शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

अधिसूचनाएं


अगस्त 16, 2018
अनुसूचित सहकारी बैंकों के लिए चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) और सीमांत स्‍थायी सुविधा (एमएसएफ) उपलब्‍ध कराया जाना
प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों द्वारा गैर एसएलआर प्रतिभूतियों में निवेश किया जाना – द्वितीयक बाज़ार लेनदेन के लिए अनुमोदित काउंटरपार्टियां
जुलाई 12, 2018
डिमांड ड्राफ्ट के मुखपृष्ठ पर ग्राहक का नाम शामिल किया जाना
जुलाई 06, 2018
बैंकों द्वारा निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण, मूल्‍यांकन और परिचालन संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड – सहकारी बैंकों द्वारा एमटीएम हानियों का विभाजन (स्प्रेडिंग) और निवेश अस्थिरता रिज़र्व (आईएफआर) का सृजन
जून 14, 2018
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची में “दी महानगर को-ओपरेटिव बैंक लि., मुंबई” शब्दों को “जीएस महानगर को-ओपरेटिव बैंक लि., मुंबई” के रूप में परिवर्तन
मई 10, 2018
प्राथमिक शहरी सहकारी बैंकों के लिए प्राथमिकता प्राप्‍त क्षेत्र को उधार देने से संबंधित संशोधित दिशानिर्देश
दिसंबर 14, 2017
ग्राहक संरक्षण – अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में सहकारी बैंकों के ग्राहकों की देयता को सीमित करना
दिसंबर 07, 2017
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची में “सरदार भीलाडवाला पारडी पीपल्स को-ओपरेटिव बैंक लि., किला पारडी, जि. वलसाड (गुजरात)” के नाम का “एसबीपीपी को-ओपरेटिव बैंक लि., किला पारडी, जि. वलसाड (गुजरात)” के रूप में परिवर्तन
2018
2017
2016
2015
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