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भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम (एसए-सीसीआर) हेतु मानकीकृत दृष्टिकोण संबंधी संशोधन निदेशों के मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की

10 जून 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम (एसए-सीसीआर) हेतु मानकीकृत दृष्टिकोण संबंधी
संशोधन निदेशों के मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की

वर्तमान दिशानिर्देशों के अंतर्गत यह आवश्यक है कि प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम (सीसीआर) एक्सपोज़र की गणना करने के लिए चालू एक्सपोज़र पद्धति (सीईएम) का उपयोग किया जाए। आरबीआई ने वर्ष 2016 में, दिनांक 1 अप्रैल 2018 से क्रियान्वयन करने के लक्ष्य के साथ, ‘डेरिवेटिव लेनदेन-जनित प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम के लिए एक्सपोज़र की गणना’ और ‘केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंक एक्स्पोज़र के लिए पूंजीगत आवश्यकताओं’ संबंधी अंतिम दिशानिर्देश जारी किए थे और उक्त दोनों दिशानिर्देश प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम हेतु मानकीकृत पद्धति (एसए-सीसीआर) पर आधारित थे। यद्यपि, उक्त दिशानिर्देशों का कार्यान्वयन स्थगित कर दिया गया था।

2. मौजूदा स्थिति के अनुसार, अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग अधिनियम, 2020 लागू हो चुका है तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए मार्जिनिंग) निदेश, 2024 के अंतर्गत मार्जिनिंग ढांचे को कार्यान्वित कर दिया गया है। समय के साथ, बैंकिंग पर्यवेक्षण बासेल समिति (बीसीबीएस) ने भी एसए-सीसीआर दिशानिर्देशों पर और स्पष्टता प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ जारी किए हैं।

3. इस संबंध में, गत-समय तथा हाल ही की विधिक एवं विनियामकीय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए, उक्त दिशानिर्देशों की व्यापक समीक्षा की गई है। वर्ष 2016 के दिशानिर्देशों (जो कि वर्तमान में वाणिज्यिक बैंक- आगामी अनुदेश, निदेश 2025 का भाग है) और निदेशों के प्रस्तावित मसौदे के बीच, अन्य बातों के साथ-साथ, (i) बैंकिंग और ट्रेडिंग बुक एक्सपोजर दोनों में सीसीआर के दायरे पर स्पष्टीकरण, (ii) निवल निर्धारण और मार्जिनिंग दिशानिर्देशों की विधिक/विनियामकीय गतिविधियों को देखते हुए एकाधिक मार्जिन करारों और एकाधिक निवल निर्धारण समूहों के निष्पादन, (iii) ऐसे लेनदेन के निष्पादन जहां एक बैंक, इक्विटी डेरिवेटिव और कमोडिटी डेरिवेटिव खंडों में सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त शेयर बाज़ार के समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य करता है, पर मार्गदर्शन (iv) विकल्प प्रीमियम के स्थगन संबंधी निष्पादन (v) विकल्पों के लिए प्रभावी-कल्पित की गणना संबंधी मार्गदर्शन, और (vi) एसए-सीसीआर के प्रकटीकरण टेम्पलेट्स संबंधी प्रमुख बदलाव शामिल हैं।

4. तदनुसार, रिज़र्व बैंक ने आज भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - आगामी अनुदेश) संशोधन निदेश, 2026 जारी किए हैं।

5. उपर्युक्त संशोधन निदेशों के मसौदे पर विनियमित संस्थाओं, बाज़ार-सहभागियों और अन्य इच्छुक पक्षकारों से 1 जुलाई 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं। टिप्पणियां / प्रतिक्रियाएं रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध 'कनेक्ट 2 रेगुलेट' खंड के अंतर्गत दिए गए लिंक के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती हैं अथवा वैकल्पिक रूप से निम्नलिखित पते पर –

मुख्य महाप्रबंधक
बाज़ार जोखिम समूह
विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय
भारतीय रिज़र्व बैंक, 12वीं मंज़िल
शहीद भगत सिंह मार्ग
फोर्ट, मुंबई – 400 001

अथवा

विषय पंक्ति ‘प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम (एसए-सीसीआर) हेतु मानकीकृत दृष्टिकोण (एसए-सीसीआर)' पर प्रतिक्रिया लिखकर ई-मेल द्वारा प्रेषित की जा सकती हैं।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/430


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