वित्त मंत्रालय
(आर्थिक कार्य विभाग)
अधिसूचना
नई दिल्ली, 22 अगस्त, 2022
सा.का.नि. 646(अ).—विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 46 की उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के खंड (एए) और (एबी) एवं धारा 47 की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण या निर्गम) विनियमावली, 2004 और विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 का अधिक्रमण करते हुए, इस तरह के अधिक्रमण से पहले किए गए या छोड़े गए कार्यों के अलावा, केंद्र सरकार एतद्द्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, यथा:
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.—(1) इन नियमों को विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) नियमावली, 2022 कहा जाएगा।
(2) वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।
2. परिभाषाएं.—(1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,—
(ए) "अधिनियम" का अर्थ है विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42);
(बी) "प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक" या "एडी बैंक" का अर्थ अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के तहत प्राधिकृत व्यक्ति से है और इन नियमों के प्रयोजनों से एडी बैंक का अर्थ ऐसे एडी बैंक की केवल घरेलू शाखाओं से होगा;
(सी) "नियंत्रण" का अर्थ है अधिकांश निदेशकों को नियुक्त करने का अधिकार या प्रबंधन अथवा नीतिगत निर्णयों को नियंत्रित करने का अधिकार जो किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा जो व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, कार्य कर रहे हों, जिसमें वे भी शामिल हैं जो अपनी शेयरधारिता अथवा प्रबंधन अधिकारों अथवा शेयरधारकों के करारों या मतदान करारों के बल पर उक्त संस्था में दस प्रतिशत या अधिक का मतदान अधिकार अथवा किसी अन्य प्रकार का अधिकार रखते हैं;
(डी) "विनिवेश" का अर्थ है इन नियमों के तहत अर्जित इक्विटी पूंजी के अधिकार, हक या कब्जे का आंशिक या पूर्ण निर्वापन;
(ई) "इक्विटी पूंजी" का अर्थ है इक्विटी शेयर या स्थायी पूंजी या लिखत जो अप्रतिदेय हों अथवा पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय लिखतों के रूप में किसी विदेशी संस्था की ऋण से इतर पूंजी में अंशदान;
(एफ) "वित्तीय प्रतिबद्धता" का अर्थ है पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा किए गए निवेश की कुल राशि, पारदेशीय पोर्टफोलियो निवेश से भिन्न ऋण जो उस संस्था अथवा संस्थाओं में किया गया हो जिनमें पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश किया गया है, और इसमें ऐसी विदेशी संस्था अथवा संस्थाओं को अथवा उनकी ओर से ऐसे व्यक्ति द्वारा दी गयी गैर-निधि-आधारित सुविधाएँ भी शामिल होंगी;
(जी) "वित्तीय सेवा विनियामक" का अर्थ भारत में लागू किसी भी कानून के तहत स्थापित कोई वित्तीय सेवा विनियामक है और इसमें रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण शामिल हैं;
(एच) "विदेशी संस्था" का अर्थ है भारत के बाहर, जिसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएँ केंद्र शामिल है, गठित या पंजीकृत या निगमित कोई संस्था जिसकी सीमित देयता है:
बशर्ते सीमित देयता का उक्त प्रतिबंध ऐसी संस्था पर लागू नहीं होगा जिसका प्रमुख क्रियाकलाप किसी रणनीतिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है;
(आई) "मेजबान देश" या "मेजबान क्षेत्राधिकार" का अर्थ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र सहित वह देश या क्षेत्राधिकार है, जिसमें उक्त विदेशी संस्था का गठन, पंजीकरण या निगमन, जैसा भी मामला हो, हुआ है;
(जे) "भारतीय संस्था" का अर्थ है—
(i) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के तहत परिभाषित कंपनी;
(ii) तत्समय लागू किसी कानून द्वारा निगमित निकाय;
(iii) सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के तहत विधिवत गठित और निगमित कोई सीमित देयता भागीदारी फर्म; तथा
(iv) भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) के तहत पंजीकृत कोई साझेदारी फर्म।
(के) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र" या "आईएफएससी" का वही अर्थ होगा जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) की धारा 3 के खंड (छ) में दिया गया है;
(एल) "अंतिम लेखापरीक्षित तुलन-पत्र" का अर्थ वह तुलन-पत्र होगा जो लेनदेन की तारीख से 18 माह से ज्यादा पहले की तारीख की स्थिति के अनुसार तैयार न किया गया हो;
(एम) "सूचीबद्ध विदेशी संस्था" का अर्थ है कोई विदेशी संस्था जिसके इक्विटी शेयर या कोई भी अन्य पूर्ण और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय लिखत भारत के बाहर किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं;
(एन) "सूचीबद्ध भारतीय कंपनी" का अर्थ है कोई भारतीय कंपनी जिसके इक्विटी शेयर या कोई भी अन्य पूर्ण और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय लिखत भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं और इसी के अनुरूप "असूचीबद्ध भारतीय कंपनी" का अर्थ लगाया जाएगा;
(ओ) "म्यूचुअल फंड" का अर्थ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में इस प्रकार से पंजीकृत कोई निधि है;
(पी) "निवल मालियत" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (57) में दिया गया है।
स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों से, पंजीकृत साझेदारी फर्म या सीमित देयता भागीदारी की "निवल मालियत" अंतिम लेखापरीक्षित तुलन पत्र के अनुसार भागीदारों के पूंजी अंशदान और भागीदारों के अविभाजित लाभ के योग में से संचित हानियों, आस्थगित व्यय और बट्टे खाते न डाले गए विविध व्यय के कुल मूल्य को घटाने पर प्राप्त राशि होगी;
(क्यू) "विदेशी प्रत्यक्ष निवेश" या "ओडीआई" का अर्थ है किसी विदेशी संस्था की असूचीबद्ध इक्विटी पूंजी के अधिग्रहण के माध्यम से निवेश, या किसी विदेशी संस्था के बहिर्नियमों के एक भाग के रूप में अंशदान, या किसी सूचीबद्ध विदेशी संस्था की चुकता इक्विटी पूँजी के दस प्रतिशत या उससे अधिक में निवेश, या नियंत्रण के साथ निवेश जहाँ किसी सूचीबद्ध विदेशी संस्था की चुकता इक्विटी पूंजी के दस प्रतिशत से कम राशि का निवेश हो;
स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों से, जहां भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा किसी विदेशी संस्था की इक्विटी पूंजी में निवेश को ओडीआई के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, ऐसे निवेश को ओडीआई के रूप में माना जाना जारी रहेगा, भले ही यह निवेश चुकता इक्विटी पूंजी के 10 प्रतिशत से नीचे के स्तर पर आ जाए या वह व्यक्ति उस विदेशी संस्था पर अपना नियंत्रण खो दे;
(आर) "पारदेशीय निवेश" या "ओआई" का अर्थ भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा दी गयी वित्तीय प्रतिबद्धता और उसका पारदेशीय पोर्टफोलियो निवेश है;
(एस) "पारदेशीय पोर्टफोलियो निवेश" या "ओपीआई" का अर्थ है विदेशी प्रतिभूतियों में ओडीआई से भिन्न निवेश, लेकिन यह निवेश किसी असूचीबद्ध ऋण लिखतों में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति, जो आईएफएससी में न हो, द्वारा जारी किसी भी प्रतिभूति में न किया गया हो:
बशर्ते भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा किसी सूचीबद्ध संस्था की इक्विटी पूँजी में किया गया ओपीआई उक्त संस्था के असूचीबद्ध हो जाने के बाद भी ओपीआई तब तक माना जाता रहेगा जब तक उसमें कोई और निवेश न किया जाए।
स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों से, "ऋण लिखत" पद का अर्थ नियम 5 के खंड (ए) में इस रूप में निर्दिष्ट लिखतों से है;
(टी) "रिश्तेदार" का वही अर्थ लिया जाएगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (77) में दिया गया है;
(यू) "निवासी व्यष्टि" का अर्थ है भारत में निवासी व्यक्ति जो एक नैसर्गिक व्यक्ति है;
(वी) "निवासी विदेशी मुद्रा खाता" या "आरएफसी खाता" का वही अर्थ होगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 में दिया गया है;
(डब्लू) "सेबी" का अर्थ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के तहत स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड है;
(एक्स) "सोसाइटी" का अर्थ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के तहत पंजीकृत सोसायटी है;
(वाई) किसी विदेशी संस्था की "अनुषंगी" या "उप अनुषंगी" का अर्थ एक ऐसी संस्था है जिसमें उस विदेशी संस्था का नियंत्रण होता है;
(जेड) "रणनीतिक क्षेत्र" में ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र शामिल होंगे जैसे तेल, गैस, कोयला, खनिज अयस्क, पनडुब्बी केबल प्रणाली और स्टार्ट-अप और कोई भी अन्य क्षेत्र या उप-क्षेत्र जिसे कि केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक समझा जाए;
(जेडए) "स्वेद इक्विटी शेयर" का अर्थ है ऐसे इक्विटी शेयर जो किसी पारदेशीय संस्था द्वारा अपने निदेशकों या कर्मचारियों को छूट पर या नकद के अलावा अन्य प्रतिफल के रूप में, उनके द्वारा तकनीकी जानकारी प्रदान किए जाने के बदले या बौद्धिक संपदा अधिकार उपलब्ध करवाने या गुणात्मक वृद्धि करने, चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाए, के बदले जारी किए जाते हैं;
(जेडबी) "न्यास" का अर्थ भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) के तहत पंजीकृत न्यास है;
(जेडसी) "जोखिम पूँजी निधि" का अर्थ सेबी में इसी रूप में पंजीकृत एक निधि है।
(2) इन नियमों में प्रयुक्त लेकिन परिभाषित नहीं किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे जो उन्हें अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों में दिए गए हैं।
3. इन नियमों का क्रियान्वयन.—(1) इन नियमों का क्रियान्वयन रिज़र्व बैंक द्वारा किया जाएगा।
(2) रिज़र्व बैंक ऐसे निदेश, परिपत्र, अनुदेश और स्पष्टीकरण जारी कर सकता है जो वह इन नियमों के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे।
4. कुछ मामलों में इन नियमों और उनसे संबंधित विनियमों का लागू न होना.—निम्नलिखित पर इन नियमों या विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 में से कुछ भी लागू नहीं होगा—
(ए) किसी आईएफएससी में स्थित वित्तीय संस्थान द्वारा भारत के बाहर किया गया कोई निवेश;
(बी) भारत के बाहर किए गए निम्नलिखित में से किसी भी निवेश का अधिग्रहण या अंतरण—
(i) निवासी विदेशी मुद्रा खाते में से; या
(ii) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर रखे गए विदेशी मुद्रा संसाधनों में से, जो भारत में किसी विशिष्ट अवधि के लिए नियोजित है, चाहे वह अवधि कुछ भी हो या किसी विशिष्ट नौकरी या कार्यभार के लिए जिसकी अवधि तीन वर्ष से अधिक न हो; या
(iii) अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (4) के अनुसार।
स्पष्टीकरण.—इस नियम के प्रयोजनों से, "वित्तीय संस्था" पद का वही अर्थ होगा जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) में इसके लिए निर्दिष्ट है।
5. ऋण लिखत और गैर-ऋण लिखत.—अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (7) के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित ऋण लिखत और गैर-ऋण लिखत निम्नलिखित होंगे, अर्थात्:—
(ए) ऋण लिखत:
(i) सरकारी बंध पत्र;
(ii) कॉरपोरेट बंध पत्र;
(iii) प्रतिभूकरण संरचना के सभी अंश जो इक्विटी अंश नहीं हैं;
(iv) फर्मों द्वारा ऋणों के माध्यम से लिए गए उधार; तथा
(v) निक्षेपागार प्राप्तियाँ जिनकी अंतर्निहित प्रतिभूतियां ऋण प्रतिभूतियां हैं;
(बी) गैर-ऋण लिखत:
(i) निगमित संस्थाओं (सरकारी, निजी, सूचीबद्ध और असूचीबद्ध) के इक्विटी में सभी निवेश;
(ii) सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) में पूंजीगत भागीदारी;
(iii) समय-समय पर यथा अधिसूचित विदेशी निवेश नीति में यथा मान्यताप्राप्त निवेश की सभी लिखतें;
(iv) वैकल्पिक निवेश निधि (एआईएफ) और भू-संपदा निवेश न्यास (आरईआईटी) और अवसंरचना निवेश न्यास (आईएनवीआईटी) की यूनिटों में निवेश;
(v) म्यूचुअल फंडों और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) जो इक्विटी में 50 प्रतिशत से अधिक निवेश करती है, की यूनिटों में निवेश;
(vi) प्रतिभूतीकरण संरचना का न्यूनतम स्तर (अर्थात इक्विटी अंश);
(vii) स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण, विक्रय या प्रत्यक्षत: व्यवहार;
(viii) न्यासों को अभिदाय; तथा
(ix) इक्विटी लिखतों के प्रति जारी की गयी निक्षेपागार रसीदें;
6. कुछ निवेशों की निरंतरता.—भारत के बाहर किसी भी निवेश या वित्तीय प्रतिबद्धता जिसे इस अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों के अनुसार किया गया है और जो आधिकारिक राजपत्र में इन नियमों के प्रकाशन की तारीख को धारित हों, उन्हें इन नियमों और विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 के तहत किया गया माना जाएगा।
7. राइट्स इश्यू और बोनस शेयर.—(1) भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति जिसने अधिनियम के प्रावधानों या उसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों के अनुसार किसी विदेशी संस्था की इक्विटी पूंजी हासिल की है और अभी भी धारित कर रहा है—
(ए) ऐसी संस्था द्वारा जारी इक्विटी पूंजी में राइट्स इश्यू के रूप में निवेश कर सकता है; या
(बी) उसे इन नियमों के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन बोनस शेयर दिए जा सकते हैं।
(2) भारत में निवासी ऐसा व्यक्ति जो उपर्युक्त उप-नियम (1) के तहत राइट्स अर्जित करता है, वह भारत में निवासी किसी व्यक्ति या भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति के पक्ष में ऐसे अधिकारों का त्याग कर सकता है।
8. भारत के बाहर निवेश पर निषेध.—अधिनियम या इन नियमों अथवा अधिनियम के तहत बनाई गयी विनियमावली या जारी किए गए निदेशों में अन्यथा किए गए उपबंधों को छोड़कर, भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति भारत के बाहर कोई निवेश या वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं करेगा या उसको अंतरित नहीं करेगा।
9. पारदेशीय निवेश.—(1) इन नियमों में या विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 में किए गए प्रावधानों को छोड़कर, भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किया गया कोई भी निवेश ऐसी विदेशी संस्था, जो वास्तविक व्यावसायिक क्रियाकलाप में संलग्न हो, में किया जाएगा जो इन नियमों और उक्त विनियमावली में निर्धारित सीमाओं और शर्तों के अधीन, सीधे या उप अनुषंगी के माध्यम से अथवा विशेष प्रयोजन माध्यमों से किया जाएगा:
बशर्ते उस विदेशी संस्था की ऐसी अनुषंगी या उप-अनुषंगी की संरचना विदेशी संस्था के लिए विहित संरचनात्मक अपेक्षाओं का पालन करती हो:
बशर्ते यह भी कि पाकिस्तान अथवा किसी भी अन्य क्षेत्राधिकार, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर सूचित किया जाए, में गठित, पंजीकृत या निगमित किसी विदेशी संस्था में पारदेशीय निवेश और उसके अंतरण के लिए केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
स्पष्टीकरण—इस उप-नियम के प्रयोजनों से, "वास्तविक व्यावसायिक कार्यकलाप" का अर्थ भारत और मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, में लागू किसी भी कानून के तहत अनुमत कोई भी व्यावसायिक कार्यकलाप होगा:
(2) इन नियमों या विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर, इन नियमों में निर्धारित सीमा से अधिक वित्तीय प्रतिबद्धता की अनुमति रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों या भौगोलिक प्रदेशों के लिए उन शर्तों के अधीन दे सकती है जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(ii) रिज़र्व बैंक, नामित प्राधिकृत व्यापारी बैंक के माध्यम से आवेदन किए जाने पर, पर्याप्त कारणों से भारत में निवासी व्यक्ति को भारत के बाहर किसी भी प्रकार का निवेश या वित्तीय प्रतिबद्धता करने या उन्हें अंतरित करने की अनुमति ऐसी शर्तों के अधीन दे सकता है, जो रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित की गयी हों:
बशर्ते भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा पारदेशीय निवेश ऐसे किसी देश या अधिकार क्षेत्र में स्थित किसी विदेशी संस्था में नहीं किया जाएगा जिसका निर्णय केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर लिया जाए।
(3) रिज़र्व बैंक, यदि वह आवश्यक समझे, केंद्र सरकार से परामर्श करते हुए—
(i) वित्तीय प्रतिबद्धता के कारण या विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के रूप में वित्तीय वर्ष के दौरान कुल बहिर्वाह की सीमा निर्धारित कर सकता है;
(ii) भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा किसी एक वित्तीय वर्ष में दी जाने वाली वित्तीय प्रतिबद्धता की उस सीमा का निर्धारण कर सकता है जिससे अधिक राशि होने पर उसकी पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा।
10. अनापत्ति प्रमाण पत्र.—
(1) भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति, जो,—
(i) एक ऐसे खाते का धारक है, जो अनर्जक आस्ति के रूप में दिख रहा है; या
(ii) किसी बैंक द्वारा इरादतन चूककर्ता के रूप में उसे वर्गीकृत किया गया है; या
(iii) भारत में किसी वित्तीय सेवा विनियामक या जांच एजेंसी, यथा, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या प्रवर्तन निदेशालय या गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय द्वारा जांच के अधीन है,
उसे इन नियमों या विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 के तहत कोई वित्तीय प्रतिबद्धता या विनिवेश करने से पहले, ऐसे ऋणदाता बैंक या विनियामक निकाय या संबंधित जांच एजेंसी को लिखित रूप में आवेदन करके ऐसे ऋणदाता बैंक या विनियामक निकाय या जांच एजेंसी से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।
बशर्ते जहां संबंधित ऋणदाता बैंक या नियामक निकाय या संबंधित जांच एजेंसी ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों के भीतर प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो यह माना जाएगा कि प्रस्तावित लेनदेन पर उसे कोई आपत्ति नहीं थी।
(2) उप-नियम (1) के तहत जारी किया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र संबंधित ऋणदाता बैंक या विनियामक निकाय या जांच एजेंसी द्वारा नामित एडी बैंक को संबोधित किया जाएगा और इसका पृष्ठांकन आवेदक को भेजा जाएगा।
11. भारतीय संस्था द्वारा पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश करने का तरीका.—भारतीय संस्था अनुसूची-I में बताए गए तरीके से निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश कर सकती है।
12. भारतीय संस्था द्वारा पारदेशीय पोर्टफोलियो निवेश करने का तरीका.—भारतीय संस्था अनुसूची-II में बताए गए तरीके से निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन पारदेशीय पोर्टफोलियो निवेश कर सकती है।
13. निवासी व्यष्टि द्वारा पारदेशीय निवेश करने का तरीका.—निवासी व्यष्टि अनुसूची-III में बताए गए तरीके से निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन पारदेशीय निवेश कर सकता है।
14. भारतीय संस्था और निवासी व्यष्टि से भिन्न भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा पारदेशीय निवेश.—भारतीय संस्था और निवासी व्यष्टि से भिन्न भारत में निवासी व्यक्ति, अनुसूची-IV में बताए गए तरीके से निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन पारदेशीय निवेश कर सकता है।
15. भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा आईएफएससी में पारदेशीय निवेश.—भारत में निवासी व्यक्ति अनुसूची-V में बताए गए तरीके से निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन भारत में स्थित आईएफएससी में पारदेशीय निवेश कर सकता है।
16. मूल्य निर्धारण दिशानिर्देश.— (1) जब तक इन नियमों में अन्यथा प्रावधान नहीं किया जाता है, किसी विदेशी संस्था की इक्विटी पूंजी का निर्गम या अंतरण भारत के बाहर निवासी व्यक्ति या भारत में निवासी व्यक्ति से भारत में निवासी व्यक्ति को, जो इसके लिए पात्र है, या भारत के निवासी व्यक्ति से भारत के बाहर निवासी व्यक्ति को, स्वतंत्र संव्यवहार के आधार पर निर्धारित कीमत के अधीन होगा।
(2) एडी बैंक, उप-नियम (1) के तहत लेनदेन की सुविधा प्रदान करने से पहले, मूल्यांकन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत किसी मूल्य निर्धारण पद्धति का अनुसरण करते हुए स्वतंत्र संव्यवहार आधारित मूल्य निर्धारण का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
17. अंतरण या नकदीकरण.— (1) जब तक इन नियमों में अन्यथा प्रावधान नहीं किया जाता है, इन नियमों के अनुसार इक्विटी पूंजी रखने वाला भारत में निवासी व्यक्ति ऐसे निवेश का अंतरण इन नियमों और विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 में बताए गए तरीके से सीमाओं का पालन करते हुए और ऐसे निवेश या विनिवेश की शर्तों, मूल्यनिर्धारण दिशानिर्देशों अथवा दस्तावेजीकरण एवं रिपोर्टिंग अपेक्षाओं के अधीन कर सकता है।
(2) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत में निवासी किसी व्यक्ति, जो इन नियमों के तहत इस तरह के निवेश करने के लिए पात्र है, को या भारत के बाहर निवासी व्यक्ति को बिक्री के माध्यम से इक्विटी पूंजी अंतरित कर सकता है।
(3) यदि उक्त अंतरण विलय, समामेलन या विलगाव के कारण हो रहा हो या विदेशी प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद के कारण, तो ऐसे अंतरण या उक्त विदेशी संस्था के परिसमापन के मामले में परिसमापन के लिए भारत में लागू कानूनों या मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, के कानूनों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लेना होगा।
(4) जहां भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा विनिवेश पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित हो—
(i) अंतरणकर्ता को, परिसमापन से भिन्न किसी माध्यम से किए गए पूर्ण विनिवेश के मामले में, ऐसी कोई देय राशि प्राप्ति के लिए शेष नहीं रहेगी जिसे ऐसा अंतरणकर्ता इक्विटी पूंजी और ऋण में निवेशक होने के नाते विदेशी संस्था से प्राप्त करने का हकदार है;
(ii) अंतरणकर्ता को, किसी भी विनिवेश के मामले में, ओडीआई करने की तारीख से कम से कम एक वर्ष तक निवेश बनाए रखना होगा:
बशर्ते उपयुर्क्त शर्तें ऐसी दो या दो से अधिक विदेशी संस्थाओं के बीच विलय, विलगाव या समामेलन के मामले में लागू नहीं होंगी, जिनका पूर्ण स्वामित्व प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उक्त भारतीय संस्था के पास हो अथवा जहां विलय की गयी या विलगाव की गयी या समामेलित संस्था में उक्त भारतीय संस्था की कुल इक्विटी होल्डिंग में कोई परिवर्तन या कमी नहीं आयी है।
(5) किसी निवेश को धारित करने या किसी भी प्रकार से उसके अंतरण की अनुमति नहीं होगी यदि संबंधित आरंभिक निवेश की अनुमति अधिनियम के अधीन न दी गई हो।
18. पुनर्गठन.—भारत में निवासी कोई व्यक्ति जिसने किसी विदेशी संस्था में ओडीआई किया है, उस विदेशी संस्था को तुलन-पत्र के पुनर्गठन की अनुमति दे सकता है, जो पिछले लेखा परीक्षित तुलन-पत्रों के अनुसार पिछले दो वर्षों से घाटे में चल रही है, बशर्ते रिपोर्टिंग, प्रलेखीकरण अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित किया गया हो, और बशर्ते ऐसे पुनर्गठन के बाद, भारत में निवासी ऐसे व्यक्ति को इक्विटी और ऋण के रूप में किए गए निवेश के संबंध में कुल बकाया देय राशि में होने वाला ह्रास संचित हानि की आनुपातिक राशि से अधिक न हो।
बशर्ते ऐसे ह्रास के मामले में जहां तत्संबंधी मूल निवेश की राशि 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है या ऐसे मामले में जहां ऐसे ह्रास की राशि भारतीय संस्था या निवेशक को देय कुल बकाया राशि के कुल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक है, उक्त मूल्यह्रास का स्वतंत्र संव्यवहार करते हुए विधिवत सत्यापन कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के अनुसार किसी पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता, अथवा तत्संबंधी मूल्यांकनकर्ता जिसका पंजीकरण विनियामकीय प्राधिकारी के साथ हो अथवा मेजबान क्षेत्राधिकार के किसी प्रमाणित सरकारी लेखाकार द्वारा किया जाएगा:
बशर्ते यह भी कि उक्त प्रमाण-पत्र, जिसकी तारीख लेनदेन की तारीख से छह महीने से अधिक पहले की न हो, नामित प्राधिकृत व्यापारी बैंक को प्रस्तुत किया जाएगा।
19. प्रतिबंध और निषेध.— (1) जब तक अधिनियम या इन नियमों में अन्यथा प्रावधान नहीं किया जाता है, भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति किसी विदेशी संस्था में पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश नहीं करेगा जो निम्नलिखित क्रियाकलाप से संबंधित हो—
(ए) स्थावर संपत्ति क्रियाकलाप;
(बी) किसी भी प्रकार का जुआ; और
(सी) रिज़र्व बैंक के विशिष्ट अनुमोदन के बिना भारतीय रुपये से जुड़े वित्तीय उत्पादों का कारोबार।
स्पष्टीकरण: इस उप-नियम के प्रयोजनों से, अभिव्यक्ति "स्थावर संपत्ति क्रियाकलाप" का अर्थ स्थावर संपत्ति की खरीद और बिक्री या हस्तांतरणीय विकास अधिकारों में व्यापार है, लेकिन इसमें बेचने या पट्टे पर देने के उद्देश्य से विकसित की जाने वाली टाउनशिप, आवासीय या वाणिज्यिक परिसरों, सड़कों या पुलों का निर्माण शामिल नहीं है।
(2) मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, के कानूनों के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप में किया जाने वाला कोई भी ओडीआई, किसी भारतीय संस्था द्वारा आंतरिक उपचित राशि में से किया जाएगा चाहे वह उक्त भारतीय संस्था से अथवा भारत में स्थित उस समूह अथवा सहयोगी कंपनियों से आयी हो और, निवासी व्यष्टियों के मामले में ऐसे व्यष्टि के स्वयं के धन से हो।
(3) भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी ऐसी विदेशी संस्था में वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं करेगा जिसने ऐसी वित्तीय प्रतिबद्धता करते समय या उसके बाद किसी भी समय, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, भारत में निवेश किया हुआ है या निवेश करता है, जिसके परिणामस्वरूप अनुषंगियों के दो से अधिक स्तरों की संरचना होती है:
बशर्ते ऐसा प्रतिबंध कंपनी (स्तरों की संख्या पर निर्बंधन) नियम, 2017, समय-समय पर यथासंशोधित, के नियम 2 के उप-नियम (2) में उल्लिखित कंपनियों के निम्नलिखित वर्गों पर लागू नहीं होगा, यथा:—
(ए) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में यथापरिभाषित बैंककारी कंपनी;
(बी) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45-I के खंड (एफ) में यथापरिभाषित ऐसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी, जो रिज़र्व बैंक के साथ पंजीकृत है और जिसे रिज़र्व बैंक प्रणालीगत महत्व की गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनी मानता है;
(सी) कोई बीमा कंपनी जो एक कंपनी होने के कारण बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) और बीमा विनियामक विकास और प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) के प्रावधानों के अनुसार बीमा कारोबार करती है; तथा
(डी) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (45) में निर्दिष्ट कोई सरकारी कंपनी।
20. रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट की जाने वाली अपेक्षाएँ.—भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किसी भी निवेश के लिए भुगतान का तरीका, प्रतिफल का आस्थगित भुगतान, रिपोर्टिंग, वसूली और अन्य अपेक्षाएँ रिज़र्व बैंक द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत इस संबंध में बनाए गए विनियमों के अनुसार होंगी।
21. भारत के बाहर स्थावर संपत्ति के अर्जन या हस्तांतरण पर प्रतिबंध.— (1) अधिनियम या इस नियम में अन्यथा उपबंधित को छोड़कर, भारत में निवासी कोई भी व्यक्ति रिज़र्व बैंक की सामान्य या विशेष अनुमति के बिना भारत के बाहर स्थित किसी भी स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण या हस्तांतरण नहीं करेगा:
बशर्ते इस नियम में निहित कुछ भी किसी ऐसी संपत्ति पर लागू नहीं होगा जो—
(i) भारत में निवासी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित है जो किसी अन्य देश का नागरिक है;
(ii) भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा 8 जुलाई 1947 को या उससे पहले अधिगृहीत की गयी हो और रिज़र्व बैंक की अनुमति से ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित की जाती रही हो;
(iii) भारत के निवासी व्यक्ति द्वारा पांच वर्ष से अधिक के पट्टे पर अधिगृहीत नहीं की गयी है।
(2) उप-नियम (1) में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) भारत में निवासी कोई व्यक्ति विरासत या उपहार के रूप में या खरीद के माध्यम से भारत के बाहर स्थित स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण भारत में निवासी किसी ऐसे व्यक्ति से कर सकता है जिसने वह संपत्ति अधिग्रहण के समय यथालागू विदेशी मुद्रा प्रावधानों के अनुसार अधिगृहीत की हो;
(ii) भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति से भारत के बाहर स्थावर संपत्ति निम्नानुसार अधिगृहीत कर सकता है—
(ए) विरासत के माध्यम से;
(बी) आरएफसी खाते में धारित विदेशी मुद्रा द्वारा खरीद के माध्यम से;
(सी) रिज़र्व बैंक द्वारा लागू की गयी उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत भेजे गए प्रेषणों द्वारा खरीद के माध्यम से:
बशर्ते उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत ऐसे प्रेषण रिश्तेदारों के संबंध में समेकित किए जा सकते हैं, यदि ऐसे रिश्तेदार, जो भारत में निवासी व्यक्ति हैं, इस योजना की शर्तों का पालन करते हों;
(डी) किसी रिश्तेदार, जो भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति है, के साथ संयुक्त रूप से;
(ई) ओडीआई को छोड़कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत विदेशों में अर्जित परिसंपत्तियों से हुई आय या उनके बिक्री आगम में से;
(iii) समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों के अनुसार कोई भारतीय संस्था, जिसका कार्यालय विदेश में है, वह व्यवसाय और अपने कर्मचारियों के आवासीय उद्देश्यों के लिए भारत के बाहर स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण कर सकती है;
(iv) भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति, जिसने भारत के बाहर कोई स्थावर संपत्ति का अधिग्रहण किया है और ऐसा अधिग्रहण तत्समय यथालागू विदेशी मुद्रा प्रावधानों के अनुसार किया गया है, तो वह—
(ए) भारत में निवासी किसी व्यक्ति को उपहार के रूप में ऐसी संपत्ति हस्तांतरित कर सकता है, जो इन नियमों के तहत ऐसी सम्पत्ति के अधिग्रहण हेतु पात्र हो, या बिक्री के माध्यम से;
(बी) इस अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमों या विनियमों या समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों के तहत इस तरह की संपत्ति पर प्रभार सृजित कर सकता है।
(3) स्थावर संपत्ति में किसी भी निवेश को रखने या किसी भी तरीके से उसके हस्तांतरण की अनुमति नहीं होगी यदि स्थावर संपत्ति में किए गए संबंधित आरंभिक निवेश की अनुमति अधिनियम के तहत न दी गयी हो।
अनुसूची-I
[नियम 11 देखें]
भारतीय संस्था द्वारा पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश करने का तरीका
1. ओडीआई करने का तरीका (1) कोई भारतीय संस्था इस अनुसूची में उल्लिखित सीमाओं और शर्तों के अधीन वास्तविक व्यावसायिक क्रियाकलाप करने के उद्देश्य से इक्विटी पूंजी में निवेश के माध्यम से ओडीआई कर सकती है।
(2) ओडीआई करने या उसे धारित करने के निम्नलिखित माध्यम हो सकते हैं,—
(i) संस्था के बहिर्नियमों का एक हिस्सा बनने की सहमति व्यक्त करना अथवा सूचीबद्ध या असूचीबद्ध इक्विटी पूंजी की खरीद;
(ii) बोली या निविदा प्रक्रिया के माध्यम से अधिग्रहण;
(iii) राइट्स इश्यू या बोनस शेयरों के आवंटन के माध्यम से इक्विटी पूंजी का अधिग्रहण;
(iv) विदेशी संस्था द्वारा भारतीय संस्था को देय किसी भी राशि का पूँजीकरण, निर्दिष्ट समयावधि के भीतर, जिसकी वसूली अधिनियम के तहत निर्दिष्ट हो, जिसका प्रेषण अधिनियम के तहत अनुमत है या जिसके लिए अधिनियम के तहत या उसके अंतर्गत बनाए गए किसी भी नियम या विनियम या जारी किए गए निदेशों के अनुसार केंद्र सरकार या रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति लेना अपेक्षित नहीं है;
(v) प्रतिभूतियों की अदला-बदली;
(vi) भारत में लागू कानूनों या मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, के कानूनों के अनुसार विलय, विलगाव, समामेलन या व्यवस्था की कोई योजना।
2. वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में ओडीआई (1) भारत में वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न कोई भारतीय संस्था किसी ऐसी विदेशी संस्था में निम्नलिखित शर्तों के अधीन ओडीआई कर सकती है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न है, यथा:—
(i) उस भारतीय संस्था ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान शुद्ध लाभ अर्जित किया है;
(ii) वह भारतीय संस्था भारत के किसी वित्तीय सेवा विनियामक के साथ पंजीकृत है या उसके द्वारा विनियमित है;
(iii) उस भारतीय संस्था ने ऐसी वित्तीय सेवाओं में संलग्न होने के लिए भारत और मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, दोनों में ऐसी वित्तीय सेवा क्रियाकलाप के विनियामकों से अनुमोदन प्राप्त किया है जैसा कि अपेक्षित हो:
(2) कोई भारतीय संस्था जो भारत में वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न नहीं है, किसी विदेशी संस्था, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बैंकिंग या बीमा को छोड़कर वित्तीय सेवाओं क्रियाकलाप में संलग्न है, में ओडीआई कर सकती है, बशर्ते ऐसी भारतीय संस्था ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान शुद्ध लाभ अर्जित किया है:
प्रावधान किया जाता है कि कोई भारतीय संस्था जो बीमा क्षेत्र के क्रियाकलाप में संलग्न नहीं है, वह साधारण और स्वास्थ्य बीमा में, जहां ऐसा बीमा व्यवसाय इस भारतीय संस्था द्वारा विदेशों में की जा रही मुख्य क्रियाकलाप में सहायक हो, ओडीआई कर सकती है।
(3) यदि कोई भारतीय संस्था 2020-2021 से 2021-2022 की अवधि के दौरान कोविड-19 के प्रभाव के कारण इस पैराग्राफ के उप पैराग्राफ (1) और (2) के तहत उल्लिखित शुद्ध लाभ की अपेक्षा को पूरा नहीं करती है, तो तीन वर्ष की लाभप्रदता की गणना के उद्देश्य से उक्त अवधि के वित्तीय परिणामों पर विचार नहीं किया जाएगा:
प्रावधान किया जाता है कि रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से इस अवधि को इस प्रकार बढ़ाया जा सकता है, जैसा वह आवश्यक समझे:
(4) इस पैराग्राफ में किसी बात के होते हुए भी, रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों द्वारा पारदेशीय निवेश इस संबंध में लागू कानूनों के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन होगा।
3. वित्तीय प्रतिबद्धता की सीमा.—(1) किसी भारतीय संस्था द्वारा ऐसी प्रतिबद्धता करने के समय उसके द्वारा सभी विदेशी संस्थाओं में की गई कुल वित्तीय प्रतिबद्धता की राशि उसके अंतिम लेखापरीक्षित तुलनपत्र की तारीख के अनुसार उसकी निवल मलियत के 400 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए या जैसा कि रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से समय-समय पर निर्दिष्ट किया जाए।
(2) उप-पैराग्राफ (1) में निर्दिष्ट कुल वित्तीय प्रतिबद्धता में ऐसी सीमा की गणना के लिए प्रतिधारित आय के पूंजीकरण को शामिल नहीं किया जाएगा लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल होगा—
(i) अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदें या ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीदें जारी करके और ऐसी रसीदों के स्टॉक-स्वैप द्वारा जुटाई गई राशि का उपयोग; तथा
(ii) बाह्य वाणिज्यिक उधारियों से प्राप्त राशि का उस सीमा तक उपयोग जहाँ तक इस तरह की उधारियाँ जुटाने के संबंध में रखी गयी गिरवी अथवा परिसंपत्तियों पर सृजित प्रभार की गणना उपर्युक्त सीमा के लिए पहले ही न कर ली गयी हो:
बशर्ते महारत्न या नवरत्न या मिनीरत्न या ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की अनुषंगियों द्वारा भारत के बाहर रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी विदेशी संस्थाओं में की गई वित्तीय प्रतिबद्धता इस पैराग्राफ के तहत निर्धारित सीमाओं के अधीन नहीं होगी।
स्पष्टीकरण—इस अनुसूची के प्रयोजनों से, किसी विदेशी संस्था को वित्तीय सेवा क्रियाकलाप के व्यवसाय में संलग्न माना जाएगा यदि वह ऐसी क्रियाकलाप करती है जिसे यदि भारत में किसी संस्था द्वारा किया जाता है, तो उसके लिए यह अपेक्षित होता है कि वह भारत में वित्तीय क्षेत्र के विनियामक के साथ पंजीकृत या विनियमित हो।
अनुसूची-II
[नियम 12 देखें]
किसी भारतीय संस्था द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश करने का तरीका
1. भारतीय संस्था द्वारा ओपीआई—(1) कोई भारतीय संस्था इस अनुसूची में बताए गए तरीके से और निर्धारित शर्तों के अधीन ओपीआई कर सकती है जिसकी राशि उसके अंतिम लेखापरीक्षित तुलनपत्र की तारीख के अनुसार उसकी निवल मलियत के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(2) कोई सूचीबद्ध भारतीय कंपनी ओपीआई, जिसमें पुनर्निवेश का माध्यम भी शामिल है, कर सकती है।
(3) कोई असूचीबद्ध भारतीय संस्था केवल अनुसूची I के पैराग्राफ 1 के उप-पैरा (2) के खंडों (iii), (iv), (v) और (vi) के तहत ओपीआई कर सकती है।
अनुसूची-III
[नियम 13 देखें]
निवासी व्यष्टि द्वारा पारदेशीय निवेश करने का तरीका
1. ओआई बनाने का तरीका.— (1) कोई भी निवासी व्यष्टि इस अनुसूची में बताए गए तरीके से इक्विटी पूंजी में निवेश के माध्यम से ओडीआई, अथवा ओपीआई कर सकता है और जब तक इसके अंतर्गत अन्यथा प्रावधान न किया जाए, यह रिज़र्व बैंक की उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत निर्धारित समग्र सीमा के अधीन होगा।
(2) कोई निवासी व्यष्टि निम्नलिखित के माध्यम से पारदेशीय निवेश कर सकता है या बनाए रख सकता है—
(i) किसी परिचालनरत विदेशी संस्था में ओडीआई, जो वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न नहीं है, और जिसकी कोई अनुषंगी या उप-अनुषंगी नहीं है, जहाँ निवासी व्यष्टि का नियंत्रण उस विदेशी संस्था में हो।
(ii) ओपीआई जिसमें पुनर्निवेश का माध्यम शामिल है;
(iii) निम्नलिखित के माध्यम से ओडीआई या ओपीआई, जैसा भी मामला हो—
(ए) विदेशी संस्था द्वारा, निर्दिष्ट समयावधि के भीतर भारतीय संस्था को देय किसी भी राशि का पूँजीकरण, जिसकी वसूली अधिनियम के तहत निर्दिष्ट हो, जिसका प्रेषण अधिनियम के तहत अनुमत है या जिसके लिए केंद्र सरकार या रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति लेना अपेक्षित नहीं है;
(बी) विलय, विलगाव, समामेलन या परिसमापन के परिणामस्वरूप प्रतिभूतियों की अदला-बदली;
(सी) राइट्स इश्यू या बोनस शेयरों के आवंटन के माध्यम से इक्विटी पूंजी का अधिग्रहण;
(डी) इस अनुसूची के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार उपहार;
(ई) विरासत;
(एफ) स्वेद इक्विटी शेयरों का अधिग्रहण;
(जी) किसी विदेशी संस्था में कोई प्रबंधन पद धारण करने के लिए जारी किए गए न्यूनतम अर्हता शेयरों का अधिग्रहण;
(एच) कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना या कर्मचारी लाभ योजना के तहत शेयरों या हित का अधिग्रहण:
प्रावधान किया जाता है कि खंड (ई), (एफ), (जी) और (एच) के संबंध में किसी विदेशी संस्था में ओडीआई किया जा सकता है, चाहे ऐसी विदेशी संस्था वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में लगी हो या नहीं या उसकी ऐसी अनुषंगी या उप अनुषंगी है, जहां निवासी व्यष्टि का विदेशी संस्था में नियंत्रण है;
यह प्रावधान भी किया जाता है कि खंड (एफ), (जी) और (एच) के तहत किसी विदेशी संस्था में नियंत्रण के बिना, उसकी इक्विटी पूंजी के दस प्रतिशत से कम का अधिग्रहण, चाहे वह सूचीबद्ध हो या असूचीबद्ध, ओपीआई माना जाएगा।
स्पष्टीकरण—इस अनुसूची के प्रयोजनों से, किसी विदेशी संस्था को वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न माना जाएगा यदि वह ऐसे क्रियाकलाप करती है, जिसे यदि भारत में किसी संस्था द्वारा किया जाता है, तो उसके लिए यह अपेक्षित होता है कि वह भारत में वित्तीय क्षेत्र के विनियामक के साथ पंजीकृत या विनियमित हो।
2. उपहार या विरासत के रूप में अधिग्रहण.—(1) कोई निवासी व्यष्टि बिना किसी सीमा के, भारत में निवासी व्यष्टि, जो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसी प्रतिभूतियाँ धारित करता हो, उससे या भारत के बाहर निवासी व्यक्ति से विरासत के रूप में विदेशी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण कर सकता है।
(2) कोई निवासी व्यष्टि बिना किसी सीमा के, भारत में निवासी किसी ऐसे व्यष्टि से उपहार के रूप में विदेशी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण कर सकता है, जो रिश्तेदार हो और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसी प्रतिभूतियाँ धारित करता हो।
(3) कोई निवासी व्यक्ति विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (2010 का 42) के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार भारत के बाहर निवासी व्यष्टि से उपहार के रूप में विदेशी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण कर सकता है।
3. कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना या कर्मचारी लाभ योजना के तहत या स्वेद इक्विटी शेयरों के रूप में शेयरों या हित का अधिग्रहण.— (1) कोई निवासी व्यष्टि, जो भारत में किसी कार्यालय या किसी विदेशी संस्था की शाखा या किसी पारदेशीय संस्था की भारत में स्थित अनुषंगी अथवा किसी ऐसी भारतीय संस्था जिसमें विदेशी संस्था की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष इक्विटी होल्डिंग है, की शाखा का कर्मचारी या निदेशक है, वह ऐसी पारदेशीय संस्था द्वारा कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना या कर्मचारी लाभ योजना के तहत दिए गए शेयरों या हित का अधिग्रहण, बिना किसी सीमा के, कर सकता है बशर्ते उक्त पारदेशीय संस्था द्वारा कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना या कर्मचारी लाभ योजना के अंतर्गत किए गए इन निर्गमों को वैश्विक रूप से एकसमान रूप से जारी किया गया हो।
स्पष्टीकरण – इस पैराग्राफ के प्रयोजनों से, अभिव्यक्ति,—
(i) "अप्रत्यक्ष इक्विटी होल्डिंग" का अर्थ है किसी विशिष्ट प्रयोजन माध्यम या उप अनुषंगी के माध्यम से किया गया अप्रत्यक्ष विदेशी इक्विटी होल्डिंग;
(ii) "कर्मचारी लाभ योजना" का अर्थ है किसी संस्था के निदेशकों या कर्मचारियों को दिया गया कोई मुआवजा या प्रोत्साहन जो कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना या ऐसी ही अन्य किसी योजना के माध्यम से ऐसे निदेशकों अथवा कर्मचारियों को स्वामित्व हित प्रदान करती है।
(2) इन नियमों में किसी भी बात के होते हुए भी, कोई निवासी व्यष्टि केंद्र सरकार की किसी भी योजना के तहत कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजनाओं का अधिग्रहण कर सकता है।
अनुसूची-IV
[नियम 14 देखें]
भारतीय संस्था और निवासी व्यष्टि के अलावा भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा पारदेशीय निवेश
1. पंजीकृत न्यास या सोसाइटी द्वारा ओडीआई.—कोई भी व्यक्ति जो पंजीकृत न्यास या पंजीकृत सोसाइटी है जो भारत में शैक्षिक क्षेत्र में संलग्न है या जिसने अस्पताल स्थापित किए हैं, रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन के साथ किसी विदेशी संस्था में निम्नलिखित शर्तों के अधीन ओडीआई कर सकता है, यथा:—
(i) विदेशी संस्था उसी क्षेत्र में संलग्न हो, जिसमें भारतीय न्यास या सोसाइटी संलग्न है;
(ii) यह न्यास या सोसाइटी, जैसा भी मामला हो, जिस वर्ष में निवेश किया जा रहा है उससे न्यूनतम तीन वित्तीय वर्ष पहले से अस्तित्व में होनी चाहिए;
(iii) न्यास के मामले में न्यास विलेख, और सोसाइटी के मामले में संस्थापन प्रलेख या नियम या उपनियम प्रस्तावित ओडीआई की अनुमति देते हों;
(iv) इस तरह के निवेश को न्यास के मामले में न्यासियों और सोसाइटी के मामले में अधिशासी निकाय या परिषद या प्रबंध या कार्यकारी समिति का अनुमोदन प्राप्त हो;
(v) यदि न्यास या सोसाइटी को गृह मंत्रालय, केंद्र सरकार या संबंधित स्थानीय प्राधिकरण, जैसा भी मामला हो, से विशेष लाइसेंस या अनुमति लेनी अपेक्षित है, तो विशेष लाइसेंस या अनुमति प्राप्त कर ली गई है और उसे नामित एडी बैंक को प्रस्तुत किया गया है।
2. म्यूचुअल फंड या जोखिम पूंजी निधियों या वैकल्पिक निवेश निधियों द्वारा ओआई:—(1) कोई म्यूचुअल फंड या जोखिम पूंजी निधि या वैकल्पिक निवेश निधि, इन नियमों के प्रावधानों के अनुसार सेबी द्वारा समय-समय पर निर्धारित विदेशी प्रतिभूतियों का अर्जन या अंतरण भारतीय रिज़र्व बैंक तथा सेबी द्वारा अनुमेय क़ानूनों के तहत समय-समय पर निर्धारित अन्य निबंधनों और शर्तों के अनुसार कर सकता है।
प्रावधान किया जाता है कि ऐसे निवेश की समग्र सीमा रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार के परामर्श से तय की जाएगी:
प्रावधान किया जाता है कि ऐसे निवेशों के लिए उपयुर्क्त फंडों एवं निधियों की अलग-अलग सीमाएं सेबी द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अनुदेशों के अनुसार होंगी।
(2) उप-पैरा (1) में निर्दिष्ट निधियों द्वारा विदेशी प्रतिभूति की खरीद और बिक्री से संबंधित प्रत्येक लेनदेन भारत में नामित प्राधिकृत एडी बैंक के माध्यम से किया जाएगा:
(3) इन नियमों में किसी भी बात के होते हुए भी, इन नियमों के तहत म्यूचुअल फंड, जोखिम पूंजी निधि और वैकल्पिक निवेश निधि द्वारा किए गए किसी भी निवेश को ओपीआई माना जाएगा।
स्पष्टीकरण.—इस पैराग्राफ के प्रयोजनों से, "वैकल्पिक निवेश निधि" का अर्थ सेबी में इस रूप में पंजीकृत कोई भी निधि है।
3. स्टॉक एक्सचेंजों के क्लीयरिंग कार्पोरेशन और समाशोधन सदस्यों द्वारा डीमैट खाते खोलना:—कोई व्यक्ति जो किसी स्टॉक एक्सचेंज का सेबी द्वारा अनुमोदित क्लीयरिंग कार्पोरेशन या उसके समाशोधन सदस्य हों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा संपार्श्विक के रूप में पेश की गई विदेशी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण, धारण और अंतरण कर सकता है और, समय-समय पर सेबी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अधीन,—
(i) विदेशी निक्षेपागारों के साथ डीमैट खाता खोल सकता है और बनाए रख सकता है;
(ii) ऐसे क्रियाकलाप से यदि कोई अर्जन हो, तो उसका विप्रेषण कर सकता है; तथा
(iii) ऐसी विदेशी प्रतिभूतियों का नकदीकरण करके और उससे प्राप्त राशि का भारत में संप्रत्यावर्तन कर सकता है।
4. घरेलू निक्षेपागार द्वारा विदेशी प्रतिभूतियों का अर्जन और अंतरण.—घरेलू निक्षेपागार किसी विदेशी संस्था की ऐसी विदेशी प्रतिभूतियों का अधिग्रहण, धारण और अंतरण कर सकता है जो भारतीय निक्षेपागार रसीदें जारी करने के लिए अंतर्निहित प्रतिभूति है तथा ऐसी विदेशी संस्था या इसके पारदेशीय संरक्षक बैंक द्वारा यथा प्राधिकृत हो और भारतीय निक्षेपागार रसीदों में निवेश करने वाला व्यक्ति या तो इन नियमों और विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 में प्रदान की गई शर्तों के अनुसार विदेशी प्रतिभूतियों को बेच सकता है या अपने पास बनाए रख सकता है।
5. एडी बैंक द्वारा विदेशी प्रतिभूतियों का अर्जन और अंतरण.—एडी बैंक और उसकी विदेशी शाखा अपने सामान्य बैंकिंग व्यवसाय के तहत मेजबान देश या मेजबान क्षेत्राधिकार, जैसा भी मामला हो, की शर्तों के अनुसार विदेशी प्रतिभूतियों का अर्जन या अंतरण कर सकते हैं।
अनुसूची-V
[नियम 15 देखें]
भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा आईएफएससी में पारदेशीय निवेश
1. भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा आईएफएससी में पारदेशीय निवेश:—(1) इन नियमों के उपबंधों और विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 के अधीन, भारत में निवासी व्यक्ति भारत में आईएफएससी में इन नियमों में प्रदान की गई सीमाओं के भीतर पारदेशीय निवेश कर सकता है।
(2) भारत में निवासी व्यक्ति अनुसूची-I या अनुसूची-II या अनुसूची-III या अनुसूची-IV में निर्धारित तरीके से आईएफएससी में पारदेशीय निवेश कर सकता है:
प्रावधान किया जाता है कि:—
(i) आईएफएससी में किए गए ओडीआई के मामले में, संबंधित वित्तीय सेवा नियामक द्वारा अनुमोदन, जहां भी लागू हो, के लिए सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन पर निर्णय उसे प्रस्तुत करने की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर लिया जाएगा, जिसके उपरांत इसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा;
(ii) कोई भारतीय संस्था जो भारत में वित्तीय सेवा क्रियाकलाप में संलग्न नहीं है, किसी ऐसी विदेशी संस्था में ओडीआई करती है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बैंकिंग और बीमा को छोड़कर वित्तीय क्षेत्र के क्रियाकलाप में संलग्न है, तथा जो इन नियमों के तहत अपेक्षित शुद्ध लाभ की शर्त को पूरा नहीं करती है, वह आईएफएससी में ओडीआई कर सकती है।
(iii) भारत में निवासी व्यक्ति आईएफएससी में किसी निवेश निधि या व्हीकल में ओपीआई के रूप में योगदान कर सकता है;
(iv) कोई निवासी व्यष्टि आईएफएससी में वित्तीय सेवाओं के क्रियाकलाप (बैंकिंग या बीमा को छोड़कर), में संलग्न किसी विदेशी संस्था में ओडीआई कर सकता है, यदि ऐसी संस्था के पास आईएफएससी के बाहर अनुषंगी या उप-अनुषंगी नहीं है जहां निवासी व्यष्टि का विदेशी संस्था में नियंत्रण है।
(3) आईएफएससी में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को इन नियमों के प्रयोजन से भारत के बाहर मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज माना जाएगा। |