शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

अधिसूचनाएं


जनवरी 17, 2024
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची - समावेशन के लिए मानदंड
जनवरी 15, 2024
राज्य सहकारी बैंकों और केंद्रीय सहकारी बैंकों के सांविधिक लेखा परीक्षकों की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति के संबंध में दिशानिर्देश
जनवरी 01, 2024
शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए थोक जमा पर अनुदेशों की समीक्षा
अक्तूबर 30, 2023
जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) द्वारा एक ही शहर, नगर या गांव के भीतर शाखाओं/कार्यालयों/विस्तार काउंटरों के स्थानांतरण के संबंध में स्पष्टीकरण तथा डीसीसीबी द्वारा शाखाओं और विस्तार काउंटरों को बंद करने संबंधी दिशानिर्देश
बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम 2020 - सहकारी बैंकों के नाम में परिवर्तन
अक्तूबर 06, 2023
स्वर्ण ऋण - एकमुश्त भुगतान - प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी)
अगस्त 18, 2023
समान मासिक किस्तों (ईएमआई) आधारित व्यक्तिगत ऋण पर अस्थायी (फ्लोटिंग) ब्याज दर का पुनर्निर्धारण
जुलाई 25, 2023
मास्टर परिपत्र - अग्रिमों का प्रबंधन – शहरी सहकारी बैंक
2024
2023
2022
2021
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