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आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार संबंधी विनियामाकीय उपायों की घोषणा की

10 अक्तूबर 2026

आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार संबंधी विनियामाकीय उपायों की घोषणा की

बदलती हुई परिस्थितियों को देखते हुए तथा विदेशी मुद्रा बाजार के सुव्यवस्थित कामकाज को सुनिश्चित करने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज दो परिपत्र जारी किए हैं - एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 25 और एपी(डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 26 जिनमें निम्नलिखित विनियामकीय उपायों की घोषणा की गई है।

  1. निरस्त की गई विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की पुन: बुकिंग करने पर प्रतिबंध: प्राधिकृत व्यापारी, इन निदेशों के जारी होने के बाद किसी भी प्राधिकृत व्यापारी के साथ निरस्त की गई ऐसी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा, जिसमें भारतीय रुपया शामिल है, चाहे वह प्रदेय हो अथवा गैर-प्रदेय, की पुन: बुकिंग की अनुमति उपयोगकर्ताओं को नहीं देंगे। विदेशी मुद्रा डेरिवेटव संविदाओं की परिपक्वता पर उनकी अवधि का बढ़ना, मौजूदा विनियामकीय प्रावधानों के अनुपालन के अधीन अनुमत होगा।

  2. अंतर्निहित एक्सपोज़र स्थापित किए बिना विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा में कमी: संविदाबद्ध एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए अंतर्निहित एक्सपोज़र को स्थापित किए बिना विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन करने की मौजूदा सीमा 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य से घटाकर 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य कर दी गई है। यह सीमा सभी प्राधिकृत व्यापारियों पर लागू होगी। इसी प्रकार, अंतर्निहित एक्सपोज़र को स्थापित किए बिना भारतीय रुपये से संबंधित एक्सचेंज में खरीदे-बेचे गए करेंसी डेरिवेटिव में पोज़िशन लेने की सीमा भी 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से घटाकर 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य कर दी गई है। यह सीमा कुल मिलाकर सभी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों में लागू होगी।

  3. अंतर्निहित एक्सपोज़र के सत्यापन के लिए अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण: प्राधिकृत व्यापारियों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे संविदाबद्ध एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए भारतीय रुपये से संबंधित विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं को निष्पादित करने वाले उपयोगकर्ताओं से एक वचनपत्र प्राप्त करें और उसे अपने पास रखें। इस वचनपत्र में यह पुष्टि की जाएगी कि उसी अंतर्निहित एक्सपोज़र की हेजिंग किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से नहीं की गई है।

  4. विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि (एफईआरआर) की शुरुआत: भारतीय रुपये से संबंधित ऐसी सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं के संबंध में, जिनका सांकेतिक मूल्य 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के समतुल्य से अधिक है, प्राधिकृत व्यापारियों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के पास नकद रूप में विदेशी मुद्रा जोखिम आरक्षित निधि (एफईआरआर) का रखरखाव आवश्यक होगा। यह निधि प्रत्येक लेनदेन की सांकेतिक राशि के आईएनआर में समतुल्य राशि की 20 प्रतिशत होगी। यह एफईआरआर भारतीय रुपये से संबंधित उन विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं पर लागू होगी, जो चालू खाता एक्सपोज़र की हेजिंग के लिए की जाती हैं और जिनमें उपयोगकर्ता भारतीय रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदता है।

उपरोक्त उपायों का उद्देश्य, बाजार के लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी वातावरण बनाते हुए, बाजार अनुशासन को सुदृढ़ करना तथा विदेशी मुद्रा बाजार में उचित जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1305


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