अधिसूचनाएं

मास्टर निर्देश – फेमा,1999 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग

भा.रि.बैंक/विमुवि/2015-16/1
विमुवि मास्टर निदेश सं.04/2015-16

01 जनवरी 2016
(22 दिसंबर 2017 तक अद्यतन)
(02 फरवरी 2017 तक अद्यतन)
(26 मई 2016 तक अद्यतन)

सेवा में,

सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक और प्राधिकृत बैंक

महोदया / महोदय

मास्टर निदेश – फेमा,1999 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 (1999 का 42), जिसे इसके पश्चात फेमा,1999 कहा गया है, की धारा-15 के प्रावधान उल्लंघनों की कंपाउंडिंग करने की अनुमति देते हैं तथा इस प्रकार के उल्लंघन करने वाले व्यक्ति द्वारा किये गये आवेदनपत्र पर फेमा,1999 की धारा-13 के तहत यथा परिभाषित एवं फेमा,1999 की धारा 3(ए) के तहत किए गए उल्लंघनों को छोड़कर, किसी भी प्रकार के उल्लंघन की कंपाउंडिंग का अधिकार रिज़र्व बैंक को देते हैं। समय-समय पर यथा-संशोधित विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 (जिसे इसके पश्चात नियमवाली कहा गया है) कंपाउंडिंग प्रक्रिया के लिए बुनियादी ढाँचा निर्धारित करती है।

2. इस मास्टर निदेश में "फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों की कंपांउंडिंग" विषय पर जारी अनुदेशों को समेकित किया गया है। इस मास्टर निदेश में निहित परिपत्रों/ अधिसूचनाओं की सूची परिशिष्ट में दी गई है, जो इस मास्टर निदेश का आधार है। सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक और प्राधिकृत बैंक इस मास्टर परिपत्र में निहित अनुदेशों से अपने घटकों को अवगत करा दें।

3. नए अनुदेश जारी होने पर, इस मास्टर निदेश को समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा।

भवदीय,

(शेखर भटनागर)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


अनुक्रमाणिका

विवरण
सामान्य
कंपाउंडिंग हेतु रिज़र्व बैंक को प्रदत्त अधिकार
क्षेत्रीय कार्यालयों को अधिकारों का प्रत्यायोजन
विमुवि, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली को उल्लंघनों की कंपांउडिंग करने संबंधी दिए गए प्राधिकार
कंपांउडिंग के लिए आवेदनपत्र
कंपांउडिंग की प्रक्रिया के लिए पूर्वापेक्षा
कंपांउडिंग की व्याप्ति और पद्धति
कंपांउडिंग आदेश जारी करना
कंपाउंड किए गए उल्लंघन के लिए राशि का भुगतान
प्राधिकृत व्यापारियों के लिए निदेश
रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ

1. सामान्य

1.1 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा-15 के अनुसार, फेमा 1999 की धारा-13 के तहत किसी उल्लंघन की कंपाउंडिंग, इस प्रकार के उल्लंघन करने वाले व्यक्ति द्वारा किये गये आवेदन पत्र पर केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए यथा प्राधिकृत रिज़र्व बैंक के अधिकारियों द्वारा यथा विनिर्दिष्ट तरीके से आवेदन की प्राप्ति की तारीख से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर की जा सकती है।

फेमा, 1999 की धारा 13(1) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति फेमा, 1999 के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है अथवा इस नियम के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए जारी किये गये किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निदेश अथवा आदेश का उल्लंघन करता है, अथवा ऐसी किसी शर्त, जिसके लिए रिज़र्व बैंक द्वारा निदेश जारी किया गया है, का उल्लंघन करता है, तो वह न्याय-निर्णयन पर, जहाँ उल्लंघन की राशि गणनयोग्य है वहाँ उल्लंघन में निहित राशि से तीन गुना अथवा जहां उल्लंघन राशि सीधे गणनयोग्य नहीं है, वहाँ दो लाख रूपयों तक दण्ड के लिए दायी होगा। यदि उल्लंघन सतत रूप से हो रहा है, तो इस प्रकार के निरंतर उल्लंघन के लिए अतिरिक्त दण्ड, जो उल्लंघन की पुनरावृत्ति के दिन के तुरंत अगले दिन से प्रत्येक दिन के लिए पाँच हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकता है।

1.2 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 15 की उप-धारा (1) के साथ पठित धारा-46 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा फेमा, 1999 के अध्याय IV के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग से संबंधित विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 बनायी गयी है।

1.3 1 जून 2000 से लागू विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसीडिंग्स) नियमावली, 2000 के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक को धारा 7, 8 और 9 तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खातेगत लेनदेन) (FEMCAT) नियमावली, 2000 की तीसरी अनुसूची से संबंधित उल्लंघनों की कंपाउंडिंग करने की शक्तियां प्राप्त हैं। जानबूझकर, असद्भावी (बदनीयत वाले) और कपटपूर्ण लेनदेनों के प्रति गंभीर रुख कायम रखते हुए, 13-09-2004 के जीएसआर सं. 609(ई) के द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 3(ए) के अलावा अन्य सभी उल्लंघनों को कंपाउंड करने की शक्तियां भारतीय रिज़र्व को प्रदान की गईं हैं ताकि व्यक्तियों तथा कंपनी समुदाय के लेनदेनगत उल्लंघनों की लागत को कम करके उन्हें राहत प्रदान की जा सके।

