12 जून 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने आईआईएफ़एल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 5 जून 2026 के आदेश द्वारा आईआईएफ़एल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड (कंपनी) पर 'भारतीय रिज़र्व बैंक (अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)) निदेश' और 'भारतीय रिज़र्व बैंक (एनबीएफ़सी में धोखाधड़ी संबंधी जोखिम प्रबंधन) निदेश' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹3.90 लाख (तीन लाख नब्बे हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58जी(1)(बी) के साथ पठित धारा 58बी(5)(एए) के अंतर्गत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को कंपनी की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा इसका सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर कंपनी के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
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कंपनी संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत सॉफ्टवेयर स्थापित करने में विफल रही; और
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कंपनी वित्तीय विवरण - 'नोट्स टू अकाउंट्स' में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी का सही विवरण प्रकट करने में विफल रही।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/444
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