विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम


विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (संशोधन) विनियमावली, 2019

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई

अधिसूचना सं. फेमा 20(आर) (6)/2019-आरबी

01 फ़रवरी 2019

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (संशोधन) विनियमावली, 2019

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (3) के खंड (बी) और धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2017 (दिनांक 07 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं.फेमा.20 (आर)/2017-आरबी) (जिसे इसके पश्चात “मूल विनियमावली” कहा गया है) में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

(i) यह विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (पांचवां संशोधन) विनियमावली, 2019 कहलाएँगे।

(ii) यह विनियमावली 1 फरवरी 2019 से लागू होगी।

2. विनियम 16. बी में संशोधन :-

विनियम 16. बी में,

(i) विद्यमान क्रम सं.15.2.3 (बी) में ‘ई-कॉमर्स एंटीटी’ का अर्थ है कोई कंपनी जिसे कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निगमित किया गया है, इन शब्दों को ‘ई-कॉमर्स एंटीटी’ का अर्थ है कोई कंपनी जिसे कंपनी अधिनियम, 1956 अथवा कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निगमित किया गया है से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

(ii) मौजूदा क्रम सं.15.2.3 (एच) को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

मार्केट-प्लेस प्रदान करने वाली ई-कॉमर्स एंटीटी किसी इनवेंटरी अर्थात बेची जाने वाली वस्तुओं, पर स्वामित्व अथवा नियंत्रण नहीं दर्शाएगी।

स्पष्टीकरण: विक्रेता की इनवेंटरी को ई-कॉमर्स एंटीटी द्वारा तभी नियंत्रित समझा जाएगा यदि इस प्रकार के विक्रेताओं की 25% से अधिक ख़रीदारी मार्केट-प्लेस एंटीटी अथवा उसकी समूह कंपनियों से की गई हो, जिससे इस कारोबार का मॉडेल इनवेंटरी आधारित मोडेल बन जाएगा।

(iii) मौजूदा क्रम सं. 15.2.3(आई) को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

कोई एंटीटी, जिसमें ई-कॉमर्स मार्केट-प्लेस एंटीटी अथवा उसकी समूह कंपनियों की इक्विटि सहभागिता है, अथवा जिसकी इनवेंटरी पर ई-कॉमर्स मार्केट-प्लेस एंटीटी अथवा उसकी समूह कंपनियों का नियंत्रण है, को ऐसी मार्केटप्लेस एंटीटी द्वारा चलाए गए प्लैटफ़ार्म पर अपने उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं होगी।

(iv) मौजूदा क्रम सं. 15.2.3(एम) को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

मार्केट-प्लेस प्रदान करने वाली ई-कॉमर्स एंटिटियाँ माल तथा सेवाओं के बिक्री मूल्य को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेंगी तथा सभी को समान अवसर उपलब्ध कराएंगी। ई-कॉमर्स मार्केट-प्लेस एंटिटियों अथवा अन्य एंटिटियों, जिनमें ई-कॉमर्स मार्केट-प्लेस एंटीटी की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष इक्विटि सहभागिता अथवा सामान्य नियंत्रण है, द्वारा विक्रेताओं को प्लैटफ़ार्म पर ऐसी सेवाएँ, एक विशिष्ट दूरी बनाए रखते हुए, उचित रूप से तथा बिना किसी पक्षपात के प्रदान की जानी चाहिए।

स्पष्टीकरण: ऐसी सेवाओं में पूर्ति, लॉजिस्टिक्स, माल गोदाम, विज्ञापन/ विपणन, भुगतान, वित्तपोषण, आदि शामिल होंगे, लेकिन यह इतने तक ही सीमित नहीं होंगी। ख़रीदारों को मार्केट-प्लेस एंटीटी की समूह कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए कॅश बॅक उचित तथा पक्षपात रहित होने चाहिए। इस खंड के प्रयोजन के लिए किसी भी विक्रेता को ऐसी शर्तों, जो समान परिस्थितियों में अन्य विक्रेताओं को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, पर सेवाएँ प्रदान करना अनुचित तथा पक्षपाती माना जाएगा।

(v) क्रम सं. 15.2.3 में मौजूदा खंड (एन) के बाद एक नया खंड (ओ) जोड़ा जाएगा, अर्थात:

ई-कॉमर्स मार्केट-प्लेस एंटिटी किसी भी विक्रेता को कोई उत्पाद अनन्य रूप से अपने ही प्लैटफ़ार्म पर बेचने के लिए अधिदेशित नहीं करेगी।

vi) क्रम सं. 15.2.3 के खंड (ओ) के पश्चात एक नया खंड (पी) जोड़ा जाएगा, अर्थात:-

इस अधिसूचना को जारी करने की तारीख से सभी मौजूदा निवेश उपर्युक्त शर्तों के अनुपालन में होने चाहिए।

(अजय कुमार मिश्र)
मुख्य महाप्रबंधक


पाद टिप्पणी :

मूल विनियमावली दिनांक 7 नवम्बर 2017 के जी.एस.आर.सं.1374(ई) द्वारा भारत सरकार के सरकारी राजपत्र के भाग-II, खंड-3, उप-खंड (i) में प्रकाशित की गई थी और बाद में संशोधन के तहत

सा का नि 279(अ) दिनांक 26 मार्च, 2018
सा का नि 520(अ) दिनांक 01 जून, 2018
सा का नि 823(अ) दिनांक 30 अगस्त, 2018
सा का नि 78(अ) दिनांक 31 जनवरी, 2019


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