5 जून 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने केनरा बैंक पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 5 जून 2026 के आदेश द्वारा, केनरा बैंक (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) और ‘बैंकों में अदावी जमा / निष्क्रिय खाते’ संबंधी कतिपय निदेशों के प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹41.80 लाख (इकतालीस लाख अस्सी हज़ार रुपए मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 51(1) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का पर्यवेक्षी मूल्यांकन संबंधी सांविधिक निरीक्षण (आईएसई 2025) किया गया। आरबीआई निदेशों के प्रावधानों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि आरबीआई निदेशों के उक्त प्रावधानों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर बैंक के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
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बैंक ने कतिपय ग्राहकों के केवाईसी अभिलेखों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार (सीकेवाईसीआर) में अपलोड नहीं किया।
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बैंक ने कतिपय खातों को निष्क्रिय-खातों के रूप में वर्गीकृत किया, जबकि ऐसे खातों में किसी ग्राहक द्वारा किया गया अंतिम लेन-देन एक वर्ष से भी कम पुराना था।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/398 |