आरबीआई/2025-26/257
विवि.सीआरई.आरईसी.449/21.04.018/2025-26
30 मार्च 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय विवरणियाँ: प्रस्तुतीकरण एवं प्रकटीकरण) – तृतीय संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)
कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - वित्तीय विवरणियाँ: प्रस्तुतीकरण एवं प्रकटीकरण) निदेश, 2025 (जिसे आगे 'निदेश' कहा जाएगा) का संदर्भ लें।
2. समीक्षा करने पर, दिनांक 30 मार्च 2026 के भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएँ) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित) जारी होने के परिणामस्वरूप तथा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21 और 35ए तथा इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक को सशक्त बनाने वाली अन्य सभी विधियों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक (जिसे आगे रिज़र्व बैंक कहा जाएगा) को यह संतुष्टि हुई है कि जनहित में ऐसा करना आवश्यक एवं उचित है, अतः रिज़र्व बैंक निम्नलिखित संशोधन निदेश (संशोधित) जारी करता है।
3. उपरोक्त संशोधन निदेश (संशोधित) में निम्नलिखित निदेशों को संशोधित किया गया है:
3(1) निदेशों के 'वित्तीय विवरणियों में प्रकटीकरण अध्याय-III – लेखा नोट्स' में 'पैरा 10(5) जिसका शीर्षक 'एक्सपोजर' है, में निम्नलिखित संशोधन प्रभावी होंगे:
3(1)(i) उप-पैरा 10(5)(ii) हटा दिया जाएगा।
3(1)(ii) के बाद 10(5)(ii) उप-पैरा तथा निम्नलिखित नया उप-पैरा (iiए) जोड़ा जाएगा:
(iiए) पूंजी बाजारों का एक्सपोजर
| (राशि ₹ करोड़ में) |
| क्रम सं. |
विवरण |
वर्तमान वर्ष |
पिछला वर्ष |
| (i) |
इक्विटी और वरीयता शेयरों में प्रत्यक्ष निवेश; संपरिवर्तनीय बॉण्ड; संपरिवर्तनीय डिबेंचर; गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिट इकाई; आरईआईटी और आईएनवीआईटी के यूनिटों और वैकल्पिक निवेश निधि (एआईएफ) की यूनिटें |
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| (ii) |
शेयरों (आईपीओ/एफपीओ/ईएसओपी सहित), संपरिवर्तनीय बॉण्ड, संपरिवर्तनीय डिबेंचर और गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिटों में निवेश के लिए व्यक्तियों को दिए गए अग्रिम |
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| (iii) |
अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए अग्रिम, जहाँ शेयर या संपरिवर्तनीय बॉण्ड या संपरिवर्तनीय डिबेंचर या गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिट प्राथमिक सुरक्षा के रूप में लिए गए हैं |
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| (iv) |
शेयरों, संपरिवर्तनीय बॉण्ड, संपरिवर्तनीय डिबेंचर या गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं की यूनिट के संपार्श्विक द्वारा सुरक्षित सीमा तक किसी अन्य प्रयोजन के लिए अग्रिम, जहां ऐसे संपार्श्विक की मूल सीमा तक अग्रिम दिए जाते हैं |
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| (v) |
पूंजी बाजार मध्यस्थों (सीएमआई) को सभी क्रेडिट सुविधाएँ |
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| (vi) |
अधिग्रहण वित्त |
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अधिग्रहण वित्त (vi) में से भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं द्वारा |
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(vi) में से अधिग्रहण करने वाली कंपनियों की अपनी निधिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरक वित्त |
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| (vii) |
गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए वित्तपोषण |
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| (viii) |
नई कंपनियों की इक्विटी में अग्रिम योगदान को पूरा करने के लिए कंपनियों को पूरक वित्त |
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| (ix) |
शेयरों या संपरिवर्तनीय बॉण्ड या संपरिवर्तनीय डिबेंचर या बांड के प्राथमिक निर्गम के संबंध में बैंकों द्वारा शुरू की गई हामीदारी प्रतिबद्धताएं, जहां अंतिम उपयोग, अधिग्रहण वित्त या गैर-ऋण म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिटों के लिए है। |
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| (x) |
स्टॉक एक्सचेंज के समाशोधन कार्पोरेशन के पक्ष में अपने ग्राहकों की ओर से अभिरक्षक (कस्टोडियन) बैंकों द्वारा जारी अप्रतिसंहरणीय भुगतान प्रतिबद्धताएँ |
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| (xi) |
बैंक के इक्विटी डेरिवेटिव और कमोडिटी डेरिवेटिव लेनदेन में समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य करने पर अपने ग्राहकों के प्रति व्यापार एक्सपोजर, जिसमें ग्राहकों के लिए रखे गए अनुमेय वित्तपोषित प्रारंभिक मार्जिन भी शामिल हैं, जहाँ अनुमति है |
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पूंजी बाजार में कुल एक्सपोजर |
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नोट: उपरोक्त तालिका में रिपोर्ट किए गए पूंजी बाजार एक्सपोजर की गणना भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – सकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) निदेश, 2025 के साथ पठित भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएँ) निदेश, 2025 के संदर्भ में की जाएगी।
4. उपरोक्त पुनरीक्षित संशोधन भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (पुनरीक्षित) दिनांक 30 मार्च, 2026 के प्रावधानों को लागू करने के लिए बैंक द्वारा निर्धारित तिथि से या 1 जुलाई, 2026 से, जो भी पहले हो, लागू होंगे और ये 13 फरवरी, 2026 को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय विवरणियाँ: प्रस्तुतीकरण एवं प्रकटीकरण) संशोधन निदेश, 2026 को प्रतिस्थापित करेंगे।
वैभव चतुर्वेदी
(मुख्य महाप्रबंधक) |