आरबीआई/2026-27/293
ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 27
12 अक्तूबर, 2026
सभी प्राधिकृत व्यापारी
महोदया/महोदय,
जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन
प्राधिकृत व्यापारियों का ध्यान समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश-जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन की ओर आकृष्ट किया जाता है।
2. उपर्युक्त मास्टर निदेश के भाग क के खंड I के पैराग्राफ 2.3 (iii) के अनुसार, परिचालनरत आईएफएससी बैंकिंग इकाई वाले प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक तथा प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारी, अनिवासी उपयोगकर्ताओं को प्रयोजन संबंधी किसी प्रतिबंध के बिना भारतीय रुपये से संबंधित गैर-सुपुर्दगी योग्य व्युत्पन्नी संविदाएँ (एनडीडीसी) उपलब्ध करा सकते हैं। समीक्षा के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि अब से प्राधिकृत व्यापारी किसी अनिवासी उपयोगकर्ता को भारतीय रुपये से संबंधित एनडीडीसी केवल बचाव-व्यवस्था के उद्देश्य से ही उपलब्ध कराएँगे।
3. इसके अतिरिक्त, यह निर्णय लिया गया है कि:
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प्राधिकृत व्यापारी को अपनी आस्तियों और देयताओं के मुद्रा जोखिम की बचाव-व्यवस्था के लिए अपने द्वारा की गई भारतीय रुपये से संबंधित विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदाओं के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि (एफईआरआर) बनाए रखनी होगी;
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एफईआरआर भारतीय रुपये से संबंधित उन सभी विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदाओं पर लागू होगी, जिनमें प्राधिकृत व्यापारी भारतीय रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीद रहा है;
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एफईआरआर प्रत्येक व्युत्पन्नी संविदा की कल्पित राशि के भारतीय रुपये में समतुल्य की 20 प्रतिशत होगी; और
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एफईआरआर दैनिक आधार पर भारत में रिज़र्व बैंक के पास नकद के रूप में जमा की जाएगी और बनाए रखी जाएगी तथा संविदा की समाप्ति तक बनाए रखी जाएगी।
4. ये निदेश इनके जारी होने के बाद की गई विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदाओं पर लागू होंगे।
5. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धाराओं 10(4) और 11(1) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45डब्ल्यू द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित अनुमतियों / अनुमोदनों, यदि कोई हों, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक |