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25 मई 2026
क्वांटम सिक्योर एंड अडैप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम (क्यू-एसएएफ़ई) -
विशेषज्ञ समिति का गठन
क्वांटम तकनीक, पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में एक आमूल-चूल बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, क्योंकि यह क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों, जैसे कि सुपरपोज़िशन और एंटैंगलमेंट, का उपयोग करती है। इससे क्वांटम प्रणाली, जटिल वित्तीय समस्याओं, जैसे कि पोर्टफोलियो अनुकूलन, जोखिम मूल्यांकन, समष्टि-आर्थिक मॉडलिंग आदि का समाधान करने में सक्षम हो पाते हैं। हालाँकि, क्वांटम तकनीक से कुछ बड़े जोखिम, विशेष रूप से कुछ मौजूदा क्रिप्टोग्राफ़िक मानकों को कमज़ोर करने की संभावना, भी उत्पन्न हो सकते हैं।
2. संबंधित मुद्दों की जांच करने के लिए, क्वांटम सिक्योर एंड अडैप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम (क्यू-एसएएफ़ई) हेतु एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:
| क्रम सं. |
नाम |
भूमिका |
| i) |
डॉ. अनिल प्रभाकर, प्रोफेसर, डिपार्टमेन्ट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी मद्रास |
संयोजक |
| ii) |
श्री सुनील कुमार, अपर सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार |
सदस्य |
| iii) |
श्री सतीश राव नागेश, उप प्रबंध निदेशक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) |
सदस्य |
| iv) |
श्री दिलीप असबे, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) |
सदस्य |
| v) |
श्री मनोज कुमार जैन, साइंटिस्ट-जी और समूह समन्वयक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), भारत सरकार |
सदस्य |
| vi) |
श्री विनायक गोडसे, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) |
सदस्य |
| vii) |
डॉ. एल. वेंकट सुब्रमण्यम, क्वांटम इंडिया सर्वेंट लीडर, पूर्व-आईबीएम क्वांटम इंडिया प्रमुख |
सदस्य |
| viii) |
श्री शुभेंदु पति, मुख्य महाप्रबंधक, फिनटेक विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) |
सदस्य-सचिव |
3. फिनटेक विभाग, केंद्रीय कार्यालय, आरबीआई, समिति को सचिवीय सहायता प्रदान करेगा। समिति, आवश्यकतानुसार, परामर्श और अपनी चर्चाओं में भाग लेने के लिए डोमेन विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, आरबीआई के विभागों और अन्य हितधारकों को भी आमंत्रित कर सकती है।
4. समिति के विचारार्थ विषय निम्नानुसार हैं:
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वित्तीय क्षेत्र में संभावित लाभों, जोखिमों और चुनौतियों का अन्वेषण और मूल्यांकन करना।
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क्रिप्टोग्राफ़ी बिल ऑफ़ मटीरियल्स (सीबीओएम) के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र की क्रिप्टोग्राफ़िक इन्वेंट्री का मूल्यांकन करना, क्रिप्टो एजिलिटी का आकलन करना, और उन महत्वपूर्ण प्रणालियों तथा प्रक्रियाओं की पहचान करना जो इस प्रकार के खतरों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
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विभिन्न देशों के बीच तुलनात्मक विश्लेषण करना और क्वांटम एप्लिकेशनों की सुरक्षित तैनाती के लिए मौजूदा विनियामक ढांचों की पर्याप्तता का आकलन करना।
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क्वांटम-सेफ क्रिप्टोग्राफ़ी को अपनाने के लिए उद्योग की तैयारियों का मूल्यांकन करना, जिसमें वेंडर उपकरणों और समाधानों की उपलब्धता, मापनीयता और परिपक्वता शामिल है।
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भारतीय वित्तीय प्रणाली को क्वांटम-सेक्योर बनाने के लिए एक रोडमैप और रूपरेखा की अनुशंसा करना।
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उद्देश्य से संबंधित कोई अन्य क्षेत्र।
5. समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/325 |