शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

अधिसूचनाएं


दिसंबर 30, 2022
व्यक्तिगत आवास ऋण - चार-स्तरीय विनियामकीय ढांचे के तहत संशोधित सीमाएं
दिसंबर 01, 2022
संशोधित विनियामकीय ढांचा – विनियामकीय उद्देश्यों के लिए शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) का वर्गीकरण
शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को वित्तीय रूप से सक्षम और सुप्रबंधित (एफएसडब्ल्यूएम) रूप में वर्गीकृत करने के लिए मानदंडों की समीक्षा
शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए संशोधित नियामक ढांचा – निवल मालियत और पूंजी पर्याप्तता
अक्टूबर 11, 2022
भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय विवरण - प्रस्तुति और प्रकटीकरण) निदेश, 2021 – आस्ति वर्गीकरण और प्रावधान में विचलन का प्रकटीकरण
सितंबर 19, 2022
अनुपालन कार्य और मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) की भूमिका - शहरी सहकारी बैंक
अगस्त 12, 2022
वित्तीय सेवाओं की आउटसोर्सिंग - वसूली प्रतिनिधियोंको नियुक्त करने वाली विनियमित संस्थाओं की जिम्मेदारी
अगस्त 11, 2022
अर्हित वित्तीय संविदाओं की द्विपक्षीय नेटिंग - विवेकपूर्ण दिशानिर्देशों में संशोधन
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 23 (सहकारी समितियों पर यथा लागू) - जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) द्वारा व्यवसाय के नए स्थान का उद्घाटन
जुलाई 26, 2022
बोर्ड द्वारा अनुमोदित ऋण नीति - अग्रिमों का प्रबंधन - शहरी सहकारी बैंक
2023
2022
2021
2020
2019
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