शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रेस प्रकाशनी


अक्टूबर 17, 2021
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश – मंथा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मंथा, जिला: जालना, महाराष्ट्र- अवधि का विस्तार
अक्टूबर 14, 2021
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश– दि सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई - अवधि का विस्तार
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत सर्व-समावेशी निदेशों का वापस लिया जाना - हिन्दू को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पठानकोट, पंजाब
अक्टूबर 12, 2021
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश – दि सेवा विकास सहकारी बैंक लि., पुणे
अक्टूबर 06, 2021
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि खेड़ा पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक लि., खेड़ा (गुजरात) पर मौद्रिक दंड लगाया
अक्टूबर 05, 2021
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि प्रगति को-ऑपरेटिव बैंक लिमि., थार (गुजरात) पर मौद्रिक दंड लगाया
सितंबर 30, 2021
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश – मराठा सहकारी बैंक लि., मुंबई, - अवधि का विस्तार
सितंबर 25, 2021
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – हिंदु को-ऑपरेटिव बैंक लि., पठानकोट, पंजाब – अवधि का विस्तार
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