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विनियमावली में संशोधन


G.S.R.No.417 (E) - 12.04.2016

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई - 400 001

12 अप्रैल 2016

शुद्धिपत्र

भारतीय रिज़र्व बैंक, विदेशी मुद्रा विभाग द्वारा 15 फरवरी 2016 को जारी अधिसूचना सं. फेमा.362/2016-आरबी जो जी.एस.आर. सं.166 (ई) के मार्फत भारत सरकार के राजपत्र, असाधारण, भाग-II, खंड 3, उप-खंड (i) में प्रकाशित हुई थी (जिसे इसके पश्चात गज़ट अधिसूचना कहा गया है) में-

2.  पैरा 2 (बी) में

i. (ए) (iए) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा-

"(iए) "नियंत्रण" शब्द में शेयरधारण अथवा प्रबंधन अधिकार अथवा शेयरधारक करार अथवा मताधिकार करार के कारण बहुसंख्यक निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार अथवा प्रबंधन अथवा नीतिगत निर्णय पर नियंत्रण शामिल है।

सीमित देयता भागीदारी फ़र्मों के प्रयोजन के लिए - "नियंत्रण" शब्द का अभिप्राय बहुसंख्यक नामित भागीदारों की नियुक्ति से है, जहां कुछ खास अपवादों को छोडकर, ऐसे नामित भागीदार सीमित देयता भागीदारी फर्म की सभी नीतियों पर नियंत्रण रखते हैं।"

ii. (सी)(v) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा -

"(v) यह स्पष्ट किया जाता है कि विदेशी निवेश में सभी प्रकार के विदेशी निवेश अर्थात प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी संस्थागत निवेशकों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, अर्हताप्राप्त विदेशी निवेशकों, अनिवासी भारतीयों, वैश्विक निक्षेपागार रसीदों (GDRs), विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्डों और पूर्णतः, अधिदेशात्मक और अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों / डिबेंचरों के जरिए किए गए निवेश शामिल हैं, भले ही ऐसे निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2000 की अनुसूची 1, 2, 2ए, 3, 6, 8 9 और 10 के अंतर्गत किए गए हों।"

iii. (डी)(ii)(ए) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा -

"ए. ऐसी कंपनी / सीमित देयता भागीदारी फ़र्म को एसआईए (SIA), डीआईपीपी (DIPP) और एफआईपीबी (FIPB) को अपने द्वारा किए गए डाउनस्ट्रीम निवेश, नए/मौजूदा उद्यम (विस्तार कार्यक्रम सहित/रहित) में निवेश के तरीके सहित, ऐसे निवेश करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर http://www.fipb.gov.in पर उपलब्ध फॉर्म में अधिसूचित करना होगा, भले ही पूंजी लिखत (capital instrument) आबंटित न हुए हों;"

3. पैरा 2(सी)(ii) में निम्नलिखित अंतर्निहित / प्रतिस्थापित किया जाएगा :

i. "(ii) पैराग्राफ 2 में, उप-पैरा 4 में, खंड (iv) के बाद, निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात :

(v) शेयरों के स्वाप के द्वारा, बशर्ते जिस कंपनी में निवेश किया गया हो वह कंपनी स्वचालित मार्ग से निवेश करने के क्षेत्र में संलग्न हो, और निवेश की राशि कितनी भी क्यों न हो, स्वाप व्यवस्था में शामिल शेयरों का मूल्यांकन सेबी के पास पंजीकृत किसी मर्चेन्ट बैंकर अथवा भारत से बाहर अपने गृह देश में किसी उचित विनियामक प्राधिकारी के पास पंजीकृत किसी निवेश बैंकर द्वारा किया जाएगा।

नोट: कोई कंपनी यदि ऐसे क्षेत्र में संलग्न है जिसमें विदेशी निवेश हेतु सरकारी अनुमोदन लेना अपेक्षित है, तो वह स्वाप के जरिये अनिवासियों को शेयर सरकारी अनुमोदन से ही जारी कर सकती है।

4. पैरा 2 (सी)(iv) में

ए. अनुसूची 1 के संलग्नक 'बी' का मौजूदा क्रमांक 6.1 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा।

6.1 रक्षा उद्योग, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत औद्योगिक लाइसेंस के अधीन ।      49%

49% तक स्वचालित मार्ग से;

49% से अधिक सरकारी मार्ग के अंतर्गत, मामले–दर-मामले के आधार पर, जहां इससे देश में आधुनिक और आत्याधुनिक तकनीक तक पहुँच संभव हो सकती है।

बी. अनुसूची 1 के संलग्नक बी का निम्नलिखित मौजूदा क्रमांक 16.3 निम्नलिखित द्वारा  प्रतिस्थापित किया जाएगा :

16.3 एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार 100%

49% तक स्वचालित मार्ग से;

49% से अधिक सरकारी मार्ग से;

 

(1) एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार में विदेशी निवेश का उद्देश्‍य उत्‍पादन तथा विपणन क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना, उपभोक्‍ताओं हेतु ऐसी वस्‍तुओं की उपलब्‍धता में सुधार लाना, भारत से वस्‍तुओं की सोर्सिंग बढ़ाने को प्रोत्‍साहन देना और वैश्विक डिजाइनों, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के तौर-तरीकों तक पहुंच को सुगम बनाते हुए भारतीय उद्यमों की प्रतिस्‍पर्धा में वृद्धि करने से है।

(2) एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश निम्‍नलिखित शर्तों के अधीन किया जाएगा :

(ए) बेचे जाने वाले उत्‍पाद केवल ‘एकल ब्रांड' (सिंगल ब्रांड) के होंगे।

(बी) उत्‍पाद एक ही ब्रांड के अधीन अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बेचे जाने चाहिए अर्थात भारत से इतर एक या अधिक देशों में उत्‍पाद एक ही ब्रांड के अधीन बेचे जाने चाहिए।

(सी) ‘एकल ब्रांड’ उत्‍पाद के खुदरा व्‍यापार में वही उत्‍पाद शामिल होंगे जिनको विनिर्माण के दौरान ब्रैंडेड किया जाता है।

(डी) किसी अनिवासी संस्‍था (एंटिटी) / संस्थाओं को, चाहे ब्रांड का मालिक हो अथवा अन्‍यथा, विशिष्‍ट ब्रांड के संबंध में सिंगल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार के लिए ब्रांड के मालिक के साथ किए गए कानूनी तौर पर मान्‍य करार के अधीन, विशिष्‍ट ब्रांड के लिए देश में सिंगल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार करने की अनुमति दी जा सकेगी। इस शर्त के अनुपालन की जिम्‍मेदारी भारत में सिंगल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार करने वाली भारतीय संस्‍था की होगी। निवेश करने वाली संस्‍था अनुमोदन प्राप्‍त करते समय इस आशय का प्रमाण प्रस्‍तुत करेगी, जिसमें उपर्युक्‍त शर्त के अनुपालन को विशिष्‍ट रूप से दर्शाने वाले लाइसेंस / फ्रैन्‍चाइज़ / उप लाइसेंस करार की प्रति शामिल होगी। अपेक्षित साक्ष्य स्वचालित मार्ग के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के पास और अनुमोदन मामले में SIA/FIPB के पास फाइल किए जाने चाहिए।

(ई) 51% से अधिक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश संबंधी प्रस्‍तावों के लिए, खरीदी गयी वस्‍तुओं के मूल्‍य के 30% की सोर्सिंग भारत से की जाएगी, जिसके लिए सभी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्योगों (MSME's), ग्रामीण तथा कुटीर उद्योगों, कारीगरों तथा शिल्‍पकारों को वरीयता दी जाएगी। देशी (घरेलू) सोर्सिंग की मात्रा कंपनी द्वारा      स्‍व-प्रमाणित की जाएगी, जिसे कंपनी द्वारा रखे गए विधिवत प्रमाणित खातों से सांविधिक लेखा-परीक्षकों द्वारा तदनंतर जांचा जाएगा। खरीद की इस अपेक्षा को कंपनी द्वारा कारोबार शुरू करने के समय अर्थात प्रथम स्टोर खोलने की तारीख से वार्षिक आधार पर पूरा किया जाएगा। सोर्सिंग की अपेक्षा के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, संबंधित संस्‍था भारत में निगमित वह कंपनी होगी, जिसने सिंगल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार के प्रयोजन के लिए प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्राप्‍त किया हो।

(एफ़) इस पैरा की शर्तों के अधीन, जिन सिंगल ब्रांड रीटेल ट्रेडिंग कंपनियों के स्टोर भौतिक रूप से मौजूद हैं, उन्हें ई-कॉमर्स के माध्‍यम से रीटेल ट्रेडिंग करने की अनुमति होगी।

(3) भारत में ‘सिंगल ब्रांड’ उत्‍पादों के खुदरा व्‍यापार का प्रस्ताव करने वाली कंपनी में 49% से अधिक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश के लिए भारत सरकार से अनुमति प्राप्‍त करने हेतु आवेदनपत्र औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग में औद्योगिक सहायता सचिवालय (SIA) को प्रस्तुत किए जाएंगे। आवेदनपत्र में उस उत्‍पाद / उत्‍पाद की श्रेणियों का विशिष्‍ट रूप से उल्‍लेख किया जाए जिनका ‘सिंगल ब्रांड’ के तहत विक्रय प्रस्‍तावित है। ‘सिंगल ब्रांड’ के अधीन विक्रय किए जाने वाले किसी उत्‍पाद/उत्‍पाद श्रेणियों में कुछ भी जोड़ने के लिए सरकार से नया अनुमोदन प्राप्‍त करना होगा। 49% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में, खाद्य उत्पादों को छोड़कर, प्रस्तावित उत्‍पादों / उत्‍पाद की श्रेणियों की सूची भारतीय रिज़र्व बैंक को उपलब्ध करायी जाएगी।

(4) सरकारी अनुमोदन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) द्वारा विचार करने से पूर्व औद्योगिक नीति तथा संवर्धन विभाग द्वारा यह निर्धारण करने के लिए आवेदनपत्र पर कार्रवाई की जाएगी कि क्या प्रस्‍तावित निवेश अधिसूचित दिशा-निर्देशों को पूरा करते हैं।

नोट :

i. भारतीय ब्रांडों के सिंगल ब्रांड रीटेल व्यापार के संबंध में उपर्युक्त पैरा (2)(बी) एवं (2)(डी) की शर्तें लागू नहीं होंगी।

ii. भारतीय निर्माता को स्वनिर्मित उत्पादों को ई-कॉमर्स सहित थोक, खुदरा अथवा किसी भी रूप में बेचने अनुमति है।

iii. भारतीय निर्माता वह निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी है, जो भारतीय ब्रांड की मालिक है और भारत में विनिर्माण करती है, वह अपने उत्पादों के मूल्य का कम से कम 70% उत्पाद इन हाउस और अधिकतम 30% उत्पाद भारतीय निर्माताओं से ले सकती है।

iv. भारतीय ब्रांड का स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए और/अथवा ऐसी कंपनियों के पास होना चाहिए जिसका स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास हो।

v. "अत्याधुनिक एवं कटिंग-एज तकनीक" वाले उत्पादों से संबन्धित एंटीटीयों और जहां स्थानीय सोर्सिंग संभव नहीं है ऐसे मामलों में सिंगल ब्रांड ट्रेड के विषय में सरकार सोर्सिंग मानदण्डों को शिथिल कर सकती है।

सी. अनुसूची 1 के संलग्नक 'बी' का निम्नलिखित मौजूदा क्रमांक 16.5 निम्नलिखित द्वारा  प्रतिस्थापित किया जाएगा :

16.5

शुल्क रहित (ड्यूटी फ्री) दुकाने

100%

स्वचालित

 

(i) शुल्क रहित (ड्यूटी फ्री) दुकानों का अर्थ सीमाशुल्क क्षेत्र के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों / अंतरराष्ट्रीय समुद्री बन्दरगाहों एवं लैंड कस्टम स्टेशनों के क्षेत्र में स्थापित वे दुकाने हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की आवाजाही होती है।

(ii) शुल्क रहित (ड्यूटी फ्री) दुकानों में विदेशी निवेश कस्टम्स अधिनियम, 1962 तथा अन्य नियमों एवं विनियमों के अधीन होगा।

(iii) शुल्क रहित (ड्यूटी फ्री) दुकानों को देश के घरेलू टेरीफ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की रीटेल गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।

डी. मौजूदा पैराग्राफ एफ़ 5.2(3)(सी) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा :

“(सी) कोर निवेश कंपनियों (CICs) में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) /विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अपनी शेयरधारिता के आधार पर कंपनी के निदेशक बोर्ड में प्रतिनिधित्व की मांग नहीं करेंगे।"

5. गज़ट अधिसूचना की अन्य विषयवस्तु अपरिवर्तित बनी रहेगी।

(शेखर भटनागर)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक



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