आरबीआई/2025-26/260
डीओआर.सीआरई.आरईसी.452/07-03-002/2025-26
30 मार्च 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)
कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) निदेश, 2025 (जिसे आगे से ‘निदेश’ संदर्भित) देखें।
2. समीक्षा करने पर, दिनांक 30 मार्च, 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित) जारी करने के परिणामस्वरूप, और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21 और 35ए द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक (जिसे आगे रिज़र्व बैंक कहा जाएगा) को सक्षम करने वाले अन्य सभी कानूनों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होकर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और समीचीन है, एतद्द्वारा विनिर्दिष्ट संशोधन निदेश (संशोधित) जारी करता है।
3. संशोधन निदेश (संशोधित) निदेशों में निम्नानुसार संशोधन किया गया है:
3 (1) (i) निदेश के ' अध्याय I - प्रारंभिक ' के पैरा 4 में, निम्नलिखित उप -पैरा शामिल किए जाएंगेः
(3ए) “पूंजी बाजार मध्यवर्ती संस्थाएं” (सीएमआई) का वही अर्थ होगा जो भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएं) निदेश, 2025 में परिभाषित है।
(3बी) “संपार्श्विक प्रतिभूति” अथवा “संपार्श्विक” का वही अर्थ होगा जो भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएं) निदेश, 2025 में परिभाषित है।
(8ए) “गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड" का अर्थ है म्यूच्युअल फंड योजनाएं जिनकी मूल निधि को विशेष रूप से ऋण प्रतिभूतियों में निवेश नहीं किया गया है।
(8बी) “प्राथमिक प्रतिभूति” का अर्थ वही होगा जो भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएं ) निदेश, 2025 में परिभाषित है।
3(1)(ii) पैरा 3(7) को हटा दिया जाएगा।
3(2) निदेश के 'अध्याय II - बोर्ड की भूमिका' में, उप-पैरा 6 (1) (iv) के स्थान पर निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा:
"बैंक के कुल पूंजी बाजार एक्सपोज़र (सीएमई) के लिए इन निदेशों में निर्धारित विवेकपूर्ण सीमाओं के भीतर पूंजी बाजार में अंतर्दिवसीय एक्सपोज़र सीमा तय करने की नीति।“
3(3) निदेशों के 'अध्याय IV - एक्सपोज़र मानदंड' में, निम्नलिखित संशोधन प्रभावी होंगे:
3(3)(i) पैरा 28 हटा दिया जाएगा।
3(3)(ii) पैरा 28 के बाद, एक नया पैरा 28ए को निम्नानुसार शामिल किया जाएगा:
"28 ए. बैंक के सीएमई में इसके प्रत्यक्ष एक्सपोज़र और अप्रत्यक्ष एक्सपोज़र दोनों (निधि आधारित और गैर-निधि आधारित दोनों) शामिल होंगे, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
(1) निवेश एक्सपोज़र: इक्विटी और अधिमान शेयरों, संपरिवर्तनीय बॉण्ड; संपरिवर्तनीय डिबेंचर; गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों; आरईआईटी और इनविट की इकाइयों और वैकल्पिक निवेश निधियां (एआईएफ) की इकाइयों में प्रत्यक्ष निवेश;
(2) क्रेडिट एक्सपोज़र:
(i) शेयरों (आईपीओ/एफपीओ/ईएसओपी सहित), संपरिवर्तनीय बॉण्ड, संपरिवर्तनीय डिबेंचर और गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों में निवेश के लिए व्यक्तियों को अग्रिम;
(ii) किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए अग्रिम जहां शेयर या संपरिवर्तनीय बॉण्ड या संपरिवर्तनीय डिबेंचर या गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों को प्राथमिक प्रतिभूति के रूप में लिया जाता है;
