आरबीआई/2026-27/232
एफआईडीडी.केंका.पीएसडी.बीसी.सं.08/04.09.001/2026-27
07 अगस्त 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र उधार – लक्ष्य और वर्गीकरण) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026
कृपया गवर्नर का 05 जून 2026 के वक्तव्य और ‘एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए स्वैप सुविधा’ से संबंधित 08 जून 2026 के आरबीआई परिपत्र एफएमओडी.एमओएजी.सं.एस-56/01.06.016/2026-27 का संदर्भ लें, जिसमें न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई नई विदेशी मुद्रा अनिवासी खाता [एफसीएनआर (बी)] जमाराशियों के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
2. साथ ही, 08 जून 2026 और 19 जून 2026 के भारतीय रिज़र्व बैंक (आरक्षित नकदी निधि अनुपात और सांविधिक चलनिधि अनुपात) द्वितीय और तृतीय संशोधन निदेशक, जैसा कि विभिन्न बैंकों के लिए लागू हैं, का संदर्भ लें, जिनमें 08 जून 2026 की तारीख से 30 सितंबर 2026 तक जुटाई गई नवीन एफसीएनआर (बी) जमाराशियों को न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि और अधिकतम पांच वर्ष की अवधि (परिपक्वता पर नवीनीकृत जमाराशियों सहित) के लिए सीआरआर और एसएलआर बनाए रखने से छूट दी जाएगी। साथ ही, यह छूट 19 जून 2026 और 30 सितंबर 2026 के बीच जुटाई गई तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि की नवीन अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) सावधि जमाराशियों के लिए भी दी जाएगी।
3. इस संबंध में कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक (प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र उधार – लक्ष्य और वर्गीकरण) (संशोधन) निदेश, 2025 (19 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार अद्यतन) का संदर्भ लें। यह निर्णय लिया गया है कि भारत में दिए गए निम्नलिखित अग्रिमों को समायोजित निवल बैंक ऋण (एएनबीसी) की गणना से छूट दी जाए:
क) दिनांक 08 जून 2026 और 30 सितंबर 2026 के बीच बैंकों द्वारा जुटाई गई न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष (जिनके अंतर्गत परिपक्वता पर नवीकृत जमाराशियां भी शामिल हैं) की नवीन एफसीएनआर (बी) जमाराशियों पर दिए गए अग्रिम, और
ख) दिनांक 19 जून 2026 और 30 सितंबर 2026 के बीच बैंकों द्वारा जुटाई गई तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि की एनआरई सावधि जमाराशियों (जिनके अंतर्गत परिपक्वता पर नवीकृत जमाराशियां भी शामिल हैं) पर दिए गए अग्रिम।
4. इस संशोधन निदेश द्वारा भारतीय रिज़र्व बेंक (प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार – लक्ष्य और वर्गीकरण) निदेश, 2025 में निम्नानुसार बदलाव किया गया है:
i. पैरा 6.1 में सारणी की मद सं.VI को निम्नानुसार आंशिक रूप से परिवर्तित किया गया है:
भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक 31 जनवरी 2014 के परिपत्र बैंपविवि.सं.आरईटी.बीसी.93/12.01.001/2013-14, दिनांक 6 फरवरी 2014 को जारी किया बैंपविवि मेलबॉक्स स्पष्टीकरण के साथ पठित दिनांक 14 अगस्त 2013 के परिपत्र बैंपविवि.सं.आरईटी.बीसी.36/12.01.001/2013-14 तथा 11 जून 2014 के परिपत्र शबैंवि.बीपीडी.(पीसीबी).परि.सं.72/13.01.000/2013-14 के साथ पठित दिनांक 27 अगस्त 2013 के परिपत्र शबैंवि.बीपीडी.(पीसीबी).परि.सं.5/13.01.000/2013-14 दिनांक 08 जून 2026 और 19 जून 2026 के भारतीय रिज़र्व बैंक (आरक्षित नकदी निधि अनुपात और सांविधिक चलनिधि अनुपात) द्वितीय और तृतीय संशोधन निदेश, जैसा कि विभिन्न बैंकों के लिए लागू हैं, के अनुसार ऐसी वृद्धिशील एफसीएनआर (बी)/ एनआरई जमाराशियों (जिनके अंतर्गत परिपक्वता पर नवीकृत जमाराशियां भी शामिल हैं) के आधार पर भारत में प्रदत्त पात्र अग्रिम जो (आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) अपेक्षाओं से छूट के योग्य हैं।
नोट: प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र संबंधी लक्ष्यों की गणना के लिए एएनबीसी से छूट दी जाने वाली राशि उपर्युक्त संशोधन निदेशों के अनुसार सीआरआर/ एसएलआर बनाए रखने से छूट के लिए योग्य नवीन एफसीएनआर (बी)/ एनआरई जमाराशियों से अधिक नहीं होगी।
ii. पाद टिप्पणी सं.3 को हटाया जाएगा:
पात्र वृद्धिशील एफसीएनआर (बी)/ एनआरई जमा से उत्पन्न संसाधनों से दिए गए वृद्धिशील अग्रिमों की गणना 7 मार्च 2014 (यूसीबी के मामले में 13 जून 2014) को भारत में बकाया अग्रिमों और आधार तारीख (26 जुलाई 2013) के बीच के अंतकर के रूप में की जाती है। प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र लक्ष्यों की गणना के लिए एएनबीसी से बाहर रखी जाने वाली राशि, उपर्युक्त परिपत्रों के अनुसार सीआरआर/ एसएलआर के रखरखाव से छूट के लिए पात्र वृद्धिशील एफसीएनआर (बी)/ एनआरई जमा से अधिक नहीं होगी। यदि बकाया राशि में अंतर शून्य या ऋणात्मक है, तो प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र उधार लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से एएनबीसी से कटौती के लिए कोई भी राशि पात्र नहीं होगी।
5. उपर्युक्त संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
भवदीया,
(निशा नम्बियार)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक |