विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम


विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (अठारहवाँ संशोधन) विनियमावली, 2016

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई- 400 001

अधिसूचना सं.फेमा. 381/2016-आरबी

07 दिसंबर 2016

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा
प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (अठारहवाँ संशोधन) विनियमावली, 2016

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (3) के खंड (बी) और धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2000 (3 मई 2000 की अधिसूचना सं.फेमा.20/2000-आरबी) (इसके बाद “मूल विनियमवली” कहलाया जाएगा) में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

(i) ये विनियम विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (अठारहवाँ संशोधन) विनियमावली, 2016 कहलाएंगे।

(ii) वे सरकारी राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।

2. अनुसूची 1 में संशोधन

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2000 (3 मई 2000 की अधिसूचना सं.फेमा.20/2000-आरबी) की अनुसूची-1 के अनुबंध "बी" में निम्नवत पैराग्राफ़ों को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात :

क्र.सं. क्षेत्र / गतिविधि विदेशी निवेश की कैप (सीमा) का प्रतिशत प्रवेश मार्ग
कृषि    
1. कृषि और पशुपालन
  ए) नियंत्रित परिस्थितियों में पुष्‍पोत्‍पादन, बागबानी तथा सब्जियों और मशरूम की खेती;
बी) बीजों और रोपण सामग्री का विकास और उत्‍पादन;
सी) पशुपालन (श्‍वान-प्रजनन सहित), मछली-पालन, जलीय कृषि (अक्‍वाकल्‍चर); और मधुमक्खी-पालन; तथा
डी) कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित सेवाएं ।

टिप्‍पणी: उपर्युक्‍त के अलावा, अन्‍य किसी कृषि क्षेत्र / गतिविधि में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है।
100% स्‍वचालित
1.1 अन्‍य शर्तें:
  ‘नियंत्रित परिस्थितियों के तहत’ शब्‍दावली निम्‍नलिखित को कवर करती है:

(i) पुष्‍प उत्‍पादन, बागबानी, सब्जियों और मशरूम की खेती वाली श्रेणियों के लिए ‘नियंत्रित परिस्थितियों के तहत खेती’ खेती का एक ऐसा तरीका है जिसमें वर्षा, तापमान, सूर्य विकिरण, वायु-आर्द्रता और खेती की विधियों (culture) को कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया जाता है। सुरक्षित खेती के जरिए इन मानदंडों में नियंत्रण ग्रीन हाउस, नेट हाउस, पॉली हाउस से या किसी अन्य परिवर्धित इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सुविधाओं - जहां सूक्ष्‍म मौसमी परिस्थितियों को मानवीय हस्‍तक्षेप से नियंत्रित किया जाता है।
5. विनिर्माण (मैनुफैक्चरिंग) 100% स्‍वचालित
  इन विनियमावली के प्रावधानों की शर्तों के अधीन रहते हुए 'विनिर्माण (मैनुफैक्चरिंग)' क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत विदेशी निवेश की अनुमति है। यह भी कि, विनिर्माता भारत में विनिर्मित अपने उत्पादों को सरकारी अनुमोदन के बिना ई-कॉमर्स सहित थोक / रीटेल सेल के माध्यम से बेच सकता है । ट्रेड क्षेत्र से संबंधित विदेशी निवेश नीति के प्रावधानों में किसी भी बात के होते हुए भी, भारत में विनिर्मित और/ अथवा उत्पादित खाद्य उत्पादों की ट्रेडिंग, ई-कॉमर्स सहित, में सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत 100% विदेशी निवेश की अनुमति है। खाद्य उत्पादों की रीटेल ट्रेडिंग में विदेशी निवेश संबंधी आवेदनों को सरकारी अनुमोदन देने से पूर्व औद्योगिक नीति एवं संवर्धन बोर्ड द्वारा उन्हें प्रोसेस किया जाएगा।
6. रक्षा    
6.1 रक्षा उद्योग, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत औद्योगिक लाइसेंस के अधीन है; और
छोटे आयुध एवं गोला-बारूद का विनिर्माण आयुध अधिनियम, 1959 के अधीन होगा।
100% 49% तक स्वचालित मार्ग से।
49% के पश्चात सरकारी मार्ग से, जहां आधुनिक प्रौद्योगिकी अथवा ऐसे अन्य कारण जिन्हें रेकॉर्ड किया जाना अपेक्षित है।
6.2 अन्य शर्तें    
  i. अनुमत स्वचालित मार्ग के स्तर पर ऐसी कंपनी में नया विदेशी निवेश प्राप्त करना, जो औद्योगिक लाइसेन्स नहीं चाहती है, किन्तु उसके स्वामित्व का प्रकार बदलने अथवा मौजूदा निवेशक की कंपनी में हिस्सेदारी नए विदेशी निवेशक को अंतरित करने के परिणाम स्वरूप फ्रेश निवेश के लिए सरकार का अनुमोदन आवश्यक होगा।

ii. लाइसेंस आवेदनों पर विचार किया जाएगा और रक्षा मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय से परामर्श के बाद औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा लाइसेंस जारी किए जाएंगे।

iii. इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति रक्षा मंत्रालय द्वारा सुरक्षा संबंधी क्लियरेंस तथा उनके दिशानिर्देशों के अधीन होगी ।

iv. निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी का ढांचा इस प्रकार का होना चाहिए कि वह उत्पाद डिजाइन एवं विकास के मामले में आत्मनिर्भर हो। उत्पादन सुविधा सहित निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी/ संयुक्त उद्यम कंपनी के पास भारत में निर्मित उत्पादों के मेंटिनेंस एवं लाइफ साइकिल सपोर्ट की भी सुविधा होनी चाहिए।

सेवा क्षेत्र
सूचना सेवाएँ
7 प्रसारण
7.1 प्रसारण वाहक सेवाएं
7.1.1 (1) टेलीपोर्ट (अप-लिंकिग एचयूबी/टेलीपोर्ट की स्‍थापना)
(2) डायरेक्‍ट टू होम (डीटीएच)
(3) केबल नेटवर्क (राष्‍ट्रीय या राज्‍य या जिला स्‍तर पर परिचालन करने वाले और डिजिटलाइजेशन एवं अड्रेसबिलिटी के लिए नेटवर्क अपग्रेडशन का काम करनेवाले मल्‍टी सिस्‍टम ऑपरेटर (एमएसओ)
(4) मोबाइल टीवी
(5) हेडएंड-इन-द-स्काई ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (एचआईटीएस)
100% स्‍वचालित मार्ग
7.1.2 केबल नेटवर्क (अन्‍य एमएसओ, जो डिजिटलाइजेशन और अड्रेसबिलिटी के लिए नेटवर्क अपग्रेडेशन का कार्य नहीं करते हैं और स्‍थानीय केबल ऑपरेटर (एलसीओ)) 100% स्‍वचालित मार्ग
  नोट: किसी ऐसी कंपनी में 49% से अधिक नया विदेशी निवेश प्राप्त करना, जो अपने क्षेत्र-विशेष से सम्बद्ध मंत्रालय से अनुमति / लाइसेन्स नहीं चाहती है, किन्तु उसके स्वामित्व का प्रकार बदलने अथवा मौजूदा निवेशक की कंपनी में हिस्सेदारी नए विदेशी निवेशक को अंतरित करने के परिणामस्वरूप फ्रेश निवेश के लिए सरकार का अनुमोदन आवश्यक होगा।
9. नागरिक उड्डयन    
9.2 एयरपोर्ट    
  (ए) ग्रीनफील्‍ड परियोजनाएं
(बी) मौजूदा परियोजनाएं
100%
100%
स्वचालित मार्ग
स्वचालित मार्ग
16.3 एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार (SBRT) 100% 49% तक स्वचालित मार्ग से

49% से अधिक सरकारी मार्ग से
  1) एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार में विदेशी निवेश का उद्देश्‍य है - उत्‍पादन तथा विपणन में निवेश आकर्षित करना, उपभोक्‍ता के लिए ऐसी वस्‍तुओं की उपलब्‍धता में सुधार लाना, भारत से वस्‍तुओं की बढ़ी सोर्सिंग को प्रोत्‍साहन देना, तथा वैश्विक डिजाइनों, प्रौद्योगिकियों और प्रबंधन प्रथाओं तक पहुंच के माध्‍यम से भारतीय उद्यमों की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता में वृद्धि करना।

2) एकल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार में विदेशी निवेश निम्‍नलिखित शर्तों के अधीन किया जाएगा:

(ए) बेचे जाने वाले उत्‍पाद केवल ‘एकल ब्रैंड’ (सिंगल ब्रैंड) के होंगे।
(बी) उत्‍पाद एक ही ब्रैंड के अधीन अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बेचे जाने चाहिए अर्थात भारत से इतर एक या अधिक देशों में उत्‍पाद एक ही ब्रैंड के अधीन बेचे जाने चाहिए।
(सी) ‘एकल ब्रैंड’ उत्‍पाद के खुदरा व्‍यापार में वही उत्‍पाद शामिल होंगे जिनको विनिर्माण के दौरान ब्रैंडेड किया जाता है।
(डी) किसी अनिवासी संस्‍था / संस्थाओं को, चाहे वह ब्रैंड की मालिक हो अथवा अन्‍यथा, विशिष्‍ट ब्रैंड के संबंध में सिंगल ब्रांड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार के लिए ब्रैंड के मालिक के साथ किए गए कानूनी तौर पर मान्‍य करार के अधीन, विशिष्‍ट ब्रैंड के लिए देश में सिंगल ब्रैंड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार करने की अनुमति दी जाएगी। इस शर्त के अनुपालन की जिम्‍मेदारी भारत में सिंगल ब्रैंड उत्‍पाद खुदरा व्‍यापार करने वाली भारतीय एंटिटी की होगी। निवेश करने वाली संस्‍था इस आशय का प्रमाण अनुमोदन प्राप्‍त करते समय प्रस्‍तुत करेगी, जिसमें उपर्युक्‍त शर्त के अनुपालन को विशिष्‍ट रूप से दर्शाने वाले लाइसेंस / फ्रैन्‍चाइज़ / उप लाइसेंस करार की प्रति शामिल होगी। स्वचालित मार्ग के लिए अपेक्षित साक्ष्य भारतीय रिज़र्व बैंक के पास और अनुमोदन लेने वाले मामले SIA/FIPB के पास फाइल किए जाने चाहिए।
(ई) 51% से अधिक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश संबंधी प्रस्‍तावों के लिए, खरीदी गयी वस्‍तुओं के मूल्‍य के 30% की सोर्सिंग भारत से की जाएगी, जिसके लिए सभी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्योग (MSME), ग्रामीण तथा कुटीर उद्योगों, कारीगरों तथा शिल्‍पकारों को वरीयता दी जाएगी। देसी सोर्सिंग की मात्रा का कंपनी द्वारा स्‍व-प्रमाणन किया जाएगा, जिसकी जांच कंपनी द्वारा रखे गए विधिवत प्रमाणित खातों से सांविधिक लेखा-परीक्षकों द्वारा की जाएगी। खरीद की यह अपेक्षा कंपनी द्वारा कारोबार शुरू करने के वर्ष अर्थात प्रथम स्टोर की शुरुआत वाले वर्ष की 01 अप्रैल से की जाएगी, जिसमें कंपनी को अपने पिछले पाँच वर्षों के माल की खरीद के औसत मूल्य का विवरण देना होगा। बाद में इस अपेक्षा को वार्षिक आधार पर पूरा किया जाएगा। सोर्सिंग की अपेक्षा के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, संबंधित संस्‍था भारत में निगमित वह कंपनी होगी, जिसने सिंगल ब्रैंड उत्‍पाद रीटेल व्‍यापार हेतु विदेशी निवेश प्राप्‍त किया हो।
(एफ़) उपर्युक्त पैरा की शर्तों के अधीन, जिन सिंगल ब्रांड रीटेल कंपनियों के स्टोर भौतिक रूप से मौजूद हैं, उन्हें ई-कॉमर्स के माध्‍यम से रीटेल ट्रेडिंग करने की अनुमति होगी।

3) भारत में ‘सिंगल ब्रैंड’ उत्‍पादों के खुदरा व्‍यापार का प्रस्ताव करने वाली कंपनी में 49% से अधिक विदेशी निवेश के लिए भारत सरकार से अनुमति प्राप्‍त करने हेतु आवेदन औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग में औद्येगिक सहायता सचिवालय (SIA) को प्रस्तुत किए जाएंगे। आवेदन पत्र में उन उत्‍पादों / उत्‍पाद की श्रेणियों का विशिष्‍ट रूप से उल्‍लेख किया जाए जिनका ‘सिंगल ब्रांड’ के अधीन विक्रय प्रस्‍तावित है। ‘सिंगल ब्रैंड’ के अधीन विक्रय किए जाने वाले किसी उत्‍पाद/उत्‍पाद श्रेणियों में कुछ भी जोड़ने के लिए सरकार से नया अनुमोदन प्राप्‍त करना होगा। 49% तक विदेशी निवेश के मामले में, खाद्य उत्पादों को छोड़कर, उत्‍पादों / उत्‍पाद की श्रेणियों की सूची भारतीय रिज़र्व बैंक को उपलब्ध करायी जाएगी।

(4) आवेदनों पर कार्रवाई औद्योगिक नीति तथा संवर्धन विभाग में की जाएगी, जिसमें यह निर्धारण किया जाएगा कि सरकार से अनुमोदन प्राप्‍त करने के लिए FIPB द्वारा विचार करने से पहले क्‍या प्रस्‍तावित निवेश अधिसूचित दिशा-निर्देशों को पूरा करते हैं।

नोट :

i. भारतीय ब्रांड के सिंगल ब्रांड रीटेल ट्रेड (SBRT) के संबंध में उपर्युक्त पैरा (2)(बी) एवं (2)(डी) की शर्तें लागू नहीं होंगी।
ii. भारतीय ब्रांड के निर्माता को अपने निर्मित उत्पादों को ई-कॉमर्स सहित थोक, खुदरा अथवा किसी भी रूप में बेचने की अनुमति है।
iii. भारतीय निर्माता को निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी माना जाएगा, जहां वह भारतीय ब्रांड की मालिक है और जो भारत में निर्माण करती है, वह अपने उत्पादों के मूल्य के अनुसार कम से कम 70% उत्पादों निर्माण घरेलू आधार पर और अधिकतम 30% उत्पादों का निर्माण भारतीय निर्माताओं के माध्यम से करती है।
iv. भारतीय ब्रांड का स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए और/अथवा ऐसी कंपनियों के पास होना चाहिए जिसका स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास हो।
v. "अत्याधुनिक" एवं "उच्चतम तकनीक" वाले उत्पादों से संबन्धित एंटीटीयों के मामलों में जहां स्थानीय सोर्सिंग संभव नहीं है ऐसी एंटिटियों के संबंध में उनके कारोबार प्रारम्भ करने की तारीख से अर्थात प्रथम स्टोर खोलने की तारीख से अगले तीन वर्षों तक की अवधि हेतु सोर्सिंग संबंधी प्रावधान लागू नहीं होंगे। इसके पश्चात पैराग्राफ (2) (ई) में विनिर्दिष्ट प्रावधान लागू होंगे।
17. फार्मास्यूटिकल
17.1 ग्रीन फील्ड 100% स्वचालित
17.2 ब्राउन फील्ड 100% 74% तक स्वचालित,
74% से अधिक सरकारी मार्ग से
17.3 अन्य शर्तें    
  (i) विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) के अनुमोदन से केवल विशिष्ट परिस्थितियों को छोडकर स्वचालित अथवा सरकारी अनुमोदन मार्ग में ‘गैर -प्रतिस्पर्धी’ खंड की अनुमति नहीं होगी ।

(ii) भावी निवेशक एवं निवेश प्राप्तकर्ता के लिए यह अपेक्षित होगा कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) आवेदन के साथ पैरा 17.4 में उल्लिखितानुसार उक्त आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें।

(iii) ब्राउनफील्ड मामलों में विदेशी निवेश के लिए अनुमोदन देते समय सरकार उचित शर्तें लगा सकती है।

(iv) स्वचालित तथा सरकारी अनुमोदन मार्ग दोनों के अंतर्गत ब्राउनफील्ड फर्मास्यूटिकल्स में विदेशी निवेश इसके अलावा निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा:

ए) आवयशक दवाइयों की राष्ट्रीय सूची (NLEM) औषधियों और/ अथवा उपभोज्य वस्तुओं का उत्पादन स्तर तथा एफ़डीआई प्रवर्तित करते समय घरेलू बाज़ार में उनकी आपूर्ति अगले पाँच वर्षों में पूर्णतया मात्रात्मक स्तर पर बनी रहे। इस स्तर के लिए बेंचमार्क, विदेशी निवेश प्रवर्तन वर्ष के तुरंत पिछले वर्ष से अगले तीन वित्तीय वर्षों में NLEM औषधियों और/ अथवा उपभोज्य वस्तुओं के उत्पादन स्तर के संदर्भ में निर्धारित किया जाएगा। इनमें से, इन तीन वर्षों में से उत्पादन के उच्चत्तम स्तर को स्तर के रूप में लिया जाएगा।
बी) विदेशी निवेश प्रवर्तित करते समय अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर किए गए खर्च को पूर्णतया मात्रात्मक स्तर पर मूल्य के अर्थ में पाँच वर्षों के लिए बनाए रखना। इस स्तर के लिए बेंचमार्क का निर्धारण विदेशी निवेश प्रवर्तन वर्ष के तुरंत पिछले वर्ष से अगले किसी तीन वर्षों में हुए अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्च के उच्चत्तम स्तर के संदर्भ में किया जाएगा।
सी) निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा अपने संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय को अपने द्वारा प्राप्त विदेशी निवेश सहित प्रोद्योगिकी का अंतरण, यदि कोई हो, संबंधी संपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
डी) केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित प्रशासनिक मंत्रालयों यथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, औषध विभाग अथवा अन्य कोई नियामक एजेंसी/विकास, शर्तों के अनुपालन की जांच करेंगे।

नोट :

i. मेडिकल डिवाइस (उपकरण) के उत्पादन हेतु स्वचालित मार्ग से 100% विदेशी निवेश की अनुमति है। अतः उल्लिखित शर्तें इस उद्योग के ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगी।

ii. मेडिकल डिवाइस (उपकरण) अर्थात :-

ए) विनिर्माता द्वारा अपेक्षित सॉफ्टवेयर सहित कोई भी यंत्र (instrument), उपकरण (apparatus), औज़ार (appliances), इंप्लांट, सामग्री अथवा अन्य वस्तुएँ, जो अकेले अथवा अन्य उपकरणों के साथ मिलकर विशेषतः मनुष्य अथवा पशुओं के लिए निम्नलिखित एक अथवा बहुविध विशिष्ट उद्देश्यों से उपयोग में लाये जाते हों, जैसे :

(एए) किसी बीमारी अथवा विकार की पहचान, रोकथाम, निगरानी, इलाज अथवा उससे राहत के लिए;

(एबी) किसी जख्म अथवा विकलांगता की पहचान, निगरानी, इलाज, उससे राहत अथवा सहायता के लिए;

(एसी) शारीरिक संरचना अथवा शरीर विज्ञान प्रक्रिया के तहत जांच, बदलाव अथवा सुधार अथवा सहायता के लिए

(एडी) जीवन-रक्षा और जान बचाने में सहायक;

(एई) मेडिकल डिवाइसों (उपकरण) का विसंक्रमण;

(एएफ) गर्भाधान नियंत्रण

एवं ऐसे उपकरण, जो मनुष्य अथवा पशुओं के शरीर पर / में किसी औषधीय अथवा प्रतिरक्षात्मक और चयापचय के माध्यम से अपनी मूल कार्रवाई के उद्देश्य को सीधे प्राप्त नहीं करते हैं, किन्तु इन माध्यमों के कार्य में सहायक होते हैं;

बी) इस प्रकार के यंत्र, उपकरणों, औज़ारों, सामग्री अथवा अन्य वस्तुओं के सहायक उप-साधन;

(सी) उपकरण जो अभिकर्मक (regeant), अभिकर्मक-उत्पाद, कैलिब्रेटर (Calibrator), नियंत्रण सामग्री, किट, इन्स्ट्रुमेंट, उपकरण (apparatus), औज़ार (instrument) अथवा सिस्टम जो अकेले अथवा किसी अन्य उपकरण के साथ परीक्षण एवं चिकित्सा अथवा निदान के उद्देश्य से सूचना देने के लिए मनुष्य अथवा पशुओं के शरीर के नमूने (specimens) के विट्रो-परीक्षण के लिए उपयोग में लाए जाते हों;

iii. उपर्युक्त नोट (ii) में दी गई चिकित्सा उपकरण की परिभाषा औषधि और प्रसाधन सामाग्री अधिनियम,1940 में समय-समय पर संशोधन के अधीन होगी।
17.4 भावी निवेशक तथा भावी निवेश प्राप्तकर्ता एंटीटी द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला प्रमाणपत्र
प्रमाणित किया जाता है कि निम्नलिखित सभी पारस्परिक करारों की संपूर्ण सूची है जिसमें, विदेशी निवेशक(कों) तथा निवेश प्राप्तकर्ता ब्राउनफील्ड फार्मास्युटिकल एंटीटी के बीच किया हुआ शेयर-धारक करार शामिल है।

1. .........................

2. .........................

3. .........................

(सभी समझौतों की प्रतियाँ संलग्न हैं)

यह भी प्रमाणित किया जाता है कि विदेशी निवेशक(कों) तथा निवेश प्राप्तकर्ता ब्राउनफील्ड फार्मास्युटिकल एंटीटी के बीच किए हुए पारस्परिक करार जिसमें शेयर-धारक करार शामिल है, में किसी प्रकार में, जो भो हो, गैर-प्रतिस्पर्धी खंड निहित नहीं है।

साथ ही, यह भी प्रमाणित किया जाता है कि विदेशी निवेशक(कों) तथा निवेश प्राप्तकर्ता ब्राउनफील्ड फार्मास्युटिकल एंटीटी के बीच उपर्युक्त सूचीबद्ध के अलावा कोई और संविदा/ करार नहीं है।

विदेशी निवेशक(कों) तथा निवेश प्राप्तकर्ता ब्राउनफील्ड फार्मास्युटिकल एंटीटी वचनबद्ध है कि इस आवेदन के प्रस्तुतीकरण एवं उस पर विचार किए जाने के उपरांत यदि उनके बीच किसी प्रकार का पारस्परिक करार होता है, तो वे उसे विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) को प्रस्तुत करेंगे।

(रोहित जैन)
मुख्य महाप्रबंधक


पाद-टिप्पणी :- मूल विनियमावली 8 मई 2000 को जी.एस.आर.सं.406 (अ) भाग-।।, खंड 3, उप-खंड (i) के तहत सरकारी राजपत्र के में प्रकाशित और तत्पश्चात निम्नलिखित द्वारा संशोधित की गयी:-

जी.एस.आर. सं. 158(अ) दिनांक 02.03.2001
जी.एस.आर. सं. 175(अ) दिनांक 13.03.2001
जी.एस.आर. सं. 182(अ) दिनांक 14.03.2001
जी.एस.आर. सं. 4(अ) दिनांक 02.01.2002
जी.एस.आर. सं. 574(अ) दिनांक 19.08.2002
जी.एस.आर. सं. 223(अ) दिनांक 18.03.2003
जी.एस.आर. सं. 225(अ) दिनांक 18.03.2003
जी.एस.आर. सं. 558(अ) दिनांक 22.07.2003
जी.एस.आर. सं. 835(अ) दिनांक 23.10.2003
जी.एस.आर. सं. 899(अ) दिनांक 22.11.2003
जी.एस.आर. सं. 12(अ) दिनांक 07.01.2004
जी.एस.आर. सं. 278(अ) दिनांक 23.04.2004
जी.एस.आर. सं. 454(अ) दिनांक 16.07.2004
जी.एस.आर. सं. 625(अ) दिनांक 21.09.2004
जी.एस.आर. सं. 799(अ) दिनांक 08.12.2004
जी.एस.आर. सं. 201(अ) दिनांक 01.04.2005
जी.एस.आर. सं. 202(अ) दिनांक 01.04.2005
जी.एस.आर. सं. 504(अ) दिनांक 25.07.2005
जी.एस.आर. सं. 505(अ) दिनांक 25.07.2005
जी.एस.आर. सं. 513(अ) दिनांक 29.07.2005
जी.एस.आर. सं. 738(अ) दिनांक 22.12.2005
जी.एस.आर. सं. 29(अ) दिनांक 19.01.2006
जी.एस.आर. सं. 413(अ) दिनांक 11.07.2006
जी.एस.आर. सं. 712(अ) दिनांक 14.11.2007
जी.एस.आर. सं. 713(अ) दिनांक 14.11.2007
जी.एस.आर. सं. 737(अ) दिनांक 29.11.2007
जी.एस.आर. सं. 575(अ) दिनांक 05.08.2008
जी.एस.आर. सं. 896(अ) दिनांक 30.12.2008
जी.एस.आर. सं. 851(अ) दिनांक 01.12.2009
जी.एस.आर. सं. 341(अ) दिनांक 21.04.2010
जी.एस.आर. सं. 821(अ) दिनांक 10.11.2012
जी.एस.आर. सं. 606(अ) दिनांक 03.08.2012
जी.एस.आर. सं. 795(अ) दिनांक 30.10.2012
जी.एस.आर. सं. 796(अ) दिनांक 30.10.2012
जी.एस.आर. सं. 797(अ) दिनांक 30.10.2012
जी.एस.आर. सं. 945(अ) दिनांक 31.12.2012
जी.एस.आर. सं. 946(अ) दिनांक 31.12.2012
जी.एस.आर. सं. 38(अ) दिनांक 22.01.2013
जी.एस.आर. सं. 515(अ) दिनांक 30.07.2013
जी.एस.आर. सं. 532(अ) दिनांक 05.08.2013
जी.एस.आर. सं. 341(अ) दिनांक 28.05.2013
जी.एस.आर. सं. 344(अ) दिनांक 29.05.2013
जी.एस.आर. सं. 195(अ) दिनांक 01.04.2013
जी.एस.आर. सं. 393(अ) दिनांक 21.06.2013
जी.एस.आर. सं. 591(अ) दिनांक 04.09.2013
जी.एस.आर. सं. 596(अ) दिनांक 06.09.2013
जी.एस.आर. सं. 597(अ) दिनांक 06.09.2013
जी.एस.आर. सं. 681(अ) दिनांक 11.10.2013
जी.एस.आर. सं. 682(अ) दिनांक 11.10.2013
जी.एस.आर. सं. 818(अ) दिनांक 31.12.2013
जी.एस.आर. सं. 805(अ) दिनांक 30.12.2013
जी.एस.आर. सं. 683(अ) दिनांक 11.10.2013
जी.एस.आर. सं. 189(अ) दिनांक 19.03.2014
जी.एस.आर. सं. 190(अ) दिनांक 19.03.2014
जी.एस.आर. सं. 270(अ) दिनांक 07.04.2014
जी.एस.आर. सं. 361(अ) दिनांक 27.05.2014
जी.एस.आर. सं. 370(अ) दिनांक 30.05.2014
जी.एस.आर. सं. 371(अ) दिनांक 30.05.2014
जी.एस.आर. सं. 435(अ) दिनांक 08.07.2014
जी.एस.आर. सं. 400(अ) दिनांक 12.06.2014
जी.एस.आर. सं. 436(अ) दिनांक 08.07.2014
जी.एस.आर. सं. 487(अ) दिनांक 11.07.2014
जी.एस.आर. सं. 632(अ) दिनांक 02.09.2014
जी.एस.आर. सं. 798(अ) दिनांक 13.11.2014
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