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अधिसूचनाएं

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारत में विदेशी निवेश

भारिबैंक/2014-15/448
ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 71

3 फरवरी 2015

सभी प्राधिकृत व्यक्ति

महोदया/महोदय,

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारत में विदेशी निवेश

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों का ध्यान 3 मई 2000 की अधिसूचना सं॰फेमा.20/2000-आरबी द्वारा अधिसूचित, समय समय पर यथासंशोधित, विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2000 की अनुसूची 5 एवं 23 जुलाई 2014 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 13 की ओर आकृष्ट किया जाता है जिसके अनुसार पंजीकृत विदेशी पोर्टफालियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में सभी भावी निवेश, न्यूनतम तीन सालों की अवशिष्ट परिपक्वता अवधि वाले सरकारी बांडों में करने अपेक्षित होंगे।

2. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों का ध्यान 3 फरवरी 2015 को जारी छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तब्य, 2014-15 में की गई घोषणा की ओर आकृष्ट किया जाता है जिसके अनुसार भारत में कर्ज बाजार (Debt market) में विदेशी पोर्टफालियो निवेशकों द्वारा सभी भावी निवेश न्यूनतम तीन सालों की अवशिष्ट परिपक्वता अवधि के लिए किए जाने अपेक्षित होंगे।

3. तदनुसार, निवेश-सीमा में से कार्पोरेट बांडों में विदेशी पोर्टफालियो निवेशकों द्वारा किए जाने सभी भावी निवेश न्यूनतम तीन सालों की अवशिष्ट परिपक्वता अवधि वाले कार्पोरेट बांडों में किए जाने अपेक्षित होंगे। इसके अलावा, बिक्री अथवा मोचन के कारण चालू निवेश की शेष हुई सीमा के बदले जिन कार्पोरेट बांडों में सभी भावी निवेश किए जाएंगे उनकी न्यूनतम अवशिष्ट परिपक्वता अवधि तीन साल होगी।

4. विदेशी पोर्टफालियो निवेशकों को चल और मुद्रा बाजार म्युच्युअल निधि योजनाओं में कोई और निवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

5. हालांकि, इस बाबत कोई अवरुद्धता अवधि (लॉक-इन-पीरियड) नहीं होगी और विदेशी पोर्टफालियो निवेशक प्रतिभूतियां (तीन सालों से कम अवशिष्ट परिपक्वता अवधि वाली संप्रति धारित प्रतिभूतयों सहित) घरेलू निवेशकों को बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे।

6. उल्लिखित निदेश तत्काल प्रभाव से लागू हैं। इसके अलावा, परिचालनात्मक दिशानिर्देश, यदि कोई होंगे, वे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा जारी किए जाएंगे।

7. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा कर्ज (डेट) बाजार में निवेश किए जाने से संबंधित सभी अन्य मौजूदा शर्तें अपरिवर्तित बनी रहेंगी।

8. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबंधित घटकों और ग्राहकों को अवगत कराने का कष्ट करें।

9. इस परिपत्र में निहित निर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11(1) के अंतर्गत और किसी अन्य विधि के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/ अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किये गये हैं।

भवदीय,

(बी॰ पी॰ कानूनगो)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


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