आरबीआई/2025-26/258
विवि.सीआरई.आरईसी.450/24-01-041/2025-26
मार्च 30, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय सेवाएं प्रदान करना) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)
कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय सेवाएं प्रदान करना) निदेश, 2025 (जिसे इसके बाद 'निदेश' कहा जाएगा) देखें।
2. समीक्षा करने पर, भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित) दिनांक 30 मार्च, 2026 जारी करने के परिणामस्वरूप और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक (जिसे इसके बाद रिज़र्व बैंक कहा जाएगा) को सक्षम करने वाले अन्य सभी कानूनों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि ऐसा करना आवश्यक और लोकहित में समीचीन है, एतद्द्वारा संशोधन निदेश (संशोधित) जारी किए जाते हैं, जो निम्नानुसार निर्दिष्ट है।
3. संशोधन निदेश (संशोधित) द्वारा इन निदेशों के ‘अध्याय-III ‘सामान्य दिशानिर्देश’’ के पैराग्राफ 18(4) में नीचे दिए गए अनुसार बदलाव किया गया हैं:
3 (1) उप-पैराग्राफ (ii)(ए)iii की जगह निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा:
“नई कंपनियों में प्रायोजक की हिस्सेदारी के लिए वित्त हेतु अधिग्रहण वित्त और पूरक वित्त”
3(2) उप-पैराग्राफ (ii)(बी) की जगह निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा:
“पात्र प्रतिभूतियों के बदले व्यक्तियों को ऋण देना”
4. उपरोक्त पुनरीक्षित संशोधन भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (पुनरीक्षित) दिनांक 30 मार्च, 2026 के प्रावधानों को लागू करने के लिए बैंक द्वारा निर्धारित तिथि से या 1 जुलाई, 2026 से, जो भी पहले हो, लागू होंगे और ये 13 फरवरी, 2026 को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय सेवाएं प्रदान करना) संशोधन निदेश, 2026 को प्रतिस्थापित करेंगे।
(वैभव चतुर्वेदी)
मुख्य महाप्रबंधक
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