2. कंपाउंडिंग हेतु रिज़र्व बैंक को प्रदत्त अधिकार

2.1 यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम की धारा-3 के खण्ड (ए) को छोड़कर, फेमा, 1999 के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है,

(ए) ऐसे मामले में जहां इस प्रकार किए गए उल्लंघन में निहित राशि दस लाख रुपए अथवा उससे कम हो, तो भारतीय रिज़र्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक द्वारा;

(बी) ऐसे मामले में जहां इस प्रकार किए गए उल्लंघन में निहित राशि दस लाख रुपए से अधिक लेकिन चालीस लाख रुपए से कम हो, तो भारतीय रिज़र्व बैंक के उप-महाप्रबंधक द्वारा;

(सी) ऐसे मामले में जहां इस प्रकार किए गए उल्लंघन में निहित राशि चालीस लाख रुपए अथवा उससे अधिक हो लेकिन सौ लाख रुपए से कम हो, तो भारतीय रिज़र्व बैंक के महाप्रबंधक द्वारा;

(डी) ऐसे मामले में जहां इस प्रकार किए गए उल्लंघन में निहित राशि सौ लाख रुपए अथवा उससे अधिक हो, तो भारतीय रिज़र्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक द्वारा;

बशर्ते यह भी कि उल्लंघन में निहित राशि परिमाणनीय (गणनयोग्य) न होने पर उसकी कंपाउंडिंग नहीं की जाएगी।

2.2 भारतीय रिज़र्व बैंक (कंपाउंडिंग प्राधिकारी) के नियम-4 के उप-नियम (1) के तहत विनिर्दिष्ट प्रत्येक अधिकारी किसी उल्लंघन की कंपाउंडिंग करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के निदेश, नियंत्रण तथा पर्यवेक्षण के अधीन अधिकारों का प्रयोग करेगा।

3. क्षेत्रीय कार्यालयों को अधिकारों का प्रत्यायोजन

ग्राहक सेवा के उपाय के रूप में और परिचालनगत सुविधा को सुलभता प्रदान करने की दृष्टि से, तत्कालीन 03 मई 2000 की अधिसूचना संख्या विदेशी मुद्रा प्रबंध 20/2000-आरबी के तहत लागू निम्न-प्रकार के उल्लंघनों की कंपांउंडिंग करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों को अधिकार प्रत्यायोजित किये गए थे :

फेमा विनियम उल्लंघन का संक्षिप्त ब्योरा
अनुसूची-। का पैराग्राफ-9 (1) (ए) शेयरों को जारी करने के लिए प्राप्त आवक विप्रेषण की रिपोर्टिंग में देरी।
अनुसूची-। का पैराग्राफ-9 (1) (बी) शेयर जारी करने के बाद फॉर्म एफसी (जीपीआर) फाइल करने में देरी।
अनुसूची1-। का पैराग्राफ 9(2) विदेशी देयताओं एवं संपत्ति संबंधी वार्षिक रिपोर्ट (FLAR) की फाइलिंग मे विलंब।
अनुसूची-। का पैराग्राफ-8 (1) (बी) शेयर जारी करने/शेयर आवेदन राशि की वापसी मेँ 180 दिनों से ज्यादा विलंब, निधियों की प्राप्ति के तरीके, आदि ।
अनुसूची-। का पैराग्राफ 5 शेयरों को जारी करने के लिए मूल्य निर्धारण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन।
विनियम 5(1) के साथ पठित विनियम 2(ii) अपात्र लिखतों जैसे अपरिवर्तनीय डिबेंचरों, आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों, आप्शनैलिटी शर्त के साथ शेयरों, आदि को जारी करना।
अनुसूची । का पैराग्राफ 2 अथवा 3 जहां कहीं भी आवश्यक है वहाँ क्रमश: भारतीय रिजर्व बैंक अथवा एफआईपीबी (FIPB) की मंजूरी लिए बिना शेयर जारी करना।
अनुसूची-। के पैराग्राफ 10 के साथ पठित विनियम 10A (b)(i) निवासी से अनिवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फार्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
अनुसूची-। के पैराग्राफ 10 के साथ पठित विनियम 10B(2) अनिवासी से निवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फॉर्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
विनियम 4 निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा शेयरों के अंतरण को रेकार्ड में लेना।

03 मई 2000 को जारी पूर्ववर्ती अधिसूचना सं. फेमा 20/2000-आरबी का अधिक्रमण करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने 07 नवंबर 2017 को जारी अधिसूचना सं. 20(आर)/2017-आरबी के तहत विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निराम) विनियमावली 2017 जारी की है। तदनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों को अधिसूचना सं.20(आर)/2017-आरबी के निम्नलिखित प्रावधानों के उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के अधिकार दिए गए हैं :

फेमा विनियम उल्लंघन का संक्षिप्त ब्योरा
विनियम -13.1(1) शेयरों को जारी करने के लिए प्राप्त आवक विप्रेषण की रिपोर्टिंग में देरी।
विनियम -13.1(2) शेयर जारी करने के बाद फॉर्म एफसी (जीपीआर) फाइल करने में देरी।
विनियम -13.1(3) विदेशी देयताओं एवं संपत्ति संबंधी वार्षिक रिपोर्ट (FLA) की फाइलिंग मे विलंब।
अनुसूची-। का पैराग्राफ-2 शेयर जारी करने/शेयर आवेदन राशि की वापसी मेँ 60 दिनों से ज्यादा विलंब, निधियों की प्राप्ति के तरीके, आदि ।
विनियम -11 शेयरों को जारी करने के लिए मूल्य निर्धारण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन।
विनियम 5 के साथ पठित विनियम 2(v) अपात्र लिखतों को जारी करना।
विनियम-16.बी भारतीय रिजर्व बैंक अथवा सरकार के अनुमोदन, जहां कहीं भी आवश्यक है, के बिना शेयर जारी करना।
विनियम 13.1(4) निवासी से अनिवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फार्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
विनियम 4 किसी अनिवासी से भारत में निवेश प्राप्त करना अथवा निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा शेयरों के अंतरण को रेकार्ड में लेना।

4. विदेशी मुद्रा विभाग, केन्द्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली द्वारा उल्लंघनों की कंपाउंडिंग किये जाने हेतु उसे प्रदत्त प्राधिकार

4.1 विदेशी निवेश प्रभाग के तीन प्रभागों अर्थात संपर्क/ शाखा/ परियोजना कार्यालय (LO/BO/PO) प्रभाग, अनिवासी विदेशी खाता प्रभाग (NRFAD) और अचल संपत्ति (IP) प्रभाग के कार्य 15 जुलाई 2014 से विदेशी मुद्रा विभाग, केन्द्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली को अंतरित (transfer) कर दिए गए हैं। तदनुसार, विदेशी मुद्रा विभाग, केन्द्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली से संबद्ध अधिकारी अब निम्नलिखित उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए प्राधिकृत किए जाते हैं।

फेमा अधिसूचना उल्लंघन का संक्षिप्त ब्योरा
फेमा 7/2000-आरबी, दिनांक 03.05.2000 भारत से बाहर अचल संपत्ति के अर्जन एवं अंतरण से संबंधित उल्लंघन
फेमा 21/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 भारत में अचल संपत्ति के अर्जन एवं अंतरण से संबंधित उल्लंघन
फेमा 22/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 भारत में शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय (LO/ BO/ PO) की स्थापना से संबंधित उल्लंघन
फेमा 5/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2000 के अंतर्गत आने वाले उल्लंघन

4.2 उपर्युक्त पैराग्राफ-3 और पैराग्राफ-4 में उल्लिखित उल्लंघनों को कंपाउंड करने के अधिकार, उल्लंघन राशि की सीमा पर विचार किए बिना, सभी क्षेत्रीय कार्यालयों (कोची और पणजी को छोड़कर) और क्रमश: विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली को प्रदान किए गए हैं। कोची और पणजी क्षेत्रीय कार्यालय पैराग्राफ-3 में दिए गए उक्त प्रकार के एक सौ लाख रुपये (रु.1,00,00,000/) से कम के उल्लंघनों को कंपाउंड कर सकते हैं। पणजी और कोची क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र के एक सौ लाख रुपये (रु.1,00,00,000/-) से अधिक के ऐसे उल्लंघनों तथा फेमा के तहत हुए अन्य उल्लंघनों को फेमा के प्रभावी कार्यान्वयन संबंधी कक्ष (सेफा/CEFA), विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई द्वारा पहले की भांति कंपाउंड किया जाता रहेगा।

4.3 तदनुसार, उक्त उल्लंघनों से संबंधित कंपाउंडिंग के लिए आवेदन पत्र संबंधित एंटिटियों द्वारा उन क्षेत्रीय कार्यालयों, जिनके अधिकार क्षेत्र में वे आती हैं अथवा विदेशी मुद्रा विभाग, केन्द्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली को प्रस्तुत किए जाएंगे। अन्य सभी उल्लंघनों के लिए, आवेदनपत्र CEFA, विदेशी मुद्रा विभाग, 5 वीं मंजिल, अमर भवन, सर पी॰एम॰ रोड, फोर्ट, मुंबई - 400001 को प्रस्तुत किए जाते रहेंगे।

5. कंपाउंडिंग के लिए आवेदन

5.1 कंपाउंडिंग के लिए सभी आवेदन पत्र निर्धारित रु.5000/- के शुल्क, जो ''भारतीय रिज़र्व बैंक'' के पक्ष में आहरित डिमांड ड्राफ्ट के रूप में हो एवं संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में देय हो, के साथ प्रस्तुत किए जाएँ और कंपाउंडिंग प्राधिकारी, सेफा कक्ष [फेमा के प्रभावी कार्यान्वयन संबंधी कक्ष (सेफा)], विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई को प्रस्तुत मामलों के लिए ''भारतीय रिज़र्व बैंक'' के पक्ष में आहरित डिमांड ड्राफ्ट के रूप में हो एवं मुंबई में देय हो ।

5.2 आवेदन पत्र का फॉर्मेट विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के साथ अनुलग्न किया गया है।

5.3 आवेदक निर्धारित फार्मेट में आवेदन-पत्र के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बाह्य वाणिज्यिक उधार, समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश और शाखा कार्यालय/ संपर्क कार्यालय, यथा लागू, के ब्योरे भी संलग्नक-।। के अनुसार प्रस्तुत करें। साथ ही कंपाउंडिंग हेतु आवेदन करते समय संस्था के बहिर्नियम (Memorandum of Association) और अद्यतन लेखा-परिक्षित बैलेन्स-शीट की प्रतिलिपि भी प्रस्तुत की जाए, जिसके साथ संलग्नक-।।। में इस आशय का एक वचन-पत्र भी संलग्न करें, जिसमें आवेदन करने की तिथि तक आवेदक के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, आदि जैसी किसी एजेंसी द्वारा कोई जाँच/अन्वेषण/न्याय-निर्णयन प्रक्रिया नहीं चल रही है, तथा यह भी घोषणा की जाए कि यदि कंपाउंडिंग आवेदन फ़ाइल करने की तिथि के पश्चात आवेदक के विरुद्ध किसी भी एजेंसी द्वारा किसी प्रकार की कोई जाँच/अन्वेषण/न्याय-निर्णयन प्रक्रिया प्रारम्भ की जाती है, तो इस बारे में आवेदक कंपाउंडिंग प्राधिकारी/ भारतीय रिज़र्व बैंक को तत्काल लिखित रूप में सूचित करेगा, किन्तु यह सूचना कंपाउंडिंग आदेश जारी करने की तिथि को अथवा उससे पूर्व देनी होगी, ताकि बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट समय के भीतर कंपाउंडिंग प्रक्रिया पूरी की जा सके।

5.4 यदि संबन्धित प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त न किए जाने के कारण आवेदनपत्र या किसी अन्य कारण से अपूर्ण आवेदनपत्र लौटाना पड़े तो आवेदनपत्र के साथ प्राप्त रुपये 5000/- का शुल्क, आवेदनपत्र के साथ प्रस्तुत संलग्नक IV के अनुसार दिए गए ECS मैंडेट उनके बैंक खाते के ब्योरों के अनुसार एनईएफटी (NEFT) के द्वारा आवेदक के खाते में जमा कर दिया जाएगा। 13 दिसंबर 2011 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 57 में दिए गए अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, बाह्य वाणिज्यिक उधार, समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश और शाखा कार्यालय/ संपर्क कार्यालय से संबंधित संलग्नक भी आयकर PAN के ब्योरे और 12 अगस्त 2013 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 20 के अनुसार NIC कोड - 1987 के अनुसार गतिविधि शामिल करने के लिए संशोधित किए गए हैं। इन ब्योरों के बगैर आवेदनपत्र अपूर्ण समझा जाएगा।

5.5 आवेदकों को यह भी सूचित किया जाता है कि रिज़र्व बैंक के पास कंपाउंडिंग आवेदनपत्र लंबित होने के दौरान अपने पते/ संपर्क ब्योरों में यदि कोई परिवर्तन होता है तो उसे कंपाउंडिंग प्राधिकारी के ध्यान में लाया जाए।

6. कंपाउंडिंग प्रक्रिया के लिए पूर्वापेक्षा

6.1 किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई उल्लंघन जो कंपाउंडिंग नियमावली के अधीन जिस तारीख को कंपाउंडेड हुआ था, तो उस तारीख से अगले तीन वर्षों की अवधि के भीतर उसी प्रकार के उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर उसे कंपाउंड नहीं किया जाएगा। ऐसे उल्लंघन का समाधान फेमा, 1999 के संबंधित प्रावधान के अधीन किया जाएगा। पूर्व में कंपाउंडेड उल्लंघन की तारीख से तीन वर्षों की अवधि की समाप्ति के बाद किये गये किसी दूसरे अथवा अनुवर्ती उल्लंघन को पहला उल्लंघन समझा जाएगा।

6.2 किसी लेन-देन से संबंधित उल्लंघन, जिसमें सरकार अथवा संबंधित कोई सांविधिक प्राधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, से उचित अनुमोदन अथवा अनुमति प्राप्त नहीं की गयी है, ऐसे उल्लंघन संबंधित प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किये बिना कंपाउंड नहीं किये जाएंगे।

6.3 उल्लंघन के ऐसे मामले, जिनमें धन-शोधन, आतंकवाद का वित्त-पोषण अथवा राष्ट्र की सार्वभौमिकता और अखंडता को प्रभावित करने संबंधी घंभीर उल्लंघन का संदेह हो अथवा उल्लंघनकर्ता जिस उल्लंघन के लिए कंपाउंडिंग आदेश के अनुसार विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कंपाउंडेड राशि अदा करने में चूक गया हो, उन मामलों को फेमा, 1999 के अधीन आगे की जाँच और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय अथवा धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के कार्यान्वयन के लिए स्थापित प्राधिकरण को अथवा किसी अन्य एजेंसी, जो भी उचित हो, को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित किये जाएंगे।

6.4 उल्लंघन के उन मामलों में, जहां प्रवर्तन निदेशालय द्वारा न्याय-निर्णयन किया गया है और आवेदक द्वारा फेमा, 1999 की धारा-17 एवं धारा-19 के तहत अपील दायर की गई है, तो विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के नियम-11 के अनुसार ऐसे मामलों में कंपाउंडिंग नहीं की जाएगी। कंपाउंडिंग हेतु आवेदन करते समय आवेदक को अनुलग्नक-III में यह वचनपत्र प्रस्तुत करना होगा कि उसने फेमा, 1999 की धारा-17 एवं धारा-19 के तहत किसी प्रकार की अपील दायर नहीं की है।

6.5 इस संबंध में, यह स्पष्ट किया जाता है कि कंपाउंडिंग के लिए विनिर्दिष्ट आवेदन पत्र में उल्लंघन का संदर्भ प्राप्त होने से इतर जब भी रिज़र्व बैंक द्वारा उल्लंघन की पहचान की जाती है या उल्लंघन में शामिल किसी कंपनी (एंटिटी) द्वारा कंपाउंडिंग के लिए निर्धारित आवेदन के माध्यम की बजाय किसी अन्य संदर्भ द्वारा ऐसी कोई बात बैंक की नोटिस में लायी जाती है, तो बैंक यह निश्चित करना जारी रखेगा कि -

(i) क्या उल्लंघन तकनीकी और/ या हल्के स्वरूप का है और इसलिए तत्संबंध में प्रशासनिक/ सचेतक सूचना जारी कर के उस पर कार्रवाई की जा सकती है,

(ii) क्या उल्लंघन मटीरियल स्वरूप का है और इसलिए उसकी कंपाउंडिंग करना आवश्यक है, जिसके लिए समूची प्रक्रिया को पूरा किया जाए; या

(iii) क्या उसमें शामिल मुद्दे संवेदनशील/ गंभीर स्वरूप के हैं और इसलिए उन्हें प्रवर्तन निदेशालय को संदर्भित करने की जरूरत है। तथापि, एक बार संबंधित कंपनी द्वारा स्वयं कंपाउंडिंग के लिए आवेदन करने एवं उसके उल्लंघन स्वीकार करने पर, उसके 'तकनीकी' या 'मटीरियल' स्वरूप पर विचार नहीं किया जाएगा और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 की धारा 15(1) के साथ पठित विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के नियम-9 के अनुसार कंपाउंडिंग की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी ।

6.6 दिनांक 20 फरवरी 2017 को भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के नियम-8(2) के साथ अंतर्विष्ट किए गए परंतुक (proviso) के अनुसार यदि किसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय का यह अभिमत है कि संबन्धित उल्लंघन में धन-शोधन, आतंकवाद का वित्त-पोषण अथवा राष्ट्र की सार्वभौमिकता और अखंडता को प्रभावित करने संबंधी गंभीर उल्लंघन का संदेह है, तो कंपाउंडिंग प्राधिकारी ऐसे मामलों में कंपाउंडिंग कार्रवाई न करें, और वे इन मामलों को धारा-13 के तहत जांच हेतु उपयुक्त न्याय-निर्णयन प्राधिकारी को प्रेषित कर दें।

7. कंपाउंडिंग की व्याप्ति और पद्धति

7.1 कंपाउंडिंग के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, रिज़र्व बैंक दस्तावेजों तथा आवेदन पत्र में किये गये प्रस्तुतीकरण के आधार पर आवेदन पत्र की जाँच करेगा और निर्धारित किया जाएगा कि उल्लंघन में निहित राशि परिमाणनीय (गणनयोग्य) है अथवा नहीं, और यदि है, तो उल्लंघन की राशि तदनुसार तय की जाएगी।

7.2 कंपाउंडिंग प्राधिकारी कंपाउंडिंग प्रक्रिया से संबंधित किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी, रिकार्ड तथा अन्य दस्तावेजों की माँग कर सकते हैं। यदि उल्लंघनकर्ता अतिरिक्त जानकारी/दस्तावेज विनिर्दिष्ट की गयी अवधि के भीतर प्रस्तुत करने में असफल होता है तो कंपाउंडिंग के लिए प्राप्त आवेदनपत्र अस्वीकृत किया जा सकता है।

7.3 निम्नलिखित घटक, जो केवल निदर्शी हैं, कंपाउंडिंग आदेश पारित करने के प्रयोजन और उल्लंघन की राशि के निर्धारण, जिसके बाबत भुगतान किए जाने पर, कंपाउंडिंग की जानी है, के लिए विचारार्थ लिये जाएंगे:

(ए) अनुचित लाभगत प्राप्त राशि, उल्लंघन के परिणामस्वरूप जहां भी परिमाणनीय (गणनयोग्य) हो;

(बी) उल्लंघन के परिणामस्वरूप किसी प्राधिकारी/ एजेंसी/ राजकोष को हुई हानि की राशि;

(सी) विलंबित अनुपालन अथवा टाले गये अनुपालन से उल्लंघनकर्ता को उपचित आर्थिक लाभ;

(डी) उल्लंघन का पुनरावर्तीय स्वरूप, उल्लंघनकर्ता के गैर-अनुपालन का ट्रैक रिकार्ड और/ अथवा इतिहास;

(ई) उल्लंघनकर्ता का लेनदेन करते समय आचरण तथा आवेदन पत्र में और वैयक्तिक सुनवाई के दौरान प्रस्तुतीकरण में पूरे तथ्यों का प्रकटीकरण और कोई अन्य घटक जो उससे संबंधित तथा यथोचित हो।

7.4 2विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम की धारा-13 के उपबंधों के अनुसार लगाई गई राशि उल्लंघनगत राशि के तीन गुना तक हो सकती है। तथापि, नीचे दिये गए दिशानिदेश नोट (guidance note) के अनुसार कंपाउंडिंग राशि का आकलन किया जा सकता है। तथापि, ध्यान रहे कि यह दिशानिदेश नोट (guidance note) केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के कंपाउंडिंग अधिकारियों द्वारा लगाई जाने वाली राशि को मोटे-तौर पर दर्शाता है। वास्तविक कंपाउंडिंग राशि नीचे दिए गए पैराग्राफ में उल्लिखित तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एवं मामले की परिस्थितियों के अनुसार कभी-कभी भिन्न हो सकती है।

I. दिशानिदेश नोट (guidance note) आकलन का साँचा (Computation Matrix)

उल्लंघन का प्रकार प्रचलित सिद्धान्त

1] रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघन
ए) फेमा 20
पैरा 9(1)(ए), 9(1)(बी), FC(GPR) का भाग-बी, FCTRS (Reg. 10) तथा FCTRS (Reg. 4) के रेकॉर्ड संबंधी मामले
बी) फेमा 3
ECB विवरणियों को प्रस्तुत न करना
C) फेमा 120
सहायक कंपनियों/ उप-अनुषंगी सहायक कंपनियों की स्थापना/ अधिग्रहण / शेयरधारिता के पैटर्न में परिवर्तन संबंधी रिपोर्टिंग न करना / रेपोर्टिंग में विलंब करना
डी) अन्य कोई उल्लंघन (पंक्ति-2 में नीचे दिये गए को छोडकर)

निश्चित राशि : रुपये 10000/- (कम्पाउंडिंग आवेदन में प्रत्येक उल्लंघन पर एक बार लागू) +
निम्नलिखित परिवर्ती राशि :
रुपये 10 लाख तक : 1000 प्रतिवर्ष
रुपये 10-40 लाख तक : 2500 प्रतिवर्ष
रुपये 40-100 लाख तक : 7000 प्रतिवर्ष
रुपये 1-10 करोड़ तक : 50000 प्रतिवर्ष
रुपये 10-100 करोड़ तक : 100000 प्रतिवर्ष
रुपये 100 करोड़ से अधिक : 200000 प्रतिवर्ष

ई) LO/BO/PO द्वारा रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघन उपर्युक्त के अनुसार, 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा के अधीन। परियोजना कार्यालय के मामले में, कम्पाउंडिंग की राशि परियोजना की कुल कीमत के 10% पर आकलित की जाएगी।

2] AAC/ APR/ शेयर प्रमाणपत्र जारी करने में विलंब
APR/शेयर प्रमाणपत्र को प्रस्तुत न करना / विलंब से प्रस्तुत करना/ (फेमा-120) अथवा AAC (फेमा-22) अथवा FCGPR (B) विवरणियाँ (फेमा-20) 3अथवा FLAR विवरणियाँ [फेमा 20] अथवा FLA विवरणियाँ [फेमा 20(आर)]

- प्रत्येक AAC/APR/FCGPR (B) की विलंबित विवरणी हेतु रुपये 10000/- प्रति विवरणी ।
- शेयर प्रमाणपत्रों का विलंब से प्राप्त होना – रुपये 10000/- प्रतिवर्ष, यह राशि कुल निवेश राशि के 300% की अधिकतम सीमा के अधीन होगी ।

3]
ए] आबंटन / रिफ़ंड
फेमा-20/2000-आरबी का पैरा-8 (शेयरों को आबंटित न करना अथवा निर्धारित 180 दिनों की अवधि के पश्चात शेयर आबंटित करना / रिफ़ंड करना)
B] LO/BO/PO
(रिपोर्टिंग उल्लंघनों के अलावा अन्य उल्लंघन)

रुपये 30000/- + निम्नलिखित प्रतिशत:
1ला वर्ष : 0.30%
1-2 वर्ष : 0.35%
2-3 वर्ष : 0.40%
3-4 वर्ष : 0.45%
4-5 वर्ष : 0.50%
> 5 वर्ष : 0.75%
(परियोजना कार्यालय के मामले में, उल्लंघन की राशि परियोजना की कुल कीमत के 10% पर आकलित की जाएगी।)

4] कॉर्पोरेट गारंटियों को छोडकर अन्य सभी उल्लंघन किन्तु FLA विवरणियों को छोडकर वे सभी उल्लंघन जो 07 नवंबर 2017 को जारी अधिसूचना सं. फेमा-420(आर)/ 2017-आरबी के तहत शामिल हैं। रुपये 50000/- + निम्नलिखित प्रतिशत :
1ला वर्ष : 0.50%
1-2 वर्ष : 0.55%
2-3 वर्ष : 0.60%
3-4 वर्ष : 0.65%
4-5 वर्ष : 0.70%
> 5 वर्ष : 0.75%
5] UIN के बिना कॉर्पोरेट गारंटियाँ जारी करना /
जहां अनुमति ली जानी जरूरी है वहाँ अनुमति के बिना गारंटी जारी करना / खुली गारंटियाँ अथवा कॉर्पोरेट गारंटी संबंधी अन्य कोई उल्लंघन।
रुपये 500000/- + निम्नलिखित प्रतिशत :
1ला वर्ष : 0.050%
1-2 वर्ष : 0.055%
2-3 वर्ष : 0.060%
3-4 वर्ष : 0.065%
4-5 वर्ष : 0.070%
> 5 वर्ष: 0.075%
इन उल्लंघनों में ऋणों की उगाही के लिए गारंटियाँ जारी करना, जिन्हें भारत में पुनः निवेशित किया गया हो, शामिल हैं। ऐसे मामलों में कम्पाउंडिंग राशि को तिगुना किया जाएगा।
07 नवंबर 2017 के पूर्व विद्यमान एवं उक्त तारीख तक जारी (अर्थात ऐसे उल्लंघन जिनकी प्रारम्भ तिथि 07 नवंबर 2017 से पूर्व है) सभी उल्लंघनों (FLAR विवरणियाँ के अतिरिक्त) की कंपाउंडिंग ऊपर उल्लिखित पैरा 1(ए) के तहत की जाएगी।

II. उपर्युक्त राशियाँ निम्नलिखित परंतुको (proviso) के अधीन हैं, यथा:-

(i) कंपाउंडिंग की राशि उल्लंघन राशि के 300% से अधिक न हों।

(ii) रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघनों के मामलों में यदि उल्लंघन की राशि 1 लाख रुपये से कम हो, तो ऐसे मामलों में कंपाउंडिंग की राशि उल्लंघन की वास्तविक राशि और उल्लंघन अवधि के 5% प्रतिवर्ष की दर से आकलित सामान्य ब्याज की राशि से अधिक न हों, अन्य सभी उल्लंघनों के मामलों में ये राशि 10% प्रतिवर्ष की दर पर होगी।

(iii) फेमा 20/2000-आरबी की अनुसूची-I के पैराग्राफ 8 संबंधी उल्लंघनों के मामलों में, दण्ड की राशि को निम्नप्रकार श्रेणीबद्ध किया गया है :

a. भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना यदि 180 दिनों के बाद शेयर आबंटित किए जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.25 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

b. यदि शेयर आबंटित न किए जाए और रिज़र्व बैंक की अनुमति से 180 दिनों के पश्चात राशि लौटाई जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.50 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

c. यदि शेयर आबंटित न किए जाए और रिज़र्व बैंक की अनुमति के बिना 180 दिनों के पश्चात राशि लौटाई जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.75 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

(iv) उन मामलों में, जहां यह स्पष्ट हो जाता है कि उल्लंघनकर्ता द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त किया गया है, ऐसे मामलों में उपर्युक्त सारणी (चार्ट) के अनुसार आकलित की गई कम्पाउंडिंग राशि में उस राशि को यथोचित सीमा तक जोड़कर उसे न्यूट्रलाइज किया जा सकता है।

(v) यदि किसी पार्टी के किसी उल्लंघन की कम्पाउंडिंग पहले की जा चुकी और उसी प्रकार के उल्लंघन की कम्पाउंडिंग हेतु पार्टी द्वारा पुनः आवेदन किया गया, तो ऐसे उल्लंघन की कम्पाउंडिंग राशि 50% तक बढाई जाए।

III. उपर्युक्त पैरा- I.1 रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघनों के तहत कम्पाउंडिंग राशि के आकलन हेतु उल्लंघन की अवधि को समानुपातिक दर से {(लगभग अगले उच्चतम माह में पूर्णांकित÷12) x एक वर्ष अवधि की राशि} आकलित किया जाएगा। दिनों की कुल संख्या में रविवार /अवकाश के दिनों को भी शामिल किया जाएगा।

8. कंपाउंडिंग आदेश पारित करना

8.1 कंपाउंडिंग प्राधिकारी आवेदन में किए गए प्राकथन और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान उल्लंघनकर्ता द्वारा इस संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों और प्रस्तुतीकरणों के आधार पर आवेदन की तारीख से यथा संभव यथा शीघ्र परंतु 180 दिनों के भीतर सभी संबंधितों को सुनवाई का अवसर देने के बाद कंपाउंडिंग आदेश पारित करेगा ।

8.2 इस प्रयोजन के लिए समय सीमा कंपाउंडिंग के लिए पूर्ण किये गये आवेदन पत्र की रिज़र्व बैंक द्वारा प्राप्ति की तारीख से गिनी जाएगी।

8.3 यदि आवेदक व्यक्तिगत सुनवाई के विकल्प का चयन करता है तो रिज़र्व बैंक कानूनी विशेषज्ञों / सलाहकारों द्वारा प्रतिनिधित्व करने / को साथ लाने के बजाय आवेदक द्वारा इसके लिए सीधे (स्वयं) आने को प्रोत्साहित करेगा क्योंकि कंपाउडिंग केवल स्वीकार किए गए उल्लंघनों के लिए होती है। व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने अथवा विकल्प देने से कंपाउडिंग आदेश में लगाई गई राशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यदि व्यक्तिगत सुनवाई के लिए आवेदक का प्राधिकृत प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होता है तो कंपाउंडिंग प्राधिकारी उपलब्ध जानकारी/दस्तावेजों के आधार पर आदेश पारित करेगा।

8.4 कंपाउंडिंग आदेश में उल्लंघन के ब्योरों के साथ जिस संबंध में उल्लंघन किया गया है, उस संबंध में फेमा,1999 के प्रावधान अथवा फेमा,1999 के अधीन अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निदेश अथवा आदेश विनिर्दिष्ट किए जाएंगे।

8.5 जहाँ फेमा, 1999 की धारा 16 की उप-धारा (3) के अधीन शिकायत किये जाने के बाद, जैसी भी स्थिति हो, विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के नियम 8 के उप-नियम (2) के अधीन जारी किये गये कंपाउंडिंग आदेश की एक प्रति आवेदक (उल्लंघनकर्ता) को तथा न्यायनिर्णय प्राधिकारी को भी दी जाएगी।

58.6 कंपाउंडिंग आदेशों से संबन्धित सूचनाओं में अधिक पारदर्शिता लाने और उसका व्यापक प्रसार करने हेतु यह निर्णय लिया गया है कि 1 जून 2016 को या उसके बाद पारित होने वाले कंपाउंडिंग आदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर प्रकाशित किया जाए। वेबसाइट पर ऐसे आंकड़े निम्नलिखित फार्मेट में मासिक अंतराल पर अद्यतन किए जाएंगे:

क्र. ओवदक का नाम कंपाउंडिंग आदेश के तहत लगाई गई कम्पाउंडिंग राशि यदि लगाई गई राशि का भुगतान किया गया है आदेश की प्रति डाउनलोड करें।

9. कंपाउंड किए गए उल्लंघन के लिए राशि का भुगतान

9.1 कंपाउंडिंग के आदेश में यथाविनिर्दिष्ट कंपाउंडिंग की गयी उल्लंघन की राशि का भुगतान, इस प्रकार के उल्लंघन के कंपाउंडिंग के आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर ''भारतीय रिज़र्व बैंक'' के पक्ष में मांग ड्राफ्ट के रूप में देय होगा। कंपाउंडिंग आदेश में निदेशित किये गये अनुसार मांग ड्राफ्ट आहरित करना होगा और जमा करना होगा।

9.2 कंपाउंडिंग आदेश पारित किये जाने के बाद आदेश हटाने के लिए अथवा कंपाउंडिंग आदेश अवैध मानने के लिए अथवा कंपाउंडिंग प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश की समीक्षा का अनुरोध करने के लिए नियमावली के प्रावधान उल्लंघनकर्ता को कोई अधिकार प्रदान नहीं करते हैं।

9.3 कंपाउंडिंग आदेश में विनिर्दिष्ट सीमा के भीतर कंपाउंडेड राशि का भुगतान करने में चूक जाने पर विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 के अनुसार यह समझा जाएगा कि उल्लंघनकर्ता ने इस नियमावली के अधीन किसी उल्लंघन के कंपाउंडिंग के लिए कभी भी आवेदन नहीं किया था।

9.4 फेमा, 1999 के उल्लंघन (फेमा, 1999 की धारा 13 में यथा परिभाषित) के संबंध में, जो कंपाउंडिंग प्राधिकारी द्वारा कंपाउंडेड नहीं है, ऐसे उल्लंघनों के संबंध में फेमा, 1999 के संबंधित प्रावधान तदनुसार लागू होंगे।

9.5 कंपाउंडेड उल्लंघन की राशि की वसूली पर रिज़र्व बैंक द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट शर्तों, यदि कोई हों, के अधीन इस संबंध में एक प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा ।

10. प्राधिकृत व्यापारियों को निदेश

10.1 फेमा, 1999 की धारा 11 (2) के अनुसार, रिज़र्व बैंक इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निदेश अथवा आदेश के अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए निदेश दे सकता है। तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्राधिकृत व्यापारियों को समय–समय पर जारी निर्देशों के अनुसार विदेशी मुद्रा लेनदेनों और उसकी रिपोर्टिंग के लिए विनिर्दिष्ट नियमों/विनियमों के अनुपालन की ज़िम्मेदारी सौंपी है। अत: प्राधिकृत व्यापारी यह सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्रवाई करें कि विदेशी मुद्रा लेनदेनों की रिज़र्व बैंक को रिपोर्टिंग करने से संबंधित प्रणाली में जांच-पड़ताल (checks and balances) समाविष्ट हों ताकि प्राधिकृत व्यापारियों की भूल-चूक के कारण फेमा,1999 के उपबंधों का उल्लंघन न हो।

10.2 इस संबंध में, यह दोहराया जाता है कि फेमा, 1999 की धारा 11 (3) के अनुसार रिज़र्व बैंक इस अधिनियम के तहत प्राधिकृत व्यक्ति को रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किसी निदेश के उल्लंघन के लिए अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा यथा निदेशित कोई विवरणी फाइल करने में असफल होने पर दंड लगाया जा सकता है।

11. रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ

11.1 फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के संबंध में रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ 1 जनवरी 2016 के विदेशी मुद्रा विभाग मास्टर निदेश सं. 18/2015-16 में शामिल की गई हैं।


परिशिष्ट I

समेकित नियमों/ए.पी. (डीआइआर सिरीज) परिपत्रों की सूची

क्रम सं नियम संख्या तारीख
1 विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2000 3 मई 2000
2 विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2002 (संशोधन) 2 नवंबर 2002
3 विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2004 (संशोधन) 13 सितंबर 2004
4 विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2008 (संशोधन) 27 अगस्त 2008
5 विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग प्रोसिडिंग्ज) नियमावली, 2017 (संशोधन) 20 फरवरी 2017

क्र. ए.पी.(डीआइआर सिरीज) परिपत्र दिनांक
1 परिपत्र सं. 31 01 फरवरी 2005
2 परिपत्र सं. 56 28 जून 2010
3 परिपत्र सं. 57 13 दिसंबर 2011
4 परिपत्र सं. 11 31 जुलाई 2012
5 परिपत्र सं. 76 17 जनवरी 2013
6 परिपत्र सं. 20 12 अगस्त 2013
7 परिपत्र सं. 117 04 अप्रैल 2014
8 परिपत्र सं. 36 16 अक्तूबर 2014
9 परिपत्र सं. 73 26 मई 2016
10 परिपत्र सं. 29 02 फरवरी 2017

18 जनवरी 2013 की प्रेस प्रकाशनी सं. 2012-13/1215


1 02 फरवरी 2017 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.29 के द्वारा अंतर्विष्ट

2 26 मई 2016 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.73 के द्वारा अंतर्विष्ट। जिसके तहत मौजूदा पैराग्राफ 7.4 को 7.5 के रूप में पुनर्क्रमांकित किया गया है।

3 02 फरवरी 2017 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.29 के द्वारा अंतर्विष्ट

4 02 फरवरी 2017 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.29 के द्वारा अंतर्विष्ट

5 26 मई 2016 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.73 के द्वारा अंतर्विष्ट।


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