बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का लोगो

विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता संव्यवहार) नियम, 2000

अधिसूचना

नई दिल्ली, मई 03, 2000 (जून 30, 2023 तक संशोधित)

केन्द्रीय सरकार, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 5 और धारा 46 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के खंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से लोकहित में इसे आवश्यक समझते हुए, निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् : -

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ : (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम विदेशी मुद्रा प्रबन्ध (चालू खाता संव्यवहार) नियम, 2000 है;

(2) ये 1 जून, 2000 को प्रवृत्त होंगे।

2. परिभाषायें – इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो :

(क) “अधिनियम” से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) अभिप्रेत है;

(ख) “आहरण” से किसी प्राधिकृत व्यक्ति से विदेशी मुद्रा का आहरण अभिप्रेत है और जिसके अन्तर्गत प्रत्यय पत्र लेना या अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड या अंतर्राष्ट्रीय डेबिट कार्ड या ए टी एम कार्ड या किसी अन्य वस्तु, चाहे उसका कोई भी नाम हो और जिससे विदेशी मुद्रा दायित्व उत्पन्न होता है, का प्रयोग भी सम्मिलित है ;

(ग) “अनुसूची” से इन नियमों से संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है;

(घ) उन शब्दों और पदों के, जो इन नियमों में परिभाषित नहीं है किन्तु अधिनियम में परिभाषित है, वही अर्थ होंगे जो इस अधिनियम में है।

3. विदेशी मुद्रा आहरण पर प्रतिषेध :– किसी व्यक्ति द्वारा निम्लिखित प्रयोजनों के लिए विदेशी मुद्रा आहरण प्रतिषिध्द है, अर्थात्:-

(क) अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट किसी संव्यवहार ; या

(ख) नेपाल और / या भुटान में यात्रा ; या

(ग) नेपाल या भुटान के निवासी व्यक्ति के साथ किसी संव्यवहार:

परंतु खंड (ग) के प्रतिषेध में भा.रि.बैं. द्वारा, ऐसे निबंधन और शर्तों के अधीन रहते हुए, जिन्हे अनुबध्द करना वह आवश्यक समझे, विशेष या साधारण आदेश द्वारा छूट दे सकेगा।

4. भारत सरकार का पूर्व अनुमोदन – कोई व्यक्ति भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना अनुसूची 2 में सम्मिलित किसी संव्यवहार के लिए विदेशी मुद्रा नहीं लेगा :

परंतु यह नियम वहां लागू नहीं होगा, जहां संदाय प्रेषक के रेसिडेन्ट फारेन करैंसी (आर एफ सी) खाते 1[***] में धारित निधि से किया जाता है।

2[5. रिजर्व बैंक से पूर्व अनुमोदन -

अनुसूची-III में शामिल संव्यवहारों के लिए विदेशी मुद्रा का प्रत्येक आहरण उसमें यथा उपबंधित अभिशासित किया जाएगा :

बशर्ते कि यह नियम वहां लागू नहीं होगा जहां भुगतान प्रेषक के नि‍वासी वि‍देशी मुद्रा (आरएफसी) खाते में जमा निधियों में से किया गया हो।]

3[6. (1) नियम 4 या नियम 5 की कोई बात, प्रेषक के एक्सचेन्ज अर्नरर्स फारेन करैंसी (ई ई एफ सी) खाता में धारित निधियों में से आहरण को लागू नहीं होगी।

(2) उपनियम (1) में किसी बात के होते हुए भी, नियम 4 या नियम 5 के अधीन अधिरोपित निर्बधनों वहां लागू रहेंगी, जहां एक्सचेन्ज अर्नरर्स फारेन करैंसी (ई ई एफ सी) खाते से आहरण को यथास्थिती अनुसूची II की मद 10 और 11 या अनुसूची 3 की मद 3, 4, 11, 16 और 17 में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए है।]

47. [भारत के बाहर रहते हुए अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड का उपयोग- नियम 5 में अंतर्विष्ट कोई भी बात, भारत से बाहर दौरे पर ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यय को पूरा करने के लिए व्यक्ति द्वारा भुगतान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर लागू नहीं होगी।]

अनुसूची - 1

5[वे संव्यवहार जो प्रतिषिद्ध हैं (नियम 3 देखिए)]

