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भारतीय रिज़र्व बैंक (भुगतान बैंक – विविध) – संशोधन निदेश, 2025

भारिबैं/2025-26/143
विवि.एसओजी(एसपीई).आरईसी.349/13-04-001/2025-26

11 दिसंबर 2025

भारतीय रिज़र्व बैंक (भुगतान बैंक – विविध) – संशोधन निदेश, 2025

कृपया दिनांक 28 नवंबर 2025 के भारतीय रिज़र्व बैंक (भुगतान बैंक - विविध) निदेश, 2025 (जिसे आगे 'निदेश' कहा गया है) का संदर्भ लें।

2. एक समीक्षा के फलस्वरूप, भारतीय रिज़र्व बैंक (इसके बाद रिज़र्व बैंक कहा जाएगा) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए तथा रिज़र्व बैंक को इस संबंध में सक्षम बनाने वाले अन्य सभी प्रावधानों/कानूनों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, और इस संबंध में संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और उचित है, एतद् द्वारा निम्नलिखित संशोधित निदेश जारी करता है।

3. संशोधन निदेश के माध्यम से इस निदेश में निम्नानुसार संशोधन किया गया है:

(1) अनुच्छेद 4 में, उप-अनुच्छेद (1) के बाद, निम्नलिखित उप-अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:

(1ए) 'चालू खाता' से तात्पर्य मांग जमा खाते के उस रूप से है जिससे खाते में शेष राशि के आधार पर अथवा किसी विशेष सहमत राशि तक कितनी भी बार निकासी की अनुमति होती है और इसमें ऐसे अन्य जमा खाते भी शामिल माने जाएंगे जो न तो बचत खाता हैं और न ही मीयादी जमा खाता हैं।

(2) अध्याय VI में, खंड बी का नाम बदलकर “चालू खातों का रखरखाव” कर दिया जाएगा।

(3) अनुच्छेद 55 के बाद, खंड ख में, निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़े जाएंगे:

55ए. ऋण अनुशासन को सुदृढ़ करने और लेन-देन तथा निधियों के उपयोग की बेहतर निगरानी को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से, यह खंड बैंकों द्वारा चालू खाते बनाए रखने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।

सी.1 चालू खाते

55बी. यदि ग्राहकों के प्रति बैंकिंग प्रणाली का एक्सपोज़र 10 करोड़ रुपये से कम है, तो बैंक बिना किसी प्रतिबंध के चालू खाता रख सकता है।

स्पष्टीकरण (1): इस अध्याय के प्रयोजन के लिए ‘बैंकिंग प्रणाली’ में वाणिज्यिक बैंक (जिसमें लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल हैं, लेकिन भुगतान बैंक शामिल नहीं हैं), शहरी सहकारी बैंक और ग्रामीण सहकारी बैंक (राज्य सहकारी बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंक) शामिल होंगे।

स्पष्टीकरण (2): इस अध्याय के प्रयोजन के लिए 'एक्सपोज़र' का अर्थ उधारकर्ता द्वारा बैंकिंग प्रणाली से प्राप्त सभी स्वीकृत निधि-आधारित ऋण सुविधाओं और गैर-निधि-आधारित सुविधाओं का योग है।

55सी. यदि ग्राहकों के प्रति बैंकिंग प्रणाली का एक्सपोज़र 10 करोड़ अथवा उससे अधिक है, तो बैंक ऐसे ग्राहकों के लिए केवल संग्रह खाते ही रख सकता है।

स्पष्टीकरण: इस अनुभाग के प्रयोजन के लिए 'संग्रह खाता' से तात्पर्य चालू खाता है जिसका उपयोग मुख्य रूप से खाताधारक के नकद अंतर्वाह के लिए किया जाता है। ऐसे खाते से प्रतिबंधित भुगतान/नकद बहिर्वाह इन निदेशों के अनुच्छेद 55D में उल्लिखित शर्तों के अधीन होंगे।

सी.2. संग्रह खाते

55डी. संग्रह खाते में जमा की गई धनराशि को, ऐसी धनराशि प्राप्त होने के दो कार्यदिवसों के भीतर, बैंकिंग प्रणाली में किसी भी बैंक के साथ बनाए गए और उधारकर्ता द्वारा इस उद्देश्य के लिए नामित किए गए नकदी ऋण खाते (सीसी), चालू खाते अथवा ओवरड्राफ्ट खाते (ओडी) खाते में अंतरित कर दिया जाएगा (जिसे इस अध्याय में आगे 'नामित खाता' कहा गया है)।

बशर्ते कि सांविधिक देयताएँ, जैसे कर, तथा संग्रह खाते का रखरखाव करने वाले बैंक के प्रति बकाए, यदि कोई हो, ऐसी निधि अंतरित करने से पहले संग्रह खाते से डेबिट किए जा सकते हैं।

सी.3. छूट

55ई. इन निदेशों के अनुच्छेद 55सी के संदर्भ में लगाए गए प्रतिबंध नीचे उल्लिखित खातों पर लागू नहीं होंगे:

