मूल विनियमावली और संबंधित संशोधन


विदेशी मुद्रा प्रबंध (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र) विनियमावली, 2015

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केन्द्रीय कार्यालय
मुंबई - 2 मार्च 2015

(7 जनवरी 2020 तक संशोधित)

विदेशी मुद्रा प्रबंध (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र) विनियमावली, 2015

सं. फेमा.339/2015-RB - विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (1999 का 42) की धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएँ केंद्र में स्थापित वित्तीय संस्थाओं हेतु निम्नलिखित विनियम बनाता है; अर्थात्:—

1. संक्षिप्त नाम एवं प्रारम्भ:-

i. ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र) विनियमावली, 2015 कहलाएंगे।

ii. वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।

2. परिभाषाएँ:-

इस विनियमावली में जब तक कि प्रसंग से अन्यथा अपेक्षित न हो -

(ए) ‘अधिनियम’ का अर्थ विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) होगा;

(बी) ‘वित्तीय संस्था’ में निम्नलिखित शामिल होंगे;

(i) कोई कंपनी, अथवा

(ii) कोई फ़र्म, अथवा

(iii) लोगों का कोई एसोशिएशन (AOP) अथवा व्यक्तियों का कोई निकाय (BOI), चाहे निगमित हो अथवा नहीं, अथवा

(iv) पूर्वोल्लिखित श्रेणियों में न आने वाला कोई अन्नेसर्गिक विधिक व्यक्ति (ARJP) जो वित्तीय सेवाएं देने अथवा वित्तीय लेन देन करने में संलग्न हो।

स्पष्टीकरण: इस उप-विनियम के प्रयोजन के लिए, और उपर्यूक्त सामान्यता को क्षति पहुंचाए बिना, “वित्तीय संस्था” अभिव्यक्ति में बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ, बीमा कंपनियां, ब्रोकरेज़ फ़र्मे, मर्चेन्ट बैंक, निवेश बैंक, पेंशन फ़ंड, म्यूचुअल फ़ंड, ट्रस्ट, विनिमय गृह, क्लियरिंग हाउस और भारत सरकार अथवा वित्तीय विनियामक प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट कोई अन्य संस्था शामिल होगी।

(सी) ‘वित्तीय सेवा’ का अर्थ किसी वित्तीय संस्था द्वारा की जाने वाली उन गतिविधियों से है जो संसद के संबंधित अधिनियम अथवा भारत सरकार अथवा संबंधित वित्तीय संस्था को विनियमित करने के लिए अधिकार प्राप्त किसी विनियामक प्राधिकारी द्वारा तत् रूप में विनिर्दिष्ट/अनुमत की गई हो।

(डी) ‘वित्तीय लेनदेन’ का अर्थ किसी व्यक्ति को भुगतान करने अथवा उसके खाते में धन जमा करने, अथवा किसी व्यक्ति के लिए, आदेश द्वारा अथवा की ओर से भुगतान प्राप्त करने, अथवा आहरण करने अथवा किसी विनियम बिल अथवा प्रोमिसरी नोट को जारी करने अथवा परक्रामित करने, अथवा किसी प्रतिभूति को अंतरित करने अथवा किसी ऋण को प्राप्त करने से है।

(ई) “एफएमसी” का अर्थ वायदा संविदा (विनियम) अधिनियम, 1952 (1952 का 74) के अंतर्गत स्थापित वायदा बाजार आयोग से है।

(एफ़) ‘अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र’ अथवा आईएफ़एससी का अर्थ विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 (क्यू) में निहित अर्थ से है।

(जी) ‘आईआरडीए’ का अर्थ बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) के तहत स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण से है।

(एच) ‘पीएफ़आरडीए’ का अर्थ पेंशन फ़ंड विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 (2013 का 23) के अंतर्गत स्थापित पेंशन फ़ंड विनियामक और विकास प्राधिकरण से है।

(आई) ‘विनियामक प्राधिकरण’ में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण(आईआरडीए), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA), वायदा बाजार आयोग (एफ़एमसी) अथवा भारतीय कानून के अंतर्गत किसी वित्तीय संस्था को विनियमित करने के अधिकार प्राप्त प्राधिकृत सांविधिक प्राधिकरण शामिल हैं।

(जे) ‘सेबी’ का अर्थ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अंतर्गत स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से है।

(के) इन विनियमों में प्रयुक्त शब्दों और अभिव्यक्तियों जिनका अर्थ इनमें विनिर्दिष्ट नहीं किया गया है, उनका अर्थ वही होगा जो संबंधित अधिनियमों में उन्हे दिया गया है।

3. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र में स्थापित कोई वित्तीय संस्था अथवा वित्तीय संस्था की शाखा और भारत सरकार अथवा विनियामक प्राधिकारी द्वारा ऐसी अनुमत/मान्यताप्राप्त संस्था को भारत से बाहर के निवासी व्यक्ति के रूप में माना जाएगा।

4. कोई वित्तीय संस्था अथवा वित्तीय संस्था की शाखा किसी ऐसी विदेशी मुद्रा में और किसी निवासी अथवा अनिवासी व्यक्ति अथवा अन्य के साथ संबन्धित विनियामक प्राधिकारी द्वारा किए गए निर्धारणानुसार कारोबार कर सकती है।

1बशर्ते, भारतीय रिज़र्व बैंक, सामान्य अथवा विशेष अनुमति से, किसी वित्तीय संस्था अथवा किसी वित्तीय संस्था की किसी शाखा को ऐसे व्यक्ति, निवासी अथवा अन्यत्र जैसा निर्धारित किया जाए, के साथ भारतीय रुपये में ऐसा कारोबार करने की अनुमति प्रदान कर सकता है।

5. उक्त अधिनियम की धारा 1(3) के उपबंधो के अधीन और इस विनियमावली अथवा किसी अन्य विनियमावली अथवा समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा दिये गए निदेशों में उपबंधित अन्य छुट के सिवाय किसी अन्य विनियमावली में अंतर्विष्ट शर्तें अंतरराष्ट्रीय वितीय सेवा केंद्र में स्थापित किसी ऐसी वित्तीय संस्था अथवा वित्तीय संस्था की शाखा पर लागू नहीं होंगी।

बी. पी. कानूनगो, प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


i) पाद टिप्पणी: इसे भारत सरकार के सरकारी राजपत्र-असाधारण-भाग-II, खंड 3 के उप-खंड (i) में दिनांक 02.03.2015 के सा.का.नि..सं. 218(अ) के माध्यम से प्रकाशित किया गया था और तदुपरांत इसका संशोधन निम्नानुसार किया गया:-

1. दिनांक 16.01.2020 को राजपत्र आईडी सीजी-डीएल-ई-17012020-215530 के माध्‍यम से भारत के राजपत्र [असाधारण, भाग III-खंड 4] में प्रकाशित और दिनांक 07.01.2020 से लागू अधिसूचना सं. फेमा. 397/आरबी-2020 विदेशी मुद्रा प्रबंध (अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र) (संशोधन) विनियमावली, 2020


1 अधिसूचना सं. फेमा. 397/आरबी-2020 तारीख 07-01-2020 के माध्यम से दिनांक 16.01.2020 से प्रभावी।



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