22 मई 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 20 मई 2026 के आदेश द्वारा, सिटी यूनियन बैंक लिमिटेड (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र ऋण खाते’ और ‘साख सूचना कंपनियों (सीआईसी) को स्व-सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य स्तर के आँकड़ों की रिपोर्टिंग’ संबंधी कतिपय निदेशों के प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹10.10 लाख (दस लाख दस हज़ार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) तथा प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 23(4) के साथ पठित धारा 25(1)(iii) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय के संदर्भ में पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया था। आरबीआई निदेशों के प्रावधानों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
i. बैंक ने कतिपय कृषि-प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के ऋणों पर ₹25,000/- तक का ऋण संबंधी प्रभार लगाया।
ii. बैंक ने स्व-सहायता समूह के सदस्य स्तर के आंकड़ों की रिपोर्टिंग साख सूचना कंपनियों को नहीं की।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/315 |