7 अक्तूबर 2026
आरबीआई ने ‘प्रतिपक्षी ऋण जोखिम (एसए-सीसीआर) हेतु मानकीकृत दृष्टिकोण’ संबंधी संशोधन निदेश
जारी किए
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 10 जून 2026 को ‘प्रतिपक्षी ऋण जोखिम (एसए-सीसीआर) हेतु मानकीकृत दृष्टिकोण' पर संशोधन निदेशों का मसौदा जारी किया था, जिसमें 1 जुलाई 2026 तक हितधारकों से प्रतिक्रिया आमंत्रित की गई थी। इस संशोधन निदेशों के मसौदे में वाणिज्यिक बैंकों के लिए आगामी अनुदेशों पर मास्टर निदेश में दिए गए प्रतिपक्षी ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार संबंधी अनुदेशों में संशोधनों का प्रस्ताव किया गया था। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल था: (i) बैंकिंग और ट्रेडिंग बुक एक्सपोजर के लिए सीसीआर के दायरे को स्पष्ट करना, (ii) हाल के विधिक / विनियामक गतिविधियों के प्रकाश में एकाधिक मार्जिन समझौतों और एकाधिक नेटिंग सेट संबंधी कार्य को संबोधित करना, (iii) उन लेनदेनों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना जहां एक बैंक सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के इक्विटी डेरिवेटिव्स और कमोडिटी डेरिवेटिव्स खंडों में समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य करता है, (iv) ऑप्शन प्रीमियम के विलंबन के लिए कार्रवाई निर्दिष्ट करना, (v) ऑप्शन के लिए प्रभावी नोशनल की गणना करने पर मार्गदर्शन प्रदान करना, और (vi) एसए-सीसीआर के लिए प्रकटन टेम्पलेट शामिल करना।
2. अनुदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जांच की गई और तदनुसार, संशोधन निदेशों को अंतिम रूप देते समय आवश्यक संशोधन उसमें उचित रूप से शामिल कर लिए गए हैं। अनुदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।
3. तदनुसार, रिज़र्व बैंक ने आज 'भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – आगामी अनुदेश) संशोधन निदेश, 2026' जारी किया है।
4. ये अनुदेश 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1272 |