10 जून 2026
आरबीआई ने भू-संपदा निवेश न्यास (आरईआईटी) और अवसंरचना निवेश न्यास (आईएनवीआईटी) को उधार देने संबंधी अंतिम संशोधन निदेश जारी किए
रिज़र्व बैंक ने हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए 13 फरवरी 2026 को ‘भू-संपदा निवेश न्यास (आरईआईटी) और अवसंरचना निवेश न्यास (आईएनवीआईटी) को उधार’ देने संबंधी अनुदेशों के संशोधन निदेश का मसौदा जारी किया था। संशोधन निदेश के उक्त मसौदे में वाणिज्यिक बैंकों को आरईआईटी को ऋण देने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया गया था जो कि आरईआईटी के एक्सपोज़र की विनियामकीय उच्चतम-सीमा सहित उपयुक्त विवेकपूर्ण रक्षोपायों के अधीन होगा। आईएनवीआईटी को दिए जाने वाले उधार (वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू) संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों को आरईआईटी को दिए जाने वाले उधार संबंधी विवेकपूर्ण रक्षोपायों के साथ सुसंगत करने का भी प्रस्ताव किया गया था।
2. उपर्युक्त निदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जांच की गई है, परिणामस्वरूप किए गए संशोधनों को, रिज़र्व बैंक द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, अंतिम संशोधन निदेशों में उपयुक्त रूप से शामिल कर लिया गया है। संशोधन निदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया से संबंधित एक विवरण अनुबंध में दिया गया है।
3. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज निम्नलिखित संशोधन निदेश जारी किए हैं:
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भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएँ) तीसरा संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) तीसरा संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) आठवाँ संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - ऋण सुविधाएँ) दूसरा संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान - ऋण सुविधाएँ) संशोधन निदेश, 2026
दिनांक 27 अप्रैल 2026 को जारी किए गए, भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार - मानकीकृत दृष्टिकोण) निदेश, 2026 के कारण 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होने वाले आस्ति वर्गों में हुए परिवर्तनों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि इस समय भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - वित्तीय विवरण: प्रस्तुति और प्रकटीकरण), 2025 में, मसौदा निदेश जारी करते समय प्रस्तावित किए गए संशोधन नहीं किए जाएं।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/429
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