(iii) किसी अन्य प्रयोजन के लिए दिए गए ऐसे अग्रिम, जो शेयरों, संपरिवर्तनीय बॉण्ड, संपरिवर्तनीय डिबेंचर या गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों के संपार्श्विक द्वारा प्रतिभूत हों और ये अग्रिम मुख्य रूप से उसी संपार्श्विक के आधार पर दिए गए हों;
(iv) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - ऋण सुविधाएं) निदेश, 2025 के संदर्भ में सीएमआई को सभी ऋण सुविधाएं;
(v) गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं में वित्तपोषण;
बशर्ते कि, गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं, जिन्हें (ए) एसडीएल, टी-बिल, सरकारी प्रतिभूतियों के परिपक्वता आगम अथवा ऐसे म्यूच्युअल फंड द्वारा धारित एसडीएल और सरकारी प्रतिभूतियों से ब्याज, अथवा (बी) सीसीआईएल से टीआरईपीएस के परिपक्वता आगम के कारण उसी दिन देय गारंटीकृत प्राप्तियों की सीमा तक ही अंतर्दिवसीय उधार लेने की अनुमति है, के लिए अंतर्दिवसीय सीमाओं को सीएमई के रूप में नहीं माना जाएगा ।
(vi) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएं) निदेश, 2025 के अनुसार भारत में एक बुनियादी ढांचा परियोजना को लागू अथवा संचालित करने में लगे किसी मौजूदा कंपनी में प्रमोटरों के शेयरों के अधिग्रहण के वित्तपोषण के लिए बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण।
(vii) शेयरों अथवा संपरिवर्तनीय बोण्डोंअथवा संपरिवर्तनीय डिबेंचर अथवा बांडों अथवा गैर-ऋण म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों के प्राथमिक निर्गम के संबंध में बैंकों द्वारा किए गए हामीदारी प्रतिबद्धताएँ;
(viii) स्टॉक एक्सचेंजों के समाशोधन निगमों के पक्ष में अपने ग्राहकों की ओर से अभिरक्षक बैंकों द्वारा जारी की गई अप्रतिसंहरणीय भुगतान प्रतिबद्धताएं (आईपीसी);
(ix) किसी बैंक का व्यापार एक्सपोज़र, जो अपने ग्राहक के लिए इक्विटी डेरिवेटिव और कमोडिटी डेरिवेटिव लेनदेन में एक समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें ग्राहकों की ओर से रखे गए वित्त पोषित प्रारंभिक मार्जिन शामिल हैं, जहां अनुमति हो।
3(3)(iii) उप-भाग शीर्षक बी.1.4.2.2.1 और बी.1.4.2.2.2 और पैरा 30 और 31 हटा दिए जाएंगे।
3(3)(iv) पैरा 31 के बाद, एक नया पैरा 31ए जोड़ा जाएगा, जो निम्नानुसार है:
“31ए.किसी बैंक का कुल सीएमई, नीचे दिए गए पैराग्राफ में निर्दिष्ट छूट और शर्तों के अधीन, निम्नलिखित विवेकपूर्ण सीमाओं (‘सीएमई सीमाएं’) के दायरे में होगा और इसे निरंतर आधार पर बनाए रखना होगा:
(1) किसी बैंक का कुल सीएमई, एकल और समेकित दोनों आधारों पर, उसके टियर 1 पूंजी आधार के 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
(2) किसी बैंक का प्रत्यक्ष पूंजी बाजार एक्सपोज़र, जिसमें पैरा 28ए(1) के अनुसार निवेश एक्सपोज़र शामिल है, एकल और समेकित दोनों आधारों पर टियर 1 पूंजीआधार के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
(3) अपनी कुल सीएमई सीमा के भीतर, बैंक के पास एकल प्रतिपक्षकार के लिए अंतर्दिवसीय एक्सपोज़र के लिए एक अलग उप-सीमा होगी, साथ ही सभी अंतर्दिवसीय एक्सपोज़र के लिए एक कुल सीमा भी होगी।“
3(3)(v) पैरा 32 को आंशिक रूप से निम्नानुसार संशोधित किया जाएगा:
“32. उपर्युक्त सीमाएं (जैसा कि पैरा 31ए में निर्धारित किया गया है) अधिकतम स्वीकार्य सीमाएँ हैं और बैंक अपने समग्र जोखिम प्रोफाइल और कॉर्पोरेट रणनीति को ध्यान में रखते हुए उससे कम सीमा को अपनाने के लिए स्वतंत्र है। बैंक को इन सीमाओं का निरंतर आधार पर पालन करना होगा।“
3 (3) (vi) पैराग्राफ 33 को आंशिक रूप से निम्नानुसार संशोधित किया जाएगा:
