21 सितंबर 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए बासेल III के अंतर्गत बाज़ार जोखिम हेतु न्यूनतम पूंजीगत अपेक्षाओं संबंधी निदेश जारी किए
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 17 फरवरी 2023 को हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए बासेल III के अंतर्गत बाज़ार जोखिम हेतु न्यूनतम पूंजी अपेक्षाओं संबंधी दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। उक्त दिशानिर्देशों के मसौदे में संशोधित बासेल III रूपरेखा के अंतर्गत बाज़ार जोखिम हेतु पूंजी अपेक्षा की गणना के लिए सरलीकृत मानकीकृत दृष्टिकोण (एसएसए) अपनाने का प्रस्ताव किया गया था।
2. दिशानिर्देशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जांच की गई है और तदनुसार आवश्यक संशोधनों को अंतिम निदेशों में समुचित रूप से शामिल किया गया है। दिशानिर्देशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है। तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज ‘भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक—बाज़ार जोखिम हेतु न्यूनतम पूंजी अपेक्षाएं) निदेश, 2026’ जारी किए हैं।
3. इन निदेशों का उद्देश्य संशोधित बासेल III रूपरेखा के अनुरूप बाज़ार जोखिम संबंधी दिशानिर्देशों को सुव्यवस्थित करना है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बासेल मानकों को अपनाए जाने के क्रम में किया गया है तथा इसका उद्देश्य विनियमावली को सरल बनाना, लचीलापन सुनिश्चित करना और उन्हें अपनाने में सुविधा प्रदान करना है। उक्त निदेश 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे, जिससे बैंकों को तैयारी हेतु पर्याप्त समय मिल सकेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि सुगम प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल 2024 से अंतरिम (प्रसारण) गुणक प्रभावी हैं।
4. दिशानिर्देशों के मसौदे की तुलना में अंतिम निदेशों में किए गए प्रमुख परिवर्तनों का सारांश निम्नानुसार है:
(1) ट्रेडिंग बही का दायरा: निवेश संबंधी निदेशों1 में ‘ट्रेडिंग के लिए धारित (एचएफटी)’ लेखांकन उप-वर्गीकरण के अंतर्गत ट्रेडिंग बही की स्पष्ट पहचान योग्य परिभाषा दी गई है। अतः ट्रेडिंग बही की परिभाषा संबंधी अनुदेशों को अंतिम निदेशों से हटा दिया गया है और निवेश संबंधी निदेशों का संदर्भ दिया गया है।
(2) निवल खुली स्थिति और विदेशी मुद्रा जोखिम संबंधी पूंजी प्रभार: भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक—पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) दसवां संशोधन निदेश, 2026 में दिए गए संशोधित अनुदेशों को समुचित रूप से शामिल किया गया है।
(3) ब्याज दर जोखिम के लिए विशिष्ट जोखिम पूंजी प्रभार: ब्याज दर जोखिम से संबंधित विशिष्ट जोखिम सारणियों को बैंकिंग पर्यवेक्षण संबंधी बासेल समिति (बीसीबीएस) के दिशानिर्देशों के अनुरूप संशोधित किया गया है। इससे इनका निष्पादन अधिक संक्षिप्त एवं सुव्यवस्थित हो गया है।
(4) ट्रेडिंग बही में शामिल ऋण म्यूचुअल फंड/एक्सचेंज में खरीदी- बेची गई निधियों (ईटीएफ): अंतर्निहित जोखिम चालकों के आधार पर पूंजी की गणना सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए पूंजी संबंधी निष्पादन को संशोधित किया गया है।
(5) क्रेडिट डेरिवेटिव्स द्वारा हेज की गई पोजीशन के लिए विशिष्ट जोखिम पूंजी अपेक्षा: अनुदेशों को संशोधित कर उन पोजीशन के निष्पादन को शामिल किया गया है जिन्हें कुल प्रतिलाभ स्वैप के माध्यम से हेज किया गया है। यह ‘मास्टर निदेश—भारतीय रिज़र्व बैंक (क्रेडिट डेरिवेटिव) निदेश, 2026’ के अंतर्गत अनुमत है।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1158
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