बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और अंतरण) अधिनियम, 1970/1980 की धारा 10 (1) और एसबीआई अधिनियम, 1955 की धारा 41 (1) के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के सांविधिक केंद्रीय लेखा परीक्षकों (एससीए)/सांविधिक शाखा लेखा परीक्षकों (एसबीए) की नियुक्ति के लिए अनुमोदनकर्ता प्राधिकारी है।
(ii) वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान, सभी पीएसबी ने इस संबंध में उन्हें दी गई प्रबंधकीय स्वायत्तता का उपयोग करते हुए और आरबीआई द्वारा 06 मार्च 2023 को पीएसबी के एसबीए की नियुक्ति/पुनःनियुक्ति के लिए संशोधित दिशानिर्देशों के आधार पर एसबीए की नियुक्ति की थी।
(iii) एसबीए के रूप में नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति से पहले आरबीआई द्वारा सत्यापन के लिए पीएसबी द्वारा अनुशंसित लेखा-परीक्षा फर्मों के नाम यहां क्लिक करके एक्सेस किए जा सकते हैं। एसबीए शाखाओं का बैंक-वार आवंटन यहां होस्ट किया गया है।
(iv) आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूचित किया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि चयन और एसबीए को शाखाओं का आवंटन पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसम्मत तरीके से किया गया है। यह सूचित किया गया है कि प्रत्येक एसबीए को दो से अधिक शाखाएं आवंटित नहीं की जाएं।
अस्वीकरण: चूंकि एसबीए की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति और शाखाओं के आवंटन से संबंधित जानकारी बैंकों से प्राप्त की गई है, अतः आरबीआई प्रकाशित जानकारी में किसी भी विसंगति/चूक के लिए जिम्मेदार नहीं है। यह हमारे संज्ञान में आया है कि एसबीआई द्वारा प्रस्तुत एसबीए के बीच शाखाओं के आवंटन की सूची में निम्नलिखित विसंगतियां मौजूद हैं: शाखा 'औद्योगिक वित्त शाखा, पुणे' की वास्तव में मेसर्स एचएमए एंड एसोसिएट्स (यूसीएन 211802; एफआरएन 100537डब्ल्यू) द्वारा लेखा-परीक्षा की गई थी। जबकि बैंक द्वारा प्रस्तुत सूचना में इसे गलती से मेसर्स गोयल और अग्रवाल (UCN-955548; FRN 131763W) द्वारा लेखा-परीक्षा किया हुआ दिखाया गया है। |