“33. भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – दबावग्रस्त आस्तियों का समाधान) निदेश, 2025 के संदर्भ में एक पुनर्गठन प्रक्रिया के दौरान ऋण को इक्विटी में बदलने के कारण या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के हिस्से के रूप में शेयरों के अधिग्रहण को पूंजी बाजार एक्सपोज़रएक्सपोज़र पर नियामक सीमा/प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी...... तथापि, बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 19 (2) के प्रावधानों का पालन करेंगे।“
3(3)(vii) पैरा 34 को हटा दिया जाएगा।
3(3)(viii) पैरा 34 के बाद, एक नया पैरा 34ए निम्नानुसार जोड़ा जाएगा:
“34ए. बैंक के निम्नलिखित एक्सपोज़र को सीएमई गणना से बाहर रखा जाएगा:
(1) संयुक्त उद्यमों में निवेश;
(2) महत्वपूर्ण वित्तीय अवसंरचना का निर्माण करने वाले संस्थानों द्वारा जारी शेयरों, संपरिवर्तनीय डिबेंचर और संपरिवर्तनीय बोण्डोंमें निवेश, जैसा कि अनुबंध I में बताया गया है;
बशर्ते कि सूचीबद्धता के बाद, (1) और (2) में शामिल संस्थाओं में लिया गया कोई भी अतिरिक्त एक्सपोज़र सीएमई का हिस्सा होगा।
(3) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों और अन्य बैंकों द्वारा जारी किए गए अतिरिक्त टियर I और टियर II ऋण लिखतों में निवेश;
(4) अन्य बैंकों के जमा प्रमाणपत्र (सीडी) में निवेश;
(5) बिना मताधिकार वाले अधिमान शेयरों में निवेश और उनके बदले ऋण;
(6) किसी बैंक की अपनी शेयर या संपरिवर्तनीय बॉण्ड अथवा संपरिवर्तनीय डिबेंचर या गैर-ऋण इक्विटी म्यूच्युअल फंड योजनाओं की इकाइयों को जारी करने के संबंध में हामीदारी प्रतिबद्धताएँ, बुक रनिंग प्रक्रिया के माध्यम से ऋण समतुल्य राशि के 70 प्रतिशत तक;
(7) किसी अवसंरचना परियोजना के एसपीवी में प्रवर्तक शेयर, जिस पर अवसंरचना परियोजना ऋण देने के लिए ऋण देने वाले बैंक के पक्ष में प्रतिभूति शुल्क बनाया गया है;
(8) कमोडिटी और इक्विटी क्षेत्र के अलावा ब्रोकरों के लिए एक्सपोज़र;
(9) मुख्य रूप से ऋण लिखतों में मार्केट मेकिंग के लिए सीएमआई के लिए एक्सपोज़र।”
3(3)(ix) भाग बी.1.4.5 और बी.1.4.6 और पैरा 35 से 40 हटा दिए जाएंगे।
3(3)(x) पैरा 40 के बाद, नए पैरा 40ए और 40बी निम्नानुसार जोड़े जाएंगे:
"40ए. सीएमई के प्रयोजन के लिए, विभिन्न एक्सपोज़र के मूल्य की गणना निम्नानुसार की जाएगी:
(1) प्रत्यक्ष निवेश की गणना उसके लागत मूल्य पर की जाएगी।
(2) स्वीकृत सीमा या बकाया, जो भी अधिक हो, के संदर्भ में सीएमई के लिए निधि-आधारित और गैर-निधि आधारित दोनों ऋण एक्सपोज़र की गणना की जाएगी। तथापि, पूर्ण रूप से आहरित सावधि ऋणों के मामले में, जहां स्वीकृत सीमा के किसी भी भाग को पुन आहरण की कोई गुंजाइश नहीं है, वहाँ बैंक बकाया राशि को एक्सपोज़र के रूप में मान सकते हैं।
बशर्ते कि सीएमई के प्रयोजन के लिए किसी बैंक के एक्सपोज़र की गणना, ग्राहकों की ओर से रखे गए केंद्रीय रूप से समाशोधित व्यापारों में निपटान समय के अंतर के कारण उत्पन्न होने वाली कमी को पूरा करने के लिए बढ़ाई गई अंतर्दिवसीय सीमा के 30 प्रतिशत पर की जा सकती है, बशर्ते कि उधारकर्ता को क्यूसीसीपी से ऐसी प्राप्य राशियाँ मिलने की उम्मीद हो जो ऐसे इंट्रा-डे ड्रॉडाउन को पूरी तरह से कवर करती हो। तथापि, दिन के आखिर में जो भी बकाया राशि होगी, उसे पूरी तरह से सीएमई माना जाएगा।
(3) इक्विटी और कमोडिटी डेरिवेटिव के संबंध में एक्सपोज़र की गणना भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2025 के अनुसार की जाएगी।
(4) सीएमई के प्रयोजन के लिए जारी आईपीसी के संबंध में एक्सपोज़र को निम्नानुसार शामिल किया जाएगा:
