RBI/2026-27/164
DOR.FIN.REC.No.138/03.10.001/2026-27
जून 24, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) तृतीय संशोधन निदेश, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अध्याय IIIB और अन्य सभी प्रावधानों/कानूनों के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 28 नवंबर, 2025 को भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) निदेश, 2025 (इसके बाद इन्हें 'निदेश' कहा गया है) जारी किए हैं। स्केल आधारित नियामक ढांचे के अंतर्गत अपर लेयर में स्थित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर लागू विनियमों एवं सरकारी स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर लागू ऋण/निवेश संकेन्द्रण के मानदंड की समीक्षा के आधार पर इन निर्देशों में संशोधन की आवश्यकता लगी है।
2. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का अधिनियम 2) की धारा 45JA, 45K, 45L और 45M, फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम, 2011 (2012 का अधिनियम 12) की धारा 3 (धारा 31A के साथ पढ़ा जाए) और धारा 6, राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का अधिनियम 53) की धारा 30, 30A, 32 और 33, और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक को सक्षम बनाने वाले अन्य सभी प्रावधानों/कानूनों के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और उचित है, एतद्द्वारा निम्नलिखित संशोधन निदेश जारी करता है।
3. इन संशोधन निदेश को भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) तृतीय संशोधन निदेश, 2026 कहा जाएगा।
4. ये संशोधन निदेश जारी होने की तिथि से प्रभावी होंगे।
5. इन संशोधन निदेश के तहत मौजूदा निदेश में निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं:
(1) ‘अध्याय I – प्रारंभिक’ के पैराग्राफ 3 के उप- पैराग्राफ (1) के बाद, निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाएगा:
“बशर्ते कि सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को उस लेयर पर लागू संकेंद्रण मानदंडों और सीमाओं द्वारा निर्देशित किया जाएगा, जिसमें उसे वर्गीकृत किया गया है। तदनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को संकेंद्रण मानदंडों से प्रदान की गई छूट वापस ले ली गयी है।
स्पष्टीकरण: इन निदेशो के जारी किए जाने की तारीख को सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी के किसी भी उल्लंघन (जिसमें मौजूदा स्वीकृत सीमाओं का आहरण भी शामिल है), यदि कोई हो, को इस शर्त के अधीन परिपक्वता तक जारी रखने की अनुमति होगी कि ऐसे उधारकर्ताओं के प्रति कोई अतिरिक्त एक्सपोजर नहीं लिया जाएगा। तथापि, मिडिल लेयर या अपर लेयर में आने वाली सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी विवेकपूर्ण सीमाओं से अधिक एक्सपोजर ले सकती है, बशर्ते कि ऐसे अतिरिक्त एक्सपोजर पात्र क्रेडिट जोखिम अंतरण साधनों द्वारा पूर्णतः सुरक्षित किए गए हों, जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध वृद्धिशील एक्सपोजर शून्य हो।“
(2) ‘अध्याय III – गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पर लागू दिशानिर्देश – मिडिल लेयर’ के पैराग्राफ 19 को विलोपित किया जाएगा।
(3) ‘अध्याय IV – गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) के लिए लागू दिशानिर्देश – अपर लेयर’ के पैराग्राफ 29(1) के बाद, निम्नलिखित नोट जोड़ा जाएगा:
“नोट: राज्य सरकार की गारंटियों द्वारा भरपाई किए गए एक्सपोजर को गारंटी देने वाली राज्य सरकार के प्रति एक्सपोजर माना जाएगा। ऐसे एक्सपोजर को विवेकपूर्ण एक्सपोजर सीमा से छूट प्राप्त होगी। हालांकि, चूंकि इस मामले में क्रेडिट जोखिम हस्तांतरण राज्य सरकार की गारंटी होगी, इसलिए ऐसे भरपाई जोखिमों पर 20 प्रतिशत का जोखिम भार लागू होगा।“
(4) ‘अध्याय IV – गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) के लिए लागू दिशानिर्देश – अपर लेयर’ के पैराग्राफ 35 के बाद पहले परंतुक को निम्नलिखित अनुसार संशोधित किया जाएगा:
“बशर्ते कि एक आईएफसी संबद्ध प्रतिपक्षों के समूह के प्रति एक्सपोजर अपनी टियर 1 पूंजी के 20 प्रतिशत तक एक्सपोजर सीमा से अधिक जा सकता है।“
(5) ‘अध्याय IV – गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) के लिए लागू दिशानिर्देश – अपर लेयर’ के पैराग्राफ 39 के तालिका मे एनबीएफसी (आईएफसी) को जुड़े प्रतिपक्षकारों का समूह के प्रति सीमा को संशोधित कर 45 प्रतिशत किया जाएगा।
(जे पी शर्मा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
|