 के दौरान (अप्रैल-जुलाई) मौजूदा स्थिति के अनुसार भारत में निवल एफपीआई से 4.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का बहिर्वाह हुआ है। इक्विटी खंड में निवल बहिर्वाह 11.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि ऋण खंड में 7.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवल अंतर्वाह दर्ज किया गया।

36 31 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि 692.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।


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