(i) टी+1 निपटान चक्र के तहत अंतर्दिवसीय एक्सपोज़र – निवल निपटान दायित्व का 30 प्रतिशत;
(ii) टी +2 निपटान चक्र के तहत ओवरनाइट आईपीसी एक्सपोज़र - निवल निपटान दायित्व का 50 प्रतिशत;
व्याख्या 1: निवल निपटान दायित्व की गणना, एक ही निपटान चक्र के भीतर किसी विशेष ग्राहक के लिए सभी क्रय दायित्वों (निधियों का पे-इन) के योग में से सभी विक्रय दायित्वों (निधियों का पे-आउट) के योग को घटाकर की जाएगी।
व्याख्या 2: उपरोक्त नेटिंग सुविधा की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब खरीद और बिक्री दोनों लेनदेन का निपटान एक ही समाशोधन निगम के माध्यम से किए गए हैं; और जब तक ग्राहक अपनी निधियन के दायित्वों को पूरा नहीं कर लेता, तब तक बैंक नेटिंग सेट के खरीद-पक्ष के परिणामस्वरूप पेआउट प्रतिभूतियों पर अपना पूर्ण और अप्रतिसंहरणीय ग्रहणाधिकार बनाए रखता है।
40बी. उपर्युक्त पैरा 40ए के अनुसार गणना किए गए एक्सपोज़र को, भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2025 में निर्धारित शर्तों और हेयरकट के अधीन, नकदी और सरकारी प्रतिभूतियों से समंजित किया जा सकता है, जिससे सीएमई प्राप्त किया जा सके।
3(3)(xi) भाग सी और पैरा 42 को हटा दिया जाएगा।
3(3)(xii) अनुबंध I के स्थान पर निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा:
“सीएमई से छूट प्राप्त महत्वपूर्ण वित्तीय अवसंरचना की सूची”
1. आईएफसीआई लिमिटेड,
2. भारतीय पर्यटन वित्त निगम लिमिटेड (टीएफसीआई),
3. आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (आईएफसीआई वेंचर),
4. भारतीय प्रौद्योगिकी विकास एवं सूचना कंपनी लिमिटेड (टीडीआईसीआई),
5. राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी),
6. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी),
7. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड),
8. भारतीय निर्यात आयात बैंक (एक्ज़िम बैंक),
9. भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी),
10. भारतीय साधारण बीमा निगम लिमिटेड (जीआईसी),
11. नैशनल सिक्युरिटीज डिपॉज़िटरी लिमिटेड(एनएसडीएल),
12. सेंट्रल डिपॉज़िटरी सर्विसेज़ (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल),
13. एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड (नैशनल क्लियरिंग),
14. नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई),
15. भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल),
16. एक साख सूचना कंपनी जिसने आरबीआई से पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त किया है और बैंक जिसका सदस्य है,
17. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स),
18. नैशनल कमोडिटी एवं डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीएक्स),
19. इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (आईसीईएक्स),
20. नैशनल कमोडिटी मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (एनसीएमएल),
21. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), और
22. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई)”
4. उपरोक्त पुनरीक्षित संशोधन भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित) दिनांक 30 मार्च, 2026 के प्रावधानों को लागू करने के लिए बैंक द्वारा निर्धारित तिथि से या 1 जुलाई, 2026 से, जो भी पहले हो, लागू होंगे और ये 13 फरवरी, 2026 को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) संशोधन निदेश, 2026 को प्रतिस्थापित करेंगे।
(वैभव चतुर्वेदी)
मुख्य महाप्रबंधक |