1. लाटरी की जीत में से प्रेषण।

2. घुड़दौड़ / घुड़सवारी आदि या किसी अन्य अभिरूचि से उत्पन्न आय से प्रेषण।

3. लाटरी टिकट, निषिध्द / अभिनिषिध्द पत्रिका के क्रय के लिए फुटबाल पूल दांव लगाने आदि के लिए प्रेषण।

4. भारतीय कंपनियों की विदेशों में संयुक्त वेंचर/ संपूर्ण स्वामित्व समनुषंगियों में इक्विटी निवेश के लिए किए गए निर्यात पर दलाली का संदाय।

5. किसी कंपनी द्वारा लाभांश, जिसके लिए शेष लाभांश की अपेक्षा भी लागू है, से प्रेषण।

6[6. रूपए स्टेट क्रैडिट रूट के अधीन निर्यात पर दलाली का संदाय, चाय और तन्बाकू के निर्यात के बीजक मूल्य की 10 प्रतिशत तक दलाली के सिवाय ।]

7. दूरभाष के “कॉल बैंक सर्विसेज” से संबंधित संदाय।

8. एन आर एस आर अनिवासी विशेष रूपए के खाते में रखी निधियों पर ब्याज से आय से प्रेषण|

अनुसूची 2

7[वे संव्यवहार जिनके लिए केंन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन अपेक्षित है (नियम 4 देखिए)]

प्रेषण का प्रयोजन भारत सरकार का मंत्रालय/विभाग जिसका अनुमोदन अपेक्षित है
1. सांस्कृतिक टयूर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा और संस्कृति विभाग)
8[2. किसी राज्य सरकार या लोक सैक्टर उपक्रमों द्वारा पर्यटन, विदेशी विनिधान और अंतरराष्ट्रीय बोली (10,000 अमरीकी डालर) से भिन्न प्रयोजन के लिए विदेशी प्रिन्ट मीडिया में विज्ञापन। वित्त मंत्रालय, आर्थिक कार्य विभाग]
3. पब्लिक सेक्टर उपक्रम द्वारा भाड़े पर लिया गया जलयान के माल भाड़े से प्रेषण जल भूतल मंत्रालय (माल भाड़ा स्कंध)
9[4. सरकारी विभाग या पब्लिक सेक्टर उपक्रम द्वारा लागत बीमा भाड़ा पर आधारित (अर्थात् पोत पर्यन्त निःशुल्क और पोत तक निःशुल्क पर आधारित को छोड़कर) महासागरीय परिवहन के माध्यम से आयात का संदाय] जल भूतल मंत्रालय (माल भाड़ा स्कंध)
5. अपने विदेश स्थित अभिकर्ताओं को प्रेषण करने वाले बहु मोडल परिवहन संचालक पोत परिवहन महानिदेशक से रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र
10[6.
(क) टी वी चैनलों द्वारा ट्रांसपोंडरों के भाड़ा प्रभारों का प्रेषण
(ख) इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा ट्रांसपोंडरों के भाड़ा प्रभारों का प्रेषण
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
संचार और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय)]
7. पोत परिवहन महानिदेशक द्वारा विहित आधान निरोध प्रभार से अधिक दर का प्रेषण । जल भूतल मंत्रालय (पोत परिवहन महानिदेशक)
11[8***]  
9. यदि अंतर्वलित रकम 1,00,000 अमरीकी डालर से अधिक है तब अंतर्राष्ट्रीय / राष्ट्रीय / राज्य स्तर के खेल निकायों को छोड़कर किसी व्यक्ति द्वारा विदेश में खेल के क्रिया कलापों के प्राइज धन / प्रयोजन का प्रेषण। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (युवा मामले और खेल विभाग)
12[10***]  
11. पी एण्ड आई क्लब की सदस्यता के लिए प्रेषण वित्त मंत्रालय (बीमा प्रभाग)

13[अनुसूची III

(नियम 5 देखें)

व्यष्टियों के लिए सुविधाएं-

1. व्यष्टिगण केवल 2,50,000 अमरीकी डालर की सीमा के अंदर निम्नलिखित प्रयोजनों हेतु विदेशी मुद्रा सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उक्त सीमा से अधिक के किसी अतिरिक्त विप्रेषण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से पूर्व अनुमोदन अपेक्षित होगा।

(i) किसी देश में (नेपाल और भूटान को छोड़कर) निजी यात्राएं।

(ii) उपहार या दान।

(iii) रोजगार हेतु विदेश जाना।

(iv) उत्प्रवास।

(v) विदेश में निकट संबंधियों का भरण-पोषण।

(vi) व्यवसाय के लिए यात्रा करना अथवा सम्मेलन या विशिष्टिकृत प्रशिक्षण में भाग लेना अथवा चिकित्सा व्यय या विदेश में जांच करवाने अथवा चिकित्सीय उपचार / जांच करवाने के लिए विदेश जा रहे रोगी के परिचारक के रूप में उसके साथ जाने से संबंधित व्यय की पूर्ति हेतु।

(vii) विदेश में चिकित्सीय उपचार कराने के संबंध में व्यय।

(viii) विदेश में अध्ययन करना।

(ix) कोई अन्य चालू खाता संव्यवहार।

बशर्ते कि मद संख्या (iv), (vii) तथा (viii) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए, यदि क्रमश: उत्प्रवास के देश, उपचार प्रदान करने वाले चिकित्सा संस्थान अथवा विश्‍वविद्दालय द्वारा ऐसा करना अपेक्षित हो, तो तारीख 3 मई, 2000 की फेमा अधिसूचना 1/2000 – आरबी के विनियम 4 में यथा उपबंधित उदारीकृत विप्रेषण योजना (इसमें इसके पश्‍चात् उदारीकृत विप्रेषण योजना कहा गया है) के अंतर्गत निर्धारित सीमा से अधिक की धनराशि के लिए व्यष्टि विनिमय सुविधा का उपयोग कर सकेगा:

बशर्ते और यह कि यदि उक्त उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत कोई व्यष्टि एक वित्त वर्ष में किसी धनराशि का विप्रेषण करता है, तो ऐसे व्यष्टि के लिए लागू होने वाली सीमा 250,000 अमरीकी डॉलर (केवल दो लाख पचास हजार अमरीकी डालर) से घटाकर ऐसी विप्रेषित राशि तक कर दी जाएगी:

बशर्ते यह भी कि ऐसा व्यक्ति जो भारत का निवासी है परंतु स्थायी रूप से नहीं है और -

क) पाकिस्तान के अलावा किसी बाहरी देश का नागरिक हो, या

ख) भारत का नागरिक हो, जो किसी विदेशी कंपनी के कार्यालय अथवा शाखा या ऐसी विदेशी कंपनी की भारत में अनुषंगी कंपनी अथवा संयुक्त उध्यम में प्रतिनियुक्ति पर हो, तो अपने निवल वेतन (करों की कटौती, भविष्य निधि में अंशदान और अन्य कटौतियों के पश्चात) तक का विप्रेषण कर सकेगा।

स्पष्टीकरण: इस मद के प्रयोजन के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपने रोजगार अथवा किसी विनिर्दिष्ट अवधि की प्रतिनियुक्ति पर (उसकी अवधि पर विचार किए बिना) अथवा किसी विनिर्दिष्ट कार्य या समनुदेशनों के लिए, जिसकी अवधि तीन वर्षोंसे अधिक नहीं हो, भारत में निवास करता है, तो वह निवासी तो है परंतु स्थायी रूप से निवासी नहीं है:

बशर्ते यह भी कि किसी व्यष्टि के अलावा कोई व्यक्ति भी इसमें ऊपर उल्लिखित प्रयोजनों के लिए उक्त उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत निर्धारित सीमा के भीतर, आवश्यक परिवर्तनों सहित, विदेशी मुद्रा सुविधा का लाभ ले सकेगा।

व्यष्टि केअलावा व्यक्तियों के लिए सुविधाएं-

2. व्यष्टियों को छोड़कर व्यक्तियों द्वारा निम्नलिखित विप्रेषणों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन की अपेक्षा होगी।

(i) विगत तीन वित्त वर्षों के दौरान, उनके विदेशी मुद्रा अर्जनों के एक प्रतिशत से अधिक के दानों अथवा 5,000,000 अमरीकी डालर, जो भी कम हो, जो

(क) प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के पीठ सृजन;

(ख) शैक्षणिक संस्थानो द्वारा संवर्ध्दित निधियों (निवेश निधि नही होने पर) में अंशदान; और

(ग) दाता कंपनी की गतिविधियों के क्षेत्र में किसी तकनीकी संस्था या निकाय अथवा संगम को अंशदान के लिए हों।

(ii) भारत में आवासीय फ्लैटों या वाणिज्यिक प्लाटों की बिक्री के लिए विदेशी अभिकर्त्ताओं को 25,000 अमरीकी डालर अथवा आवक विप्रेषण का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, प्रति संव्यवहार, कमीशन।

(iii) अवसंरचना परियोजनाओं के संबंध में किसी भी परामर्शी सेवाओं के लिए प्रति परियोजना 10,000,000 अमरीकी डालर और भारत से बाहर से अधिप्राप्त अन्य परामर्शी सेवाओं के लिए प्रति परियोजना 10,000,000 अमरीकी डालर से अधिक के विप्रेषण।

स्पष्टीकरण: इस उप – पैराग्राफ के प्रयोजनों के लिए “अवसंरचना” अभिव्यक्ति से अभिप्रेत तारीख 3 मई, 2000 की फेमा अधिसूचना 3/ 2000 – आरबी के पैरा 1(iv)(क)(क) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित होगा।

(iv) भारत में किसी निकाय द्वारा पूर्व-निगमन व्ययों की प्रतिपूर्ति के जरिए भारत में लाए गए निवेश के पांच प्रतिशत अथवा 100,000 अमरीकी डालर, जो भी अधिक हो, से अधिक के विप्रेषण।

3. प्रक्रिया

इस अनुसूची के अंतर्गत किसी विदेशी मुद्रा के आहरण अथवा विप्रेषण के लिए प्रक्रिया उक्त उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत किसी धनराशि के विप्रेषण के लिए लागू होने वाली ही होगी।]


1 शब्द "या विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाता" को का.आ.301 (अ), तारीख 30-3-2001 (30-3-2001 से प्रभावी) के माध्यम से लोप किया गया

2 सा.का.नि. 426 (अ), तारीख 26-5-2015 (26-5-2015 से प्रभावी) द्वारा प्रतिस्थापित

3 का.आ.301 (अ), तारीख 30-3-2001 द्वारा अंत: स्थापित किया गया (30-3-2001 से प्रभावशील)

4 सा.का.नि. 472 (अ), तारीख 30-6-2023 के माध्यम से जोड़ा गया (16-5-2023 से प्रभावी)

5 "(नियम 3 देखिए)" को सा.का.नि. 512 (अ), तारीख 27-7-2005 के माध्यम से प्रतिस्थापित किया गया (28-7-2005 से प्रभावी)

6 सा.का.नि. 397 (अ), तारीख 1-5-2003 के माध्यम से प्रतिस्थापित (14-5-2003 से प्रभावी)

7 "(नियम 4 देखिए)" को सा.का.नि. 512 (अ), तारीख 27-7-2005 के माध्यम से प्रतिस्थापित किया गया (28-7-2005 से प्रभावी)

8 का.आ.301 (अ), तारीख 30-3-2001 के माध्यम से प्रतिस्थापित (30-3-2001 से प्रभावी)

9 सा.का.नि. 849 (अ), तारीख 27-10-2003 के माध्यम से जोड़ा गया (29-10-2003 से प्रभावी)

10 सा.का.नि. 608 (अ), तारीख 13-9-2004 के माध्यम से जोड़ा गया (13-9-2004 से प्रभावी)। इससे पूर्व मद संख्या 6 को, सा.का.नि. 442, तारीख 22-10-2002 के माध्यम से लोप किया गया (2-11-2002 से प्रभावी)।

11 मद 8 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का सा.का.नि. 382 (अ), तारीख 5-5-2010 के माध्यम से लोप किया गयागया (16-12-2009 से प्रभावी)

12 मद 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का सा.का.नि. 608 (अ), तारीख 13-9-2004 के माध्यम से लोप किया गयागया (13-9-2004 से प्रभावी)

13 सा.का.नि. 426 (अ), तारीख 26-5-2015 के माध्यम से प्रतिस्थापित (26-5-2015 से प्रभावी)


शीर्ष
पिछले पृष्ठ पर वापस जाएं