आरबीआई/2025-26/256
विवि.सीआरई.आरईसी.448/21-01-002/2025-26
मार्च 30, 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)
कृपया भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2025 (जिसे इसके बाद 'निदेश' कहा जाएगा) देखें।
2. समीक्षा करने पर, भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित) दिनांक 30 मार्च, 2026 जारी करने के परिणामस्वरूप और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21 और 35ए और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक (जिसे इसके बाद रिज़र्व बैंक कहा जाएगा) को सक्षम करने वाले अन्य सभी कानूनों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि ऐसा करना आवश्यक और लोकहित में समीचीन है, एतद्द्वारा संशोधन निदेश (संशोधित) जारी किए जाते हैं, जो निम्नानुसार निर्दिष्ट है।
3. संशोधन निदेश (संशोधित) निदेशों के 'अध्याय IV - जोखिम भारित आस्तियां (आरडब्ल्यूए)' में अनुच्छेद 84(6) को निम्नानुसार संशोधित करता है:
'किसी बैंक द्वारा अपने ग्राहक की ओर से स्टॉक एक्सचेंजों के क्लियरिंग कॉरपोरेशनों को अप्रतिसंहरणीय भुगतान प्रतिबद्धता जारी करना 100 प्रतिशत सीसीएफ के साथ एक वित्तीय गारंटी है। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) निदेश, 2025 के संदर्भ में पूंजी बाजार एक्सपोजर (सीएमई) के रूप में मान्य एक्सपोजर पर ही पूंजी बनाए रखी जाएगी। इस प्रकार, सीएमई के लिए ली गई राशि पर पूंजी बनाए रखी जानी है और उस पर जोखिम भार 125 प्रतिशत होगा।
4. उपरोक्त पुनरीक्षित संशोधन भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएं) संशोधन निदेश, 2026 (पुनरीक्षित) दिनांक 30 मार्च, 2026 के प्रावधानों को लागू करने के लिए बैंक द्वारा निर्धारित तिथि से या 1 जुलाई, 2026 से, जो भी पहले हो, लागू होंगे और ये 13 फरवरी, 2026 को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) संशोधन निदेश, 2026 को प्रतिस्थापित करेंगे।
(वैभव चतुर्वेदी)
मुख्य महाप्रबंधक
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