आरबीआई/2026-27/291
ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 25
10 अक्तूबर 2026
सभी प्राधिकृत व्यापारी
महोदया/महोदय,
जोखिम प्रबंध तथा अंतर-बैंक लेनदेन
प्राधिकृत व्यापारियों का ध्यान समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश-जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन की ओर आकृष्ट किया जाता है।
2. बदलती बाज़ार परिस्थितियों को देखते हुए निम्नानुसार निर्णय लिया गया है:
विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदाओं का निरस्तीकरण और पुनः बुकिंग / रोलओवर
(क) प्राधिकृत व्यापारी उपयोगकर्ताओं को भारतीय रुपये से संबंधित किसी भी विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदा, चाहे वह सुपुर्दगी योग्य हो या गैर-सुपुर्दगी योग्य, की पुनः बुकिंग की अनुमति नहीं देगा, जिसे इन निदेशों के जारी होने के बाद किसी भी प्राधिकृत व्यापारी के साथ निरस्त किया गया हो।
(ख) तथापि, प्राधिकृत व्यापारी उपर्युक्त मास्टर निदेश के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन, उपयोगकर्ताओं को परिपक्वता पर विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदाओं के रोलओवर की अनुमति देना जारी रख सकता है।
अंतर्निहित एक्सपोज़र का अस्तित्व स्थापित करने की आवश्यकता के बिना पोज़िशन लेने की सीमा
(ग) उपर्युक्त मास्टर निदेश के भाग क के खंड I के पैराग्राफ 2.4 (i) के परंतुक के अनुसार, प्राधिकृत व्यापारियों को यह अनुमति है कि वे संविदागत एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए उपयोगकर्ताओं को अंतर्निहित एक्सपोज़र का अस्तित्व स्थापित करने की आवश्यकता के बिना, सभी प्राधिकृत व्यापारियों को मिलाकर, 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य काल्पनिक मूल्य तक की पोज़िशन लेने दें, जो किसी भी समय बकाया हो। इसके अतिरिक्त, उपर्युक्त मास्टर निदेश के भाग क के खंड I के पैराग्राफ 3.4 (i) के अनुसार, उपयोगकर्ता को अंतर्निहित एक्सपोज़र का अस्तित्व स्थापित किए बिना भारतीय रुपये से संबंधित सभी मुद्रा युग्मों को मिलाकर तथा सभी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों को संयुक्त रूप से लेते हुए, 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य की एकल सीमा तक पोज़िशन (लॉन्ग अथवा शॉर्ट) लेने की अनुमति है। अब से उपर्युक्त प्रत्येक सुविधा के लिए सीमा 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य काल्पनिक मूल्य की होगी, जो किसी भी समय बकाया हो।
अतिरिक्त दस्तावेज़ों की आवश्यकता
(घ) प्राधिकृत व्यापारी किसी उपयोगकर्ता को संविदागत एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए भारतीय रुपये से संबंधित विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदा उपलब्ध कराते समय उससे इस आशय का वचनपत्र प्राप्त करेगा और अपने पास रखेगा कि उसी अंतर्निहित एक्सपोज़र की हेजिंग किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी के साथ नहीं की गई है। जहाँ एक ही एक्सपोज़र की हेजिंग एक से अधिक प्राधिकृत व्यापारियों के साथ अलग-अलग हिस्सों में की जा रही हो, वहाँ अन्य प्राधिकृत व्यापारी/व्यापारियों के साथ पहले से बुक की गई राशियों का विवरण वचनपत्र में स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए। यह वचनपत्र सौदे की पुष्टि के हिस्से के रूप में भी प्राप्त किया जा सकता है। यह वचनपत्र उन अन्य दस्तावेज़ों के अतिरिक्त होगा, जिन्हें प्राधिकृत व्यापारी उपर्युक्त मास्टर निदेश के भाग क के खंड I के पैराग्राफ 2.4 (iv) के अनुसार तथा इन निदेशों की अपेक्षाओं के अनुपालन के लिए उपयोगकर्ताओं से माँग सकते हैं।
3. अंतर्निहित एक्सपोज़र के अस्तित्व सहित इन निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व प्राधिकृत व्यापारी का होगा। इसके लिए वह आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त करेगा और उन्हें कम-से-कम दो वर्ष की अवधि तक अपने पास रखेगा।
4. ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
5. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धाराओं 10(4) और 11(1) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45डब्ल्यू द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित अनुमतियों / अनुमोदनों, यदि कोई हों, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक |