29 मई 2026
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा ऋण पर वार्षिक मूलभूत
सांख्यिकीय विवरणी (बीएसआर)-1 – मार्च 2026
आज, रिज़र्व बैंक ने अपने ‘वार्षिक मूलभूत सांख्यिकीय विवरणी (बीएसआर)-1: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा ऋण – मार्च 2026’1 शीर्षक से अपना वेब प्रकाशन, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर डेटाबेस’ (डीबीआईई) पोर्टल2 (https://data.rbi.org.in होमपेज > प्रकाशन) पर जारी किया। यह प्रकाशन भारत में बकाया बैंक ऋण की स्थिति संबंधी जानकारी प्रदान करता है, जो वार्षिक ‘मूलभूत सांख्यिकीय विवरणी (बीएसआर) – 1’ प्रणाली के अंतर्गत एससीबी {क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आआरबी) सहित} द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों पर आधारित होती है। इस विवरणी में खाते का प्रकार, संगठन, उधारकर्ता के व्यवसाय/ गतिविधि और श्रेणी, ऋण के उपयोग के स्थान का जिला और जनसंख्या समूह3, ब्याज दर, ऋण सीमा और बकाया राशि संबंधी जानकारी एकत्रित की जाती है। इसके अलावा, अब से इस प्रकाशन में, जिला-स्तर पर व्यक्तियों के बकाया ऋण संबंधी लिंग-वार जानकारी प्रस्तुत करने वाली एक नई डेटा श्रृंखला को शामिल किया गया है।
मुख्य बातें:

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वित्तीय वर्ष 2025-26 के मौद्रिक नीति निर्णयों के क्रम में, 9 प्रतिशत से कम ब्याज दर वाले ऋणों का हिस्सा मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 64.2 प्रतिशत हो गया, जो एक वर्ष पूर्व 43.9 प्रतिशत था।
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सभी जनसंख्या समूहों, अर्थात ग्रामीण, अर्ध-शहरी, शहरी तथा महानगरीय, की ऋण वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) में, मार्च 2026 के अंत तक दोहरे अंकों की वृद्धि के साथ, सतत वृद्धि देखी गई। ऋण प्रदान करने में ग्रामीण, अर्ध-शहरी, शहरी और महानगरीय बैंक शाखाओं की हिस्सेदारी क्रमशः 9.4 प्रतिशत, 14.5 प्रतिशत, 17.9 प्रतिशत और 58.2 प्रतिशत थी।
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निजी क्षेत्र के बैंकों ने मार्च 2026 के अंत तक ऋण वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो एक वर्ष पूर्व 9.5 प्रतिशत थी। वहीं, उनके समकक्ष सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने हेडलाइन ऋण वृद्धि की तुलना में अधिक ऋण वृद्धि दर्ज की। मार्च 2021 के 1.0 प्रतिशत की तुलना में 1.6 प्रतिशत की वर्धित कुल ऋण हिस्सेदारी के साथ लघु वित्त बैंकों ने उच्च ऋण वृद्धि बनाए रखी।
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मार्च 2026 के अंत तक वैयक्तिक ऋणों5 की वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) घटकर 12.9 प्रतिशत हो गई जो कि पिछले कई वर्षों के दौरान समग्र ऋण वृद्धि से अधिक होने के बाद, उससे कम हो गई (चार्ट I)। कुल ऋण में, 30.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ, व्यक्तिगत ऋणों की हिस्सेदारी प्रासंगिक बनी रही।
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निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र को दिए गए ऋण, कुल बैंक ऋण के एक चौथाई से अधिक थे और मार्च 2026 के अंत तक इनमें 15.5 प्रतिशत की वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) हुई, जो एक वर्ष पूर्व 11.9 प्रतिशत थी।
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कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में ऋण वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) मार्च 2026 के अंत तक क्रमशः 14.4 प्रतिशत और 12.0 प्रतिशत तक बढ़ गई, जो एक वर्ष पूर्व क्रमशः 8.1 प्रतिशत और 9.4 प्रतिशत थी। मार्च 2026 के अंत तक कुल बैंक ऋण में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी क्रमशः 12.9 प्रतिशत और 22.4 प्रतिशत थी।
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मार्च 2026 के अंत तक घरेलू क्षेत्र द्वारा उधार में 14.3 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि हुई। कुल बैंक ऋण में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 58.6 प्रतिशत रही और वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान वृद्धिशील ऋण में इस क्षेत्र का हिस्सा लगभग तीन-पांचवां रहा।
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मार्च 2026 के अंत तक कुल बैंक ऋण में व्यक्तियों की हिस्सेदारी 47.8 प्रतिशत रही। इस खंड में महिला उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 24.7 प्रतिशत रही, जो एक वर्ष पूर्व 23.8 प्रतिशत थी।
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मार्च 2026 के अंत तक कुल बैंक ऋण में मीयादी ऋणों6 का हिस्सा 62.8 प्रतिशत था। मीयादी ऋणों में 10 प्रतिशत से कम ब्याज दर वाले ऋणों का हिस्सा 80.2 प्रतिशत था।
अजीत प्रसाद
उप महाप्रबंधक (संचार)
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/352
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