आरबीआई/2026-27/04
एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र. 03
01 अप्रैल, 2026
सभी प्राधिकृत डीलर
महोदया/महोदय,
जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन
प्राधिकृत डीलरों का ध्यान दिनांक 27 मार्च, 2026 के एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र. 24 और समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश – जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन की ओर आकृष्ट किया जाता है।
2. बाजार की बदलती परिस्थितियों की समीक्षा करने पर, यह आगे निर्णय लिया गया है कि:
ए) प्राधिकृत डीलर, निवासी या अनिवासी उपयोगकर्ताओं को भारतीय रुपये से जुड़ी गैर-सुपुर्दगी योग्य डेरिवेटिव संविदाओं की पेशकश नहीं करेंगे। हालांकि, प्राधिकृत डीलर उपयोगकर्ताओं को उनकी हेजिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सुपुर्दगी योग्य विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की पेशकश करना जारी रख सकते हैं, बशर्ते कि उपयोगकर्ता गैर-सुपुर्दगी योग्य डेरिवेटिव स्थितियों द्वारा उसकी ऑफसेटिंग न करे। इस प्रयोजन के लिए, प्राधिकृत डीलर उपयोगकर्ताओं से ऐसी जानकारी/दस्तावेज मांग सकते हैं जो वे आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए आवश्यक समझते हों;
बी) प्राधिकृत डीलर भारतीय रुपये से जुड़ी किसी भी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा चाहे वह सुपुर्दगी योग्य हो या गैर-सुपुर्दगी, को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं देंगे, जिसे इन निदेशों के जारी होने की तारीख के बाद रद्द कर दिया जाता है। इस प्रयोजन के लिए, प्राधिकृत डीलर उपयोगकर्ताओं से ऐसी जानकारी/दस्तावेज मांग सकते हैं जो वे आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए आवश्यक समझते हों; और
सी) प्राधिकृत डीलर अपनी संबंधित पार्टियों के साथ भारतीय रुपये से जुड़ी कोई विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा नहीं करेंगे। 'संबंधित पार्टियों' का वही अर्थ होगा जो भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 24 – संबंधित पार्टी प्रकटीकरण या अंतरराष्ट्रीय लेखा मानक (आईएएस) 24 – संबंधित पार्टी प्रकटीकरण या किसी भी अन्य समकक्ष लेखांकन मानकों के अंतर्गत इसे दिया गया है।
3. आगे समीक्षा किए जाने तक, ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
4. इस परिपत्र में निहित निदेश फेमा, 1999 (1999 का 42) की धारा 10 (4), 11(1) और 11(2) के अंतर्गत और किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/अनुमोदन, यदि हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक |