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शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

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बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – दि गुजरात राज्य कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक लि., अहमदाबाद - अवधि बढ़ाना

11 सितंबर 2026

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश
– दि गुजरात राज्य कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक लि., अहमदाबाद - अवधि बढ़ाना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम,1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 11 मार्च 2026 के निदेश सं. AMD.DOS.SSM.No.S1057/11-04-083/2025-2026 द्वारा दि गुजरात राज्य कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक लि., अहमदाबाद को 11 सितंबर 2026 को कारोबार की समाप्ति से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए गये थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जनहित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 11 सितंबर 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

2. तदनुसार, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उप-धारा (1) के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक उक्त निदेश को 11 सितंबर 2026 की कारोबार की समाप्ति से 11 दिसंबर 2026 की कारोबार की समाप्ति तक अगले तीन महीने की अवधि के लिए बढ़ाता है, तथा ये निदेश समीक्षाधीन होंगे।

3. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उपरोक्त विस्तार और / या संशोधन को, यह न माना जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।

4. इस संदर्भाधीन निदेश के अन्य सभी नियम एवं शर्तें यथावात् रहेंगे।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

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