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भाषण

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14 दिसंबर 2020 को ज़ी बिजनेस के साथ साक्षात्कार - श्री शक्तिकांत दास, गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक

प्रश्न 1. आपके लिए क्या यह पद आरबीआई का सिंहासन रहा है या कांटों भरा ताज? आरबीआई गवर्नर के तौर पर ये दो वर्ष कैसे रहे हैं?

उत्तर: यह पद बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी वाला रहा है। दो तरह की स्थितियाँ रही हैं। इस देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का यह एक शानदार अवसर रहा है। हालाँकि, चुनौतियाँ और मुश्किलें भी आई हैं।

प्रश्न 2. आप अपने पूर्ववर्तियों की छवि से बाहर निकलने में सफल रहे हैं, जिन्हें एकांतप्रिय माना जाता था। सरकार के साथ आपके संबंध बहुत सौहार्दपूर्ण हैं। आप ऐसा करने में कैसे कामयाब रहे?

उत्तर: दुनिया भर में, सरकार और केंद्रीय बैंकों की सोच आमतौर पर अलग-अलग होती है। विचार विमर्श से इन मतभेदों को सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा, अर्थव्यवस्था के मामलों में सरकार की जवाबदेही किसी देश के केंद्रीय बैंक की तुलना में कहीं ज़्यादा होती है। विवादित मुद्दों पर, आगे बढ़ने का तरीका एक-दूसरे से बातचीत करना है।

प्रश्न 3. दो वर्ष तक शीर्ष पर रहने के दौरान आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है?

पदभार संभालने के समय सबसे बड़ी चुनौती एनबीएफसी क्षेत्र में थी। उनकी स्थिरता और चलनिधि की स्थिति पर बड़े सवाल थे। उनके कामकाज को स्थिर करने और उन पर भरोसा बढ़ाने की चुनौती थी। विनियामक को बैंकों और एनबीएफसी के कामकाज पर कड़ी नज़र रखनी पड़ी।

रिज़र्व बैंक, बैंकों की वित्तीय स्थिति का पहले से ही अंदाज़ा लगाने और प्रबंधन को सामने आ रही समस्याओं के बारे में आगाह करने की कोशिश करता रहा है।

फिलहाल, ब्याज दर, मौद्रिक नीति और विकास आरबीआई के सामने कुछ बड़े मुद्दे हैं।

प्रश्न 4. आरबीआई को दुनिया भर में सबसे अच्छे केंद्रीय बैंकों में से एक माना जाता है। पीएमसी, येस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) से जुड़ी समस्याएँ थीं, और येस बैंक तथा एलवीबी को बहुत अच्छे से संभाला गया। विनियामकिय निगरानी के बावजूद बैंक क्यों असफल हो रहे हैं? हम देखते हैं कि बैंकों को फिर से खड़ा करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन बॉन्ड और इक्विटी धारकों को नुकसान हो रहा है।

उत्तर: आरबीआई जमाकर्ताओं के हितों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दे रहा है, और इसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। बैंकिंग विनियामक ने बैंकों पर कड़ी नज़र रखने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए हैं। हालाँकि, हम बैंकों के बिज़नेस मॉडल को समझते हैं, फिर भी उनकी बहियों पर हमेशा नज़र रखी जाती है। आरबीआई के निर्णय विनियामकिय दिशानिर्देश के अनुसार और कानून के दायरे में होते हैं।

प्रश्न 5. नए बैंकिंग लाइसेंस के लिए प्रारूप दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य एनबीएफसी को बैंकों में बदलना है। हालांकि ये दिशानिर्देश अच्छे हैं, लेकिन क्या आरबीआई सच में नए लाइसेंस देना चाहता है?

उत्तर: कोई भी व्यक्ति कभी भी बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है। आंतरिक कार्य दल की सिफ़ारिशों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। हम अभी भी हितधारकों से प्रतिसूचना का इंतज़ार कर रहे हैं, और इस पर कोई भी निर्णय विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

प्रश्न 6. जहां एक तरफ़ महंगाई अत्यधिक है, वहीं दूसरी तरफ़ जमा पर मिलने वाला ब्याज कम है? महंगाई कम करने के लिए आरबीआई क्या कर रहा है?

उत्तर: मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के अनुसार, महंगाई अगले कुछ और महीनों तक अधिक रहने की अपेक्षा है। सर्दियों के दौरान इसमें कुछ नरमी आने की संभावना है। सरकार ने महंगाई कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। राज्य सरकारों को भी स्थिति सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्हें दूध, अंडे और चिकन की कीमतें कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

आरबीआई विकास और मौजूदा स्थिति पर नज़र रखे हुए है। महामारी की स्थिति के बीच ब्याज दरों के मुद्दे पर निर्णय लेने में कोई जल्दबाज़ी नहीं की जाएगी।

प्रश्न 7. आरबीआई हमेशा से ही अग्र-सक्रिय और निष्पक्ष रहा है। क्या केंद्रीय बैंक यूएस फेड की राह पर चल रहा है? इसमें सरकार का हस्तक्षेप कितना है?

उत्तर: आरबीआई भविष्य की स्थिति का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने के बाद ही निर्णय लेता है। यह एक स्वायत्त संस्था है और सरकार के साथ इस पर चर्चा होती रहती है। लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त है।

प्रश्न 8. शेयर बाज़ार अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं और देश में डॉलर का भारी आगमन हो रहा है। एक महीने में होने वाला यह अंतर्वाह अभूतपूर्व है। यदि यह पैसा वापस जाने लगे तो क्या होगा, और आरबीआई इस पर किस तरह नज़र रखे हुए है?

उत्तर: आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा आरक्षिती वर्तमान में 579 अरब डॉलर है। यदि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अपना पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, तो उससे निपटने के लिए पूरी तैयारी है। चलनिधि की स्थिति वैसी ही बनी रहने की संभावना है, जैसी अभी है। रिज़र्व प्रबंधन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।


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