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भारतीय रिज़र्व बैंक ने नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराजगंज (उत्तरप्रदेश) पर मौद्रिक दंड लगाया

4 जून 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराजगंज (उत्तरप्रदेश) पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 26 मई 2026 के आदेश द्वारा, नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराजगंज (उत्तरप्रदेश) (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी 'आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण तथा अन्य संबंधित मामले', 'एक्सपोज़र मानदंड और सांविधिक/अन्य प्रतिबंध', 'साख सूचना कंपनियों (सीआईसी) की सदस्यता' और 'अग्रिमों का प्रबंधन' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 14.25 लाख (चौदह लाख पच्चीस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1)(सी) के प्रावधानों तथा प्रत्‍यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा (23) के साथ पठित धारा 25 के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

  1. बैंक ने: (क) कतिपय उधारकर्ताओं को दी गई ऋण-सुविधाओं को अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया, (ख) कतिपय एनपीए को उचित तरीके से वर्गीकृत नहीं किया, और (ग) मौजूदा एनपीए की निरंतर आधार पर पहचान नहीं की;

  2. वैयक्तिक और समग्र स्तर के गैर-ज़मानती अग्रिमों संबंधी निर्धारित विनियामकीय सीमा का उल्लंघन किया

  3. उधारकर्ताओं की साख सूचना जानकारी को साख सूचना कंपनियों में अपलोड नहीं किया; और

  4. कतिपय ऋणों की मंजूरी में खामियों से बचने के लिए उपयुक्त सावधानियाँ नहीं बरतीं।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/382

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