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एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए स्वैप सुविधा

आरबीआई/2026-27/99
एफएमओडी.एमओएजी.सं.एस-56/01.06.016/2026-27

8 जून 2026

सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक

महोदया/महोदय,

एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए स्वैप सुविधा

कृपया 5 जून 2026 के गवर्नर के वक्तव्य का संदर्भ लें।

2. न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई नई विदेशी मुद्रा अनिवासी खाता (एफसीएनआर) (बी) जमाराशियों के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

3. स्वैप सुविधा की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:-

क. प्राधिकृत व्यापारी (एडी) श्रेणी-I बैंकों के लिए यह स्वैप सुविधा उन नई एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए उपलब्ध होगी, जो किसी भी स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में जुटाई गई हों (जिनमें परिपक्वता पर नवीकृत की गई जमाराशियां भी शामिल हैं), बशर्ते इनकी अवधि न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष हो। तथापि, भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ स्वैप सुविधा केवल अमेरिकी डॉलर में ही उपलब्ध होगी।

ख. स्वैप की अवधि आधारभूत जमाराशियों की अवधि के अनुरूप होगी।

ग. बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे इस योजना के अंतर्गत आने वाली एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए लेन-देन के उचित ऑडिट ट्रेल के साथ अलग-अलग रिकॉर्ड बनाए रखें।

घ. बैंक इन जमाओं का मूल्य निर्धारण अपनी आंतरिक नीति के अनुसार स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, परंतु यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी वर्तमान दिशा-निर्देशों में निर्धारित समग्र सीमा के भीतर होना चाहिए।

ङ. अमेरिकी डॉलर के अलावा अन्य अनुमेय विदेशी मुद्राओं में जुटाई गई एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के लिए, स्वैप सौदे के दिन प्रचलित बाजार दरों पर बैंक इनका संपरिवर्तन करके स्वैप के लिए पात्र समतुल्य अमेरिकी डॉलर राशि का निर्धारण कर सकते हैं। बैंकों को संपरिवर्तन के संबंध में एक सुसंगत नीति का पालन करना चाहिए और ऐसे संपरिवर्तनों के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का उचित दस्तावेजीकरण (ऑडिट ट्रेल) बनाए रखना चाहिए।

च. स्वैप सुविधा मुंबई में सभी कार्य दिवसों (शनिवार और अवकाश दिवसों को छोड़कर) प्रतिदिन परिचालित की जाएगी। हालाँकि, कोई बैंक सप्ताह में केवल एक बार ही इस स्वैप सुविधा का लाभ उठा सकता है। किसी भी सप्ताह के दौरान, किसी बैंक द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के साथ स्वैप करने के लिए पात्र अमेरिकी डॉलर की अधिकतम राशि, उन पात्र एफसीएनआर (बी) जमाराशियों के समतुल्य अमेरिकी डॉलर में परिवर्तित कुल राशि के बराबर होगी, जो पिछले सप्ताह(सप्ताहों) में जुटाई गई हैं और जिनके लिए पूर्व में इस सुविधा का लाभ नहीं उठाया गया है।

छ. स्वैप व्यवस्था के तहत, कोई भी बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक को एक मिलियन अमेरिकी डॉलर के गुणजों में अमेरिकी डॉलर बेच सकता है और साथ ही स्वैप अवधि की समाप्ति पर उतनी ही राशि के अमेरिकी डॉलर वापस खरीदने के लिए सहमत हो सकता है। लेन-देन के पहले चरण में, बैंक एफबीआईएल संदर्भ दर पर भारतीय रिज़र्व बैंक को अमेरिकी डॉलर बेचेगा। स्वैप के पहले चरण का निपटान लेन-देन की तारीख से स्पॉट आधार पर होगा। स्वैप का दूसरा चरण उसी दर पर होगा जिस पर पहला चरण हुआ था। यह स्वैप सममूल्य पर किया जाएगा।

ज. स्वैप सुविधा का लाभ उठाने हेतु अनुरोध प्रस्तुत करते समय, बैंकों को अपने प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा विधिवत् हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होगी कि उक्त जमाराशियों को योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जुटाया गया है।

झ. स्वैप सुविधा का परिचालन मुंबई स्थित भारतीय रिज़र्व बैंक के वित्तीय बाजार परिचालन विभाग द्वारा किया जाएगा। यह विभाग बाजार की स्थितियों और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए, बैंकों द्वारा इस सुविधा का व्यवस्थित ढंग से लाभ उठाने हेतु अनुसूची तैयार करेगा।

ञ. अंतर्निहित जमाराशियों पर एक वर्ष की लॉक-इन अवधि होगी। बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार, एक वर्ष के पश्चात ऐसी जमाराशियों के समय-पूर्व निकासी की अनुमति स्वेच्छा से दे सकते हैं। तथापि, भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ किए गए स्वैप को रद्द नहीं किया जा सकता है।

ट. स्वैप सुविधा तत्काल प्रभाव से लागू की जाती है और इस परिपत्र की तारीख से और 30 सितंबर 2026 के बीच जुटाई गई जमाराशियों के लिए यह 16 अक्टूबर 2026 तक खुली रहेगी।

ठ. स्वैप सुविधा की अवधि के दौरान जुटाई जाने वाली एफसीएनआर (बी) जमा राशियां ऐसी जमा राशियों पर लागू मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार जुटाई जाएंगी। हालांकि, 28 नवंबर 2025 को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएं) निदेश, 2025 के पैरा 402 के प्रावधान ऐसी जमाराशियों पर लागू नहीं होंगे।

ड. पात्र बैंक यूएस डॉलर स्वैप सुविधा के लिए अपना अनुरोध वित्तीय बाजार परिचालन विभाग को ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। अनुरोध में स्वैप की जाने वाली यूएस डॉलर की राशि, स्वैप की अवधि (टेनर) का उल्लेख होना चाहिए और उपरोक्त (ज) में उल्लिखित घोषणा शामिल होनी चाहिए।

ढ. इस प्रयोजन के लिए बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ कोई आईएसडीए करार करने की आवश्यकता नहीं है।

भवदीय,

(टी. किरन कुमार)
महाप्रबंधक


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