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भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि एन. ई. एंड ई. सी रेल्वे एम्प्लोयीज़ मल्टी-स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, गोरखपुर पर मौद्रिक दंड लगाया

2 जुलाई 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि एन. ई. एंड ई. सी रेल्वे एम्प्लोयीज़ मल्टी-स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक
लिमिटेड, गोरखपुर पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 30 जून 2026 के आदेश द्वारा दि एन. ई एंड ई. सी रेल्वे एम्प्लोयीज़ मल्टी-स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, गोरखपुर (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ पठित धारा 26ए के प्रावधानों के उल्लंघन तथा आरबीआई द्वारा जारी ‘साख सूचना कंपनियों की सदस्यता (सीआईसी)’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 1.05 लाख (एक लाख पाँच हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) और प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 23 के साथ पठित धारा 25 के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लंघन/आरबीआई के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त प्रावधानों एवं निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है :

बैंक ने:

  1. निर्धारित समय-सीमा के भीतर जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता निधि में पात्र अदावी राशियों का अंतरण नहीं किया ; और

  2. दो साख सूचना कंपनियों (सीआईसी) की सदस्यता प्राप्त नहीं की तथा अपने उधारकर्ताओं की साख संबंधी जानकारी सभी चार सीआईएस को प्रदान नहीं की।

यह कार्रवाई, सांविधिक और विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/593


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