(1) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA) और उसके अंतर्गत जारी अधिसूचनाओं के प्रावधानों के अनुसार खोले गए खाते, जिनमें फेमा ढांचे के तहत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य खाते भी शामिल हैं।

(2) विशिष्ट खाते या लेन-देन जो किसी क़ानून या वित्तीय क्षेत्र के नियामक, अथवा केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार के विशिष्ट निदेशों के तहत निर्धारित हैं।

स्पष्टीकरण: इस अध्याय के प्रयोजन के लिए 'वित्तीय क्षेत्र विनियामक' से तात्पर्य भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) से है।

(3) वित्तीय क्षेत्र के विनियामक द्वारा विनियमित संस्थाओं के खाते, जिनका उपयोग उनकी विनियमित गतिविधियों को पूरा करने के उद्देश्य से किया जाता है।

बशर्ते कि उपर्युक्त छूट प्राप्त खातों का संचालन करने वाले बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे खातों में किए गए लेनदेन का उपयोग केवल अनुमत/निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। ऐसे खातों में अधिशेष निधि, यदि कोई हो, को नामित खाते में भेज दिया जाएगा।

सी. 4. अनुपालन निगरानी

55एफ़. इस अध्याय के निरंतर अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सभी बैंक अपने पास रखे गए खातों की नियमित रूप से, और किसी भी स्थिति में कम से कम हर छह महीने में एक बार निगरानी करेंगे।

55जी. यदि यह पाया जाता है कि कोई बैंक, उधारकर्ता के प्रति बैंकिंग प्रणाली के एक्सपोज़र में 10 करोड़ की निर्दिष्ट सीमा अथवा उससे अधिक की वृद्धि के कारण, अनुच्छेद 55बी के अनुसार खोले गए चालू खाते को बनाए रखने के लिए पात्र नहीं रह गया है, तो ऐसा बैंक संबंधित ग्राहक (ग्राहकों) को तुरंत, और किसी भी स्थिति में ऐसी अपात्रता की तिथि से एक महीने के अंदर, यह सूचित करेगा कि खाते को या तो संग्रह खाते में बदलना होगा या बंद करना होगा। मामले के अनुसार, रूपांतरण अथवा समापन की प्रक्रिया ऐसी अयोग्यता पाए जाने के तीन महीने के अंदर पूरी की जाएगी।

55एच. इन निदेशों के अनुसार खोले गए खातों को बैंक के कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस) में ठीक से चिह्नित किया जाएगा ताकि उनकी साफ़ पहचान हो सके और प्रभावी निगरानी में आसानी हो। जो बैंक किसी उधारकर्ता के लिए कई खाते रखते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे खाते और उनमें होने वाले लेन-देन और नकदी प्रवाह की निगरानी उधारकर्ता के स्तर पर और साथ ही खाते के स्तर पर भी की जाए।

सी. 5. अन्य प्रावधान

55आई. बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि खाताधारक अपने खाते का उपयोग केवल अपने अधिकृत व्यवसाय अथवा गतिविधियों से संबंधित लेनदेन के लिए ही करता है। किसी भी हालत में इन खातों का इस्तेमाल तृतीय पक्ष लेन-देन को आसान बनाने के लिए पास-थ्रू चैनल के तौर पर नहीं किया जाएगा।

बशर्ते कि ऐसी संस्थाएं जिन्हें तृतीय-पक्ष लेनदेन को सुगम बनाने हेतु वित्तीय क्षेत्र के विनियामक द्वारा स्पष्ट रूप से लाइसेंस अथवा प्राधिकार प्राप्त है, वे अपने ऐसे कार्य को जारी रख सकती हैं। हालांकि, ऐसी गतिविधियां सख्ती से उन विशिष्ट लेन-देनों तक ही सीमित रहेंगी जिन्हें करने के लिए वे अधिकृत हैं और उस दायरे से आगे नहीं बढ़ेंगी। कोई भी खाता जिसे इस तरह के तृतीय-पक्ष लेनदेन करने की अनुमति दी गई है, उसे स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने और प्रभावी निगरानी की सुविधा के लिए बैंक के सीबीएस में उचित रूप से चिह्नित किया जाएगा।

55जे. बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई खाताधारक, जिसे रिज़र्व बैंक द्वारा जमा स्वीकार करने अथवा भुगतान सेवाएं प्रदान करने के लिए लाइसेंस अथवा अधिकृत नहीं किया गया है, उनके पास रखे गए खातों के माध्यम से ऐसी गतिविधियों में संलग्न न हो।

55के. उपरोक्त निषिद्ध उपयोग का पता लगाने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें असामान्य रूप से उच्च लेनदेन की मात्रा, बार-बार पास-थ्रू गतिविधियों, अथवा खाताधारक के बताए गए व्यवसाय और खाते के माध्यम से किए गए लेनदेन के बीच विसंगतियां प्रदर्शित करने वाले खातों को चिह्नित करने के लिए तंत्र शामिल हैं।

4. उपर्युक्त संशोधन 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। हालांकि, बैंक इन संशोधनों को पहले की तारीख से पूरी तरह से लागू करने का निर्णय ले सकते हैं।

वैभव चतुर्वेदी
(मुख्य महाप्रबंधक)


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