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विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

8 अप्रैल 2026

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

यह वक्तव्य (i) विनियमन; (ii) पर्यवेक्षण; (iii) भुगतान प्रणालियों; और (iv) वित्तीय बाज़ारों से संबंधित विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीतिगत उपायों को निर्धारित करता है:

I. विनियमन

1. जोखिम भारित आस्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) की गणना में त्रैमासिक लाभों के समावेशन हेतु दिशानिर्देशों की समीक्षा – वाणिज्यिक बैंकों

मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर) को सीआरएआर की गणना में त्रैमासिक निवल लाभों को शामिल करने की अनुमति है, बशर्ते कि पिछले वित्तीय वर्ष की चार तिमाहियों में से किसी भी तिमाही के अंत में अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के लिए किए गए वृद्धिशील प्रावधान, उन चारों तिमाहियों के औसत से 25 प्रतिशत से अधिक विचलित न हुए हों। समीक्षा के बाद, इस शर्त को समाप्त करने का प्रस्ताव है। इस संबंध में संशोधन निदेश का मसौदा शीघ्र ही जन- सामान्य की टिप्पणियों के लिए जारी किए जाएंगे।

2. निवेश उतार-चढ़ाव आरक्षित निधि (आईएफ़आर) संबंधी दिशानिर्देशों की समीक्षा

बैंक वर्तमान में अपने निवेश के मूल्य में मूल्यह्रास के सापेक्ष एक अतिरिक्त बफर के रूप में निवेश उतार-चढ़ाव आरक्षित निधि (आईएफ़आर) रखते हैं, जो बाज़ार भाव पर दर्शाने (एमटीएम) की आवश्यकताओं के अधीन होता है। वर्तमान में, वाणिज्यिक बैंक (जिनमें स्थानीय क्षेत्र बैंक शामिल हैं, लेकिन लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल नहीं हैं) पहले से ही बाज़ार जोखिम के लिए पूंजीगत प्रभार का रख- रखाव करते हैं और निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण, मूल्यन और परिचालन संबंधी संशोधित नियमों का भी पालन करते हैं। इन लागू विवेकपूर्ण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, ऐसे वाणिज्यिक बैंकों के लिए आईएफ़आर की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। अन्य बैंक श्रेणियों के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों को भी संशोधित किया जा रहा है, ताकि आईएफ़आर पर विनियामक सीमाओं का पालन करने में ऐसे बैंकों को आने वाली परिचालनगत चुनौतियों का समाधान किया जा सके और सभी बैंक श्रेणियों में अनुदेशों में एकरूपता लाई जा सके, जिससे विनियामक स्पष्टता और निरंतरता बढ़ेगी। इस संबंध में निदेश का मसौदा शीघ्र ही जन- सामान्य के परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।

3. बैंकों के बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत मामलों की समीक्षा

बैंकों के बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले मामले और उन मामलों की आवधिकता, स्वयं बोर्ड ही निर्धारित करते हैं, जिसके लिए वे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सात मुख्य विषयों से मार्गदर्शन लेते हैं। साथ ही, रिज़र्व बैंक ने कतिपय ऐसी नीतियां और मामले भी अनिवार्य किए हैं जिन्हें बोर्ड के सामने अनुमोदन, समीक्षा या जानकारी के लिए रखा जाना आवश्यक है। बोर्ड अपने समय का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें, और कार्यनीति तथा जोखिम प्रबंधन पर अधिक केंद्रित व गुणवत्तापूर्ण चर्चा कर सकें, इस उद्देश्य से रिज़र्व बैंक ने ऐसे सभी अनुदेशों की व्यापक समीक्षा की और उन्हें तर्कसंगत बनाने का कार्य किया है। इस संबंध में निदेश का मसौदा शीघ्र ही जन- सामान्य के परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।

II. पर्यवेक्षण

4. पर्यवेक्षी अनुदेशों का समेकन

रिज़र्व बैंक ने अनुदेशों की प्रासंगिकता को निरंतर बनाए रखने हेतु समय-समय पर उनका मूल्यांकन करके अनुपालन लागत को कम करते हुए, अपने विनियामकीय और पर्यवेक्षी ढांचे को बेहतर बनाने और मजबूत करने का लगातार प्रयास किया है। इस प्रयोजन हेतु ही, रिज़र्व बैंक ने 2025 में 'यथास्थिति' के आधार पर विनियामक अनुदेशों के व्यापक समेकन का कार्य किया था। इस कार्य में 9000 से अधिक मौजूदा विनियामक परिपत्रों/ दिशानिर्देशों को 238 कार्य-वार मास्टर निदेशों (एमडी) में समेकित करना शामिल था, जो विनियमित संस्थाओं की प्रत्येक श्रेणी के लिए विशिष्ट थे। अब पर्यवेक्षी अनुदेशों के लिए भी इसी तरह का कार्य किया गया है। तदनुसार, नौ कार्यात्मक क्षेत्रों तक के मौजूदा पर्यवेक्षी अनुदेशों को समेकित करने वाले 64 मास्टर निदेशों के मसौदे आज आरबीआई की वेबसाइट पर जन- सामान्य की टिप्पणियों के लिए प्रकाशित किए जा रहे हैं।

III. भुगतान प्रणाली

5. व्यापारिक प्राप्य राशि भुनाई प्रणाली (ट्रेड्स) में एमएसएमई को शामिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाना

एमएसएमई के लिए समय पर कार्यशील पूंजी तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, 2014 में व्यापारिक प्राप्य राशि भुनाई प्रणाली (ट्रेड्स) के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे और बाद में 2018 में उन्हें अद्यतन किया गया। 2023 में बीमा कंपनियों को चौथे प्रतिभागी के रूप में शामिल करते हुए ट्रेड्स के दायरे का और विस्तार किया गया। एमएसएमई के लिए कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा देने और उनकी ट्रेड्स पर अधिकाधिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए, ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई को सम्मिलित करते समय उनकी उचित जांच-पड़ताल की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। अन्य मौजूदा अनुदेशों की भी एक व्यापक समीक्षा की गई है, और शीघ्र ही निदेश का मसौदा जन- सामान्य के परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।

IV. वित्तीय बाज़ार

6. मीयादी मुद्रा बाज़ार का विकास

एक सक्रिय मीयादी मुद्रा बाज़ार, बाजार प्रतिभागियों के लिए वित्तपोषण का एक वैकल्पिक माध्यम प्रदान करने के अलावा, एक दिवसीय मुद्रा बाज़ार और दीर्घकालिक ब्याज दरों के बीच कड़ी बनाकर मौद्रिक नीति के प्रसार को बढ़ावा देने में भी सहायक है। वर्तमान में, कतिपय विवेकपूर्ण सीमाओं के साथ केवल बैंकों और एकल प्राथमिक व्यापाररी ही मीयादी मुद्रा बाज़ार में भाग लेने के पात्र हैं। सहभागिता की गहनता और मीयादी मुद्रा बाज़ार खंड में चलनिधि को और बढ़ाने के उद्देश्य से, यह निर्णय लिया गया है कि (क) मीयादी मुद्रा बाज़ार खंड में प्रतिभागियों के आधार को आवास वित्त कंपनियों, कंपनियों आदि सहित गैर-बैंक प्रतिभागियों, जैसे एआईएफआई, एनबीएफसी आदि को शामिल करके विस्तारित किया जाए; और (ख) एकल प्राथमिक व्यापारियों के लिए मीयादी मुद्रा बाज़ार में उधार लेने की सीमा बढ़ाई जाए। संशोधित निदेश अलग से जारी किए जा रहे हैं।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/38


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