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यद्यपि यह भूमिका हमारी गतिविधियों का एक ऐसा पहलू है, जिसके संबंध में स्‍पष्‍ट रूप से कहीं उल्‍लेख तो नहीं है, किंतु अति महत्‍वपूर्ण गतिविधियों की श्रेणी में इसकी गिनती की जाती है। इसके अंतर्गत अर्थव्‍यवस्‍था के उत्‍पादक क्षेत्रों को ऋण उपलब्‍धता सुनिश्चित करना, देश की वित्‍तीय मूलभूत संरचना के निर्माण हेतु संस्‍थाओं की स्‍थापना करना, किफायती वित्‍तीय सेवाओं की सुलभता बढ़ाना तथा वित्‍तीय शिक्षण एवं साक्षरता को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं।

प्रेस प्रकाशनी


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पर्यवेक्षी अनुदेशों का समेकन – टिप्पणियां हेतु मसौदे

8 अप्रैल 2026

पर्यवेक्षी अनुदेशों का समेकन – टिप्पणियां हेतु मसौदे

रिज़र्व बैंक ने अपने विनियामकीय और पर्यवेक्षी ढांचे को परिष्कृत और सुदृढ़ करने का सतत प्रयास किया है, ताकि अन्य बातों के साथ-साथ, बैंक की अपेक्षाओं को तर्कसंगत बनाया जा सके और समय-समय पर उनकी अनवरत प्रासंगिकता का मूल्यांकन करके अनुपालन-लागत को कम किया जा सके।

2. इस उद्देश्य की प्राप्ति के क्रम में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘यथास्थिति’ के आधार पर विनियमन विभाग द्वारा नियंत्रित अनुदेशों के समेकन का व्यापक कार्य किया था। इस संबंध में, दिनांक 28 नवंबर 2025 की प्रेस प्रकाशनी पर भी ध्यान आकर्षित किया जाता है जिसके माध्यम से विनियमन संबंधी 9000 से अधिक परिपत्रों को लगभग 30 कार्यों/ कार्य-क्षेत्रों वाले 238 मास्टर निदेशों में समेकित करने की की सूचना दी गई थी।

3. इसी क्रम में, पर्यवेक्षण विभाग ने भी पर्यवेक्षी अनुदेशों के संबंध में इस प्रकार का कार्य किया है। इस कार्य के अंतर्गत, 8 अप्रैल 2026 तक के पर्यवेक्षी निदेशों के मौजूदा यूनिवर्स को 11 प्रकार की विनियमित संस्थाओं में 9 कार्यों / कार्य-क्षेत्रों वाले 64 मास्टर निदेशों में समेकित किया गया है। परिणामस्वरूप, पर्यवेक्षण विभाग द्वारा नियंत्रित 626 परिपत्रों (मास्टर परिपत्र/मास्टर निदेश सहित) का निरसन कर दिया जाएगा। समेकन कार्य की विस्तृत पृष्ठभूमि यहां दी गई है।

4. इस कार्य से (i) विनियमित संस्थाओं के लिए पर्यवेक्षी अनुदेशों की उपलब्धता और स्पष्टता बढ़ने (ii) अनुपालन संबंधी भार के घटने, और (iii) विनियमित संस्थाओं की विभिन्न श्रेणियों में निदेशों की उपयुक्तता की समझ में सुधार होने की उम्मीद है।

5. तदनुसार, रिज़र्व बैंक ने आज निम्नलिखित दस्तावेज़ों के मसौदों को, उनकी पूर्णता और सटीकता संबंधी सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए अपनी वेबसाइट पर जारी किया है:

(i) 64 समेकित निदेशों के मसौदे

(ii) निरसन हेतु प्रस्तावित परिपत्रों की सूची

6. विनियमित संस्थाओं और जन सामान्य / अन्य हितधारकों द्वारा उक्त दस्तावेज़ों पर टिप्पणियाँ/ प्रतिक्रिया 8 मई 2026 को या उससे पहले निम्नलिखित चैनलों के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती है:

i. प्रत्येक दस्तावेज के साथ प्रदान किए गए हाइपरलिंक, जिस पेज पर वे प्रकाशित किए गए हैं, के माध्यम से वेबसाइट पर उपलब्ध 'कनेक्ट 2 रेगुलेट' खंड द्वारा; या

ii. विषय पंक्ति 'निदेश (निदेश के मसौदे का पूर्ण नाम (विनियमित संस्था के प्रकार सहित)) पर प्रतिक्रिया' लिखकर ई-मेल द्वारा।

7. यह उल्लेखनीय है कि निदेशों में संशोधन/उनकी सारभूत समीक्षा की मांग करने वाली प्रतिक्रिया या सुझावों को इस समेकन अभ्यास के हिस्से के रूप में नहीं माना जाएगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/43

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