14 अगस्त 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने इंडसइंड बैंक लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 14 अगस्त 2026 के आदेश द्वारा, इंडसइंड बैंक लिमिटेड (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘जमाराशि पर ब्याज दर’ और ‘मानक आस्तियों का प्रतिभूतिकरण’ संबंधी निदेशों के कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹59.20/- (उनसठ लाख बीस हजार रुपए मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय के संदर्भ में पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के प्रावधानों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त आरबीआई के निदेशों के प्रावधानों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर बैंक के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है :
(i) बैंक ने कतिपय चालू खातों में उपलब्ध जमाराशि पर ब्याज का भुगतान किया; और
(ii) बैंक ने 'सिंथेटिक प्रतिभूतिकरण' संबंधी गतिविधियाँ शुरू कीं।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
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